POCSO 19अध्याय V · Procedure for Reporting of Cases
धारा 19 · अपराधों की रिपोर्टिंग।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, कोई भी व्यक्ति (बच्चे सहित), जिसे यह आशंका हो कि इस अधिनियम के अंतर्गत कोई अपराध होने की संभावना है या जिसे यह जानकारी हो कि ऐसा अपराध किया जा चुका है, तो वह निम्नलिखित को ऐसी सूचना प्रदान करेगा:--
(क) विशेष किशोर पुलिस इकाई; या
(ख) स्थानीय पुलिस।
(2) उपधारा (1) के अंतर्गत दी गई प्रत्येक रिपोर्ट निम्नलिखित होगी--
(क) प्रविष्टि संख्या निर्दिष्ट की गई और लिखित रूप में दर्ज की गई;
(ख) सूचना देने वाले को पढ़कर सुनाया जाए;
(ग) इसे पुलिस इकाई द्वारा रखी जाने वाली पुस्तक में दर्ज किया जाएगा।
(3) जहां उपधारा (1) के तहत रिपोर्ट किसी बच्चे द्वारा दी जाती है, तो उसे उपधारा (2) के तहत सरल भाषा में दर्ज किया जाएगा ताकि बच्चा दर्ज की जा रही सामग्री को समझ सके।
(4) यदि सामग्री ऐसी भाषा में रिकॉर्ड की जा रही है जिसे बच्चा नहीं समझता है या जहाँ भी आवश्यक समझा जाए, तो यदि बच्चा उसे समझने में असमर्थ है, तो उसे ऐसी योग्यता, अनुभव और निर्धारित शुल्क के भुगतान पर अनुवादक या दुभाषिया उपलब्ध कराया जाएगा।
(5) जहां विशेष किशोर पुलिस इकाई या स्थानीय पुलिस संतुष्ट है कि जिस बच्चे के विरुद्ध अपराध किया गया है उसे देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता है, तो वह लिखित में कारण दर्ज करने के बाद, रिपोर्ट मिलने के चौबीस घंटे के भीतर उसे आश्रय गृह या निकटतम अस्पताल में भर्ती कराने सहित ऐसी देखभाल और संरक्षण प्रदान करने की तत्काल व्यवस्था करेगी, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(6) विशेष किशोर पुलिस इकाई या स्थानीय पुलिस, अनावश्यक देरी किए बिना, लेकिन चौबीस घंटे की अवधि के भीतर, मामले की रिपोर्ट बाल कल्याण समिति और विशेष न्यायालय को, या जहां कोई विशेष न्यायालय नामित नहीं किया गया है, सत्र न्यायालय को, बच्चे की देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता और इस संबंध में उठाए गए कदमों सहित प्रस्तुत करेगी।
(7) उपधारा (1) के प्रयोजन के लिए सद्भावपूर्वक सूचना देने पर कोई व्यक्ति किसी प्रकार का दण्ड, चाहे वह दीवानी हो या आपराधिक, नहीं लेगा।
(क) विशेष किशोर पुलिस इकाई; या
(ख) स्थानीय पुलिस।
(2) उपधारा (1) के अंतर्गत दी गई प्रत्येक रिपोर्ट निम्नलिखित होगी--
(क) प्रविष्टि संख्या निर्दिष्ट की गई और लिखित रूप में दर्ज की गई;
(ख) सूचना देने वाले को पढ़कर सुनाया जाए;
(ग) इसे पुलिस इकाई द्वारा रखी जाने वाली पुस्तक में दर्ज किया जाएगा।
(3) जहां उपधारा (1) के तहत रिपोर्ट किसी बच्चे द्वारा दी जाती है, तो उसे उपधारा (2) के तहत सरल भाषा में दर्ज किया जाएगा ताकि बच्चा दर्ज की जा रही सामग्री को समझ सके।
(4) यदि सामग्री ऐसी भाषा में रिकॉर्ड की जा रही है जिसे बच्चा नहीं समझता है या जहाँ भी आवश्यक समझा जाए, तो यदि बच्चा उसे समझने में असमर्थ है, तो उसे ऐसी योग्यता, अनुभव और निर्धारित शुल्क के भुगतान पर अनुवादक या दुभाषिया उपलब्ध कराया जाएगा।
(5) जहां विशेष किशोर पुलिस इकाई या स्थानीय पुलिस संतुष्ट है कि जिस बच्चे के विरुद्ध अपराध किया गया है उसे देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता है, तो वह लिखित में कारण दर्ज करने के बाद, रिपोर्ट मिलने के चौबीस घंटे के भीतर उसे आश्रय गृह या निकटतम अस्पताल में भर्ती कराने सहित ऐसी देखभाल और संरक्षण प्रदान करने की तत्काल व्यवस्था करेगी, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(6) विशेष किशोर पुलिस इकाई या स्थानीय पुलिस, अनावश्यक देरी किए बिना, लेकिन चौबीस घंटे की अवधि के भीतर, मामले की रिपोर्ट बाल कल्याण समिति और विशेष न्यायालय को, या जहां कोई विशेष न्यायालय नामित नहीं किया गया है, सत्र न्यायालय को, बच्चे की देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता और इस संबंध में उठाए गए कदमों सहित प्रस्तुत करेगी।
(7) उपधारा (1) के प्रयोजन के लिए सद्भावपूर्वक सूचना देने पर कोई व्यक्ति किसी प्रकार का दण्ड, चाहे वह दीवानी हो या आपराधिक, नहीं लेगा।
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