CF Act 65अध्याय XII · Disputes and Arbitration
धारा 65 · परिसीमा अवधि।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) परिसीमा अधिनियम, 1963 (36 ऑफ 1963) में किसी बात के होते हुए भी, परन्तु इस अधिनियम में निहित विशिष्ट प्रावधानों के अधीन रहते हुए, धारा 64 के अधीन रजिस्ट्रार को संदर्भित विवाद के मामले में परिसीमा अवधि,
(क) यदि विवाद किसी मृतक ग्राहक से फोरमैन को देय ब्याज सहित किसी राशि की वसूली से संबंधित है, तो ग्राहक की मृत्यु या ग्राहक न रहने की तिथि से गणना करते हुए तीन वर्ष की अवधि होगी; या
(ख) यदि विवाद किसी फोरमैन और किसी ग्राहक या पूर्व ग्राहक, या किसी मृत ग्राहक के नामित व्यक्ति, उत्तराधिकारी या कानूनी प्रतिनिधि के बीच है, और विवाद विवाद के किसी भी पक्ष की ओर से किसी कार्य या चूक से संबंधित है, तो विवाद उत्पन्न होने वाले कार्य या चूक की तिथि से तीन वर्ष का समय लगेगा।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट विवादों के अलावा, धारा 64 के अधीन रजिस्ट्रार को संदर्भित किए जाने वाले किसी भी विवाद के मामले में परिसीमा अवधि, परिसीमा अधिनियम, 1963 (36 ऑफ 1963) के प्रावधानों द्वारा विनियमित की जाएगी, मानो विवाद एक मुकदमा हो, और रजिस्ट्रार एक सिविल न्यायालय हो।
(3) उपधारा (1) और (2) में किसी बात के होते हुए भी, रजिस्ट्रार उसमें निर्दिष्ट परिसीमा अवधि की समाप्ति के बाद विवाद स्वीकार कर सकता है, यदि आवेदक रजिस्ट्रार को संतुष्ट कर दे कि उसके पास विवाद को ऐसी अवधि के भीतर संदर्भित न करने का पर्याप्त कारण था।
(क) यदि विवाद किसी मृतक ग्राहक से फोरमैन को देय ब्याज सहित किसी राशि की वसूली से संबंधित है, तो ग्राहक की मृत्यु या ग्राहक न रहने की तिथि से गणना करते हुए तीन वर्ष की अवधि होगी; या
(ख) यदि विवाद किसी फोरमैन और किसी ग्राहक या पूर्व ग्राहक, या किसी मृत ग्राहक के नामित व्यक्ति, उत्तराधिकारी या कानूनी प्रतिनिधि के बीच है, और विवाद विवाद के किसी भी पक्ष की ओर से किसी कार्य या चूक से संबंधित है, तो विवाद उत्पन्न होने वाले कार्य या चूक की तिथि से तीन वर्ष का समय लगेगा।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट विवादों के अलावा, धारा 64 के अधीन रजिस्ट्रार को संदर्भित किए जाने वाले किसी भी विवाद के मामले में परिसीमा अवधि, परिसीमा अधिनियम, 1963 (36 ऑफ 1963) के प्रावधानों द्वारा विनियमित की जाएगी, मानो विवाद एक मुकदमा हो, और रजिस्ट्रार एक सिविल न्यायालय हो।
(3) उपधारा (1) और (2) में किसी बात के होते हुए भी, रजिस्ट्रार उसमें निर्दिष्ट परिसीमा अवधि की समाप्ति के बाद विवाद स्वीकार कर सकता है, यदि आवेदक रजिस्ट्रार को संतुष्ट कर दे कि उसके पास विवाद को ऐसी अवधि के भीतर संदर्भित न करने का पर्याप्त कारण था।
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