A&C Act 105अध्याय IV · Supplementary Provisions
धारा 105 · तीसरी अनुसूची- विदेशी माध्यस्थम् पंचाटों के निष्पादनों से संबंधित अभिसमय अनुच्छेद 2
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
यद्यपि इसके अनुच्छेद 1 में अधिकथित शर्तें पूरी हो गई हों तथापि उस पंचाट की मान्यता उस दशा में न दी जाएगी तथा उसका प्रवर्तन उस दशा में न किया जाएगा जिसमें कि न्यायालय का समाधान हो जाता है-
(क) कि वह पंचाट उस देश में बातिल कर दिया गया है जिसमें वह दिया गया था ;
(ख) कि जिस पक्षकार के विरुद्ध उस पंचाट को काम में लाने का प्रयास है उसे माध्यस्थम् कार्यवाहियों की सूचना इतने समय के अन्दर न दी गई थी जो अपना पक्ष कथन प्रस्तुत करने के लिए उसे समर्थन करने के वास्ते पर्याप्त हो अथवा विधिक अक्षमता के अधीन होते हुए जिसका प्रतिनिधित्व समुचित रूप से नहीं किया गया था ;
(ग) कि वह पंचाट उन मतभेदों के संबंध में नहीं है जो माध्यस्थम् के लिए प्रस्तुत निवेदन करने के निबंधनों द्वारा संकल्पित थे अथवा उनकी व्याप्ति के अंतर्गत आते थे, अथवा उस पंचाट में उन विषयों संबंधी विनिश्चय अंतर्विष्ट हैं जो माध्यस्थम् निर्देश के प्रविषय के बाहर हैं ।
यदि पंचाट में उन सब प्रश्नों का अभिनिश्चय नहीं किया गया है जो माध्यस्थम् अधिकरण को प्रस्तुत किए गए थे तो जिस देश में उस पंचाट को मान्यता दिए जाने या उसके प्रवर्तन कराए जाने का प्रयास है उस देश का सक्षम प्राधिकारी उस दशा में जिसमें वह यह करना ठीक समझता है ऐसी मान्यता देना या ऐसा प्रवर्तित करना मुल्तवी कर सकेगा या वह ऐसी मान्यता या प्रवर्तन को ऐसी प्रत्याभूति की शर्त पर मंजूर कर सकेगा जैसी यह प्राधिकारी विनिश्चय करे ।
(क) कि वह पंचाट उस देश में बातिल कर दिया गया है जिसमें वह दिया गया था ;
(ख) कि जिस पक्षकार के विरुद्ध उस पंचाट को काम में लाने का प्रयास है उसे माध्यस्थम् कार्यवाहियों की सूचना इतने समय के अन्दर न दी गई थी जो अपना पक्ष कथन प्रस्तुत करने के लिए उसे समर्थन करने के वास्ते पर्याप्त हो अथवा विधिक अक्षमता के अधीन होते हुए जिसका प्रतिनिधित्व समुचित रूप से नहीं किया गया था ;
(ग) कि वह पंचाट उन मतभेदों के संबंध में नहीं है जो माध्यस्थम् के लिए प्रस्तुत निवेदन करने के निबंधनों द्वारा संकल्पित थे अथवा उनकी व्याप्ति के अंतर्गत आते थे, अथवा उस पंचाट में उन विषयों संबंधी विनिश्चय अंतर्विष्ट हैं जो माध्यस्थम् निर्देश के प्रविषय के बाहर हैं ।
यदि पंचाट में उन सब प्रश्नों का अभिनिश्चय नहीं किया गया है जो माध्यस्थम् अधिकरण को प्रस्तुत किए गए थे तो जिस देश में उस पंचाट को मान्यता दिए जाने या उसके प्रवर्तन कराए जाने का प्रयास है उस देश का सक्षम प्राधिकारी उस दशा में जिसमें वह यह करना ठीक समझता है ऐसी मान्यता देना या ऐसा प्रवर्तित करना मुल्तवी कर सकेगा या वह ऐसी मान्यता या प्रवर्तन को ऐसी प्रत्याभूति की शर्त पर मंजूर कर सकेगा जैसी यह प्राधिकारी विनिश्चय करे ।
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