Gratuity Act 10अध्याय · Sections
धारा 10 · नियोजक को कतिपय मामलों में दायित्व से छूट
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
जहां कोई नियोजक इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय अपराध से आरोपित है वहां वह, उसके द्वारा सम्यक् रूप से किए गए परिवाद पर और परिवादी को ऐसा करने के अपने आशय की कम से कम तीन पूर्ण दिनों की लिखित सूचना देने पर, इस बात का हकदार होगा कि किसी अन्य ऐसे व्यक्ति को जिसे वह वास्तविक अपराधी के रूप में आरोपित करता है, उस आरोप की सुनवाई के लिए नियत किए गए समय पर, न्यायालय के समक्ष लाया जाए ; और यदि अपराध का किया जाना साबित हो जाने के पश्चात्, नियोजक न्यायालय को समाधानप्रद रूप में यह साबित कर देता है-
(क) कि उसने इस अधिनियम का निष्पादन कराने के लिए सम्यक् तत्परता बरती है, तथा
(ख) कि उक्त अन्य व्यक्ति ने उसकी जानकारी, सहमति या मौनानुकूलता के बिना अपराध किया है,
तो वह अन्य व्यक्ति उस अपराध के लिए दोषसिद्ध किया जाएगा और उसी प्रकार के दण्ड का भागी होगा मानो वह नियोजक हो, और नियोजक और ऐसे अपराध की बाबत इस अधिनियम के अधीन हर दायित्व से उन्मोचित हो जाएगा :
परन्तु यथापूर्वोक्त बात को साबित करने में नियोजक की शपथ पर परीक्षा की जा सकेगी और उसके तथा किसी ऐसे साक्षी के, जिसे वह अपने समर्थन में बुलाता है, साक्ष्य की, उस व्यक्ति की ओर से जिसे वह वास्तविक अपराधी के रूप में आरोपित करता है तथा अभियोजक द्वारा, प्रतिपरीक्षा की जाएगी :
परन्तु यह और कि यदि नियोजक द्वारा वास्तविक अपराधी के रूप में आरोपित व्यक्ति आरोप की सुनवाई के लिए नियत किए गए समय पर न्यायालय के समक्ष नहीं लाया जा सकता है तो न्यायालय सुनवाई को, समय-समय पर, तीन मास से अनधिक की कालावधि के लिए, स्थगित कर देगा और यदि वास्तविक अपराधी के रूप में आरोपित व्यक्ति उक्त कालावधि की समाप्ति तक भी न्यायालय के समक्ष नहीं लाया जा सकता है तो न्यायालय नियोजक के विरुद्ध आरोप की सुनवाई के लिए अग्रसर होगा और, यदि अपराध साबित हो जाए तो, नियोजक को दोषसिद्ध करेगा ।
(क) कि उसने इस अधिनियम का निष्पादन कराने के लिए सम्यक् तत्परता बरती है, तथा
(ख) कि उक्त अन्य व्यक्ति ने उसकी जानकारी, सहमति या मौनानुकूलता के बिना अपराध किया है,
तो वह अन्य व्यक्ति उस अपराध के लिए दोषसिद्ध किया जाएगा और उसी प्रकार के दण्ड का भागी होगा मानो वह नियोजक हो, और नियोजक और ऐसे अपराध की बाबत इस अधिनियम के अधीन हर दायित्व से उन्मोचित हो जाएगा :
परन्तु यथापूर्वोक्त बात को साबित करने में नियोजक की शपथ पर परीक्षा की जा सकेगी और उसके तथा किसी ऐसे साक्षी के, जिसे वह अपने समर्थन में बुलाता है, साक्ष्य की, उस व्यक्ति की ओर से जिसे वह वास्तविक अपराधी के रूप में आरोपित करता है तथा अभियोजक द्वारा, प्रतिपरीक्षा की जाएगी :
परन्तु यह और कि यदि नियोजक द्वारा वास्तविक अपराधी के रूप में आरोपित व्यक्ति आरोप की सुनवाई के लिए नियत किए गए समय पर न्यायालय के समक्ष नहीं लाया जा सकता है तो न्यायालय सुनवाई को, समय-समय पर, तीन मास से अनधिक की कालावधि के लिए, स्थगित कर देगा और यदि वास्तविक अपराधी के रूप में आरोपित व्यक्ति उक्त कालावधि की समाप्ति तक भी न्यायालय के समक्ष नहीं लाया जा सकता है तो न्यायालय नियोजक के विरुद्ध आरोप की सुनवाई के लिए अग्रसर होगा और, यदि अपराध साबित हो जाए तो, नियोजक को दोषसिद्ध करेगा ।
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