RLBCAU Act 9
धारा 9 · आगंतुक।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) भारत के राष्ट्रपति विश्वविद्यालय के विजिटर होंगे।
(2) उपधारा (3) और (4) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, आगंतुक को विश्वविद्यालय, उसके भवनों, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों, संग्रहालयों, कार्यशालाओं और उपकरणों, तथा किसी भी संस्था या महाविद्यालय, और विश्वविद्यालय द्वारा संचालित या किए गए परीक्षा, शिक्षण और अन्य कार्यों का निरीक्षण कराने का अधिकार होगा, और विश्वविद्यालय के प्रशासन और वित्त से संबंधित किसी भी मामले के संबंध में इसी प्रकार जांच कराने का भी अधिकार होगा।
(3) आगंतुक प्रत्येक मामले में विश्वविद्यालय को निरीक्षण या जांच कराने के अपने इरादे की सूचना देगा और विश्वविद्यालय को ऐसी सूचना प्राप्त होने पर, सूचना प्राप्त होने की तिथि से तीस दिनों के भीतर या आगंतुक द्वारा निर्धारित किसी अन्य अवधि के भीतर, उसे ऐसे अभ्यावेदन देने का अधिकार होगा जिन्हें वह आवश्यक समझे।
(4) विश्वविद्यालय द्वारा दिए गए अभ्यावेदनों पर विचार करने के बाद, यदि कोई हो, तो आगंतुक उपधारा (2) में निर्दिष्ट निरीक्षण या जांच करवा सकता है।
(5) जहां आगंतुक द्वारा निरीक्षण या जांच कराई गई हो, वहां विश्वविद्यालय एक प्रतिनिधि नियुक्त करने का हकदार होगा जिसे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने और ऐसे निरीक्षण या जांच पर सुनवाई का अधिकार होगा।
(6) आगंतुक ऐसे निरीक्षण या जांच के परिणामों के संदर्भ में कुलपति को संबोधित कर सकता है, साथ ही उस पर की जाने वाली कार्रवाई के संबंध में अपने विचार और सलाह भी दे सकता है। आगंतुक द्वारा दिए गए संबोधन की प्राप्ति पर, कुलपति तुरंत बोर्ड को निरीक्षण या जांच के परिणाम और आगंतुक के विचार तथा उस पर की जाने वाली कार्रवाई के संबंध में उसके द्वारा दी गई सलाह सूचित करेगा।
(7) बोर्ड, कुलपति के माध्यम से आगंतुक को ऐसी कार्रवाई, यदि कोई हो, सूचित करेगा जो वह निरीक्षण या जांच के परिणामों के आधार पर करने का प्रस्ताव करता है या उसके द्वारा की गई है।
(8) यदि बोर्ड उचित समय के भीतर आगंतुक की संतुष्टि के अनुसार कार्रवाई नहीं करता है, तो आगंतुक बोर्ड द्वारा दी गई किसी भी व्याख्या या किए गए अभ्यावेदन पर विचार करने के बाद, ऐसे निर्देश जारी कर सकता है जैसा वह उचित समझे और बोर्ड ऐसे निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य होगा।
(9) इस धारा के पूर्वगामी प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, आगंतुक लिखित आदेश द्वारा विश्वविद्यालय की किसी भी कार्यवाही को रद्द कर सकता है जो इस अधिनियम, विधियों या अध्यादेशों के अनुरूप नहीं है:
बशर्ते कि ऐसा कोई आदेश देने से पहले, वह विश्वविद्यालय से कारण बताने को कहेगा कि ऐसा आदेश क्यों नहीं दिया जाना चाहिए और यदि उचित समय के भीतर कोई कारण बताया जाता है, तो वह उस पर विचार करेगा।
(10) आगंतुक को ऐसी अन्य शक्तियाँ प्राप्त होंगी जो विधानों द्वारा निर्धारित की जा सकती हैं।
(2) उपधारा (3) और (4) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, आगंतुक को विश्वविद्यालय, उसके भवनों, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों, संग्रहालयों, कार्यशालाओं और उपकरणों, तथा किसी भी संस्था या महाविद्यालय, और विश्वविद्यालय द्वारा संचालित या किए गए परीक्षा, शिक्षण और अन्य कार्यों का निरीक्षण कराने का अधिकार होगा, और विश्वविद्यालय के प्रशासन और वित्त से संबंधित किसी भी मामले के संबंध में इसी प्रकार जांच कराने का भी अधिकार होगा।
(3) आगंतुक प्रत्येक मामले में विश्वविद्यालय को निरीक्षण या जांच कराने के अपने इरादे की सूचना देगा और विश्वविद्यालय को ऐसी सूचना प्राप्त होने पर, सूचना प्राप्त होने की तिथि से तीस दिनों के भीतर या आगंतुक द्वारा निर्धारित किसी अन्य अवधि के भीतर, उसे ऐसे अभ्यावेदन देने का अधिकार होगा जिन्हें वह आवश्यक समझे।
(4) विश्वविद्यालय द्वारा दिए गए अभ्यावेदनों पर विचार करने के बाद, यदि कोई हो, तो आगंतुक उपधारा (2) में निर्दिष्ट निरीक्षण या जांच करवा सकता है।
(5) जहां आगंतुक द्वारा निरीक्षण या जांच कराई गई हो, वहां विश्वविद्यालय एक प्रतिनिधि नियुक्त करने का हकदार होगा जिसे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने और ऐसे निरीक्षण या जांच पर सुनवाई का अधिकार होगा।
(6) आगंतुक ऐसे निरीक्षण या जांच के परिणामों के संदर्भ में कुलपति को संबोधित कर सकता है, साथ ही उस पर की जाने वाली कार्रवाई के संबंध में अपने विचार और सलाह भी दे सकता है। आगंतुक द्वारा दिए गए संबोधन की प्राप्ति पर, कुलपति तुरंत बोर्ड को निरीक्षण या जांच के परिणाम और आगंतुक के विचार तथा उस पर की जाने वाली कार्रवाई के संबंध में उसके द्वारा दी गई सलाह सूचित करेगा।
(7) बोर्ड, कुलपति के माध्यम से आगंतुक को ऐसी कार्रवाई, यदि कोई हो, सूचित करेगा जो वह निरीक्षण या जांच के परिणामों के आधार पर करने का प्रस्ताव करता है या उसके द्वारा की गई है।
(8) यदि बोर्ड उचित समय के भीतर आगंतुक की संतुष्टि के अनुसार कार्रवाई नहीं करता है, तो आगंतुक बोर्ड द्वारा दी गई किसी भी व्याख्या या किए गए अभ्यावेदन पर विचार करने के बाद, ऐसे निर्देश जारी कर सकता है जैसा वह उचित समझे और बोर्ड ऐसे निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य होगा।
(9) इस धारा के पूर्वगामी प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, आगंतुक लिखित आदेश द्वारा विश्वविद्यालय की किसी भी कार्यवाही को रद्द कर सकता है जो इस अधिनियम, विधियों या अध्यादेशों के अनुरूप नहीं है:
बशर्ते कि ऐसा कोई आदेश देने से पहले, वह विश्वविद्यालय से कारण बताने को कहेगा कि ऐसा आदेश क्यों नहीं दिया जाना चाहिए और यदि उचित समय के भीतर कोई कारण बताया जाता है, तो वह उस पर विचार करेगा।
(10) आगंतुक को ऐसी अन्य शक्तियाँ प्राप्त होंगी जो विधानों द्वारा निर्धारित की जा सकती हैं।
इस धारा पर आपका निजी नोट
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