SIDBI Act 15अध्याय IV · Business of the Small Industries Bank
धारा 15 · लघु उद्योग बैंक द्वारा ऋण लेना और जमा स्वीकार करना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) लघु उद्योग बैंक, इस अधिनियम के अधीन अपने कार्यों के निष्पादन के उद्देश्य से,--
(क) केंद्र सरकार की गारंटी के साथ या उसके बिना बांड और डिबेंचर जारी करना और बेचना;
(ख) रिजर्व बैंक से धन उधार लेना--
(i) मांग पर या उस तिथि से नब्बे दिनों से अधिक की निश्चित अवधि की समाप्ति पर चुकाने योग्य, जिस तिथि को शेयरों, निधियों और प्रतिभूतियों (अचल संपत्ति के अलावा) की सुरक्षा के बदले धन उधार लिया गया हो, जिसमें किसी न्यासी को भारत में उस समय लागू किसी कानून द्वारा न्यासी धन का निवेश करने के लिए अधिकृत किया गया हो;
(ii) वास्तविक वाणिज्यिक या व्यापारिक लेन-देन से उत्पन्न विनिमय बिलों या वचन पत्रों के विरुद्ध, जिन पर दो या दो से अधिक वैध हस्ताक्षर हों और जो उधार लेने की तिथि से पांच वर्ष के भीतर परिपक्व हों;
(iii) भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (2 ऑफ 1934) की धारा 46सी के तहत स्थापित राष्ट्रीय औद्योगिक ऋण (दीर्घकालिक परिचालन) निधि में से, उस धारा में निर्दिष्ट किसी भी उद्देश्य के लिए;
(ग) विकास बैंक या ऐसे अन्य प्राधिकरण, संगठन या संस्था से धन उधार लेना, जिसे बोर्ड द्वारा सामान्यतः या विशेषतः अनुमोदित किया गया हो;
(घ) ऐसी अवधि की समाप्ति के बाद और ऐसी शर्तों पर जमा स्वीकार करना जो सामान्यतः या विशेष रूप से 1 [बोर्ड द्वारा अनुमोदित] हों।
(2) केंद्र सरकार, लघु उद्योग बैंक द्वारा अनुरोध किए जाने पर, उस बैंक द्वारा जारी किए गए बांडों और डिबेंचरों की मूलधन की चुकौती और ब्याज के भुगतान की गारंटी दे सकती है, ऐसी दर पर जो उस सरकार द्वारा निर्धारित की जाए।
(क) केंद्र सरकार की गारंटी के साथ या उसके बिना बांड और डिबेंचर जारी करना और बेचना;
(ख) रिजर्व बैंक से धन उधार लेना--
(i) मांग पर या उस तिथि से नब्बे दिनों से अधिक की निश्चित अवधि की समाप्ति पर चुकाने योग्य, जिस तिथि को शेयरों, निधियों और प्रतिभूतियों (अचल संपत्ति के अलावा) की सुरक्षा के बदले धन उधार लिया गया हो, जिसमें किसी न्यासी को भारत में उस समय लागू किसी कानून द्वारा न्यासी धन का निवेश करने के लिए अधिकृत किया गया हो;
(ii) वास्तविक वाणिज्यिक या व्यापारिक लेन-देन से उत्पन्न विनिमय बिलों या वचन पत्रों के विरुद्ध, जिन पर दो या दो से अधिक वैध हस्ताक्षर हों और जो उधार लेने की तिथि से पांच वर्ष के भीतर परिपक्व हों;
(iii) भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (2 ऑफ 1934) की धारा 46सी के तहत स्थापित राष्ट्रीय औद्योगिक ऋण (दीर्घकालिक परिचालन) निधि में से, उस धारा में निर्दिष्ट किसी भी उद्देश्य के लिए;
(ग) विकास बैंक या ऐसे अन्य प्राधिकरण, संगठन या संस्था से धन उधार लेना, जिसे बोर्ड द्वारा सामान्यतः या विशेषतः अनुमोदित किया गया हो;
(घ) ऐसी अवधि की समाप्ति के बाद और ऐसी शर्तों पर जमा स्वीकार करना जो सामान्यतः या विशेष रूप से 1 [बोर्ड द्वारा अनुमोदित] हों।
(2) केंद्र सरकार, लघु उद्योग बैंक द्वारा अनुरोध किए जाने पर, उस बैंक द्वारा जारी किए गए बांडों और डिबेंचरों की मूलधन की चुकौती और ब्याज के भुगतान की गारंटी दे सकती है, ऐसी दर पर जो उस सरकार द्वारा निर्धारित की जाए।
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