आईईए → बीएसए
191 प्रविष्टियाँ
अधिकार या रुढि के अस्तित्व के बारे में रायें कब सुसंगत है
जबकि न्यायालय को किसी साधारण रुढि या अधिकार के अस्तित्व के बारे में राय बनानी हो, तब ऐसी रुढि या अधिकार के अस्तित्व के बारे में उन व्यक्तियों की रायें सुंगत है, जो यदि उसका अस्तित्व होता तो संभाव्यत: उसे जानते होते । स्षष्टीकरण : साधारण रुढी या अधिकार के अंतर्गत ऐसी रुढीयाँ या अधिकार आते है जो व्यक्तियों के किसी काफी…
पूरा पढ़ेंप्रासंगिक होने पर, सामान्य प्रथा या अधिकार के अस्तित्व के संबंध में राय।
जब न्यायालय को किसी सामान्य प्रथा या अधिकार के अस्तित्व के बारे में राय बनानी होती है, तो ऐसे प्रथा या अधिकार के अस्तित्व के बारे में उन व्यक्तियों की राय प्रासंगिक होती है, जिन्हें यदि वह मौजूद होता तो उसके अस्तित्व की जानकारी होने की संभावना होती। स्पष्टीकरण। -- "सामान्य प्रथा या अधिकार" अभिव्यक्ति में किसी भी…
पूरा पढ़ेंप्रथाओं, सिद्धातों आदि के बारे में रायें कब सुसंगत है
जबकि न्यायालय को - मनुष्यों के किसी निकाय या कुटुम्ब की प्रथाओं और सिद्धांतो के, किसी धार्मिक या खैराती प्रतिष्ठान के संविधान और शासन के, अथवा विशिष्ट जिले में या विशिष्ट वर्गों के लागों द्वारा प्रयोग में लाए जाने वाले शब्दों या पदों के अर्थों के बारे में राय बनानी हो, तब उनके संबंध में ज्ञान के विशेष साधन रखने वाले…
पूरा पढ़ेंप्रासंगिक होने पर रीति-रिवाजों, सिद्धांतों आदि के संबंध में राय।
जब न्यायालय को किसी विषय पर राय बनानी हो— (i) किसी समूह या परिवार के रीति-रिवाज और सिद्धांत; (ii) किसी धार्मिक या धर्मार्थ संस्था का गठन और संचालन; या (iii) विशिष्ट जिलों में या विशिष्ट वर्गों के लोगों द्वारा प्रयुक्त शब्दों या पदों का अर्थ, इस विषय पर विशेष ज्ञान रखने वाले व्यक्तियों की राय भी प्रासंगिक तथ्य हैं।
पूरा पढ़ेंनातेदारी के बारे में राय कब सुसंगत है
जबकि न्यायालय को एक व्यक्ति की किसी अन्य के साथ नातेदारी के बारे में राय बनानी हो, तब ऐसी नातेदारी के अस्तित्व के बारे में ऐसे किसी व्यक्ती के आचरण द्वारा अभिव्यक्त राय, जिसके पास कुटुम्ब के सदस्य के रुप में या अन्यथा उस विषय के संबंध में ज्ञान के विशेष साधन है, सुसंगत तथ्य है : परन्तु भारतीय विवाह विच्छेद अधिनियम,…
पूरा पढ़ेंप्रासंगिक होने पर, रिश्ते पर राय देना।
जब न्यायालय को एक व्यक्ति का दूसरे व्यक्ति से संबंध के बारे में राय बनानी होती है, तो उस व्यक्ति द्वारा आचरण के माध्यम से व्यक्त की गई राय, जो परिवार के सदस्य के रूप में या किसी अन्य रूप में, इस विषय पर विशेष ज्ञान रखता है, एक प्रासंगिक तथ्य है: बशर्ते कि ऐसी राय तलाक अधिनियम, 1869 (4 ऑफ 1869) के तहत कार्यवाही में या…
पूरा पढ़ेंराय के आधार कब सुसंगत है
जब कभी किसी जीवित व्यक्ति की राय सुसंगत है, तब वे आधार भी जिन पर वह आधारित है, सुसंगत है । दृष्टांत : कोई विशेषज्ञ अपनी राय बनाने के प्रयोजनार्थ किए हुए प्रयोगों का विवरण दे सकता है ।
पूरा पढ़ेंप्रासंगिक होने पर, राय के आधार।
जब भी किसी जीवित व्यक्ति की राय प्रासंगिक होती है, तो वह राय जिन आधारों पर आधारित होती है, वे भी प्रासंगिक होते हैं। चित्र। एक विशेषज्ञ अपनी राय बनाने के उद्देश्य से अपने द्वारा किए गए प्रयोगों का विवरण दे सकता है।
पूरा पढ़ेंसिविल मामलों में अध्यारोपित (लांछन लगाना ) आचरण साबित करने के लिए शील विसंगत है
सिविल मामलों में यह तथ्य कि किसी सम्पृक्त व्यक्ति का शील ऐसा है कि जो उस पर अध्यारोपित किसी आचरण को अधिसंभाव्य या अनधिसंभाव्य बना देता है, विसंगत है वहाँ तक के सिवाय जहाँ तक कि ऐसा शील अन्यथा सुसंगत तथ्यों से प्रकट होता है ।
पूरा पढ़ेंदीवानी मामलों में, आरोपित आचरण को साबित करने के लिए चरित्र का उपयोग अप्रासंगिक है।
दीवानी मामलों में, यह तथ्य कि संबंधित व्यक्ति का चरित्र ऐसा है जिससे उस पर आरोपित किसी भी आचरण की संभावना या असंभावना सिद्ध होती है, अप्रासंगिक है, सिवाय उस हद तक जहां तक ऐसा चरित्र अन्य प्रासंगिक तथ्यों से स्पष्ट होता है।
पूरा पढ़ेंदाण्डिक मामलों में पूर्वतन अच्छा शील सुसंगत है
दाण्डिक कार्यवाहियों में यह तथ्य सुसंगत है कि अभियुक्त व्यक्ति अच्छे शील का है ।
पूरा पढ़ेंआपराधिक मामलों में पिछला अच्छा चरित्र प्रासंगिक होता है।
आपराधिक कार्यवाही में, आरोपी व्यक्ति का अच्छे चरित्र का होना प्रासंगिक होता है।
पूरा पढ़ेंकतिपय (कुछ) मामलों में शील या पूर्व लैंगिक अनुभव के साक्ष्य को सुसंगत न होना
भारतीय दण्ड संहिता, १८६० (१८६० का ४५ ) की धारा ३५४, ३५४-क, ३५४-ख, ३५४-ग, ३५४-घ, ३७६, १.(३७६-क, ३७६ कख, ३७६-ख, ३७६-ग, ३७६-घ, ३७६ घक, ३७६ घख) या धारा ३७६-ङ के अधीन किसी अपराध के लिए किसी अभियोजन में या किसी ऐसे अपराध के करने के प्रयत्न के लिए , जहाँ सम्मति का प्रश्न विवाद्य है, वहाँ पीडिता के शील या ऐसे व्यक्ति का किसी…
पूरा पढ़ेंकुछ मामलों में चरित्र या पूर्व यौन अनुभव के साक्ष्य प्रासंगिक नहीं होते हैं।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 64, धारा 65, धारा 66, धारा 67, धारा 68, धारा 69, धारा 70, धारा 71, धारा 74, धारा 75, धारा 76, धारा 77 या धारा 78 के तहत किसी अपराध के अभियोग में या ऐसे किसी अपराध को करने के प्रयास के मामले में, जहां सहमति का प्रश्न विचाराधीन हो, पीड़ित के चरित्र या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसे…
पूरा पढ़ेंउत्तर में होने के सिवाय पूर्वतन बुरा शील सुसंगत नहीं है
दाण्डिक कार्यवाहियों में यह तथ्य कि अभियुक्त व्यक्ति बुरे शील का है, विसंगत है, जब तक कि इस बात का साक्ष्य न दिया गया हो कि वह अच्छे शील का है, जिसके दिए जाने की दशा में वह सुसंगत हो जाता है । स्पष्टीकरण १ : यह धारा उन मामलों को लागू नहीं है, जिनमें किसी व्यक्ती का बुरा शील स्वयं विवाद्यक तथ्य है । स्पष्टीकरण २ :…
पूरा पढ़ेंपिछली बुरी आदतें, जवाब देने के अलावा, प्रासंगिक नहीं हैं।
आपराधिक कार्यवाही में, आरोपी का चरित्र खराब होना अप्रासंगिक होता है, जब तक कि यह साबित करने वाला कोई सबूत न हो कि उसका चरित्र अच्छा है, ऐसी स्थिति में यह तथ्य प्रासंगिक हो जाता है। स्पष्टीकरण 1.--यह धारा उन मामलों पर लागू नहीं होती जिनमें किसी व्यक्ति का कुटिल चरित्र स्वयं एक विवादित तथ्य हो। स्पष्टीकरण 2.--पिछली सजा…
पूरा पढ़ेंनुकसानी पर प्रभाव डालने वाला शील
सिविल मामलों में यह तथ्य कि किसी व्यक्ति का शील ऐसा है जिससे नुकसानी की रकम पर, जो उसे मिलनी चाहिए प्रभाव पडता है, सुसंगत है । स्पष्टीकरण : धारा ५२, ५३, ५४ और ५५ में शील शब्द के अंतर्गत ख्याति और स्वभाव दोनों आते है, किन्तु धार ५४ में उपबंधित के सिवाय केवल साधारण ख्याति व साधारण स्वभाव का ही न कि ऐसे विशिष्ट कार्यों…
पूरा पढ़ेंक्षति पर प्रभाव डालने वाला चरित्र।
दीवानी मामलों में, यह तथ्य प्रासंगिक है कि किसी व्यक्ति का चरित्र ऐसा है जो उसे मिलने वाली क्षतिपूर्ति की राशि को प्रभावित करता है। स्पष्टीकरण .--इस खंड और खंड 46, 47 और 49 में, "चरित्र" शब्द में प्रतिष्ठा और स्वभाव दोनों शामिल हैं; लेकिन, खंड 49 में दिए गए प्रावधानों को छोड़कर, केवल सामान्य प्रतिष्ठा और सामान्य…
पूरा पढ़ेंन्यायिक रुप से अवेक्षणीय तथ्य साबित करना आवश्यक नहीं है
जिस तथ्य की न्यायालय न्यायिक अवेक्षा (विचारण /ज्ञान या संज्ञान ) करेगा , उसे साबित करना आवश्यक नहीं है ।
पूरा पढ़ेंन्यायिक रूप से मान्य तथ्य को सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं है।
जिस तथ्य का न्यायालय न्यायिक संज्ञान लेगा, उसे सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं है।
पूरा पढ़ेंवे तथ्य, जिनकी न्यायिक अवेक्षा न्यायालय को करनी होगी
न्यायालय निम्नलिखित तथ्यों की न्यायिक अवेक्षा करेगा :- १)भारत के राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त समस्त विधियाँ; २)यूनाइटेड किंगडम की पार्लियामेण्ट द्वारा पारित या एतत्पश्चात् पारित किए जाने वाले समस्त पब्लिक ऐक्ट तथा वे समस्त स्थानीय और पर्सनल ऐक्ट, जिनके बारे में यूनाइटेड किंगडम की पार्लियामेण्ट ने यह निर्दिष्ट किया है कि…
पूरा पढ़ेंजिन तथ्यों का न्यायालय न्यायिक संज्ञान लेगा।
(1) न्यायालय निम्नलिखित तथ्यों का न्यायिक संज्ञान लेगा, अर्थात्:-- (क) भारत के भूभाग में लागू सभी कानून, जिनमें बाह्य क्षेत्रीय प्रभाव वाले कानून भी शामिल हैं; (ख) भारत द्वारा किसी देश या देशों के साथ की गई अंतर्राष्ट्रीय संधि, समझौता या सम्मेलन, या अंतर्राष्ट्रीय संघों या अन्य निकायों में भारत द्वारा लिए गए निर्णय;…
पूरा पढ़ेंस्वीकृत तथ्यों को साबित करना आवश्यक नहीं है
किसी ऐसे तथ्य को किसी कार्यवाही में साबित करना आवश्यक नहीं है, जिसे उस कार्यवाही के पक्षकार या उनके अभिकर्ता सुनवाई पर स्वीकार करने के लिए सहमत हो जाते है, या जिसे वे सुनवाई के पूर्व किसी स्वहस्ताक्षरित लेख द्वारा स्वीकार करने के लिए सहमत हो जाते है या जिसके बारे में अभिवचन संबंधी किसी तत्समय प्रवृत्त नियम के अधीन यह…
पूरा पढ़ेंस्वीकार किए गए तथ्यों को साबित करना आवश्यक नहीं है।
किसी भी कार्यवाही में ऐसे किसी तथ्य को साबित करने की आवश्यकता नहीं होती है जिसे संबंधित पक्षकार या उनके प्रतिनिधि सुनवाई के दौरान स्वीकार करने के लिए सहमत हों, या जिसे सुनवाई से पहले वे अपने हस्ताक्षर वाले किसी लिखित दस्तावेज द्वारा स्वीकार करने के लिए सहमत हों, या जिसे उस समय लागू किसी भी नियम के अनुसार उनके द्वारा…
पूरा पढ़ेंमौखिक साक्ष्य द्वारा तथ्यों का साबित किया जाना
दस्तावजों या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों की अन्तर्वस्तु के सिवाय सभी तथ्य मौखिक साक्ष्य द्वारा साबित किए जा सकेगें ।
पूरा पढ़ेंमौखिक साक्ष्य द्वारा तथ्यों का प्रमाण।
दस्तावेजों की विषयवस्तु को छोड़कर सभी तथ्यों को मौखिक साक्ष्य द्वारा सिद्ध किया जा सकता है।
पूरा पढ़ेंमौखिक साक्ष्य प्रत्यक्ष होना चाहिए
मौखिक साक्ष्य, समस्त अवस्थाओं में चाहे वे कैसी ही हों, प्रत्यक्ष ही होगा, अर्थात्- यदि वह किसी देखे जा सकने वाले तथ्य के बारे में है, तो वह ऐसे साक्षी का ही साक्ष्य होगा, जो कहता है कि उसने उसे देखा; यदि वह किसी सुने जा सकने वाले तथ्य के बारे में है, तो वह ऐसे साक्षी का ही साक्ष्य होगा जो कहता है कि उसने उसे सुना; यदि…
पूरा पढ़ेंमौखिक साक्ष्य प्रत्यक्ष होना चाहिए।
मौखिक साक्ष्य, चाहे कोई भी मामला हो, प्रत्यक्ष ही होगा; यदि यह निम्नलिखित से संबंधित है, तो... (i) कोई ऐसा तथ्य जिसे देखा जा सकता है, उसके लिए ऐसे गवाह का साक्ष्य होना चाहिए जो कहता है कि उसने उसे देखा है; (ii) कोई तथ्य जिसे सुना जा सकता है, वह ऐसे गवाह का साक्ष्य होना चाहिए जो कहता है कि उसने उसे सुना है; (iii) कोई…
पूरा पढ़ेंदस्तावेजों की अंतर्वस्तु का सबूत
दस्तावेजों की अन्तर्वस्तु या तो प्राथमिक या द्वितीयक साक्ष्य द्वारा साबित की जा सकेगी ।
पूरा पढ़ेंदस्तावेजों की विषयवस्तु का प्रमाण।
दस्तावेजों की सामग्री को प्राथमिक या द्वितीयक साक्ष्य द्वारा सिद्ध किया जा सकता है।
पूरा पढ़ेंप्राथमिक साक्ष्य
प्राथमिक साक्ष्य से न्यायालय के निरीक्षण के लिए पेश की गई दस्तावेज स्वयं अभिप्रेत है । स्पष्टीकरण १ : जहाँ कि कोई दस्तावेज कई मूल प्रतियों में निष्पादित है, वहाँ हर एक मूल प्रति उस दस्तावेज का प्राथमिक साक्ष्य है । जहाँ कि कोई दस्तावेज प्रतिलेख (दूसरी प्रति का समरुपी भाग ) में निष्पादित है और हर एक प्रतिलेख पक्षकारों…
पूरा पढ़ेंप्राथमिक साक्ष्य।
प्राथमिक साक्ष्य से तात्पर्य न्यायालय के निरीक्षण के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेज से है। स्पष्टीकरण 1.--जहां कोई दस्तावेज कई भागों में निष्पादित किया जाता है, वहां प्रत्येक भाग दस्तावेज का प्राथमिक साक्ष्य होता है। स्पष्टीकरण 2.--जहां कोई दस्तावेज दो प्रतियों में निष्पादित किया जाता है, और प्रत्येक प्रति केवल एक या…
पूरा पढ़ेंद्वितीयक साक्ष्य
द्वितीयक साक्ष्य से अभिप्रेत है और उसके अन्तर्गत आते है - १)एतस्मिन पश्चात अन्तर्विष्ट उपबंधो के अधीन दी हुई प्रमाणित प्रतियाँ; २)मूल से ऐसी यांत्रिक प्रक्रियाओं द्वारा, जो प्रक्रियाएँ स्वयं ही प्रति की शुद्धता सुनिश्चित करती है, बनाई गई प्रतियाँ तथा ऐसी प्रतियों से तुलना की हुई प्रतिलिपियाँ; ३)मूल से बनाई गई या तुलना…
पूरा पढ़ेंद्वितीयक साक्ष्य।
द्वितीयक साक्ष्य में शामिल हैं-- (i) इसके बाद दिए गए प्रावधानों के तहत दी गई प्रमाणित प्रतियां; (ii) मूल प्रति से यांत्रिक प्रक्रियाओं द्वारा बनाई गई प्रतियां जो स्वयं प्रति की सटीकता सुनिश्चित करती हैं, और ऐसी प्रतियों की तुलना इन प्रतियों से की जाती है; (iii) मूल से बनाई गई या मूल से तुलना की गई प्रतियां (iv) उन…
पूरा पढ़ेंदस्तावेजों का प्राथमिक साक्ष्य द्वारा साबित किया जाना
दस्तावेजें एतस्मिन पश्चात वर्णित अवस्थाओं के सिवाय प्राथमिक साक्ष्य द्वारा साबित करनी होंगी ।
पूरा पढ़ेंप्राथमिक साक्ष्यों द्वारा दस्तावेजों का प्रमाण।
नीचे उल्लिखित मामलों को छोड़कर, दस्तावेजों को प्राथमिक साक्ष्य द्वारा सिद्ध किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंअवस्थाएँ जिनमें दस्तावेजों के संबंध में द्वितियक साक्ष्य दिया जा सकेगा
किसी दस्तावेज के अस्तित्व, दशा या अन्तर्वस्तु का द्वितीयक साक्ष्य निम्नलिखित अवस्थाओं में दिया जा सकेगा - क)जबकि यह दर्शित कर दिया जाए या प्रतीत होता हो कि मूल ऐसे व्यक्ति के कब्जे में शक्त्यधीन है - जिसके विरुद्ध उस दस्तावेज को साबित किया जाना ईप्सित (चाहा गया) है, अथवा जो न्यायालय की आदेशिका की पहुंच के बाहर है, या…
पूरा पढ़ेंऐसे मामले जिनमें दस्तावेजों से संबंधित द्वितीयक साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
निम्नलिखित मामलों में किसी दस्तावेज़ के अस्तित्व, स्थिति या विषयवस्तु के संबंध में द्वितीयक साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकते हैं, अर्थात्:-- (क) जब मूल प्रति प्रदर्शित की जाती है या प्रतीत होती है कि वह कब्जे या अधिकार में है-- (i) उस व्यक्ति का जिसके विरुद्ध दस्तावेज़ को सिद्ध किया जाना है; या (ii) किसी ऐसे व्यक्ति का जो…
पूरा पढ़ेंनई धारा
-
इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकॉर्ड।
इस अधिनियम में ऐसा कुछ भी नहीं है जो इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकॉर्ड को साक्ष्य में स्वीकार्यता से इस आधार पर इनकार करे कि यह एक इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकॉर्ड है और ऐसे रिकॉर्ड को, धारा 63 के अधीन रहते हुए, अन्य दस्तावेज़ के समान कानूनी प्रभाव, वैधता और प्रवर्तनीयता प्राप्त होगी।
पूरा पढ़ेंइलेक्ट्रॉनिक अभिलेख से संबंधित साक्ष्य के बारे में विशेष उपबंध
इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख की अंतर्वस्तु धारा ६५-ख के उपबंधों के अनुसार साबित की जा सकेगी ।
पूरा पढ़ेंइलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से संबंधित साक्ष्यों के संबंध में विशेष प्रावधान।
इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों की सामग्री को धारा 63 के प्रावधानों के अनुसार सिद्ध किया जा सकता है।
पूरा पढ़ेंइलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों की स्वीकार्यता।
(1) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, किसी इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख में निहित कोई भी सूचना, जो कागज पर मुद्रित हो, ऑप्टिकल या चुंबकीय माध्यमों में संग्रहीत, रिकॉर्ड की गई हो या कंप्यूटर द्वारा निर्मित किसी इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख में प्रतिलिपि हो (जिसे इसके बाद कंप्यूटर आउटपुट कहा जाएगा), उसे भी एक दस्तावेज माना जाएगा,…
पूरा पढ़ेंइलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों की स्वीकार्यता।
(1) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, किसी इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख में निहित कोई भी सूचना, जो कागज पर मुद्रित हो, ऑप्टिकल या चुंबकीय माध्यमों में संग्रहित, अभिलेखित या प्रतिलिपि बनाई गई हो, या किसी कंप्यूटर या संचार उपकरण द्वारा निर्मित अर्धचालक मेमोरी में संग्रहित, अभिलेखित या प्रतिलिपि बनाई गई हो, या अन्यथा किसी…
पूरा पढ़ेंपेश करने की सूचना के बारे में नियम
धारा ६५, खण्ड (क) में निर्दिष्ट दस्तावेजों की अन्तर्वस्तु का द्वितीयक साक्ष्य तब तक न दिया जा सकेगा, जब तक ऐसे द्वितीयक साक्ष्य देने की प्रस्थापना करने वाले पक्षकार ने उस पक्षकार को जिसके कब्जे में या शक्त्यधीन वह दस्तावेज है या उसके अटर्नी या प्लीडर को उसे पेश करने के लिए सूचना, जैसी कि विधि द्वारा विहित है, और यदि…
पूरा पढ़ेंपेशी के लिए नोटिस संबंधी नियम।
धारा 60 के खंड (क) में निर्दिष्ट दस्तावेजों की विषयवस्तु के द्वितीयक साक्ष्य तब तक नहीं दिए जाएंगे जब तक कि द्वितीयक साक्ष्य देने का प्रस्ताव करने वाले पक्ष ने उस पक्ष को, जिसके कब्जे या अधिकार में दस्तावेज है, या उसके अधिवक्ता या प्रतिनिधि को, उसे प्रस्तुत करने के लिए कानून द्वारा निर्धारित सूचना न दे दी हो; और यदि…
पूरा पढ़ेंजिस व्यक्ति के बारे में अभिकथित है कि उसने पेश की गई दस्तावेज को हस्ताक्षरित किया था या लिखा था उस व्यक्ति के हस्ताक्षर और हस्तलेख का साबित किया जाना
यदि कोई दस्तावेज किसी व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित या पूर्णत: या भागत: लिखी गई अभिकथित है, तो यह साबित करना होगा कि वह हस्ताक्षर या उस दस्तावेज के उतने का हस्तलेख, जितने के बारे में यह अभिकथित है कि वह उस व्यक्ति के हस्तलेख में है, उसके हस्तलेख में है ।
पूरा पढ़ेंजिस व्यक्ति पर दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने या लिखने का आरोप है, उसके हस्ताक्षर और लिखावट का प्रमाण प्रस्तुत किया गया।
यदि किसी दस्तावेज़ पर किसी व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षर किए जाने या उसे पूर्णतः या आंशिक रूप से लिखे जाने का आरोप लगाया जाता है, तो दस्तावेज़ के उस भाग पर मौजूद हस्ताक्षर या लिखावट, जिसके बारे में यह आरोप लगाया जाता है कि वह उस व्यक्ति की लिखावट में है, को सिद्ध करना आवश्यक है।
पूरा पढ़ेंइलेक्ट्रॉनिक चिन्हक के बारे में सबूत
सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक चिन्हक की दशा में के सिवाय, यदि यह अभिकथित है कि किसी हस्ताक्षरकर्ता का इलेक्ट्रॉनिक चिन्हक इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख में लगाया गया है तो यह तथ्य साबित किया जाना चाहिए कि ऐसा इलेक्ट्रॉनिक चिन्हक हस्ताक्षरकर्ता का इलेक्ट्रॉनिक चिन्हक है ।
पूरा पढ़ेंइलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर का प्रमाण।
सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर के मामले को छोड़कर, यदि किसी ग्राहक के इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर को किसी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड पर अंकित किए जाने का आरोप लगाया जाता है, तो यह साबित करना होगा कि ऐसा इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर ग्राहक का ही इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर है।
पूरा पढ़ेंऐसी दस्तावेज के निष्पादन का साबित किया जाना जिसका अनुप्रमाणित होना विधि द्वारा अपेक्षित है
यदि किसी दस्तावेज का अनुप्रमाणित होना विधि द्वारा अपेक्षित है, तो उसे साक्ष्य के रुप में उपयोग में न लाया जाएगा, जब तक कि कम से कम अनुप्रमाणिक साक्षी, यदि कोई अनुप्रमाणक साक्षी जीवित और न्यायालय की आदेशिका के अध्यधीन हो तथा साक्ष्य देने के योग्य हो, उसका निष्पादन साबित करने के प्रयोजन से न बुलाया गया हो : परन्तु ऐसी…
पूरा पढ़ेंकानून द्वारा आवश्यक दस्तावेजों के निष्पादन का प्रमाण सत्यापित किया जाना चाहिए।
यदि किसी दस्तावेज़ को कानून द्वारा सत्यापित किया जाना आवश्यक है, तो उसे तब तक साक्ष्य के रूप में उपयोग नहीं किया जाएगा जब तक कि कम से कम एक गवाह को उसके निष्पादन को साबित करने के उद्देश्य से नहीं बुलाया जाता है, यदि कोई गवाह जीवित हो, न्यायालय की प्रक्रिया के अधीन हो और साक्ष्य देने में सक्षम हो। बशर्ते कि किसी भी…
पूरा पढ़ेंजब किसी भी अनुप्रमाणक साक्षी का पता न चले, तब सबूत
यदि ऐसे किसी अनुप्रमाणक साक्षी का पता न चल सके अथवा यदि दस्तावेज का यूनाइटेड किंगडम में निष्पादित होना तात्पर्यित हो ता यह साबित करना होगा कि कम से कम एक अनुप्रमाणक साक्षी का अनुप्रमाण उसी के हस्तलेख में है, तथा यह कि दस्तावेज का निष्पादन करने वाले व्यक्ति का हस्ताक्षर उसी व्यक्ति के हस्तलेख में है ।
पूरा पढ़ेंऐसे मामलों में प्रमाण जहां कोई गवाह मौजूद न हो।
यदि ऐसा कोई गवाह न मिले, तो यह सिद्ध करना होगा कि कम से कम एक गवाह का हस्ताक्षर उसी की लिखावट में हो, और दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति के हस्ताक्षर भी उसी व्यक्ति की लिखावट में हों।
पूरा पढ़ेंअनुप्रमाणित दस्तावेज के पक्षकार द्वारा निष्पादन की स्वीकृति
अनुप्रमाणित दस्तावेज के किसी पक्षकार की अपने द्वारा उसका निष्पादन का उसके विरुद्ध पर्याप्त सबूत होगा, यद्यपि वह ऐसी दस्तावेज हो जिसका अनुप्रमाणित होना विधि द्वारा अपेक्षित है ।
पूरा पढ़ेंप्रमाणित दस्तावेज़ पर पक्षकार द्वारा निष्पादन की स्वीकृति।
किसी पक्ष द्वारा स्वयं द्वारा निष्पादित किए गए सत्यापित दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर स्वीकार करना, उसके विरुद्ध उस दस्तावेज़ के निष्पादन का पर्याप्त प्रमाण होगा, भले ही वह दस्तावेज़ कानून द्वारा सत्यापित होना आवश्यक हो।
पूरा पढ़ेंजबकि अनुप्रमाणक साक्षी निष्पादन का प्रत्याख्यान करता है, तब सबूत
यदि अनुप्रमाणक साक्षी दस्तावेज के निष्पादन का प्रत्याख्यान करे या उसके निष्पादन का स्मरण न हो, तो उसका निष्पादन अन्य साक्ष्य द्वारा साबित किया जा सकेगा ।
पूरा पढ़ेंजब गवाह निष्पादन से इनकार करता है तो सबूत प्रस्तुत करना।
यदि गवाह दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने से इनकार करता है या उसे दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने की घटना याद नहीं है, तो अन्य साक्ष्यों के माध्यम से इसके हस्ताक्षर को सिद्ध किया जा सकता है।
पूरा पढ़ेंउस दस्तावेज का साबित किया जाना जिसका अनुप्रमाणित होना विधि द्वारा अपेक्षित नहीं है
कोई अनुप्रमाणित दस्तावेज, जिसका अनुप्रमाणित होना विधि द्वारा अपेक्षित नहीं है, ऐसे साबित की जा सकेगी, मानो वह अनुप्रमाणित नहीं हो ।
पूरा पढ़ेंऐसे दस्तावेज़ का प्रमाण जिसे कानून द्वारा सत्यापित कराना आवश्यक नहीं है।
कानून द्वारा सत्यापित किए जाने की आवश्यकता न होने पर भी सत्यापित दस्तावेज़ को असंवैधानिक दस्तावेज़ के समान ही प्रमाणित किया जा सकता है।
पूरा पढ़ेंहस्ताक्षर, लेख या मुद्रा की तुलना अन्यों से जो स्वीकृत या साबित है
यह अभिनिश्चित करने के लिए कि क्या कोई हस्ताक्षर, लेख या मुद्रा उस व्यक्ति की है, जिसके द्वारा उसका लिखा या किया जाना तात्पर्यित है, किसी हस्ताक्षर, लेख या मुद्रा की जिसके बारे में, यह स्वीकृत है या न्यायालय को समाधानप्रद रुप में साबित कर दिया गया है कि वह उस व्यक्ति द्वारा लिखा या किया गया था, उससे जिसे साबित किया…
पूरा पढ़ेंअन्य स्वीकृत या सिद्ध हस्ताक्षरों, लेखों या मुहरों से हस्ताक्षर, लेखन या मुहर की तुलना करना।
(1) यह पता लगाने के लिए कि कोई हस्ताक्षर, लेख या मुहर उस व्यक्ति की है जिसके द्वारा इसे लिखा या बनाया गया प्रतीत होता है, न्यायालय की संतुष्टि के लिए स्वीकार किए गए या सिद्ध किए गए किसी भी हस्ताक्षर, लेख या मुहर की तुलना उस हस्ताक्षर, लेख या मुहर से की जा सकती है जिसे सिद्ध किया जाना है, भले ही वह हस्ताक्षर, लेख या…
पूरा पढ़ेंअंकिय चिन्ह के सत्यापन के बारे में सबूत
यह अभिनिश्चित करने के लिए कि क्या कोई अंकिय चिन्हक उस व्यक्ति का है जिसके द्वारा उसका लगाया जाना तात्पर्यित है, न्यायालय यह निदेश दे सकेगा कि :- क)वह व्यक्ति या नियंत्रक या प्रमाणकर्ता प्राधिकारी अंकीय चिन्हक प्रमाण-पत्र पेश करे; ख)कोई अन्य व्यक्ति अंकीय चिन्हक प्रमाण-पत्र में सूचीबद्ध लोक कुंजी के लिए आवेदन करे और उस…
पूरा पढ़ेंडिजिटल हस्ताक्षर के सत्यापन का प्रमाण।
यह सुनिश्चित करने के लिए कि क्या डिजिटल हस्ताक्षर उसी व्यक्ति का है जिसके द्वारा इसे अंकित किया गया प्रतीत होता है, न्यायालय निर्देश दे सकता है--- (क) वह व्यक्ति या नियंत्रक या प्रमाणन प्राधिकारी डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र प्रस्तुत करे; (ख) किसी अन्य व्यक्ति द्वारा डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र में सूचीबद्ध सार्वजनिक…
पूरा पढ़ेंलोक दस्तावेजें
निम्नलिखित दस्तावेजें लोक दस्तावेजें हैं :- १)वे दस्तावेजें, जो निम्नलिखित के कार्यों का या कार्यों के अभिलेखों का रूप धारण करती हैं - (i) प्रभुत्वसंपन्न प्राधिकारी के; (ii) शासकीय निकायों और अधिकरणों के, और (iii) भारत के या कॉमनवेल्थ के या किसी विदेश के किसी भाग के विधायी, न्यायिक और कार्यपालक लोक ऑफिसरों के; २)किसी…
पूरा पढ़ेंसार्वजनिक और निजी दस्तावेज।
(1) निम्नलिखित दस्तावेज सार्वजनिक दस्तावेज हैं:-- (क) अधिनियमों का गठन करने वाले दस्तावेज, या अधिनियमों के अभिलेख-- (i) संप्रभु प्राधिकारी का; (ii) आधिकारिक निकायों और न्यायाधिकरणों का; और (iii) भारत या किसी विदेशी देश के लोक अधिकारियों, विधायी, न्यायिक और कार्यकारी अधिकारियों के; (ख) किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश…
पूरा पढ़ेंसार्वजनिक और निजी दस्तावेज।
(1) निम्नलिखित दस्तावेज सार्वजनिक दस्तावेज हैं:-- (क) अधिनियमों का गठन करने वाले दस्तावेज, या अधिनियमों के अभिलेख-- (i) संप्रभु प्राधिकारी का; (ii) आधिकारिक निकायों और न्यायाधिकरणों का; और (iii) भारत या किसी विदेशी देश के लोक अधिकारियों, विधायी, न्यायिक और कार्यकारी अधिकारियों के; (ख) किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश…
पूरा पढ़ेंलोक दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियाँ
हर लोक ऑफिसर, जिसकी अभिरक्षा में ऐसी कोई लोक दस्तावेज है जिसका निरीक्षण करने का किसी व्यक्ति को अधिकार है, उस व्यक्ति को माँग किए जाने पर, उसके लिए विधिक फीस के संदाय पर, उसकी एक प्रति ऐसी प्रति के नीचे लिखे हुए इस प्रमाणपत्र सहित देगा कि वह उस दस्तावेज की, या यथास्थिति, उसके भाग की सही प्रति है; और ऐसे प्रमाणपत्र पर…
पूरा पढ़ेंसार्वजनिक दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां।
प्रत्येक लोक अधिकारी जिसके पास कोई सार्वजनिक दस्तावेज है, जिसे देखने का किसी व्यक्ति को अधिकार है, मांग करने पर उस व्यक्ति को कानूनी शुल्क के भुगतान पर उसकी एक प्रति देगा, साथ ही उस प्रति के नीचे एक प्रमाण पत्र भी देगा जिसमें यह लिखा होगा कि यह दस्तावेज या उसके किसी भाग की सही प्रति है। यह प्रमाण पत्र दिनांकित होगा और…
पूरा पढ़ेंदस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां प्रस्तुत करके उनका प्रमाण प्रस्तुत किया जा सकता है।
इस प्रकार की प्रमाणित प्रतियां सार्वजनिक दस्तावेजों या सार्वजनिक दस्तावेजों के उन भागों की विषयवस्तु के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत की जा सकती हैं जिनकी वे प्रतियां होने का दावा करती हैं।
पूरा पढ़ेंदस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां प्रस्तुत करके उनका प्रमाण प्रस्तुत किया जा सकता है।
इस प्रकार की प्रमाणित प्रतियां सार्वजनिक दस्तावेजों या सार्वजनिक दस्तावेजों के उन भागों की विषयवस्तु के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत की जा सकती हैं जिनकी वे प्रतियां होने का दावा करती हैं।
पूरा पढ़ेंअन्य शासकीय दस्तावेजों का सबूत
निम्नलिखित लोक दस्तावेजें निम्नलिखित रूप से साबित की जा सकेंगी :- १)केन्द्रीय सरकार के किसी विभाग के, या क्राउन रिप्रेजेण्टेटिव के, या किसी राज्य सरकार के या किसी राज्य सरकार के किसी विभाग के कार्य, आदेश या अधिसूचनाएँ - उन विभागों के अभिलेखों द्वारा, जो क्रमश: उन विभागों के मुख्य पदाधिकारियों द्वारा प्रमाणित हैं, या…
पूरा पढ़ेंअन्य आधिकारिक दस्तावेजों का प्रमाण।
निम्नलिखित सार्वजनिक दस्तावेजों को इस प्रकार प्रमाणित किया जा सकता है: -- (क) केंद्र सरकार के किसी भी मंत्रालय और विभाग या किसी राज्य सरकार या किसी राज्य सरकार के किसी विभाग या केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के अधिनियम, आदेश या अधिसूचनाएँ-- (i) संबंधित विभागों के अभिलेखों द्वारा, जिन्हें उन विभागों के प्रमुख द्वारा…
पूरा पढ़ेंप्रमाणित प्रतियों के असली होने के बारे में उपधारणा
न्यायालय हर ऐसी दस्तावेज का असली होना उपधारित करेगा, जिसका ऐसा प्रमाणपत्र, प्रमाणित प्रति या अन्य दस्तावेज होना तात्पर्यित है, जिसका किसी विशिष्ट तथ्य के साक्ष्य के रूप में ग्राह्य होना विधि द्वारा घोषित है, और जिसका केन्द्रीय सरकार के या किसी राज्य सरकार के किसी ऑफिसर द्वारा, या जम्मू-कश्मीर राज्य के किसी ऐसे ऑफिसर…
पूरा पढ़ेंप्रमाणित प्रतियों की प्रामाणिकता के संबंध में अनुमान।
(1) न्यायालय प्रत्येक ऐसे दस्तावेज को वास्तविक मानेगा जो प्रमाण पत्र, प्रमाणित प्रति या अन्य दस्तावेज होने का दावा करता हो, जिसे विधि द्वारा किसी विशेष तथ्य के साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य घोषित किया गया हो और जो केंद्र सरकार या राज्य सरकार के किसी अधिकारी द्वारा विधिवत प्रमाणित होने का दावा करता हो। बशर्ते कि ऐसा…
पूरा पढ़ेंसाक्ष्य के अभिलेख के तौर पर पेश की गई दस्तावेजों के बारे में उपधारणा
जब कभी किसी न्यायालय के समक्ष कोई ऐसी दस्तावेज पेश की जाती है, जिसका किसी न्यायिक कार्यवाही में, या विधि द्वारा ऐसा साक्ष्य लेने के लिए प्राधिकृत किसी ऑफिसर के समक्ष, किसी साक्षी द्वारा दिए गए साक्ष्य का या साक्ष्य के किसी भाग का अभिलेख या ज्ञापन होना, अथवा किसी कैदी या अभियुक्त व्यक्ति का विधि के अनुसार लिया गया कथन…
पूरा पढ़ेंसाक्ष्य आदि के अभिलेख के रूप में प्रस्तुत दस्तावेजों के संबंध में अनुमान।
जब भी किसी न्यायालय के समक्ष कोई दस्तावेज प्रस्तुत किया जाता है, जो किसी न्यायिक कार्यवाही में किसी गवाह द्वारा या कानून द्वारा ऐसे साक्ष्य लेने के लिए अधिकृत किसी अधिकारी के समक्ष दिए गए साक्ष्य या साक्ष्य के किसी भाग का अभिलेख या ज्ञापन होने का दावा करता हो, या किसी कैदी या आरोपी व्यक्ति द्वारा कानून के अनुसार लिया…
पूरा पढ़ेंराजपत्रों, समाचारपत्रों, पार्लियामेण्ट के प्राईवेट एक्टों और अन्य दस्तवेजों के बारे में उपधारणाएँ
न्यायालय हर ऐसी दस्तावेज का असली होना उपधारित करेगा जिसका लंदन गजट, या कोई शासकिय राजपत्र या ब्रिटिश क्राउन के किसी उपनिवेश, आश्रित देश या कब्जाधीन क्षेत्र का सरकारी राजपत्र होना या कोई समाचार पत्र या जर्नल होना, या युनाइटेड किंगडम की पार्लियामेण्ट के प्राइवेट ऐक्ट की क्वीन्स प्रिन्टर द्वारा मुद्रित प्रति होना,…
पूरा पढ़ेंराजपत्रों, समाचार पत्रों और अन्य दस्तावेजों के संबंध में अनुमान।
न्यायालय प्रत्येक ऐसे दस्तावेज की प्रामाणिकता को मान लेगा जो आधिकारिक राजपत्र, समाचार पत्र या पत्रिका होने का दावा करता हो, और प्रत्येक ऐसे दस्तावेज की प्रामाणिकता को भी मान लेगा जिसे किसी कानून द्वारा किसी व्यक्ति के पास रखने का निर्देश दिया गया हो, यदि ऐसा दस्तावेज कानून द्वारा अपेक्षित रूप में रखा गया हो और उचित…
पूरा पढ़ेंइलेक्ट्रॉनिक रुप में राजपत्र के बारे में उपधारणा
न्यायालय, ऐसे प्रत्येक इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख का असली होना उपधारित करेगा, जिसका शासकीय राजपत्र होना तात्पर्यित है या जिसका ऐसा इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख होना तात्पर्यित है, जिसका किसी व्यक्ति द्वारा रखा जाना किसी विधि द्वारा निर्दिष्ट है, यदि ऐसा इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख सारत: उस रुप में रखा गया हो, जो विधि द्वारा अपेक्षित है और…
पूरा पढ़ेंइलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकॉर्ड में राजपत्रों के संबंध में अनुमान।
न्यायालय प्रत्येक इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल अभिलेख की प्रामाणिकता को मान लेगा, चाहे वह आधिकारिक राजपत्र होने का दावा करता हो या किसी कानून द्वारा किसी व्यक्ति द्वारा रखे जाने के लिए निर्देशित इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल अभिलेख होने का दावा करता हो, यदि ऐसा इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल अभिलेख कानून द्वारा अपेक्षित स्वरूप में रखा गया…
पूरा पढ़ेंमुद्रा या हस्ताक्षर के सबूत के बिना इंग्लैण्ड में ग्राह्य दस्तावेज के बारे में उपधारणा
जबकि किसी न्यायालय के समक्ष कोई ऐसी दस्तावेज पेश की जाती है जिसका ऐसी दस्तावेज होना तात्पर्यित है जो इंग्लैण्ड या आयरलैण्ड के किसी न्यायालय में किसी विशिष्ट को साबित करने के लिए उस दस्तावेज को अधिप्रमाणिकृत करने वाली मुद्रा या स्टांप या हस्ताक्षर को या उस व्यक्ति द्वारा, जिसके द्वारा उसका हस्ताक्षरित किया जाना…
पूरा पढ़ेंहटाई गई धारा
DELETED
सरकार के प्राधिकार द्वारा बनाए गए मानचित्रों या रेखांको के बारे में उपधारणा
न्यायालय यह उपधारित करेगा कि वे मानचित्र या रेखांक जो, केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार के प्राधिकार द्वारा बनाए गए तात्पर्यित है, वैसे ही बनाए गए थे और वे शुद्ध है, किन्तु किसी मामले के प्रयोजनों के लिए बनाए गए मानचित्रों या रेखांकों के बारे में यह साबित करना होगा कि वे सही है ।
पूरा पढ़ेंसरकार के अधिकार से बनाए गए मानचित्रों या योजनाओं के संबंध में अनुमान।
न्यायालय यह मानकर चलेगा कि केंद्र सरकार या किसी राज्य सरकार के अधिकार से बनाए गए मानचित्र या योजनाएँ वास्तव में बनाई गई हैं और सटीक हैं; लेकिन किसी भी उद्देश्य के लिए बनाए गए मानचित्र या योजनाओं की सटीकता सिद्ध करनी होगी।
पूरा पढ़ेंविधियों के संग्रह और विनिश्चयों की रिपोर्टों के बारे में उपधारणा
न्यायालय हर ऐसी पुस्तक का जिसका किसी देश की सरकार के प्राधिकार के अधीन मुद्रित या प्रकाशित होना और जिसमें उस देश की कोई विधियाँ अन्तर्विष्ट होना तात्पर्यित है । तथा हर ऐसी पुस्तक का, जिसमें उस देश के न्यायालय के विनिश्चयों की रिपोर्ट अन्तर्विष्ट होना तात्पर्यित है, असली होना उपधारित करेगा ।
पूरा पढ़ेंकानूनों के संग्रह और निर्णयों की रिपोर्टों के संबंध में अनुमान।
न्यायालय किसी भी देश की सरकार के अधिकार से मुद्रित या प्रकाशित होने वाली, उस देश के कानूनों से युक्त होने वाली प्रत्येक पुस्तक और उस देश के न्यायालयों के निर्णयों की रिपोर्टों से युक्त होने वाली प्रत्येक पुस्तक की प्रामाणिकता को मान लेगा।
पूरा पढ़ेंमुख्तारनामों (अभिकरण पत्र / प्रतिनिधि पत्र ) के बारे में उपधारणा
न्यायालय यह उपधारित करेगा कि हर ऐसी दस्तावेज जिसका मुख्तारनामा होना और नोटरी पब्लिक या किसी न्यायालय, न्यायाधीश, मजिस्ट्रेट, भारतीय कौन्सल या उपकौन्सल या केन्द्रीय सरकार के प्रतिनिधि के समक्ष निष्पादित और उस द्वारा अधिप्रमाणीकृत होना तात्पर्यित है, ऐसे निष्पादित और अधिप्रमाणीकृत की गई थी ।
पूरा पढ़ेंसत्ता-अधिकार सौंपने के संबंध में अनुमान।
न्यायालय यह मानकर चलेगा कि प्रत्येक दस्तावेज, जो पावर-ऑफ-अटॉर्नी होने का दावा करता है और जिसे किसी नोटरी पब्लिक, या किसी न्यायालय, न्यायाधीश, मजिस्ट्रेट, भारतीय वाणिज्य दूतावास या उप-वाणिज्य दूतावास, या केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के समक्ष निष्पादित और प्रमाणित किया गया है, वह उसी प्रकार निष्पादित और प्रमाणित किया गया…
पूरा पढ़ेंइलेक्ट्रॉनिक करारों के बारे में उपधारणा
न्यायालय यह उपधारित करेगा कि हर ऐसा इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख, जिसका ऐसा करार होना तात्पर्यित है जिस पर पक्षकारों के इलेक्ट्रॉनिक चिन्हक है, पक्षकारों के इलेक्ट्रॉनिक चिन्हक लगाकर किया गया था ।
पूरा पढ़ेंइलेक्ट्रॉनिक समझौतों के संबंध में अनुमान।
न्यायालय यह मानकर चलेगा कि पक्षों के इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल हस्ताक्षर वाले प्रत्येक इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को, जो समझौते के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, पक्षों के इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल हस्ताक्षर लगाकर ही संपन्न किया गया था।
पूरा पढ़ेंइलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों और इलेक्ट्रॉनिक चिन्हक के बारे में उपधारणा
१)किन्हीं ऐसी कार्यवाहियों में, जिनमें सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख अंतर्वलित है, जब तक कि इसके प्रतिकूल साबित नहीं कर दिया जाता, न्यायालय यह उपधारित करेगा कि सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख किसी ऐसे विनिर्दिष्ट समय से, जिससे सुरक्षित प्रास्थिति संबंधित है, परिवर्तित नहीं किया गया है । २)किन्हीं ऐसी कार्यवाहीयों में,…
पूरा पढ़ेंइलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर के संबंध में अनुमान।
(1) किसी सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से संबंधित किसी भी कार्यवाही में, न्यायालय यह मान लेगा, जब तक कि इसके विपरीत सिद्ध न हो जाए, कि सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में उस विशिष्ट समय बिंदु के बाद से कोई परिवर्तन नहीं किया गया है जिससे सुरक्षित स्थिति संबंधित है। (2) सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर से संबंधित किसी भी…
पूरा पढ़ेंइलेक्ट्रॉनिक चिन्हक प्रमाण-पत्र के बारे में उपधारणा
जब तक कि इसके प्रतिकूल साबित नहीं कर दिया जाता, न्यायालय, यह उपधारित करेगा कि यदि उपयोगकर्ता द्वारा प्रमाणपत्र को स्वीकार किया गया था तो इलेक्ट्रॉनिक चिन्हक प्रमाण-पत्र में सूचीबद्ध सूचना सही है, सिवाय उस सूचना के जो उपयोगकर्ता की सूचना के रुप में विनिर्दिष्ट है जिसे सत्यापित नहीं किया गया है ।
पूरा पढ़ेंइलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर प्रमाणपत्रों के संबंध में अनुमान।
यदि ग्राहक द्वारा प्रमाणपत्र स्वीकार कर लिया गया है, तो न्यायालय यह मानकर चलेगा कि इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर प्रमाणपत्र में सूचीबद्ध जानकारी सही है, जब तक कि इसके विपरीत सिद्ध न हो जाए, सिवाय ग्राहक जानकारी के रूप में निर्दिष्ट उस जानकारी के जिसे सत्यापित नहीं किया गया है।
पूरा पढ़ेंविदेशी न्यायिक अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियों के बारे में उपधारणा
न्यायालय यह उपधारित कर सकेगा कि ऐसे किसी देश के, जो भारत का या हर मजेस्टी के अधिक्षेत्रों का भाग नहीं है, किसी न्यायिक अभिलेख की प्रमाणित प्रति होना तात्पर्यित होने वाली कोई दस्तावेज असली और शुद्ध है, यदि उस दस्तावेज का किसी ऐसी रीति से प्रमाणित होना तात्पर्यित हो जिसका, न्यायिक अभिलेखों की प्रतियों के प्रमाणन के लिए…
पूरा पढ़ेंविदेशी न्यायिक अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियों के संबंध में अनुमान।
(1) न्यायालय यह मान सकता है कि भारत के बाहर किसी देश के किसी न्यायिक अभिलेख की प्रमाणित प्रति होने का दावा करने वाला कोई दस्तावेज वास्तविक और सटीक है, यदि दस्तावेज को किसी ऐसे तरीके से प्रमाणित किया गया हो जिसे उस देश में या उसके लिए केंद्र सरकार के किसी प्रतिनिधि द्वारा न्यायिक अभिलेखों की प्रतियों के प्रमाणीकरण के…
पूरा पढ़ेंपुस्तकों, मानचित्रों और चार्टों के बारे में उपधारणा
न्यायालय यह उपधारित कर सकेगा कि कोई पुस्तक, जिसे वह लोक या साधारण हित संबंधी बातों की जानकारी के लिए देखे और कोई प्रकाशित मानचित्र या चार्ट, जिसके कथन सुसंगत तथ्य है, और जो उसके निरीक्षणार्थ पेश किया गया है, उस व्यक्ति द्वारा तथा उस समय और उस स्थान पर लिखा गया और प्रकाशित किया गया था जिनके द्वारा या जिस स्थान पर उसका…
पूरा पढ़ेंपुस्तकों, मानचित्रों और चार्टों के संबंध में अनुमान।
न्यायालय यह मान सकता है कि कोई भी पुस्तक जिसका वह सार्वजनिक या सामान्य हित के मामलों पर जानकारी के लिए संदर्भ ले सकता है, और कोई भी प्रकाशित मानचित्र या चार्ट, जिसके कथन प्रासंगिक तथ्य हैं, और जिसे उसके निरीक्षण के लिए प्रस्तुत किया जाता है, उस व्यक्ति द्वारा, उस समय और स्थान पर लिखा और प्रकाशित किया गया था, जिसके…
पूरा पढ़ें- IEA §48BSA §42
अधिकार या रुढि के अस्तित्व के बारे में रायें कब सुसंगत है
प्रासंगिक होने पर, सामान्य प्रथा या अधिकार के अस्तित्व के संबंध में राय।
- IEA §49BSA §43
प्रथाओं, सिद्धातों आदि के बारे में रायें कब सुसंगत है
प्रासंगिक होने पर रीति-रिवाजों, सिद्धांतों आदि के संबंध में राय।
- IEA §50BSA §44
नातेदारी के बारे में राय कब सुसंगत है
प्रासंगिक होने पर, रिश्ते पर राय देना।
- IEA §51BSA §45
राय के आधार कब सुसंगत है
प्रासंगिक होने पर, राय के आधार।
- IEA §52BSA §46
सिविल मामलों में अध्यारोपित (लांछन लगाना ) आचरण साबित करने के लिए शील विसंगत है
दीवानी मामलों में, आरोपित आचरण को साबित करने के लिए चरित्र का उपयोग अप्रासंगिक है।
- IEA §53BSA §47
दाण्डिक मामलों में पूर्वतन अच्छा शील सुसंगत है
आपराधिक मामलों में पिछला अच्छा चरित्र प्रासंगिक होता है।
- IEA §53ABSA §48
कतिपय (कुछ) मामलों में शील या पूर्व लैंगिक अनुभव के साक्ष्य को सुसंगत न होना
कुछ मामलों में चरित्र या पूर्व यौन अनुभव के साक्ष्य प्रासंगिक नहीं होते हैं।
- IEA §54BSA §49
उत्तर में होने के सिवाय पूर्वतन बुरा शील सुसंगत नहीं है
पिछली बुरी आदतें, जवाब देने के अलावा, प्रासंगिक नहीं हैं।
- IEA §55BSA §50
नुकसानी पर प्रभाव डालने वाला शील
क्षति पर प्रभाव डालने वाला चरित्र।
- IEA §56BSA §51
न्यायिक रुप से अवेक्षणीय तथ्य साबित करना आवश्यक नहीं है
न्यायिक रूप से मान्य तथ्य को सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं है।
- IEA §57BSA §52
वे तथ्य, जिनकी न्यायिक अवेक्षा न्यायालय को करनी होगी
जिन तथ्यों का न्यायालय न्यायिक संज्ञान लेगा।
- IEA §58BSA §53
स्वीकृत तथ्यों को साबित करना आवश्यक नहीं है
स्वीकार किए गए तथ्यों को साबित करना आवश्यक नहीं है।
- IEA §59BSA §54
मौखिक साक्ष्य द्वारा तथ्यों का साबित किया जाना
मौखिक साक्ष्य द्वारा तथ्यों का प्रमाण।
- IEA §60BSA §55
मौखिक साक्ष्य प्रत्यक्ष होना चाहिए
मौखिक साक्ष्य प्रत्यक्ष होना चाहिए।
- IEA §61BSA §56
दस्तावेजों की अंतर्वस्तु का सबूत
दस्तावेजों की विषयवस्तु का प्रमाण।
- IEA §62BSA §57
प्राथमिक साक्ष्य
प्राथमिक साक्ष्य।
- IEA §63BSA §58
द्वितीयक साक्ष्य
द्वितीयक साक्ष्य।
- IEA §64BSA §59
दस्तावेजों का प्राथमिक साक्ष्य द्वारा साबित किया जाना
प्राथमिक साक्ष्यों द्वारा दस्तावेजों का प्रमाण।
- IEA §65BSA §60
अवस्थाएँ जिनमें दस्तावेजों के संबंध में द्वितियक साक्ष्य दिया जा सकेगा
ऐसे मामले जिनमें दस्तावेजों से संबंधित द्वितीयक साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
- IEA §New SectionBSA §61
नई धारा
इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकॉर्ड।
IEA §New SectionBSA §61 - IEA §65ABSA §62
इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख से संबंधित साक्ष्य के बारे में विशेष उपबंध
इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से संबंधित साक्ष्यों के संबंध में विशेष प्रावधान।
- IEA §65BBSA §63
इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों की स्वीकार्यता।
- IEA §66BSA §64
पेश करने की सूचना के बारे में नियम
पेशी के लिए नोटिस संबंधी नियम।
- IEA §67BSA §65
जिस व्यक्ति के बारे में अभिकथित है कि उसने पेश की गई दस्तावेज को हस्ताक्षरित किया था या लिखा था उस व्यक्ति के हस्ताक्षर और हस्तलेख का साबित किया जाना
जिस व्यक्ति पर दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने या लिखने का आरोप है, उसके हस्ताक्षर और लिखावट का प्रमाण प्रस्तुत किया गया।
- IEA §67ABSA §66
इलेक्ट्रॉनिक चिन्हक के बारे में सबूत
इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर का प्रमाण।
- IEA §68BSA §67
ऐसी दस्तावेज के निष्पादन का साबित किया जाना जिसका अनुप्रमाणित होना विधि द्वारा अपेक्षित है
कानून द्वारा आवश्यक दस्तावेजों के निष्पादन का प्रमाण सत्यापित किया जाना चाहिए।
- IEA §69BSA §68
जब किसी भी अनुप्रमाणक साक्षी का पता न चले, तब सबूत
ऐसे मामलों में प्रमाण जहां कोई गवाह मौजूद न हो।
- IEA §70BSA §69
अनुप्रमाणित दस्तावेज के पक्षकार द्वारा निष्पादन की स्वीकृति
प्रमाणित दस्तावेज़ पर पक्षकार द्वारा निष्पादन की स्वीकृति।
- IEA §71BSA §70
जबकि अनुप्रमाणक साक्षी निष्पादन का प्रत्याख्यान करता है, तब सबूत
जब गवाह निष्पादन से इनकार करता है तो सबूत प्रस्तुत करना।
- IEA §72BSA §71
उस दस्तावेज का साबित किया जाना जिसका अनुप्रमाणित होना विधि द्वारा अपेक्षित नहीं है
ऐसे दस्तावेज़ का प्रमाण जिसे कानून द्वारा सत्यापित कराना आवश्यक नहीं है।
- IEA §73BSA §72
हस्ताक्षर, लेख या मुद्रा की तुलना अन्यों से जो स्वीकृत या साबित है
अन्य स्वीकृत या सिद्ध हस्ताक्षरों, लेखों या मुहरों से हस्ताक्षर, लेखन या मुहर की तुलना करना।
- IEA §73ABSA §73
अंकिय चिन्ह के सत्यापन के बारे में सबूत
डिजिटल हस्ताक्षर के सत्यापन का प्रमाण।
- IEA §74BSA §74 (1)
लोक दस्तावेजें
सार्वजनिक और निजी दस्तावेज।
- IEA §75BSA §74 (2)
प्राइवेट दस्तावेजें
सार्वजनिक और निजी दस्तावेज।
- IEA §76BSA §75
लोक दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियाँ
सार्वजनिक दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां।
- IEA §77BSA §76
दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां प्रस्तुत करके उनका प्रमाण प्रस्तुत किया जा सकता है।
- IEA §78BSA §77
अन्य शासकीय दस्तावेजों का सबूत
अन्य आधिकारिक दस्तावेजों का प्रमाण।
- IEA §79BSA §78
प्रमाणित प्रतियों के असली होने के बारे में उपधारणा
प्रमाणित प्रतियों की प्रामाणिकता के संबंध में अनुमान।
- IEA §80BSA §79
साक्ष्य के अभिलेख के तौर पर पेश की गई दस्तावेजों के बारे में उपधारणा
साक्ष्य आदि के अभिलेख के रूप में प्रस्तुत दस्तावेजों के संबंध में अनुमान।
- IEA §81BSA §80
राजपत्रों, समाचारपत्रों, पार्लियामेण्ट के प्राईवेट एक्टों और अन्य दस्तवेजों के बारे में उपधारणाएँ
राजपत्रों, समाचार पत्रों और अन्य दस्तावेजों के संबंध में अनुमान।
- IEA §81ABSA §81
इलेक्ट्रॉनिक रुप में राजपत्र के बारे में उपधारणा
इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकॉर्ड में राजपत्रों के संबंध में अनुमान।
- IEA §82BSA §DELETED
मुद्रा या हस्ताक्षर के सबूत के बिना इंग्लैण्ड में ग्राह्य दस्तावेज के बारे में उपधारणा
हटाई गई धारा
IEA §82BSA §DELETED - IEA §83BSA §82
सरकार के प्राधिकार द्वारा बनाए गए मानचित्रों या रेखांको के बारे में उपधारणा
सरकार के अधिकार से बनाए गए मानचित्रों या योजनाओं के संबंध में अनुमान।
- IEA §84BSA §83
विधियों के संग्रह और विनिश्चयों की रिपोर्टों के बारे में उपधारणा
कानूनों के संग्रह और निर्णयों की रिपोर्टों के संबंध में अनुमान।
- IEA §85BSA §84
मुख्तारनामों (अभिकरण पत्र / प्रतिनिधि पत्र ) के बारे में उपधारणा
सत्ता-अधिकार सौंपने के संबंध में अनुमान।
- IEA §85ABSA §85
इलेक्ट्रॉनिक करारों के बारे में उपधारणा
इलेक्ट्रॉनिक समझौतों के संबंध में अनुमान।
- IEA §85BBSA §86
इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों और इलेक्ट्रॉनिक चिन्हक के बारे में उपधारणा
इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर के संबंध में अनुमान।
- IEA §85CBSA §87
इलेक्ट्रॉनिक चिन्हक प्रमाण-पत्र के बारे में उपधारणा
इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर प्रमाणपत्रों के संबंध में अनुमान।
- IEA §86BSA §88
विदेशी न्यायिक अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियों के बारे में उपधारणा
विदेशी न्यायिक अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियों के संबंध में अनुमान।
- IEA §87BSA §89
पुस्तकों, मानचित्रों और चार्टों के बारे में उपधारणा
पुस्तकों, मानचित्रों और चार्टों के संबंध में अनुमान।
