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22 प्रविष्टियाँ
धारा 28. वे दंडादेश जो उच्च न्यायालय और सेशन न्यायाधीश दे सकते हैं
28. वे दंडादेश जो उच्च न्यायालय और सेशन न्यायाधीश दे सकते हैं (1) उच्च न्यायालय विधि द्वारा प्राधिकृत कोई दंडादेश दे सकता है। (2) सेशन न्यायाधीश या अपर सेशन न्यायाधीश विधि द्वारा प्राधिकृत कोई दंडादेश दे सकता है; किन्तु ऐसे किसी न्यायाधीश द्वारा दिया गया मृत्यु दंडादेश उच्च न्यायालय द्वारा पुष्टि के अधीन होगा। (3)…
पूरा पढ़ेंउच्च न्यायालयों और सत्र न्यायाधीशों द्वारा दी जाने वाली सजाएँ।
(1) उच्च न्यायालय विधि द्वारा अधिकृत कोई भी सजा सुना सकता है। (2) सत्र न्यायाधीश या अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कानून द्वारा अधिकृत कोई भी सजा सुना सकता है; लेकिन ऐसे किसी न्यायाधीश द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजा उच्च न्यायालय द्वारा पुष्टि के अधीन होगी।
पूरा पढ़ेंधारा 34. शक्तियों का वापस लिया जाना
34. शक्तियों का वापस लिया जाना (1) यथास्थिति, उच्च न्यायालय या राज्य सरकार, इस संहिता के अधीन अपने द्वारा किसी व्यक्ति को प्रदान की गई या अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी द्वारा प्रदान की गई सभी या कोई शक्तियां वापस ले सकेगी। (2) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा प्रदान की गई कोई शक्तियां उस संबंधित…
पूरा पढ़ेंशक्तियों की वापसी।
(1) उच्च न्यायालय या राज्य सरकार, जैसा भी मामला हो, इस संहिता के अधीन किसी व्यक्ति या अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी को प्रदत्त सभी या कोई भी शक्तियाँ वापस ले सकती है। (2) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा प्रदत्त कोई भी शक्तियाँ उस संबंधित मजिस्ट्रेट द्वारा वापस ली जा सकती हैं, जिसने ऐसी शक्तियाँ प्रदत्त…
पूरा पढ़ेंशिकायत वापस लेना।
यदि इस अध्याय के अंतर्गत किसी मामले में अंतिम आदेश पारित होने से पहले किसी भी समय शिकायतकर्ता मजिस्ट्रेट को संतुष्ट कर दे कि उसके पास आरोपी के विरुद्ध शिकायत वापस लेने की अनुमति देने के लिए पर्याप्त आधार हैं, या यदि एक से अधिक आरोपी हों, तो उन सभी या उनमें से किसी के विरुद्ध शिकायत वापस लेने की अनुमति देने के लिए…
पूरा पढ़ेंशिकायत वापस लेना।
यदि कोई शिकायतकर्ता, इस अध्याय के अंतर्गत किसी मामले में अंतिम आदेश पारित होने से पहले किसी भी समय, मजिस्ट्रेट को संतुष्ट कर देता है कि उसके पास आरोपी के विरुद्ध शिकायत वापस लेने की अनुमति देने के लिए पर्याप्त आधार हैं, या यदि एक से अधिक आरोपी हैं, तो उन सभी या उनमें से किसी के विरुद्ध शिकायत वापस लेने की अनुमति देने…
पूरा पढ़ेंधारा 258. कुछ मामलों में कार्यवाही रोकने की शक्ति
258. कुछ मामलों में कार्यवाही रोकने की शक्ति किसी ऐसे समन-मामले में, जो परिवाद पर संस्थित मामले से भिन्न है, प्रथम वर्ग का मजिस्ट्रेट, या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की पूर्व मंजूरी से कोई अन्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, अपने द्वारा अभिलिखित किए जाने वाले कारणों से, कार्यवाही को किसी भी प्रक्रम पर कोई निर्णय सुनाए बिना रोक…
पूरा पढ़ेंकुछ मामलों में कार्यवाही रोकने का अधिकार।
शिकायत के अलावा किसी अन्य तरीके से दायर किए गए किसी भी समन मामले में, प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की पूर्व स्वीकृति से कोई अन्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, अपने द्वारा दर्ज किए जाने वाले कारणों के आधार पर, बिना कोई निर्णय सुनाए किसी भी स्तर पर कार्यवाही रोक सकता है, और यदि मुख्य गवाहों के साक्ष्य…
पूरा पढ़ेंधारा 259. समन-मामलों को वारंट-मामलों में संपरिवर्तित करने की न्यायालय की शक्ति
259. समन-मामलों को वारंट-मामलों में संपरिवर्तित करने की न्यायालय की शक्ति जब छह मास से अधिक की अवधि के कारावास से दंडनीय अपराध से संबंधित समन-मामले के विचारण के दौरान मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत होता है कि न्याय के हित में उस अपराध का विचारण वारंट-मामलों के विचारण के लिए उपबंधित प्रक्रिया के अनुसार किया जाना चाहिए, तब ऐसा…
पूरा पढ़ेंन्यायालय को समन मामलों को वारंट मामलों में परिवर्तित करने का अधिकार है।
जब किसी ऐसे अपराध से संबंधित समन मामले की सुनवाई के दौरान, जिसके लिए छह महीने से अधिक की कारावास की सजा का प्रावधान है, मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत होता है कि न्याय के हित में, अपराध की सुनवाई वारंट मामलों की सुनवाई की प्रक्रिया के अनुसार की जानी चाहिए, तो मजिस्ट्रेट इस संहिता में वारंट मामलों की सुनवाई के लिए निर्धारित…
पूरा पढ़ेंधारा 260. संक्षेपतः विचारण करने की शक्ति
260. संक्षेपतः विचारण करने की शक्ति (1) इस संहिता में किसी बात के होते हुए भी— (क) कोई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट; (ख) कोई महानगर मजिस्ट्रेट; (ग) प्रथम वर्ग का कोई ऐसा मजिस्ट्रेट, जो उच्च न्यायालय द्वारा इस निमित्त विशेष रूप से सशक्त किया गया है, यदि ठीक समझे तो निम्नलिखित सब या किन्हीं अपराधों का विचारण संक्षिप्त रूप…
पूरा पढ़ेंसंक्षेप में प्रयास करने की शक्ति।
(1) इस संहिता में किसी बात के होते हुए भी— (क) कोई भी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट; (ख) प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट, निम्नलिखित में से सभी या किसी भी अपराध का संक्षिप्त तरीके से निपटारा किया जाएगा:— (i) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 303 की उपधारा (2), धारा 305 या धारा 306 के अंतर्गत चोरी, जहाँ चोरी की गई संपत्ति का…
पूरा पढ़ेंधारा 261. द्वितीय वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा संक्षिप्त विचारण
261. द्वितीय वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा संक्षिप्त विचारण उच्च न्यायालय, द्वितीय वर्ग के मजिस्ट्रेट की शक्तियों से निहित किसी मजिस्ट्रेट को ऐसे किसी अपराध का, जो केवल जुर्माने से, या छह मास से अनधिक की अवधि के कारावास से, जुर्माने सहित या रहित, दंडनीय है, तथा ऐसे किसी अपराध के दुष्प्रेरण या उसे करने के प्रयत्न का,…
पूरा पढ़ेंद्वितीय श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा संक्षिप्त सुनवाई।
उच्च न्यायालय द्वितीय श्रेणी के मजिस्ट्रेट की शक्तियों से युक्त किसी भी मजिस्ट्रेट को ऐसे किसी भी अपराध की संक्षिप्त सुनवाई करने का अधिकार प्रदान कर सकता है जो केवल जुर्माने या छह महीने से अधिक की अवधि के कारावास (जुर्माने सहित या बिना जुर्माने के) से दंडनीय हो, और ऐसे किसी भी अपराध के लिए उकसाने या प्रयास करने के…
पूरा पढ़ेंधारा 262. संक्षिप्त विचारणों के लिए प्रक्रिया
262. संक्षिप्त विचारणों के लिए प्रक्रिया (1) इस अध्याय के अधीन विचारणों में, इसमें इसके पश्चात् वर्णित बातों के सिवाय, समन-मामलों के विचारण के लिए इस संहिता में विनिर्दिष्ट प्रक्रिया का अनुसरण किया जाएगा। (2) इस अध्याय के अधीन किसी दोषसिद्धि की दशा में तीन मास से अधिक की अवधि के कारावास का दंडादेश नहीं दिया जाएगा।
पूरा पढ़ेंसंक्षिप्त परीक्षणों की प्रक्रिया।
(1) इस अध्याय के अंतर्गत मुकदमों में, समन-मामलों के मुकदमे के लिए इस संहिता में निर्दिष्ट प्रक्रिया का पालन किया जाएगा, सिवाय इसके कि जैसा कि आगे उल्लेख किया गया है। (2) इस अध्याय के अंतर्गत किसी भी दोषसिद्धि के मामले में तीन महीने से अधिक की अवधि के लिए कारावास की सजा नहीं दी जाएगी।
पूरा पढ़ेंधारा 263. संक्षिप्त विचारणों में अभिलेख
263. संक्षिप्त विचारणों में अभिलेख संक्षेपतः विचारित प्रत्येक मामले में मजिस्ट्रेट, ऐसे प्ररूप में जैसा राज्य सरकार निदेश दे, निम्नलिखित विशिष्टियां प्रविष्ट करेगा, अर्थात्:— (क) मामले की क्रम संख्या; (ख) अपराध किए जाने की तारीख; (ग) रिपोर्ट या परिवाद की तारीख; (घ) परिवादी का नाम (यदि कोई हो); (ङ) अभियुक्त का नाम,…
पूरा पढ़ेंसंक्षिप्त परीक्षणों में रिकॉर्ड करें।
संक्षिप्त सुनवाई वाले प्रत्येक मामले में, मजिस्ट्रेट राज्य सरकार द्वारा निर्देशित प्रपत्र में निम्नलिखित विवरण दर्ज करेगा, अर्थात्:— (क) मामले का क्रमांक; (ख) अपराध किए जाने की तिथि; (ग) रिपोर्ट या शिकायत की तिथि; (घ) शिकायतकर्ता का नाम (यदि कोई हो); (ई) अभियुक्त का नाम, पिता का नाम और निवास स्थान; (f) शिकायत किया गया…
पूरा पढ़ेंधारा 264. संक्षेपतः विचारित मामलों में निर्णय
264. संक्षेपतः विचारित मामलों में निर्णय संक्षेपतः विचारित प्रत्येक ऐसे मामले में, जिसमें अभियुक्त दोषी होने का अभिवाक् नहीं करता है, मजिस्ट्रेट साक्ष्य का सार और ऐसा निर्णय अभिलिखित करेगा जिसमें निष्कर्ष के कारणों का संक्षिप्त कथन हो।
पूरा पढ़ेंसंक्षिप्त सुनवाई वाले मामलों में निर्णय।
प्रत्येक ऐसे मामले में जिसकी संक्षिप्त सुनवाई की जाती है और जिसमें आरोपी अपना अपराध स्वीकार नहीं करता है, मजिस्ट्रेट साक्ष्यों का सार और निर्णय दर्ज करेगा जिसमें निष्कर्ष के कारणों का संक्षिप्त विवरण होगा।
पूरा पढ़ेंधारा 265. अभिलेख और निर्णय की भाषा
265. अभिलेख और निर्णय की भाषा (1) प्रत्येक ऐसा अभिलेख और निर्णय न्यायालय की भाषा में लिखा जाएगा। (2) उच्च न्यायालय, अपराधों का संक्षेपतः विचारण करने के लिए सशक्त किसी मजिस्ट्रेट को यह प्राधिकार दे सकेगा कि वह पूर्वोक्त अभिलेख या निर्णय या दोनों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा इस निमित्त नियुक्त किसी अधिकारी के…
पूरा पढ़ेंरिकॉर्ड और निर्णय की भाषा।
(1) ऐसा प्रत्येक अभिलेख एवं निर्णय न्यायालय की भाषा में लिखा जाएगा। (2) उच्च न्यायालय किसी भी मजिस्ट्रेट को, जिसे अपराधों की संक्षिप्त सुनवाई करने का अधिकार प्राप्त है, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा इस संबंध में नियुक्त अधिकारी के माध्यम से उपर्युक्त अभिलेख या निर्णय या दोनों तैयार करने के लिए अधिकृत कर सकता है, और…
पूरा पढ़ेंधारा 265A. अध्याय का लागू होना
265A. अध्याय का लागू होना (1) यह अध्याय ऐसे अभियुक्त के संबंध में लागू होगा जिसके विरुद्ध— (क) पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी द्वारा धारा 173 के अधीन यह अभिकथन करते हुए रिपोर्ट भेजी गई है कि उसके द्वारा ऐसा अपराध किया गया प्रतीत होता है जो ऐसा अपराध नहीं है जिसके लिए तत्समय प्रवृत्त विधि के अधीन मृत्यु या आजीवन कारावास…
पूरा पढ़ेंअध्याय का अनुप्रयोग।
(1) यह अध्याय ऐसे अभियुक्त के संबंध में लागू होगा जिसके विरुद्ध— (क) पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी द्वारा धारा 193 के तहत रिपोर्ट भेजी गई है जिसमें यह आरोप लगाया गया है कि उसके द्वारा ऐसा अपराध किया गया प्रतीत होता है जो उस अपराध से इतर है जिसके लिए उस समय लागू कानून के तहत मृत्युदंड या आजीवन कारावास या सात वर्ष से…
पूरा पढ़ेंधारा 280. साक्षी के हाव-भाव के संबंध में टिप्पणियां
280. साक्षी के हाव-भाव के संबंध में टिप्पणियां जब कोई पीठासीन न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट किसी साक्षी का साक्ष्य अभिलिखित कर चुका है, तब वह ऐसी टिप्पणियां (यदि कोई हों) भी अभिलिखित करेगा, जिन्हें वह उस साक्षी के परीक्षा के दौरान के हाव-भाव के संबंध में तात्त्विक समझता है।
पूरा पढ़ेंगवाह के व्यवहार के संबंध में टिप्पणियाँ।
जब पीठासीन न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट किसी गवाह के साक्ष्य को दर्ज कर लेते हैं, तो वे उस गवाह के परीक्षा के दौरान के व्यवहार के संबंध में ऐसी टिप्पणियां (यदि कोई हो) भी दर्ज करेंगे जिन्हें वे महत्वपूर्ण समझते हैं।
पूरा पढ़ेंधारा 281. अभियुक्त की परीक्षा का अभिलेख
281. अभियुक्त की परीक्षा का अभिलेख (1) जब कभी अभियुक्त की परीक्षा किसी महानगर मजिस्ट्रेट द्वारा की जाती है, तब मजिस्ट्रेट अभियुक्त की परीक्षा के सार का ज्ञापन न्यायालय की भाषा में तैयार करेगा और ऐसा ज्ञापन मजिस्ट्रेट द्वारा हस्ताक्षरित किया जाएगा तथा अभिलेख का भाग होगा। (2) जब कभी अभियुक्त की परीक्षा महानगर मजिस्ट्रेट…
पूरा पढ़ेंअभियुक्त की जांच का रिकॉर्ड।
(1) जब भी किसी मजिस्ट्रेट या सत्र न्यायालय द्वारा अभियुक्त की परीक्षा ली जाती है, तो ऐसी संपूर्ण परीक्षा, जिसमें उससे पूछे गए प्रत्येक प्रश्न और उसके द्वारा दिए गए प्रत्येक उत्तर शामिल हैं, पीठासीन न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट द्वारा स्वयं पूर्ण रूप से दर्ज की जाएगी, या यदि वह शारीरिक या अन्य अक्षमता के कारण ऐसा करने में…
पूरा पढ़ेंधारा 282. दुभाषिए का सही-सही विवर्तन करने के लिए आबद्ध होना
282. दुभाषिए का सही-सही विवर्तन करने के लिए आबद्ध होना जब किसी दंड न्यायालय द्वारा किसी साक्ष्य या कथन के विवर्तन के लिए किसी दुभाषिए की सेवाएं अपेक्षित की जाती हैं, तब वह ऐसे साक्ष्य या कथन का सही विवर्तन बताने के लिए आबद्ध होगा।
पूरा पढ़ेंदुभाषिया सत्यपूर्वक अनुवाद करने के लिए बाध्य है।
जब किसी आपराधिक न्यायालय द्वारा किसी साक्ष्य या कथन की व्याख्या के लिए किसी दुभाषिए की सेवाओं की आवश्यकता होती है, तो वह ऐसे साक्ष्य या कथन की सही व्याख्या बताने के लिए बाध्य होगा।
पूरा पढ़ेंधारा 283. उच्च न्यायालय में अभिलेख
283. उच्च न्यायालय में अभिलेख हर उच्च न्यायालय, साधारण नियम द्वारा, वह रीति विहित कर सकेगा जिससे उसके समक्ष आने वाले मामलों में साक्षियों का साक्ष्य और अभियुक्त की परीक्षा लेखबद्ध की जाएगी; और ऐसा साक्ष्य तथा परीक्षा ऐसे नियम के अनुसार लेखबद्ध की जाएगी।
पूरा पढ़ेंउच्च न्यायालय में दर्ज रिकॉर्ड।
प्रत्येक उच्च न्यायालय सामान्य नियम द्वारा यह निर्धारित कर सकता है कि उसके समक्ष आने वाले मामलों में गवाहों के साक्ष्य और अभियुक्तों की परीक्षा किस प्रकार दर्ज की जाएगी, और ऐसे साक्ष्य और परीक्षा उस नियम के अनुसार दर्ज की जाएगी।
पूरा पढ़ेंधारा 284. साक्षी की हाजिरी कब अभिमुक्त की जा सकेगी और कमीशन कब निकाला जा सकेगा
284. साक्षी की हाजिरी कब अभिमुक्त की जा सकेगी और कमीशन कब निकाला जा सकेगा (1) जब कभी इस संहिता के अधीन किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही के दौरान किसी न्यायालय या मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत होता है कि न्याय के उद्देश्यों के लिए किसी साक्षी की परीक्षा आवश्यक है और यह कि ऐसे साक्षी की हाजिरी इतने विलंब, व्यय या असुविधा…
पूरा पढ़ेंजब गवाह की उपस्थिति से छूट दी जा सकती है और कमीशन जारी किया जा सकता है।
(1) जब भी इस संहिता के अंतर्गत किसी जाँच, मुकदमे या अन्य कार्यवाही के दौरान किसी न्यायालय या मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत हो कि न्याय के हित में किसी साक्षी की परीक्षा आवश्यक है, और ऐसी साक्षी की उपस्थिति में विलंब, व्यय या असुविधा की मात्रा इतनी अधिक हो कि मामले की परिस्थितियों में यह अनुचित हो, तो न्यायालय या मजिस्ट्रेट…
पूरा पढ़ेंधारा 285. कमीशन किसे जारी किया जाए
285. कमीशन किसे जारी किया जाए (1) यदि साक्षी उन राज्यक्षेत्रों के भीतर है जिन पर इस संहिता का विस्तार है, तो कमीशन उस मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को, जैसी स्थिति हो, निदिष्ट किया जाएगा जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर वह साक्षी पाया जाना है। (2) यदि साक्षी भारत में है, किन्तु ऐसे राज्य या…
पूरा पढ़ेंयह आयोग किसे जारी किया जाना है।
(1) यदि गवाह उन क्षेत्रों के भीतर है जिन पर यह संहिता लागू होती है, तो आयोग उस मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को निर्देशित किया जाएगा जिसके स्थानीय अधिकार क्षेत्र में गवाह पाया जाता है। (2) यदि गवाह भारत में है, लेकिन किसी ऐसे राज्य या क्षेत्र में है जिस पर यह संहिता लागू नहीं होती, तो आयोग ऐसे न्यायालय या अधिकारी को…
पूरा पढ़ेंधारा 286. कमीशनों का निष्पादन
286. कमीशनों का निष्पादन कमीशन की प्राप्ति पर, मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, या ऐसा महानगर मजिस्ट्रेट या न्यायिक मजिस्ट्रेट जिसे वह इस निमित्त नियुक्त करे, साक्षी को अपने समक्ष समन करेगा या उस स्थान को जाएगा जहां साक्षी है, और उसका साक्ष्य उसी रीति से लेखबद्ध करेगा, तथा इस प्रयोजन के लिए वही…
पूरा पढ़ेंकमीशनों का निष्पादन।
अभियोग प्राप्त होने पर, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या ऐसा कोई मजिस्ट्रेट जिसे वह इस संबंध में नियुक्त करे, गवाह को अपने समक्ष बुलाएगा या उस स्थान पर जाएगा जहां गवाह मौजूद है, और उसी प्रकार से उसका साक्ष्य दर्ज करेगा, और इस उद्देश्य के लिए वह इस संहिता के अंतर्गत वारंट-मामलों के परीक्षणों में प्राप्त शक्तियों का ही…
पूरा पढ़ेंधारा 287. पक्षकार साक्षियों की परीक्षा कर सकेंगे
287. पक्षकार साक्षियों की परीक्षा कर सकेंगे (1) इस संहिता के अधीन किसी ऐसी कार्यवाही के पक्षकार, जिसमें कमीशन जारी किया गया है, क्रमशः कोई ऐसी लिखित प्रश्नावली भेज सकेंगे जिसे कमीशन का निदेश देने वाला न्यायालय या मजिस्ट्रेट विवाद्यक के लिए सुसंगत समझे, और उस मजिस्ट्रेट, न्यायालय या अधिकारी के लिए, जिसे कमीशन निदिष्ट…
पूरा पढ़ेंपक्षकार गवाहों से पूछताछ कर सकते हैं।
(1) इस संहिता के अंतर्गत किसी भी कार्यवाही में, जिसमें कोई कमीशन जारी किया जाता है, पक्षकार क्रमशः लिखित में कोई भी प्रश्नपत्र भेज सकते हैं, जिसे कमीशन जारी करने वाला न्यायालय या मजिस्ट्रेट मामले से प्रासंगिक समझे, और मजिस्ट्रेट, न्यायालय या अधिकारी, जिसे कमीशन जारी करने का निर्देश दिया गया है, या जिसे इसे निष्पादित…
पूरा पढ़ेंधारा 288. कमीशन की वापसी
288. कमीशन की वापसी (1) धारा 284 के अधीन जारी किए गए किसी कमीशन के सम्यक् रूप से निष्पादित हो जाने के पश्चात्, वह उसके अधीन परीक्षित साक्षी के अभिसाक्ष्य सहित, कमीशन जारी करने वाले न्यायालय या मजिस्ट्रेट को लौटाया जाएगा; और वह कमीशन, उस पर की गई वापसी तथा अभिसाक्ष्य सभी उचित समयों पर पक्षकारों के निरीक्षण के लिए खुले…
पूरा पढ़ेंकमीशन की वापसी।
(1) धारा 319 के तहत जारी किए गए किसी भी कमीशन पर विधिवत हस्ताक्षर हो जाने के बाद, उसे, उसके अधीन जांचे गए गवाह के बयान सहित, कमीशन जारी करने वाले न्यायालय या मजिस्ट्रेट को लौटा दिया जाएगा; और कमीशन, उसकी प्रति और बयान सभी उचित समय पर पक्षों के निरीक्षण के लिए खुले रहेंगे, और सभी उचित अपवादों के अधीन रहते हुए, किसी भी…
पूरा पढ़ेंधारा 289. कार्यवाही का स्थगन
289. कार्यवाही का स्थगन हर मामले में, जिसमें धारा 284 के अधीन कमीशन निकाला जाता है, जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही कमीशन के निष्पादन और वापसी के लिए युक्तियुक्त रूप से पर्याप्त विनिर्दिष्ट समय के लिए स्थगित की जा सकेगी।
पूरा पढ़ेंकार्यवाही स्थगित।
धारा 319 के तहत आयोग जारी किए जाने वाले प्रत्येक मामले में, आयोग के निष्पादन और वापसी के लिए यथोचित रूप से पर्याप्त निर्दिष्ट समय के लिए जांच, परीक्षण या अन्य कार्यवाही स्थगित की जा सकती है।
पूरा पढ़ें- CRPC §28BNSS §22
धारा 28. वे दंडादेश जो उच्च न्यायालय और सेशन न्यायाधीश दे सकते हैं
उच्च न्यायालयों और सत्र न्यायाधीशों द्वारा दी जाने वाली सजाएँ।
- CRPC §34BNSS §28
धारा 34. शक्तियों का वापस लिया जाना
शक्तियों की वापसी।
- CRPC §257BNSS §280
शिकायत वापस लेना।
- CRPC §258BNSS §281
धारा 258. कुछ मामलों में कार्यवाही रोकने की शक्ति
कुछ मामलों में कार्यवाही रोकने का अधिकार।
- CRPC §259BNSS §282
धारा 259. समन-मामलों को वारंट-मामलों में संपरिवर्तित करने की न्यायालय की शक्ति
न्यायालय को समन मामलों को वारंट मामलों में परिवर्तित करने का अधिकार है।
- CRPC §260BNSS §283
धारा 260. संक्षेपतः विचारण करने की शक्ति
संक्षेप में प्रयास करने की शक्ति।
- CRPC §261BNSS §284
धारा 261. द्वितीय वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा संक्षिप्त विचारण
द्वितीय श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा संक्षिप्त सुनवाई।
- CRPC §262BNSS §285
धारा 262. संक्षिप्त विचारणों के लिए प्रक्रिया
संक्षिप्त परीक्षणों की प्रक्रिया।
- CRPC §263BNSS §286
धारा 263. संक्षिप्त विचारणों में अभिलेख
संक्षिप्त परीक्षणों में रिकॉर्ड करें।
- CRPC §264BNSS §287
धारा 264. संक्षेपतः विचारित मामलों में निर्णय
संक्षिप्त सुनवाई वाले मामलों में निर्णय।
- CRPC §265BNSS §288
धारा 265. अभिलेख और निर्णय की भाषा
रिकॉर्ड और निर्णय की भाषा।
- CRPC §265ABNSS §289
धारा 265A. अध्याय का लागू होना
अध्याय का अनुप्रयोग।
- CRPC §280BNSS §315
धारा 280. साक्षी के हाव-भाव के संबंध में टिप्पणियां
गवाह के व्यवहार के संबंध में टिप्पणियाँ।
- CRPC §281BNSS §316
धारा 281. अभियुक्त की परीक्षा का अभिलेख
अभियुक्त की जांच का रिकॉर्ड।
- CRPC §282BNSS §317
धारा 282. दुभाषिए का सही-सही विवर्तन करने के लिए आबद्ध होना
दुभाषिया सत्यपूर्वक अनुवाद करने के लिए बाध्य है।
- CRPC §283BNSS §318
धारा 283. उच्च न्यायालय में अभिलेख
उच्च न्यायालय में दर्ज रिकॉर्ड।
- CRPC §284BNSS §319
धारा 284. साक्षी की हाजिरी कब अभिमुक्त की जा सकेगी और कमीशन कब निकाला जा सकेगा
जब गवाह की उपस्थिति से छूट दी जा सकती है और कमीशन जारी किया जा सकता है।
- CRPC §285BNSS §320
धारा 285. कमीशन किसे जारी किया जाए
यह आयोग किसे जारी किया जाना है।
- CRPC §286BNSS §321
धारा 286. कमीशनों का निष्पादन
कमीशनों का निष्पादन।
- CRPC §287BNSS §322
धारा 287. पक्षकार साक्षियों की परीक्षा कर सकेंगे
पक्षकार गवाहों से पूछताछ कर सकते हैं।
- CRPC §288BNSS §323
धारा 288. कमीशन की वापसी
कमीशन की वापसी।
- CRPC §289BNSS §324
धारा 289. कार्यवाही का स्थगन
कार्यवाही स्थगित।
