CIC Act 36अध्याय VIII · Miscellaneous
धारा 36 · नियम बनाने की शक्ति।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) केंद्र सरकार रिजर्व बैंक से परामर्श करने के बाद, आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने के लिए नियम बना सकती है।
(2) विशेष रूप से, और पूर्वोक्त शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या इनमें से किसी भी मामले के लिए प्रावधान कर सकते हैं, अर्थात्:--
(क) वह प्राधिकरण या न्यायाधिकरण जिसे धारा 7 की उपधारा (1) के अधीन नामित किया जा सकता है;
(ख) धारा 19 के तहत प्रत्येक क्रेडिट सूचना कंपनी या क्रेडिट संस्थान और निर्दिष्ट उपयोगकर्ता द्वारा डेटा की सटीकता, पूर्णता सुनिश्चित करने और डेटा को किसी भी हानि या अनधिकृत पहुंच या उपयोग या प्रकटीकरण से बचाने के लिए उठाए जाने वाले कदम;
(ग) धारा 29 की उपधारा (2) के अधीन निष्ठा और गोपनीयता की घोषणा किस प्रपत्र में की जाएगी;
(घ) कोई अन्य मामला जिसे निर्धारित करना आवश्यक है, या निर्धारित किया जा सकता है।
(3) इस अधिनियम के अधीन केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के तुरंत बाद, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिनों की अवधि के लिए रखा जाएगा, जो एक सत्र या दो या दो से अधिक लगातार सत्रों में समाहित हो सकती है, और यदि उपर्युक्त सत्र या लगातार सत्रों के तुरंत बाद वाले सत्र की समाप्ति से पहले, दोनों सदन नियम में कोई संशोधन करने पर सहमत हों या दोनों सदन इस बात पर सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए, तो नियम इसके बाद केवल ऐसे संशोधित रूप में प्रभावी होगा या अप्रभावी होगा, जैसा भी मामला हो; यद्यपि, ऐसा कोई भी संशोधन या निरस्तीकरण उस नियम के अधीन पहले किए गए किसी भी कार्य की वैधता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
(2) विशेष रूप से, और पूर्वोक्त शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या इनमें से किसी भी मामले के लिए प्रावधान कर सकते हैं, अर्थात्:--
(क) वह प्राधिकरण या न्यायाधिकरण जिसे धारा 7 की उपधारा (1) के अधीन नामित किया जा सकता है;
(ख) धारा 19 के तहत प्रत्येक क्रेडिट सूचना कंपनी या क्रेडिट संस्थान और निर्दिष्ट उपयोगकर्ता द्वारा डेटा की सटीकता, पूर्णता सुनिश्चित करने और डेटा को किसी भी हानि या अनधिकृत पहुंच या उपयोग या प्रकटीकरण से बचाने के लिए उठाए जाने वाले कदम;
(ग) धारा 29 की उपधारा (2) के अधीन निष्ठा और गोपनीयता की घोषणा किस प्रपत्र में की जाएगी;
(घ) कोई अन्य मामला जिसे निर्धारित करना आवश्यक है, या निर्धारित किया जा सकता है।
(3) इस अधिनियम के अधीन केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के तुरंत बाद, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिनों की अवधि के लिए रखा जाएगा, जो एक सत्र या दो या दो से अधिक लगातार सत्रों में समाहित हो सकती है, और यदि उपर्युक्त सत्र या लगातार सत्रों के तुरंत बाद वाले सत्र की समाप्ति से पहले, दोनों सदन नियम में कोई संशोधन करने पर सहमत हों या दोनों सदन इस बात पर सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए, तो नियम इसके बाद केवल ऐसे संशोधित रूप में प्रभावी होगा या अप्रभावी होगा, जैसा भी मामला हो; यद्यपि, ऐसा कोई भी संशोधन या निरस्तीकरण उस नियम के अधीन पहले किए गए किसी भी कार्य की वैधता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
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