Gratuity Act 6अध्याय · Sections
धारा 6 · नामनिर्देशन
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) प्रत्येक कर्मचारी जिसने सेवा का एक वर्ष पूरा कर लिया है, ऐसे समय के भीतर, ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, धारा 4 की उपधारा (1) के द्वितीय परन्तुक के प्रयोजनार्थ नामनिर्देशन करेगा ।
(2) कर्मचारी अपने नामनिर्देशन में, इस अधिनियम के अधीन उसे संदेय उपदान की रकम, एक से अधिक नामनिर्देशिती के बीच वितरित कर सकेगा ।
(3) यदि नामनिर्देशन करने के समय कर्मचारी का कोई कुटुम्ब है तो नामनिर्देशन कुटुम्ब के एक अथवा अधिक सदस्यों के पक्ष में किया जाएगा, तथा ऐसे कर्मचारी द्वारा किसी ऐसे व्यक्ति के पक्ष में किया गया नामनिर्देशन, जो उसके कुटुम्ब का सदस्य नहीं है, शून्य होगा ।
(4) यदि नामनिर्देशन करने के समय कर्मचारी का कोई कुटुम्ब नहीं है तो नामनिर्देशन किसी भी व्यक्ति अथवा व्यक्तियों के पक्ष में किया जा सकेगा किन्तु यदि तत्पश्चात् कर्मचारी का कोई कुटुम्ब हो जाता है, तो ऐसा नामनिर्देशन तत्काल अविधिमान्य हो जाएगा और कर्मचारी, उतने समय के भीतर, जो विहित किया जाए, अपने कुटुम्ब के एक अथवा अधिक सदस्यों के पक्ष में नया नामनिर्देशन करेगा ।
(5) उपधारा (3) तथा (4) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, नामनिर्देशन का उपांतरण, कर्मचारी द्वारा किसी भी समय, नियोजक को ऐसा करने के अपने आशय की लिखित सूचना, ऐसे प्ररूप में और रीति से, जो विहित की जाए, देने के पश्चात् किया जा सकेगा ।
(6) यदि नामनिर्देशिती की मृत्यु कर्मचारी से पहले हो जाती है तो नामनिर्देशिती का हित कर्मचारी को प्रतिवर्तित हो जाएगा और कर्मचारी ऐसे हित के सम्बन्ध में, विहित प्ररूप में, नया नामनिर्देशन करेगा ।
(7) यथास्थिति, प्रत्येक नामनिर्देशन, नया नामनिर्देशन अथवा नामनिर्देशन में परिवर्तन, कर्मचारी द्वारा अपने नियोजक को भेजा जाएगा जो उसे अपनी सुरक्षित अभिरक्षा में रखेगा ।
(2) कर्मचारी अपने नामनिर्देशन में, इस अधिनियम के अधीन उसे संदेय उपदान की रकम, एक से अधिक नामनिर्देशिती के बीच वितरित कर सकेगा ।
(3) यदि नामनिर्देशन करने के समय कर्मचारी का कोई कुटुम्ब है तो नामनिर्देशन कुटुम्ब के एक अथवा अधिक सदस्यों के पक्ष में किया जाएगा, तथा ऐसे कर्मचारी द्वारा किसी ऐसे व्यक्ति के पक्ष में किया गया नामनिर्देशन, जो उसके कुटुम्ब का सदस्य नहीं है, शून्य होगा ।
(4) यदि नामनिर्देशन करने के समय कर्मचारी का कोई कुटुम्ब नहीं है तो नामनिर्देशन किसी भी व्यक्ति अथवा व्यक्तियों के पक्ष में किया जा सकेगा किन्तु यदि तत्पश्चात् कर्मचारी का कोई कुटुम्ब हो जाता है, तो ऐसा नामनिर्देशन तत्काल अविधिमान्य हो जाएगा और कर्मचारी, उतने समय के भीतर, जो विहित किया जाए, अपने कुटुम्ब के एक अथवा अधिक सदस्यों के पक्ष में नया नामनिर्देशन करेगा ।
(5) उपधारा (3) तथा (4) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, नामनिर्देशन का उपांतरण, कर्मचारी द्वारा किसी भी समय, नियोजक को ऐसा करने के अपने आशय की लिखित सूचना, ऐसे प्ररूप में और रीति से, जो विहित की जाए, देने के पश्चात् किया जा सकेगा ।
(6) यदि नामनिर्देशिती की मृत्यु कर्मचारी से पहले हो जाती है तो नामनिर्देशिती का हित कर्मचारी को प्रतिवर्तित हो जाएगा और कर्मचारी ऐसे हित के सम्बन्ध में, विहित प्ररूप में, नया नामनिर्देशन करेगा ।
(7) यथास्थिति, प्रत्येक नामनिर्देशन, नया नामनिर्देशन अथवा नामनिर्देशन में परिवर्तन, कर्मचारी द्वारा अपने नियोजक को भेजा जाएगा जो उसे अपनी सुरक्षित अभिरक्षा में रखेगा ।
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