CIC Act 37अध्याय VIII · Miscellaneous
धारा 37 · रिजर्व बैंक द्वारा नियम बनाने की शक्ति अनुसूची।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) रिजर्व बैंक इस अधिनियम के प्रयोजनों को पूरा करने के लिए इस अधिनियम और इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के प्रावधानों के अनुरूप विनियम बना सकता है।
(2) विशेष रूप से, और पूर्वोक्त शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित सभी या किसी भी मामले के लिए प्रावधान कर सकते हैं, अर्थात्:--
(क) वे व्यक्ति या संस्थाएँ जिन्हें धारा 2 के खंड (एल) के अधीन निर्दिष्ट उपयोगकर्ता के रूप में निर्दिष्ट किया जा सकता है;
(ख) धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन आवेदन करने का प्रपत्र तथा उस उपधारा के अधीन आवेदन दाखिल करने का तरीका;
(ग) व्यवसाय का कोई अन्य रूप जिसमें क्रेडिट सूचना कंपनी धारा 14 की उपधारा (1) के खंड (ई) के अधीन संलग्न हो सकती है;
(घ) सूचना एकत्र करने और उपलब्ध कराने के लिए नोटिस का प्रपत्र, उससे संबंधित प्रक्रिया और वे उद्देश्य जिनके लिए धारा 17 की उपधारा (1) और (2) के तहत ऋण सूचना प्रदान की जा सकती है;
(ई) क्रेडिट सूचना से संबंधित सिद्धांत और प्रक्रियाएं जो धारा 20 के खंड (एफ) के तहत निर्दिष्ट की जा सकती हैं;
(f) धारा 21 की उपधारा (2) के तहत क्रेडिट सूचना की प्रति प्राप्त करने के लिए भुगतान की जाने वाली राशि;
(जी) धारा 27 के तहत देय शुल्कों की अधिकतम राशि।
(3) रिजर्व बैंक द्वारा बनाए जाने के तुरंत बाद प्रत्येक नियम को केंद्र सरकार को भेजा जाएगा और वह सरकार संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, उसकी एक प्रति तीस दिनों की कुल अवधि के लिए रखेगी, जो एक सत्र या दो या दो से अधिक लगातार सत्रों में शामिल हो सकती है, और यदि उपर्युक्त सत्र या लगातार सत्रों के तुरंत बाद वाले सत्र की समाप्ति से पहले, दोनों सदन नियम में कोई संशोधन करने पर सहमत हों, या दोनों सदन इस बात पर सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए, तो नियम इसके बाद केवल ऐसे संशोधित रूप में प्रभावी होगा या अप्रभावी होगा, जैसा भी मामला हो; हालांकि, ऐसा कोई भी संशोधन या निरस्तीकरण उस नियम के तहत पहले किए गए किसी भी कार्य की वैधता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
(2) विशेष रूप से, और पूर्वोक्त शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित सभी या किसी भी मामले के लिए प्रावधान कर सकते हैं, अर्थात्:--
(क) वे व्यक्ति या संस्थाएँ जिन्हें धारा 2 के खंड (एल) के अधीन निर्दिष्ट उपयोगकर्ता के रूप में निर्दिष्ट किया जा सकता है;
(ख) धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन आवेदन करने का प्रपत्र तथा उस उपधारा के अधीन आवेदन दाखिल करने का तरीका;
(ग) व्यवसाय का कोई अन्य रूप जिसमें क्रेडिट सूचना कंपनी धारा 14 की उपधारा (1) के खंड (ई) के अधीन संलग्न हो सकती है;
(घ) सूचना एकत्र करने और उपलब्ध कराने के लिए नोटिस का प्रपत्र, उससे संबंधित प्रक्रिया और वे उद्देश्य जिनके लिए धारा 17 की उपधारा (1) और (2) के तहत ऋण सूचना प्रदान की जा सकती है;
(ई) क्रेडिट सूचना से संबंधित सिद्धांत और प्रक्रियाएं जो धारा 20 के खंड (एफ) के तहत निर्दिष्ट की जा सकती हैं;
(f) धारा 21 की उपधारा (2) के तहत क्रेडिट सूचना की प्रति प्राप्त करने के लिए भुगतान की जाने वाली राशि;
(जी) धारा 27 के तहत देय शुल्कों की अधिकतम राशि।
(3) रिजर्व बैंक द्वारा बनाए जाने के तुरंत बाद प्रत्येक नियम को केंद्र सरकार को भेजा जाएगा और वह सरकार संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, उसकी एक प्रति तीस दिनों की कुल अवधि के लिए रखेगी, जो एक सत्र या दो या दो से अधिक लगातार सत्रों में शामिल हो सकती है, और यदि उपर्युक्त सत्र या लगातार सत्रों के तुरंत बाद वाले सत्र की समाप्ति से पहले, दोनों सदन नियम में कोई संशोधन करने पर सहमत हों, या दोनों सदन इस बात पर सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए, तो नियम इसके बाद केवल ऐसे संशोधित रूप में प्रभावी होगा या अप्रभावी होगा, जैसा भी मामला हो; हालांकि, ऐसा कोई भी संशोधन या निरस्तीकरण उस नियम के तहत पहले किए गए किसी भी कार्य की वैधता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
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