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22 प्रविष्टियाँ
धारा 37 - किसी अपराध को गठित करने वाले कई कार्यों में से किसी एक को करके सहयोग करना
किसी अपराध को गठित करने वाले कई कार्यों में से किसी एक को करके सहयोग करना "जबकि कोई अपराध कई कार्यों द्वारा किया जाता है, तब जो कोई या तो अकेले या किसी अन्य व्यक्ति के साथ सम्मिलित होकर उन कार्यों में से कोई एक कार्य करके उस अपराध के किए जाने में साशय सहयोग करता है, वह उस अपराध को करता है । दृष्टांत : (क) क और ख…
पूरा पढ़ेंसामान्य स्पष्टीकरण।
(1) इस संहिता में अपराध की प्रत्येक परिभाषा, प्रत्येक दंड प्रावधान और ऐसी प्रत्येक परिभाषा या दंड प्रावधान के प्रत्येक उदाहरण को सामान्य अपवाद नामक अध्याय में निहित अपवादों के अधीन समझा जाएगा, भले ही वे अपवाद ऐसी परिभाषा, दंड प्रावधान या उदाहरण में दोहराए न गए हों। चित्र। (क) इस संहिता में अपराधों की परिभाषाएँ देने…
पूरा पढ़ेंधारा 99 - कार्य, जिनके विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का कोई अधिकार नहीं है
कार्य, जिनके विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का कोई अधिकार नहीं है यदि कोई कार्य, जिससे मृत्यु या घोर उपहति की आशंका युक्तियुक्त रूप से कारित नहीं होती, सद्भावपूर्वक अपने पदाभास में कार्य करते हुए लोक सेवक द्वारा किया जाता है या किए जाने का प्रयत्न किया जाता है तो उस कार्य के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का कोई अधिकार नहीं…
पूरा पढ़ेंऐसे कृत्य जिनके विरुद्ध आत्मरक्षा का कोई अधिकार नहीं है।
(1) आत्मरक्षा का कोई अधिकार नहीं है, — (क) किसी ऐसे कृत्य के विरुद्ध, जिससे मृत्यु या गंभीर चोट की आशंका उचित रूप से उत्पन्न न हो, यदि वह कृत्य किसी लोक सेवक द्वारा सद्भावनापूर्वक अपने पद के दायित्व का निर्वहन करते हुए किया गया हो, या करने का प्रयास किया गया हो, भले ही वह कृत्य कानून द्वारा सख्ती से न्यायसंगत न हो;…
पूरा पढ़ेंमानव तस्करी।
1 [370. मानव तस्करी। -- (1) जो कोई भी शोषण के उद्देश्य से, (क) भर्ती करता है, (ख) परिवहन करता है, (ग) शरण देता है, (घ) स्थानांतरित करता है, या (ङ) प्राप्त करता है, सबसे पहले , धमकियों का उपयोग करके, या दूसरे , बल प्रयोग करना, या किसी अन्य प्रकार का दबाव डालना, या तीसरा , अपहरण द्वारा, या चौथा ... धोखाधड़ी, छल या कपट…
पूरा पढ़ेंमानव तस्करी।
(1) जो कोई भी शोषण के उद्देश्य से किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को भर्ती करता है, परिवहन करता है, आश्रय देता है, स्थानांतरित करता है या प्राप्त करता है, वह ऐसा करके--- (क) धमकियों का प्रयोग करना; या (ख) बल प्रयोग करना, या किसी अन्य प्रकार का दबाव डालना; या (ग) अपहरण द्वारा; या (घ) धोखाधड़ी या छल करके; या (ई) सत्ता के…
पूरा पढ़ेंधारा 370A - दुर्व्यापार किए गए व्यक्ति का शोषण
दुर्व्यापार किए गए व्यक्ति का शोषण (1) जो कोई, यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि किसी अवयस्क का दुर्व्यापार किया गया है, ऐसे अवयस्क को किसी भी रीति में लैंगिक शोषण के लिए लगाएगा, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष से कम की नहीं होगी, किंतु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और…
पूरा पढ़ेंमानव तस्करी के शिकार व्यक्ति का शोषण।
(1) जो कोई जानबूझकर या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि किसी बच्चे की तस्करी की गई है, ऐसे बच्चे को किसी भी प्रकार से यौन शोषण में लगाता है, उसे कठोर कारावास की सजा दी जाएगी जो पांच वर्ष से कम नहीं होगी, लेकिन दस वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा। (2) जो कोई जानबूझकर या यह विश्वास करने का…
पूरा पढ़ेंधारा 371 - दासों का आभ्यासिक व्यौहार करना
दासों का आभ्यासिक व्यौहार करना जो कोई अभ्यासतः दासों को आयात करेगा, निर्यात करेगा, अपसारित करेगा, खरीदेगा, बेचेगा या उनका दुर्व्यापार या व्यौहार करेगा, वह 6[आजीवन कारावास] से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से अधिक न होगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा
पूरा पढ़ेंगुलामों का नियमित व्यापार।
जो कोई भी नियमित रूप से दासों का आयात, निर्यात, स्थानांतरण, खरीद-बिक्री, व्यापार या लेन-देन करता है, उसे आजीवन कारावास या दस वर्ष से अधिक की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा और उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 372 - वेश्यावॄत्ति आदि के प्रयोजन के लिए अप्राप्तवय को बेचना
वेश्यावॄत्ति आदि के प्रयोजन के लिए अप्राप्तवय को बेचना जो कोई अठारह वर्ष के कम आयु के किसी व्यक्ति को इस आशय से कि ऐसा व्यक्ति किसी आयु में भी वेश्यावॄत्ति या किसी व्यक्ति से अयुक्त संभोग करने के लिए या किसी विधिविरुद्ध और दुराचारिक प्रयोजन के लिए काम में लाया या उपयोग किया जाए या यह सम्भाव्य जानते हुए कि ऐसा व्यक्ति,…
पूरा पढ़ेंवेश्यावृत्ति आदि के उद्देश्य से बच्चों को बेचना।
जो कोई भी किसी बच्चे को इस इरादे से बेचता है, किराए पर देता है या किसी अन्य तरीके से उसका निपटान करता है कि उस बच्चे को किसी भी उम्र में वेश्यावृत्ति या किसी व्यक्ति के साथ अवैध यौन संबंध के लिए या किसी गैरकानूनी और अनैतिक उद्देश्य के लिए नियोजित या उपयोग किया जाएगा, या यह जानते हुए कि उस बच्चे को किसी भी उम्र में ऐसे…
पूरा पढ़ेंधारा 373 - वेश्यावॄत्ति आदि के प्रयोजन के लिए अप्राप्तवय का खरीदना
वेश्यावॄत्ति आदि के प्रयोजन के लिए अप्राप्तवय का खरीदना जो कोई, अठारह वर्ष से कम आयु के किसी व्यक्ति को इस आशय से कि ऐसा व्यक्ति किसी आयु में भी वेश्यावॄत्ति या किसी व्यक्ति से अयुक्त संभोग करने के लिए या किसी विधिविरुद्ध दुराचारिक प्रयोजन के लिए काम में लाया या उपयोग किया जाए या यह संभाव्य जानते हुए कि ऐसा व्यक्ति…
पूरा पढ़ेंवेश्यावृत्ति आदि के उद्देश्य से बच्चे को खरीदना।
जो कोई भी किसी बच्चे को इस इरादे से खरीदता है, किराए पर लेता है या किसी अन्य तरीके से अपने कब्जे में लेता है कि उस बच्चे को किसी भी उम्र में वेश्यावृत्ति या किसी व्यक्ति के साथ अवैध यौन संबंध के लिए या किसी गैरकानूनी और अनैतिक उद्देश्य के लिए नियोजित या उपयोग किया जाएगा, या यह जानते हुए कि उस बच्चे को किसी भी उम्र में…
पूरा पढ़ेंधारा 374 - विधिविरुद्ध अनिवार्य श्रम
विधिविरुद्ध अनिवार्य श्रम जो कोई किसी व्यक्ति को उस व्यक्ति की इच्छा के विरुद्ध श्रम करने के लिए विधिविरुद्ध तौर पर विवश करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
पूरा पढ़ेंगैरकानूनी जबरन श्रम।
जो कोई भी गैरकानूनी रूप से किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध श्रम करने के लिए विवश करता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से एक वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंबलात्कार।
1 [ 2 [375. बलात्कार. -- किसी पुरुष को "बलात्कार" करने वाला तब कहा जाता है जब वह-- (क) किसी महिला की योनि, मुख, मूत्रमार्ग या गुदा में अपना लिंग किसी भी हद तक प्रवेश कराता है या उसे अपने साथ या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा करने के लिए विवश करता है; या (ख) किसी महिला की योनि, मूत्रमार्ग या गुदा में लिंग के अलावा किसी…
पूरा पढ़ेंबलात्कार।
किसी पुरुष को "बलात्कार" का दोषी तब कहा जाता है जब वह... (क) किसी महिला की योनि, मुख, मूत्रमार्ग या गुदा में अपना लिंग किसी भी हद तक प्रवेश कराता है या उसे अपने साथ या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा करने के लिए विवश करता है; या (ख) किसी महिला की योनि, मूत्रमार्ग या गुदा में लिंग के अलावा किसी अन्य वस्तु या शरीर के किसी…
पूरा पढ़ेंधारा 376 - बलात्संग के लिए दण्ड
बलात्संग के लिए दण्ड (1) जो कोई, उपधारा (2) द्वारा उपबन्धित मामलों के सिवाय, बलात्संग करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु जो आजीवन या दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा, सिवाय तब के जब कि वह स्त्री जिसके साथ बलात्संग किया…
पूरा पढ़ेंबलात्कार के लिए सजा।
(1) उपधारा (2) में दिए गए मामलों को छोड़कर, जो कोई बलात्कार करता है, उसे किसी भी प्रकार के कठोर कारावास से कम से कम दस वर्ष की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा, लेकिन जो आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा। (2) जो कोई भी,--- (क) पुलिस अधिकारी होते हुए बलात्कार करता है,--- (i) उस पुलिस…
पूरा पढ़ेंधारा 376 - बलात्संग के लिए दण्ड
बलात्संग के लिए दण्ड (1) जो कोई, उपधारा (2) द्वारा उपबन्धित मामलों के सिवाय, बलात्संग करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु जो आजीवन या दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा, सिवाय तब के जब कि वह स्त्री जिसके साथ बलात्संग किया…
पूरा पढ़ेंकुछ मामलों में बलात्कार के लिए सजा का प्रावधान है।
(1) जो कोई सोलह वर्ष से कम आयु की स्त्री के साथ बलात्कार करता है, उसे कम से कम बीस वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, जिसका अर्थ उस व्यक्ति के शेष प्राकृतिक जीवन के लिए कारावास होगा, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा। बशर्ते कि ऐसा जुर्माना पीड़ित के चिकित्सा खर्च और…
पूरा पढ़ेंधारा 376A - पॄथक् कर दिए जाने के दौरान किसी पुरुष द्वारा अपनी पत्नी के साथ संभोग्र
पॄथक् कर दिए जाने के दौरान किसी पुरुष द्वारा अपनी पत्नी के साथ संभोग्र जो कोई अपनी पत्नी के साथ, जो पॄथक्करण की किसी डिक्री के अधीन या किसी प्रथा अथवा रूढ़ि के अधीन, उससे पॄथक् रह रही है, उसकी सम्मति के बिना उसके साथ मैथुन करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया…
पूरा पढ़ेंपीड़ित की मृत्यु का कारण बनने या उसे स्थायी रूप से कोमा जैसी स्थिति में पहुंचाने के लिए दी जाने वाली सजा।
जो कोई भी धारा 64 की उपधारा (1) या उपधारा (2) के तहत दंडनीय अपराध करता है और ऐसे अपराध के दौरान ऐसी चोट पहुंचाता है जिससे महिला की मृत्यु हो जाती है या महिला स्थायी रूप से कोमा जैसी स्थिति में चली जाती है, उसे कम से कम बीस वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, जिसका अर्थ उस…
पूरा पढ़ेंधारा 376AB - बारह वर्ष से कम आयु की स्त्री से बलात्संग के लिए दंड
बारह वर्ष से कम आयु की स्त्री से बलात्संग के लिए दंड जो कोई बारह वर्ष से कम आयु की किसी स्त्री से बलात्संग करेगा, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि बीस वर्ष से कम की नहीं होगी, किंतु जो आजीवन कारावास तक की, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत होगा, हो सकेगी, और जुर्माने से, या मृत्युदंड से,…
पूरा पढ़ेंकुछ मामलों में बलात्कार के लिए सजा का प्रावधान है।
(1) जो कोई सोलह वर्ष से कम आयु की स्त्री के साथ बलात्कार करता है, उसे कम से कम बीस वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, जिसका अर्थ उस व्यक्ति के शेष प्राकृतिक जीवन के लिए कारावास होगा, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा। बशर्ते कि ऐसा जुर्माना पीड़ित के चिकित्सा खर्च और…
पूरा पढ़ेंधारा 376B - लोक सेवक द्वारा अपनी अभिरक्षा में की किसी स्त्री के साथ संभोग
लोक सेवक द्वारा अपनी अभिरक्षा में की किसी स्त्री के साथ संभोग जो कोई, लोक सेवक होते हुए अपनी शासकीय स्थिति का लाभ उठाकर किसी स्त्री को जो ऐसे लोक सेवक के रूप में उसकी अभिरक्षा में है, या उसके अधीनस्थ किसी लोक सेवक की अभिरक्षा में है, ऐसा मैथुन करने के लिए उत्प्रेरित या विलुब्ध करेगा, जो बलात्संग के अपराध की कोटि में…
पूरा पढ़ेंपति द्वारा अपनी पत्नी से अलग रहने के दौरान उसके साथ यौन संबंध बनाना।
जो कोई भी अपनी पत्नी के साथ, जो अलग रह रही हो (चाहे वह तलाक के आदेश के तहत हो या अन्यथा), उसकी सहमति के बिना यौन संबंध बनाता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास की सजा दी जाएगी, जिसकी अवधि दो वर्ष से कम नहीं होगी, लेकिन सात वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा। स्पष्टीकरण.—इस धारा में, “यौन संबंध”…
पूरा पढ़ेंधारा 376C - जेल, प्रतिप्रेषण गॄह आदि के अधीक्षक द्वारा संभोग
जेल, प्रतिप्रेषण गॄह आदि के अधीक्षक द्वारा संभोग जो कोई किसी जेल, प्रतिप्रेषण गॄह या अभिरक्षा के ऐसे अन्य स्थान का जो तत्समय प्रवॄत्त किसी विधि द्वारा या उसके अधीन स्थापित किया गया है या स्त्रियों या बालकों की किसी संस्था का अधीक्षक या प्रबन्धक होते हुए अपनी शासकीय स्थिति का लाभ उठाकर जेल, प्रतिप्रेषण गॄह, स्थान या…
पूरा पढ़ेंप्राधिकारी पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा यौन संबंध।
जो कोई भी हो--- (क) अधिकार के पद पर या न्यासी संबंध में; या (ख) लोक सेवक; या (ग) किसी कारागार, सुधारगृह या किसी अन्य हिरासत स्थल का अधीक्षक या प्रबंधक, जो उस समय लागू किसी कानून द्वारा या उसके तहत स्थापित किया गया हो, या किसी महिला या बाल संस्था का अधीक्षक या प्रबंधक; या (घ) किसी अस्पताल के प्रबंधन पर या किसी अस्पताल…
पूरा पढ़ेंधारा 376D - अस्पताल के प्रबन्ध या कर्मचारिवॄन्द आदि के किसी सदस्य द्वारा उस अस्पताल में किसी स्त्री के साथ संभोग
अस्पताल के प्रबन्ध या कर्मचारिवॄन्द आदि के किसी सदस्य द्वारा उस अस्पताल में किसी स्त्री के साथ संभोग जो कोई, किसी अस्पताल के प्रबन्ध में होते हुए या किसी अस्पताल के कर्मचारिवॄन्द में होते हुए, अपनी शासकीय स्थिति का लाभ उठाकर और किसी स्त्री के साथ, जो उस अस्पताल में है, ऐसा मैथुन करेगा जो ब्लात्संग की कोटि में नहीं आता…
पूरा पढ़ेंसामूहिक बलात्कार।
(1) यदि किसी महिला के साथ एक या एक से अधिक व्यक्तियों द्वारा बलात्कार किया जाता है जो एक समूह का गठन करते हैं या किसी सामान्य इरादे को आगे बढ़ाने के लिए कार्य करते हैं, तो उनमें से प्रत्येक व्यक्ति को बलात्कार का अपराध करने वाला माना जाएगा और उसे कम से कम बीस वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे आजीवन…
पूरा पढ़ेंधारा 376DA - सोलह वर्ष से कम आयु की स्त्री से सामूहिक बलात्संग के लिए दंड
सोलह वर्ष से कम आयु की स्त्री से सामूहिक बलात्संग के लिए दंड जहां सोलह वर्ष से कम आयु की किसी स्त्री से, एक या अधिक व्यक्तियों द्वारा, जो एक समूह गठित करके या सामान्य आशय को अग्रसर करने में कार्य कर रहे हैं, बलात्संग किया जाता है, वहां उन व्यक्तियों में से प्रत्येक के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने बलात्संग का अपराध…
पूरा पढ़ेंसामूहिक बलात्कार।
(1) यदि किसी महिला के साथ एक या एक से अधिक व्यक्तियों द्वारा बलात्कार किया जाता है जो एक समूह का गठन करते हैं या किसी सामान्य इरादे को आगे बढ़ाने के लिए कार्य करते हैं, तो उनमें से प्रत्येक व्यक्ति को बलात्कार का अपराध करने वाला माना जाएगा और उसे कम से कम बीस वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे आजीवन…
पूरा पढ़ेंधारा 376DB - बारह वर्ष से कम आयु की स्त्री से सामूहिक बलात्संग के लिए दंड
बारह वर्ष से कम आयु की स्त्री से सामूहिक बलात्संग के लिए दंड जहां बारह वर्ष से कम आयु की किसी स्त्री से, एक या अधिक व्यक्तियों द्वारा, जो एक समूह गठित करके या सामान्य आशय को अग्रसर करने में कार्य कर रहे हैं, बलात्संग किया जाता है, वहां उन व्यक्तियों में से प्रत्येक के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने बलात्संग का अपराध…
पूरा पढ़ेंसामूहिक बलात्कार।
(1) यदि किसी महिला के साथ एक या एक से अधिक व्यक्तियों द्वारा बलात्कार किया जाता है जो एक समूह का गठन करते हैं या किसी सामान्य इरादे को आगे बढ़ाने के लिए कार्य करते हैं, तो उनमें से प्रत्येक व्यक्ति को बलात्कार का अपराध करने वाला माना जाएगा और उसे कम से कम बीस वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे आजीवन…
पूरा पढ़ेंधारा 376E - पुनरावृत्ति करने वाले अपराधियों के लिए दंड
पुनरावृत्ति करने वाले अपराधियों के लिए दंड जो कोई धारा 376 या धारा 376क या धारा 376कख या धारा 376घ या धारा 376घक या धारा 376घख के अधीन दंडनीय किसी अपराध के लिए पूर्व में सिद्धदोष ठहराया जा चुका है और तत्पश्चात् उक्त धाराओं में से किसी के अधीन दंडनीय किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया जाता है, वह आजीवन कारावास से, जिससे…
पूरा पढ़ेंबार-बार अपराध करने वालों के लिए दंड।
जो कोई भी पहले धारा 64 या धारा 65 या धारा 66 या धारा 70 के तहत दंडनीय अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो और बाद में उक्त धाराओं में से किसी के तहत दंडनीय अपराध के लिए दोषी ठहराया जाता है, उसे आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी, जिसका अर्थ उस व्यक्ति के प्राकृतिक जीवन के शेष समय के लिए कारावास होगा, या मृत्युदंड दिया जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 377 - प्रकॄति विरुद्ध अपराध
प्रकॄति विरुद्ध अपराध जो कोई किसी पुरुष, स्त्री या जीवजन्तु के साथ प्रकॄति की व्यवस्था के विरुद्ध स्वेच्छया इन्द्रियभोग करेगा वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा । स्पष्टीकरण - इस धारा में वर्णित अपराध के लिए…
पूरा पढ़ेंहटाई गई धारा
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धारा 378 - चोरी
चोरी जो कोई किसी व्यक्ति के कब्जे में से, उस व्यक्ति की सम्मति के बिना, कोई जंगम सम्पत्ति बेईमानी से ले लेने का आशय रखते हुए वह सम्पत्ति ऐसे लेने के लिए हटाता है, वह चोरी करता है, यह कहा जाता है । स्पष्टीकरण 1 - जब तक कोई वस्तु भूबद्ध रहती है, जंगम सम्पत्ति न होने से चोरी का विषय नहीं होती ; किन्तु ज्यों ही वह भूमि से…
पूरा पढ़ेंचोरी।
(1) जो कोई भी किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसके कब्जे से कोई चल संपत्ति बेईमानी से लेने के इरादे से, उस संपत्ति को इस प्रकार लेने के लिए ले जाता है, तो वह चोरी करता है। स्पष्टीकरण 1. —जब तक कोई वस्तु पृथ्वी से जुड़ी रहती है, वह चल संपत्ति न होने के कारण चोरी का विषय नहीं होती; परन्तु जैसे ही वह पृथ्वी से अलग हो जाती…
पूरा पढ़ेंधारा 379 - चोरी के लिए दंड
चोरी के लिए दंड जो कोई चोरी करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
पूरा पढ़ेंचोरी।
(1) जो कोई भी किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसके कब्जे से कोई चल संपत्ति बेईमानी से लेने के इरादे से, उस संपत्ति को इस प्रकार लेने के लिए ले जाता है, तो वह चोरी करता है। स्पष्टीकरण 1. —जब तक कोई वस्तु पृथ्वी से जुड़ी रहती है, वह चल संपत्ति न होने के कारण चोरी का विषय नहीं होती; परन्तु जैसे ही वह पृथ्वी से अलग हो जाती…
पूरा पढ़ें- IPC §37BNS §3(8)
धारा 37 - किसी अपराध को गठित करने वाले कई कार्यों में से किसी एक को करके सहयोग करना
सामान्य स्पष्टीकरण।
- IPC §99BNS §37
धारा 99 - कार्य, जिनके विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का कोई अधिकार नहीं है
ऐसे कृत्य जिनके विरुद्ध आत्मरक्षा का कोई अधिकार नहीं है।
- IPC §370BNS §143
मानव तस्करी।
- IPC §370ABNS §144
धारा 370A - दुर्व्यापार किए गए व्यक्ति का शोषण
मानव तस्करी के शिकार व्यक्ति का शोषण।
- IPC §371BNS §145
धारा 371 - दासों का आभ्यासिक व्यौहार करना
गुलामों का नियमित व्यापार।
- IPC §372BNS §98
धारा 372 - वेश्यावॄत्ति आदि के प्रयोजन के लिए अप्राप्तवय को बेचना
वेश्यावृत्ति आदि के उद्देश्य से बच्चों को बेचना।
- IPC §373BNS §99
धारा 373 - वेश्यावॄत्ति आदि के प्रयोजन के लिए अप्राप्तवय का खरीदना
वेश्यावृत्ति आदि के उद्देश्य से बच्चे को खरीदना।
- IPC §374BNS §146
धारा 374 - विधिविरुद्ध अनिवार्य श्रम
गैरकानूनी जबरन श्रम।
- IPC §375BNS §63
बलात्कार।
- IPC §376BNS §64
धारा 376 - बलात्संग के लिए दण्ड
बलात्कार के लिए सजा।
- IPC §376(3)BNS §65(1)
धारा 376 - बलात्संग के लिए दण्ड
कुछ मामलों में बलात्कार के लिए सजा का प्रावधान है।
- IPC §376ABNS §66
धारा 376A - पॄथक् कर दिए जाने के दौरान किसी पुरुष द्वारा अपनी पत्नी के साथ संभोग्र
पीड़ित की मृत्यु का कारण बनने या उसे स्थायी रूप से कोमा जैसी स्थिति में पहुंचाने के लिए दी जाने वाली सजा।
- IPC §376ABBNS §65(2)
धारा 376AB - बारह वर्ष से कम आयु की स्त्री से बलात्संग के लिए दंड
कुछ मामलों में बलात्कार के लिए सजा का प्रावधान है।
- IPC §376BBNS §67
धारा 376B - लोक सेवक द्वारा अपनी अभिरक्षा में की किसी स्त्री के साथ संभोग
पति द्वारा अपनी पत्नी से अलग रहने के दौरान उसके साथ यौन संबंध बनाना।
- IPC §376CBNS §68
धारा 376C - जेल, प्रतिप्रेषण गॄह आदि के अधीक्षक द्वारा संभोग
प्राधिकारी पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा यौन संबंध।
- IPC §376DBNS §70(1)
धारा 376D - अस्पताल के प्रबन्ध या कर्मचारिवॄन्द आदि के किसी सदस्य द्वारा उस अस्पताल में किसी स्त्री के साथ संभोग
सामूहिक बलात्कार।
- IPC §376DABNS §70(2)
धारा 376DA - सोलह वर्ष से कम आयु की स्त्री से सामूहिक बलात्संग के लिए दंड
सामूहिक बलात्कार।
- IPC §376DBBNS §70
धारा 376DB - बारह वर्ष से कम आयु की स्त्री से सामूहिक बलात्संग के लिए दंड
सामूहिक बलात्कार।
- IPC §376EBNS §71
धारा 376E - पुनरावृत्ति करने वाले अपराधियों के लिए दंड
बार-बार अपराध करने वालों के लिए दंड।
- IPC §377BNS §DELETED
धारा 377 - प्रकॄति विरुद्ध अपराध
हटाई गई धारा
IPC §377BNS §DELETED - IPC §378BNS §303(1)
धारा 378 - चोरी
चोरी।
- IPC §379BNS §303(2)
धारा 379 - चोरी के लिए दंड
चोरी।
