RLBCAU Act 12
धारा 12 · कुलपति।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) कुलपति की नियुक्ति विजिटर द्वारा ऐसे तरीके से की जाएगी जैसा कि विधानों द्वारा निर्धारित किया जा सकता है।
(2) कुलपति विश्वविद्यालय का प्रमुख कार्यकारी और शैक्षणिक अधिकारी होगा और विश्वविद्यालय के मामलों पर सामान्य पर्यवेक्षण और नियंत्रण रखेगा तथा विश्वविद्यालय के सभी अधिकारियों के निर्णयों को प्रभावी करेगा।
(3) यदि कुलपति को किसी मामले पर तत्काल कार्रवाई आवश्यक लगे, तो वह इस अधिनियम द्वारा या इसके अंतर्गत विश्वविद्यालय के किसी प्राधिकारी को प्रदत्त किसी भी शक्ति का प्रयोग कर सकता है और उस प्राधिकारी को उस मामले पर उसके द्वारा की गई कार्रवाई की रिपोर्ट देगा।
बशर्ते कि यदि संबंधित प्राधिकारी की राय है कि ऐसी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए थी, तो वह मामले को आगंतुक के पास भेज सकता है, जिसका निर्णय इस संबंध में अंतिम होगा:
इसके अलावा, विश्वविद्यालय की सेवा में कार्यरत कोई भी व्यक्ति जो इस उपधारा के अंतर्गत कुलपति द्वारा की गई कार्रवाई से व्यथित है, उसे ऐसी कार्रवाई पर निर्णय की सूचना प्राप्त होने की तिथि से तीन महीने के भीतर बोर्ड के समक्ष अपील करने का अधिकार होगा और इसके बाद बोर्ड कुलपति द्वारा की गई कार्रवाई की पुष्टि, संशोधन या उसे रद्द कर सकता है।
(4) यदि कुलपति को यह राय हो कि विश्वविद्यालय के किसी प्राधिकारी का कोई निर्णय इस अधिनियम, क़ानूनों या अध्यादेशों के प्रावधानों द्वारा प्रदत्त शक्तियों से परे है या लिया गया कोई निर्णय विश्वविद्यालय के हित में नहीं है, तो वह संबंधित प्राधिकारी से ऐसे निर्णय के साठ दिनों के भीतर अपने निर्णय की समीक्षा करने के लिए कह सकता है और यदि प्राधिकारी पूर्ण या आंशिक रूप से निर्णय की समीक्षा करने से इनकार करता है या उक्त साठ दिनों की अवधि के भीतर कोई निर्णय नहीं लेता है, तो मामला आगंतुक को भेजा जाएगा जिसका निर्णय इस पर अंतिम होगा।
(5) कुलपति ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करेगा और ऐसे अन्य कर्तव्यों का पालन करेगा जैसा कि क़ानूनों या अध्यादेशों द्वारा निर्धारित किया जा सकता है।
(2) कुलपति विश्वविद्यालय का प्रमुख कार्यकारी और शैक्षणिक अधिकारी होगा और विश्वविद्यालय के मामलों पर सामान्य पर्यवेक्षण और नियंत्रण रखेगा तथा विश्वविद्यालय के सभी अधिकारियों के निर्णयों को प्रभावी करेगा।
(3) यदि कुलपति को किसी मामले पर तत्काल कार्रवाई आवश्यक लगे, तो वह इस अधिनियम द्वारा या इसके अंतर्गत विश्वविद्यालय के किसी प्राधिकारी को प्रदत्त किसी भी शक्ति का प्रयोग कर सकता है और उस प्राधिकारी को उस मामले पर उसके द्वारा की गई कार्रवाई की रिपोर्ट देगा।
बशर्ते कि यदि संबंधित प्राधिकारी की राय है कि ऐसी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए थी, तो वह मामले को आगंतुक के पास भेज सकता है, जिसका निर्णय इस संबंध में अंतिम होगा:
इसके अलावा, विश्वविद्यालय की सेवा में कार्यरत कोई भी व्यक्ति जो इस उपधारा के अंतर्गत कुलपति द्वारा की गई कार्रवाई से व्यथित है, उसे ऐसी कार्रवाई पर निर्णय की सूचना प्राप्त होने की तिथि से तीन महीने के भीतर बोर्ड के समक्ष अपील करने का अधिकार होगा और इसके बाद बोर्ड कुलपति द्वारा की गई कार्रवाई की पुष्टि, संशोधन या उसे रद्द कर सकता है।
(4) यदि कुलपति को यह राय हो कि विश्वविद्यालय के किसी प्राधिकारी का कोई निर्णय इस अधिनियम, क़ानूनों या अध्यादेशों के प्रावधानों द्वारा प्रदत्त शक्तियों से परे है या लिया गया कोई निर्णय विश्वविद्यालय के हित में नहीं है, तो वह संबंधित प्राधिकारी से ऐसे निर्णय के साठ दिनों के भीतर अपने निर्णय की समीक्षा करने के लिए कह सकता है और यदि प्राधिकारी पूर्ण या आंशिक रूप से निर्णय की समीक्षा करने से इनकार करता है या उक्त साठ दिनों की अवधि के भीतर कोई निर्णय नहीं लेता है, तो मामला आगंतुक को भेजा जाएगा जिसका निर्णय इस पर अंतिम होगा।
(5) कुलपति ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करेगा और ऐसे अन्य कर्तव्यों का पालन करेगा जैसा कि क़ानूनों या अध्यादेशों द्वारा निर्धारित किया जा सकता है।
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