CF Act 68अध्याय XII · Disputes and Arbitration
धारा 68 · निर्णय से पहले कुर्की और अन्य अंतरिम आदेश।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जहाँ धारा 64 के अंतर्गत कोई विवाद संदर्भित किया गया है और विवाद की सुनवाई करने वाला रजिस्ट्रार या नामित व्यक्ति जाँच या अन्य किसी माध्यम से संतुष्ट है कि ऐसे विवाद का कोई पक्षकार, किसी निर्णय के निष्पादन या किसी आदेश के क्रियान्वयन को विफल करने या बाधित करने के इरादे से,--
(क) अपनी पूरी या आंशिक संपत्ति का निपटान करने वाला है; या
(ख) रजिस्ट्रार के अधिकार क्षेत्र से संपत्ति के संपूर्ण या किसी भाग को हटाने वाला है,
पर्याप्त सुरक्षा प्रदान न किए जाने की स्थिति में, वह उक्त संपत्ति की सशर्त कुर्की का निर्देश दे सकता है, और ऐसी कुर्की का वही प्रभाव होगा मानो वह किसी सक्षम सिविल न्यायालय द्वारा की गई हो।
(2) जहाँ रजिस्ट्रार या नामित व्यक्ति उप-धारा (1) के अधीन किसी संपत्ति की कुर्की का निर्देश देता है, तो वह उस व्यक्ति को, जिसकी संपत्ति कुर्क की गई है, एक निर्दिष्ट अवधि के भीतर ऐसी सुरक्षा प्रदान करने के लिए नोटिस जारी करेगा, जिसे वह पर्याप्त समझता है, और यदि वह व्यक्ति ऐसी सुरक्षा प्रदान करने में विफल रहता है, तो रजिस्ट्रार या नामित व्यक्ति आदेश की पुष्टि कर सकता है, और विवाद में निर्णय के बाद, यदि दावा स्वीकृत होता है, तो कुर्क की गई संपत्ति को दावे की ओर निपटाने का निर्देश दे सकता है।
(3) इस धारा के अधीन की गई कोई भी कुर्की, विवाद में पक्षकार न होने वाले व्यक्तियों के संपत्ति की कुर्की से पूर्व विद्यमान अधिकारों को प्रभावित नहीं करेगी, और न ही किसी ऐसे व्यक्ति को रोकेगी जिसके पास उस व्यक्ति के विरुद्ध डिक्री है जिसकी संपत्ति इस प्रकार कुर्क की गई है, ऐसी डिक्री की कुर्की के तहत संपत्ति की बिक्री के लिए आवेदन करने से।
(4) रजिस्ट्रार या नामित व्यक्ति, न्याय के उद्देश्यों को विफल होने से रोकने के लिए, उप-धारा (1) में निर्दिष्ट विवाद में निर्णय लंबित रहने के दौरान ऐसे अंतरिम आदेश दे सकता है जो न्यायसंगत और सुविधाजनक प्रतीत हों।
(क) अपनी पूरी या आंशिक संपत्ति का निपटान करने वाला है; या
(ख) रजिस्ट्रार के अधिकार क्षेत्र से संपत्ति के संपूर्ण या किसी भाग को हटाने वाला है,
पर्याप्त सुरक्षा प्रदान न किए जाने की स्थिति में, वह उक्त संपत्ति की सशर्त कुर्की का निर्देश दे सकता है, और ऐसी कुर्की का वही प्रभाव होगा मानो वह किसी सक्षम सिविल न्यायालय द्वारा की गई हो।
(2) जहाँ रजिस्ट्रार या नामित व्यक्ति उप-धारा (1) के अधीन किसी संपत्ति की कुर्की का निर्देश देता है, तो वह उस व्यक्ति को, जिसकी संपत्ति कुर्क की गई है, एक निर्दिष्ट अवधि के भीतर ऐसी सुरक्षा प्रदान करने के लिए नोटिस जारी करेगा, जिसे वह पर्याप्त समझता है, और यदि वह व्यक्ति ऐसी सुरक्षा प्रदान करने में विफल रहता है, तो रजिस्ट्रार या नामित व्यक्ति आदेश की पुष्टि कर सकता है, और विवाद में निर्णय के बाद, यदि दावा स्वीकृत होता है, तो कुर्क की गई संपत्ति को दावे की ओर निपटाने का निर्देश दे सकता है।
(3) इस धारा के अधीन की गई कोई भी कुर्की, विवाद में पक्षकार न होने वाले व्यक्तियों के संपत्ति की कुर्की से पूर्व विद्यमान अधिकारों को प्रभावित नहीं करेगी, और न ही किसी ऐसे व्यक्ति को रोकेगी जिसके पास उस व्यक्ति के विरुद्ध डिक्री है जिसकी संपत्ति इस प्रकार कुर्क की गई है, ऐसी डिक्री की कुर्की के तहत संपत्ति की बिक्री के लिए आवेदन करने से।
(4) रजिस्ट्रार या नामित व्यक्ति, न्याय के उद्देश्यों को विफल होने से रोकने के लिए, उप-धारा (1) में निर्दिष्ट विवाद में निर्णय लंबित रहने के दौरान ऐसे अंतरिम आदेश दे सकता है जो न्यायसंगत और सुविधाजनक प्रतीत हों।
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