SICLD Act 33अध्याय VIII · Appellate Board
धारा 33 · अपीलीय बोर्ड की संरचना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) अपीलीय बोर्ड में एक अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और ऐसे अन्य सदस्य होंगे जिन्हें केंद्र सरकार उचित समझे और इस अधिनियम के अन्य प्रावधानों के अधीन रहते हुए, अपीलीय बोर्ड के अधिकार क्षेत्र, शक्तियां और प्राधिकार का प्रयोग उसकी पीठ द्वारा किया जा सकता है।
(2) इस अधिनियम के अन्य प्रावधानों के अधीन रहते हुए, एक पीठ में एक न्यायिक सदस्य और एक तकनीकी सदस्य होंगे और वह ऐसे स्थान पर बैठेगी जैसा कि केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट करे।
(3) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, अध्यक्ष--
(क) वह जिस पीठ में नियुक्त किया गया है, उस पीठ के न्यायिक सदस्य या तकनीकी सदस्य के कार्यों का निर्वहन करने के अतिरिक्त, किसी अन्य पीठ के न्यायिक सदस्य या, जैसा भी मामला हो, तकनीकी सदस्य के कार्यों का निर्वहन कर सकता है;
(ख) किसी सदस्य को एक पीठ से दूसरी पीठ में स्थानांतरित कर सकता है;
(ग) किसी एक पीठ में नियुक्त उपाध्यक्ष, न्यायिक सदस्य या तकनीकी सदस्य को किसी अन्य पीठ के न्यायिक सदस्य या तकनीकी सदस्य के कार्यों का निर्वहन करने के लिए भी अधिकृत कर सकता है।
(4) जहाँ कोई पीठें गठित की जाती हैं, वहाँ केंद्र सरकार समय-समय पर अधिसूचना द्वारा अपीलीय बोर्ड के कामकाज के वितरण के संबंध में पीठों के बीच प्रावधान कर सकती है और उन मामलों को निर्दिष्ट कर सकती है जिन्हें प्रत्येक पीठ द्वारा निपटाया जा सकता है।
स्पष्टीकरण .-- संदेह दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि "मामला" अभिव्यक्ति में धारा 40 या धारा 42 के तहत आवेदन या अपील शामिल है।
(5) यदि किसी पीठ के सदस्य किसी मुद्दे पर मतभेद रखते हैं, तो वे उन मुद्दों को बताएंगे जिन पर उनका मतभेद है और अध्यक्ष को मामला भेजेंगे, जो या तो स्वयं उस मुद्दे पर सुनवाई करेंगे या उस मुद्दे पर एक या अधिक अन्य सदस्यों द्वारा सुनवाई के लिए मामला भेजेंगे और ऐसे मुद्दे पर सुनवाई करने वाले सदस्यों के बहुमत की राय के अनुसार निर्णय लिया जाएगा, जिसमें वे सदस्य भी शामिल हैं जिन्होंने पहले सुनवाई की थी।
(2) इस अधिनियम के अन्य प्रावधानों के अधीन रहते हुए, एक पीठ में एक न्यायिक सदस्य और एक तकनीकी सदस्य होंगे और वह ऐसे स्थान पर बैठेगी जैसा कि केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट करे।
(3) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, अध्यक्ष--
(क) वह जिस पीठ में नियुक्त किया गया है, उस पीठ के न्यायिक सदस्य या तकनीकी सदस्य के कार्यों का निर्वहन करने के अतिरिक्त, किसी अन्य पीठ के न्यायिक सदस्य या, जैसा भी मामला हो, तकनीकी सदस्य के कार्यों का निर्वहन कर सकता है;
(ख) किसी सदस्य को एक पीठ से दूसरी पीठ में स्थानांतरित कर सकता है;
(ग) किसी एक पीठ में नियुक्त उपाध्यक्ष, न्यायिक सदस्य या तकनीकी सदस्य को किसी अन्य पीठ के न्यायिक सदस्य या तकनीकी सदस्य के कार्यों का निर्वहन करने के लिए भी अधिकृत कर सकता है।
(4) जहाँ कोई पीठें गठित की जाती हैं, वहाँ केंद्र सरकार समय-समय पर अधिसूचना द्वारा अपीलीय बोर्ड के कामकाज के वितरण के संबंध में पीठों के बीच प्रावधान कर सकती है और उन मामलों को निर्दिष्ट कर सकती है जिन्हें प्रत्येक पीठ द्वारा निपटाया जा सकता है।
स्पष्टीकरण .-- संदेह दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि "मामला" अभिव्यक्ति में धारा 40 या धारा 42 के तहत आवेदन या अपील शामिल है।
(5) यदि किसी पीठ के सदस्य किसी मुद्दे पर मतभेद रखते हैं, तो वे उन मुद्दों को बताएंगे जिन पर उनका मतभेद है और अध्यक्ष को मामला भेजेंगे, जो या तो स्वयं उस मुद्दे पर सुनवाई करेंगे या उस मुद्दे पर एक या अधिक अन्य सदस्यों द्वारा सुनवाई के लिए मामला भेजेंगे और ऐसे मुद्दे पर सुनवाई करने वाले सदस्यों के बहुमत की राय के अनुसार निर्णय लिया जाएगा, जिसमें वे सदस्य भी शामिल हैं जिन्होंने पहले सुनवाई की थी।
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