Gratuity Act 9अध्याय · Sections
धारा 9 · शास्तियां
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जो कोई, किसी ऐसे संदाय से बचने के प्रयोजनार्थ जो उसे इस अधिनियम के अधीन करना है अथवा किसी अन्य व्यक्ति को ऐसा संदाय करने से बचने के लिए समर्थ बनाने के प्रयोजनार्थ, जानबूझकर कोई मिथ्या कथन अथवा मिथ्या व्यपदेशन करेगा अथवा कराएगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, अथवा जुर्माने से, जो [दस हजार रुपए] तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दण्डनीय होगा ।
(2) वह नियोजक जो इस अधिनियम के उपबन्धों अथवा उसके अधीन बनाए गए किसी नियम अथवा आदेश का उल्लंघन करेगा, अथवा उसके अनुपालन में व्यतिक्रम करेगा वह कारावास से, 1[जिसकी अवधि तीन मास से कम की नहीं होगी किन्तु जो एक वर्ष तक की हो सकेगी, अथवा जुर्माने से, जो दस हजार रुपए से कम का नहीं होगा किन्तु जो बीस हजार रुपए तक का हो सकेगा अथवा दोनों सेट दण्डनीय होगा :
परन्तु जहां अपराध इस अधिनियम के अधीन संदेय उपदान के असंदाय से संबंधित है वहां नियोजक कारावास से, जिसकी अवधि 1[छह मास से कम की नहीं होगी किन्तु जो दो वर्ष तक की हो सकेगीट दण्डनीय होगा, सिवाय तब के जब अपराध का विचारण करने वाला न्यायालय, उन कारणों से, जो उसके द्वारा लेखबद्ध किए जाएंगे, इस राय का हो कि कम अवधि के कारावास से या जुर्माने के अधिरोपण से न्याय के उद्देश्यों की पूर्ति हो जाएगी ।
(2) वह नियोजक जो इस अधिनियम के उपबन्धों अथवा उसके अधीन बनाए गए किसी नियम अथवा आदेश का उल्लंघन करेगा, अथवा उसके अनुपालन में व्यतिक्रम करेगा वह कारावास से, 1[जिसकी अवधि तीन मास से कम की नहीं होगी किन्तु जो एक वर्ष तक की हो सकेगी, अथवा जुर्माने से, जो दस हजार रुपए से कम का नहीं होगा किन्तु जो बीस हजार रुपए तक का हो सकेगा अथवा दोनों सेट दण्डनीय होगा :
परन्तु जहां अपराध इस अधिनियम के अधीन संदेय उपदान के असंदाय से संबंधित है वहां नियोजक कारावास से, जिसकी अवधि 1[छह मास से कम की नहीं होगी किन्तु जो दो वर्ष तक की हो सकेगीट दण्डनीय होगा, सिवाय तब के जब अपराध का विचारण करने वाला न्यायालय, उन कारणों से, जो उसके द्वारा लेखबद्ध किए जाएंगे, इस राय का हो कि कम अवधि के कारावास से या जुर्माने के अधिरोपण से न्याय के उद्देश्यों की पूर्ति हो जाएगी ।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 2 वर्ष
- न्यूनतम दंड (विधिक)
- 3 माह
- जुर्माना
- ₹20,000
- संज्ञेय
- असंज्ञेय
- जमानतीय
- जमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- विचारण न्यायालय
- कोई भी मजिस्ट्रेट
- असंज्ञेय — पुलिस बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के जाँच नहीं कर सकती
- जमानतीय — जमानत आपका अधिकार है — थाने से भी मिल सकती है
इस धारा की अलग-अलग उपधाराओं में अलग दंड हैं; यहाँ अधिकतम दिखाया गया है।
प्रथम अनुसूची भाग II के नियम से निकाला गया — धारावार सूचीबद्ध नहीं
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