IIIT Act 34अध्याय IV · Accounts and Audit
धारा 34 · कानून कैसे बनाए जाएं।
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(1) प्रत्येक संस्थान के पहले नियम बोर्ड द्वारा आगंतुक की पूर्व स्वीकृति से बनाए जाएंगे और उसकी एक प्रति यथाशीघ्र संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी।
(2) बोर्ड समय-समय पर नए या अतिरिक्त क़ानून बना सकता है, या इस धारा में दिए गए तरीके से क़ानूनों में संशोधन या उन्हें निरस्त कर सकता है।
(3) प्रत्येक नए क़ानून या क़ानूनों में परिवर्धन या क़ानूनों में कोई संशोधन या निरसन के लिए आगंतुक की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी, जो सहमति दे सकता है या सहमति रोक सकता है या इसे विचार के लिए बोर्ड को भेज सकता है।
(4) नए क़ानून या किसी मौजूदा क़ानून में संशोधन या निरस्त करने वाले क़ानून तब तक मान्य नहीं होंगे जब तक कि उन्हें आगंतुक द्वारा सहमति न दी गई हो:
बशर्ते कि केंद्र सरकार, आगंतुक की पूर्व स्वीकृति से, संस्थान के नियमों में संशोधन कर सकती है, यदि एकरूपता के लिए ऐसा करना आवश्यक हो, और इसकी एक प्रति यथाशीघ्र संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी।
(2) बोर्ड समय-समय पर नए या अतिरिक्त क़ानून बना सकता है, या इस धारा में दिए गए तरीके से क़ानूनों में संशोधन या उन्हें निरस्त कर सकता है।
(3) प्रत्येक नए क़ानून या क़ानूनों में परिवर्धन या क़ानूनों में कोई संशोधन या निरसन के लिए आगंतुक की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी, जो सहमति दे सकता है या सहमति रोक सकता है या इसे विचार के लिए बोर्ड को भेज सकता है।
(4) नए क़ानून या किसी मौजूदा क़ानून में संशोधन या निरस्त करने वाले क़ानून तब तक मान्य नहीं होंगे जब तक कि उन्हें आगंतुक द्वारा सहमति न दी गई हो:
बशर्ते कि केंद्र सरकार, आगंतुक की पूर्व स्वीकृति से, संस्थान के नियमों में संशोधन कर सकती है, यदि एकरूपता के लिए ऐसा करना आवश्यक हो, और इसकी एक प्रति यथाशीघ्र संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी।
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