MSMED Act 7अध्याय III · Classification of Enterprises, Advisory Committee and Memorandum of Micro, Small and Medium Enterprises
धारा 7 · उद्यमों का वर्गीकरण।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) उद्योग (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1951 (65 ऑफ 1951) की धारा 11ख में किसी बात के होते हुए भी, केंद्र सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अधिसूचना द्वारा और उपधारा (4) एवं (5) के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए, किसी भी वर्ग या वर्गों के उद्यमों को, चाहे वे स्वामित्व, हिंदू अविभाजित परिवार, व्यक्तियों का संघ, सहकारी समिति, साझेदारी फर्म, कंपनी या उपक्रम हों, चाहे उन्हें किसी भी नाम से पुकारा जाए, वर्गीकृत कर सकती है,--
(क) उद्योग (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1951 (65 ऑफ 1951) की प्रथम अनुसूची में निर्दिष्ट किसी उद्योग से संबंधित वस्तुओं के निर्माण या उत्पादन में लगे उद्यमों के मामले में, जैसा कि--
(i) एक सूक्ष्म उद्यम, जहां संयंत्र और मशीनरी में निवेश पच्चीस लाख रुपये से अधिक नहीं है;
(ii) एक लघु उद्यम, जहाँ संयंत्र और मशीनरी में निवेश पच्चीस लाख रुपये से अधिक है लेकिन पाँच करोड़ रुपये से अधिक नहीं है; या
(iii) एक मध्यम उद्यम, जहां संयंत्र और मशीनरी में निवेश पांच करोड़ रुपये से अधिक है लेकिन दस करोड़ रुपये से अधिक नहीं है;
(ख) सेवाओं के प्रावधान या प्रदान करने में लगे उद्यमों के मामले में, जैसा कि--
(i) एक सूक्ष्म उद्यम, जहां उपकरण में निवेश दस लाख रुपये से अधिक नहीं है;
(ii) एक लघु उद्यम, जहाँ उपकरण में निवेश दस लाख रुपये से अधिक है लेकिन दो करोड़ रुपये से अधिक नहीं है; या
(iii) एक मध्यम उद्यम, जहाँ उपकरण में निवेश दो करोड़ रुपये से अधिक है लेकिन पाँच करोड़ रुपये से अधिक नहीं है।
स्पष्टीकरण 1 .-- संदेह दूर करने के लिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि संयंत्र और मशीनरी में निवेश की गणना करते समय, प्रदूषण नियंत्रण, अनुसंधान और विकास, औद्योगिक सुरक्षा उपकरण और अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट अन्य मदों की लागत को शामिल नहीं किया जाएगा।
स्पष्टीकरण 2 .--यह स्पष्ट किया जाता है कि उद्योग (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1951 (1951 का 65) की धारा 29बी के प्रावधान इस धारा की उपधारा (1) के खंड (क) के उपखंड (i) और (ii) में निर्दिष्ट उद्यमों पर लागू होंगे।
(2) केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा निम्नलिखित सदस्यों से युक्त एक सलाहकार समिति का गठन करेगी, अर्थात्:--
(क) केंद्रीय सरकार के उस मंत्रालय या विभाग में भारत सरकार के सचिव, जिसके पास लघु एवं मध्यम उद्यमों का प्रशासनिक नियंत्रण है, पदेन अध्यक्ष होंगे;
(ख) सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों से संबंधित मामलों में आवश्यक विशेषज्ञता रखने वाले केंद्र सरकार के पांच से अधिक अधिकारी, पदेन सदस्य नहीं होंगे;
(ग) राज्य सरकारों के तीन से अधिक प्रतिनिधि नहीं, पदेन सदस्य; और
(घ) सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के संघों के एक-एक प्रतिनिधि, सदस्य, पदेन।
(3) बोर्ड का सदस्य-सचिव सलाहकार समिति का पदेन सदस्य-सचिव भी होगा।
(4) केंद्र सरकार उपधारा (1) के अंतर्गत किसी वर्ग या वर्गों के उद्यमों का वर्गीकरण करने से पहले सलाहकार समिति की अनुशंसाएँ प्राप्त करेगी।
(5) सलाहकार समिति धारा 5 में निर्दिष्ट किसी विषय के संबंध में बोर्ड द्वारा उसे सौंपे गए मामलों की जांच करेगी और बोर्ड को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेगी।
(6) केंद्र सरकार अध्याय IV की धारा 9, 10, 11, 12 या 14 में निर्दिष्ट किसी भी मामले पर सलाहकार समिति की सलाह ले सकती है।
(7) राज्य सरकार धारा 30 के तहत बनाए गए नियमों में निर्दिष्ट किसी भी मामले पर सलाहकार समिति से सलाह ले सकती है।
(8) सलाहकार समिति निम्नलिखित मामलों पर विचार करने के बाद केंद्र सरकार या, जैसा भी मामला हो, राज्य सरकार या बोर्ड को अपनी अनुशंसाएँ या सलाह भेजेगी, अर्थात्:--
(क) किसी वर्ग या वर्गों के उद्यमों में रोजगार का स्तर;
(ख) किसी वर्ग या वर्गों के उद्यमों में संयंत्र और मशीनरी या उपकरण में निवेश का स्तर;
(ग) तकनीकी उन्नयन, रोजगार सृजन और उद्यमों के वर्ग या वर्गों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए संयंत्र और मशीनरी या उपकरणों में अधिक निवेश की आवश्यकता;
(घ) सूक्ष्म, लघु या मध्यम उद्यमों में उद्यमिता को बढ़ावा देने और फैलाने की संभावना; और
(ई) लघु एवं मध्यम उद्यमों के वर्गीकरण के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानक।
(9) उद्योग (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1951 (65 ऑफ 1951) की धारा 11बी और खादी एवं ग्राम उद्योग आयोग अधिनियम, 1956 (61 ऑफ 1956) की धारा 2 के खंड (एच) में निहित किसी बात के बावजूद, केंद्र सरकार उपधारा (1) के अंतर्गत किसी वर्ग या वर्गों के उद्यमों का वर्गीकरण करते समय, समय-समय पर निवेश के मानदंड को बदल सकती है और उद्यमों के रोजगार या कारोबार के संबंध में मानदंड या मानकों पर भी विचार कर सकती है और ऐसे वर्गीकरण में सूक्ष्म या लघु उद्यमों या ग्राम उद्यमों को लघु उद्यमों के भाग के रूप में शामिल कर सकती है।
(क) उद्योग (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1951 (65 ऑफ 1951) की प्रथम अनुसूची में निर्दिष्ट किसी उद्योग से संबंधित वस्तुओं के निर्माण या उत्पादन में लगे उद्यमों के मामले में, जैसा कि--
(i) एक सूक्ष्म उद्यम, जहां संयंत्र और मशीनरी में निवेश पच्चीस लाख रुपये से अधिक नहीं है;
(ii) एक लघु उद्यम, जहाँ संयंत्र और मशीनरी में निवेश पच्चीस लाख रुपये से अधिक है लेकिन पाँच करोड़ रुपये से अधिक नहीं है; या
(iii) एक मध्यम उद्यम, जहां संयंत्र और मशीनरी में निवेश पांच करोड़ रुपये से अधिक है लेकिन दस करोड़ रुपये से अधिक नहीं है;
(ख) सेवाओं के प्रावधान या प्रदान करने में लगे उद्यमों के मामले में, जैसा कि--
(i) एक सूक्ष्म उद्यम, जहां उपकरण में निवेश दस लाख रुपये से अधिक नहीं है;
(ii) एक लघु उद्यम, जहाँ उपकरण में निवेश दस लाख रुपये से अधिक है लेकिन दो करोड़ रुपये से अधिक नहीं है; या
(iii) एक मध्यम उद्यम, जहाँ उपकरण में निवेश दो करोड़ रुपये से अधिक है लेकिन पाँच करोड़ रुपये से अधिक नहीं है।
स्पष्टीकरण 1 .-- संदेह दूर करने के लिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि संयंत्र और मशीनरी में निवेश की गणना करते समय, प्रदूषण नियंत्रण, अनुसंधान और विकास, औद्योगिक सुरक्षा उपकरण और अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट अन्य मदों की लागत को शामिल नहीं किया जाएगा।
स्पष्टीकरण 2 .--यह स्पष्ट किया जाता है कि उद्योग (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1951 (1951 का 65) की धारा 29बी के प्रावधान इस धारा की उपधारा (1) के खंड (क) के उपखंड (i) और (ii) में निर्दिष्ट उद्यमों पर लागू होंगे।
(2) केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा निम्नलिखित सदस्यों से युक्त एक सलाहकार समिति का गठन करेगी, अर्थात्:--
(क) केंद्रीय सरकार के उस मंत्रालय या विभाग में भारत सरकार के सचिव, जिसके पास लघु एवं मध्यम उद्यमों का प्रशासनिक नियंत्रण है, पदेन अध्यक्ष होंगे;
(ख) सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों से संबंधित मामलों में आवश्यक विशेषज्ञता रखने वाले केंद्र सरकार के पांच से अधिक अधिकारी, पदेन सदस्य नहीं होंगे;
(ग) राज्य सरकारों के तीन से अधिक प्रतिनिधि नहीं, पदेन सदस्य; और
(घ) सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के संघों के एक-एक प्रतिनिधि, सदस्य, पदेन।
(3) बोर्ड का सदस्य-सचिव सलाहकार समिति का पदेन सदस्य-सचिव भी होगा।
(4) केंद्र सरकार उपधारा (1) के अंतर्गत किसी वर्ग या वर्गों के उद्यमों का वर्गीकरण करने से पहले सलाहकार समिति की अनुशंसाएँ प्राप्त करेगी।
(5) सलाहकार समिति धारा 5 में निर्दिष्ट किसी विषय के संबंध में बोर्ड द्वारा उसे सौंपे गए मामलों की जांच करेगी और बोर्ड को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेगी।
(6) केंद्र सरकार अध्याय IV की धारा 9, 10, 11, 12 या 14 में निर्दिष्ट किसी भी मामले पर सलाहकार समिति की सलाह ले सकती है।
(7) राज्य सरकार धारा 30 के तहत बनाए गए नियमों में निर्दिष्ट किसी भी मामले पर सलाहकार समिति से सलाह ले सकती है।
(8) सलाहकार समिति निम्नलिखित मामलों पर विचार करने के बाद केंद्र सरकार या, जैसा भी मामला हो, राज्य सरकार या बोर्ड को अपनी अनुशंसाएँ या सलाह भेजेगी, अर्थात्:--
(क) किसी वर्ग या वर्गों के उद्यमों में रोजगार का स्तर;
(ख) किसी वर्ग या वर्गों के उद्यमों में संयंत्र और मशीनरी या उपकरण में निवेश का स्तर;
(ग) तकनीकी उन्नयन, रोजगार सृजन और उद्यमों के वर्ग या वर्गों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए संयंत्र और मशीनरी या उपकरणों में अधिक निवेश की आवश्यकता;
(घ) सूक्ष्म, लघु या मध्यम उद्यमों में उद्यमिता को बढ़ावा देने और फैलाने की संभावना; और
(ई) लघु एवं मध्यम उद्यमों के वर्गीकरण के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानक।
(9) उद्योग (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1951 (65 ऑफ 1951) की धारा 11बी और खादी एवं ग्राम उद्योग आयोग अधिनियम, 1956 (61 ऑफ 1956) की धारा 2 के खंड (एच) में निहित किसी बात के बावजूद, केंद्र सरकार उपधारा (1) के अंतर्गत किसी वर्ग या वर्गों के उद्यमों का वर्गीकरण करते समय, समय-समय पर निवेश के मानदंड को बदल सकती है और उद्यमों के रोजगार या कारोबार के संबंध में मानदंड या मानकों पर भी विचार कर सकती है और ऐसे वर्गीकरण में सूक्ष्म या लघु उद्यमों या ग्राम उद्यमों को लघु उद्यमों के भाग के रूप में शामिल कर सकती है।
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