IIIT Act 30अध्याय IV · Accounts and Audit
धारा 30 · लेखा एवं लेखापरीक्षा।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) प्रत्येक संस्थान उचित खाते और अन्य प्रासंगिक अभिलेख रखेगा तथा वार्षिक लेखा-विवरण तैयार करेगा जिसमें बैलेंस शीट भी शामिल होगी, ऐसे प्रारूप और लेखा मानक में जैसा कि केंद्र सरकार द्वारा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के परामर्श से अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है।
(2) यदि संस्थान के आय एवं व्यय विवरण और बैलेंस शीट लेखांकन मानकों के अनुरूप नहीं हैं, तो संस्थान को अपने आय एवं व्यय विवरण और बैलेंस शीट में निम्नलिखित जानकारी प्रकट करनी होगी, अर्थात्:—
(क) लेखांकन मानकों से विचलन;
(ख) ऐसे विचलन के कारण; और
(ग) ऐसे विचलन के कारण उत्पन्न होने वाला वित्तीय प्रभाव, यदि कोई हो।
(3) प्रत्येक संस्थान के खातों का लेखापरीक्षा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा की जाएगी तथा लेखापरीक्षा दल द्वारा ऐसे लेखापरीक्षा के संबंध में किया गया कोई भी व्यय संस्थान द्वारा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को देय होगा।
(4) भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक और उनके द्वारा किसी संस्थान के लेखापरीक्षा के संबंध में नियुक्त किसी भी व्यक्ति को ऐसी लेखापरीक्षा के संबंध में वही अधिकार, विशेषाधिकार एवं प्राधिकार प्राप्त होंगे जो भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को सरकारी लेखापरीक्षा के संबंध में प्राप्त होते हैं, और विशेष रूप से उन्हें पुस्तकों, खातों, संबंधित वाउचरों और अन्य दस्तावेजों एवं कागजातों को प्रस्तुत करने की मांग करने और संस्थान के कार्यालयों का निरीक्षण करने का अधिकार होगा।
(5) भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक या उनके द्वारा इस संबंध में नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्रमाणित प्रत्येक संस्थान के खाते, लेखापरीक्षा रिपोर्ट सहित, प्रतिवर्ष केंद्र सरकार को भेजे जाएंगे और सरकार उन्हें केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष प्रस्तुत करवाएगी।
(2) यदि संस्थान के आय एवं व्यय विवरण और बैलेंस शीट लेखांकन मानकों के अनुरूप नहीं हैं, तो संस्थान को अपने आय एवं व्यय विवरण और बैलेंस शीट में निम्नलिखित जानकारी प्रकट करनी होगी, अर्थात्:—
(क) लेखांकन मानकों से विचलन;
(ख) ऐसे विचलन के कारण; और
(ग) ऐसे विचलन के कारण उत्पन्न होने वाला वित्तीय प्रभाव, यदि कोई हो।
(3) प्रत्येक संस्थान के खातों का लेखापरीक्षा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा की जाएगी तथा लेखापरीक्षा दल द्वारा ऐसे लेखापरीक्षा के संबंध में किया गया कोई भी व्यय संस्थान द्वारा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को देय होगा।
(4) भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक और उनके द्वारा किसी संस्थान के लेखापरीक्षा के संबंध में नियुक्त किसी भी व्यक्ति को ऐसी लेखापरीक्षा के संबंध में वही अधिकार, विशेषाधिकार एवं प्राधिकार प्राप्त होंगे जो भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को सरकारी लेखापरीक्षा के संबंध में प्राप्त होते हैं, और विशेष रूप से उन्हें पुस्तकों, खातों, संबंधित वाउचरों और अन्य दस्तावेजों एवं कागजातों को प्रस्तुत करने की मांग करने और संस्थान के कार्यालयों का निरीक्षण करने का अधिकार होगा।
(5) भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक या उनके द्वारा इस संबंध में नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्रमाणित प्रत्येक संस्थान के खाते, लेखापरीक्षा रिपोर्ट सहित, प्रतिवर्ष केंद्र सरकार को भेजे जाएंगे और सरकार उन्हें केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष प्रस्तुत करवाएगी।
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