BR Act 64अध्याय VII · Provisions as to Certain Corporations
धारा 64 · बिहार राज्य वित्तीय निगम से संबंधित प्रावधान।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 (63 ऑफ 1951) के तहत स्थापित बिहार राज्य वित्तीय निगम, नियुक्त दिन से उन क्षेत्रों में कार्य करना जारी रखेगा, जिनके संबंध में वह उस दिन से ठीक पहले कार्य कर रहा था, इस धारा के प्रावधानों और केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर जारी किए जाने वाले ऐसे निर्देशों के अधीन रहते हुए।
(2) निगम के संबंध में उप-धारा (1) के तहत केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए किसी भी निर्देश में यह निर्देश शामिल हो सकता है कि उक्त अधिनियम, निगम पर लागू होने के संबंध में, ऐसे अपवादों और संशोधनों के अधीन प्रभावी होगा जैसा कि निर्देश में निर्दिष्ट किया जा सकता है।
(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, निगम का निदेशक मंडल, केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति से, और यदि केंद्र सरकार द्वारा ऐसा अपेक्षित हो, तो नियुक्त दिन के बाद किसी भी समय निगम के पुनर्गठन, पुनर्व्यवस्थापन या विघटन की योजना पर विचार करने के लिए बैठक बुला सकता है, जिसमें नए निगम के गठन और मौजूदा निगम की परिसंपत्तियों, अधिकारों और देनदारियों को उसमें हस्तांतरित करने से संबंधित प्रस्ताव शामिल होंगे, और यदि ऐसी योजना आम बैठक में उपस्थित और मतदान करने वाले शेयरधारकों के बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा अनुमोदित हो जाती है, तो योजना को केंद्र सरकार की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
(4) यदि केंद्र सरकार द्वारा योजना को बिना किसी संशोधन के या आम बैठक में अनुमोदित संशोधनों के साथ स्वीकृत किया जाता है, तो केंद्र सरकार योजना को प्रमाणित करेगी, और ऐसे प्रमाणीकरण पर, योजना, किसी भी कानून में इसके विपरीत कुछ भी होने के बावजूद, योजना से प्रभावित निगमों के साथ-साथ उनके शेयरधारकों और लेनदारों पर भी बाध्यकारी होगी।
(5) यदि योजना को इस प्रकार अनुमोदित या स्वीकृत नहीं किया जाता है, तो केंद्र सरकार योजना को पटना और झारखंड के उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीश को संदर्भित कर सकती है, जिसे इस संबंध में उनके मुख्य न्यायाधीश द्वारा नामित किया जाए, और योजना के संबंध में न्यायाधीश का निर्णय अंतिम होगा और योजना से प्रभावित निगमों के साथ-साथ उनके शेयरधारकों और लेनदारों पर भी बाध्यकारी होगा।
(6) इस धारा के पूर्ववर्ती प्रावधानों में ऐसा कुछ भी नहीं माना जाएगा जिससे बिहार और झारखंड राज्य सरकारों को नियुक्त दिन या उसके बाद किसी भी समय राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 (63 ऑफ 1951) के तहत उस राज्य के लिए राज्य वित्तीय निगम गठित करने से रोका जा सके।
(2) निगम के संबंध में उप-धारा (1) के तहत केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए किसी भी निर्देश में यह निर्देश शामिल हो सकता है कि उक्त अधिनियम, निगम पर लागू होने के संबंध में, ऐसे अपवादों और संशोधनों के अधीन प्रभावी होगा जैसा कि निर्देश में निर्दिष्ट किया जा सकता है।
(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, निगम का निदेशक मंडल, केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति से, और यदि केंद्र सरकार द्वारा ऐसा अपेक्षित हो, तो नियुक्त दिन के बाद किसी भी समय निगम के पुनर्गठन, पुनर्व्यवस्थापन या विघटन की योजना पर विचार करने के लिए बैठक बुला सकता है, जिसमें नए निगम के गठन और मौजूदा निगम की परिसंपत्तियों, अधिकारों और देनदारियों को उसमें हस्तांतरित करने से संबंधित प्रस्ताव शामिल होंगे, और यदि ऐसी योजना आम बैठक में उपस्थित और मतदान करने वाले शेयरधारकों के बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा अनुमोदित हो जाती है, तो योजना को केंद्र सरकार की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
(4) यदि केंद्र सरकार द्वारा योजना को बिना किसी संशोधन के या आम बैठक में अनुमोदित संशोधनों के साथ स्वीकृत किया जाता है, तो केंद्र सरकार योजना को प्रमाणित करेगी, और ऐसे प्रमाणीकरण पर, योजना, किसी भी कानून में इसके विपरीत कुछ भी होने के बावजूद, योजना से प्रभावित निगमों के साथ-साथ उनके शेयरधारकों और लेनदारों पर भी बाध्यकारी होगी।
(5) यदि योजना को इस प्रकार अनुमोदित या स्वीकृत नहीं किया जाता है, तो केंद्र सरकार योजना को पटना और झारखंड के उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीश को संदर्भित कर सकती है, जिसे इस संबंध में उनके मुख्य न्यायाधीश द्वारा नामित किया जाए, और योजना के संबंध में न्यायाधीश का निर्णय अंतिम होगा और योजना से प्रभावित निगमों के साथ-साथ उनके शेयरधारकों और लेनदारों पर भी बाध्यकारी होगा।
(6) इस धारा के पूर्ववर्ती प्रावधानों में ऐसा कुछ भी नहीं माना जाएगा जिससे बिहार और झारखंड राज्य सरकारों को नियुक्त दिन या उसके बाद किसी भी समय राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 (63 ऑफ 1951) के तहत उस राज्य के लिए राज्य वित्तीय निगम गठित करने से रोका जा सके।
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