SRFAESI Act 5अध्याय II · Regulation of Securitisation and Reconstruction of Financialassets of Banks and Financialinstitutions
धारा 5 · वित्तीय परिसंपत्तियों में अधिकार या हित का अधिग्रहण।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) किसी समझौते या किसी अन्य कानून में निहित किसी बात के बावजूद, कोई [संपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी] किसी बैंक या वित्तीय संस्था की वित्तीय संपत्तियों का अधिग्रहण कर सकती है--
(क) ऐसी कंपनी और बैंक या वित्तीय संस्था के बीच सहमत प्रतिफल के बदले में, जिसमें उनके बीच सहमत शर्तें और नियम शामिल हों, एक डिबेंचर या बॉन्ड या डिबेंचर की प्रकृति की कोई अन्य प्रतिभूति जारी करके; या
(ख) ऐसे बैंक या वित्तीय संस्था के साथ ऐसे वित्तीय परिसंपत्तियों को ऐसी कंपनी को हस्तांतरित करने के लिए ऐसे नियम और शर्तों पर समझौता करके, जैसा कि उनके बीच सहमति हो सकती है।
2 [(1ए) परिसंपत्ति पुनर्निर्माण या प्रतिभूतिकरण के प्रयोजनों के लिए वित्तीय परिसंपत्तियों का अधिग्रहण करने वाली परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी के पक्ष में उप-धारा (1) के तहत किसी बैंक या वित्तीय संस्था द्वारा निष्पादित कोई भी दस्तावेज भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (1899 का 2) की धारा 8एफ के प्रावधानों के अनुसार स्टाम्प शुल्क से छूट प्राप्त होगा:
बशर्ते कि इस उपधारा के प्रावधान वहां लागू नहीं होंगे जहां परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी द्वारा वित्तीय परिसंपत्तियों का अधिग्रहण परिसंपत्ति पुनर्निर्माण या प्रतिभूतिकरण के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए किया गया हो।
(2) यदि बैंक या वित्तीय संस्था उप-धारा (1) के तहत 3 [संपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी] द्वारा अधिग्रहित किसी वित्तीय परिसंपत्ति के संबंध में ऋणदाता है, तो ऐसी 4 [संपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी] को ऐसे अधिग्रहण पर ऋणदाता माना जाएगा और ऐसे बैंक या वित्तीय संस्था के सभी अधिकार ऐसी वित्तीय परिसंपत्तियों के संबंध में ऐसी कंपनी में निहित होंगे।
2 [(2ए) यदि बैंक या वित्तीय संस्था किसी मूर्त या अमूर्त संपत्ति पर किसी अवैतनिक क्रय मूल्य के भुगतान या उधारकर्ता को मूर्त संपत्ति प्राप्त करने या अमूर्त संपत्ति का आवंटन या लाइसेंस प्रदान करने के लिए किए गए दायित्व या ऋण के भुगतान को सुरक्षित करने के लिए कोई अधिकार, स्वामित्व या हित धारण करती है, तो उप-धारा (1) के तहत ऐसी संपत्तियों के अधिग्रहण पर ऐसा अधिकार, स्वामित्व या हित परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी में निहित हो जाएगा।]
(3) जब तक इस अधिनियम द्वारा स्पष्ट रूप से अन्यथा प्रावधान न किया गया हो, उक्त वित्तीय परिसंपत्ति से संबंधित सभी अनुबंध, विलेख, बांड, समझौते, अभिरक्षा पत्र, कानूनी प्रतिनिधित्व के अनुदान, अनुमतियाँ, अनुमोदन, सहमति या किसी कानून के तहत अनापत्ति या अन्यथा तथा किसी भी प्रकृति के अन्य दस्तावेज जो उप-धारा (1) के तहत वित्तीय परिसंपत्ति के अधिग्रहण से ठीक पहले विद्यमान या प्रभावी हैं तथा जिनमें संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था एक पक्षकार है या जो ऐसे बैंक या वित्तीय संस्था के पक्ष में हैं, वित्तीय परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के बाद, 4 [परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी], जैसा भी मामला हो, के विरुद्ध या उसके पक्ष में पूर्ण रूप से लागू और प्रभावी होंगे तथा उन पर पूर्ण और प्रभावी रूप से प्रवर्तन या कार्रवाई की जा सकती है मानो उक्त बैंक या वित्तीय संस्था के स्थान पर, 4 [परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी], जैसा भी मामला हो, एक पक्षकार होती या मानो वे 4 [परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी], जैसा भी मामला हो, के पक्ष में जारी किए गए होते।
(4) यदि उपधारा (1) के तहत वित्तीय परिसंपत्ति के अधिग्रहण की तिथि पर उक्त वित्तीय परिसंपत्ति से संबंधित किसी भी प्रकार का कोई मुकदमा, अपील या अन्य कार्यवाही बैंक या वित्तीय संस्था द्वारा या उसके विरुद्ध लंबित है, तो बीमार औद्योगिक कंपनियां (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1985 (1 ऑफ 1986) की धारा 15 की उपधारा (1) के तीसरे परंतुक में दिए गए प्रावधानों को छोड़कर , वित्तीय परिसंपत्ति के अधिग्रहण के कारण, जैसा भी मामला हो, वह कार्यवाही समाप्त नहीं होगी, न ही उसे बंद किया जाएगा, और न ही उस पर किसी भी प्रकार से प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, बल्कि मुकदमा, अपील या अन्य कार्यवाही को जैसा भी मामला हो, उसके द्वारा या उसके विरुद्ध जारी रखा जा सकता है, उस पर मुकदमा चलाया जा सकता है और उसे लागू किया जा सकता है।
5 [(5) उपधारा (1) के अधीन वित्तीय परिसंपत्तियों के अधिग्रहण पर, परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी, मूलकर्ता की सहमति से, किसी लंबित मुकदमे, अपील या अन्य कार्यवाही में अपना नाम प्रतिस्थापित करने के उद्देश्य से ऋण वसूली न्यायाधिकरण या अपीलीय न्यायाधिकरण या किसी न्यायालय या अन्य प्राधिकरण के समक्ष आवेदन कर सकती है और ऐसे आवेदन की प्राप्ति पर, ऋण वसूली न्यायाधिकरण या अपीलीय न्यायाधिकरण या न्यायालय या प्राधिकरण ऐसे लंबित मुकदमे, अपील या अन्य कार्यवाही में परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी के नाम को प्रतिस्थापित करने के लिए आदेश पारित करेगा।]
(क) ऐसी कंपनी और बैंक या वित्तीय संस्था के बीच सहमत प्रतिफल के बदले में, जिसमें उनके बीच सहमत शर्तें और नियम शामिल हों, एक डिबेंचर या बॉन्ड या डिबेंचर की प्रकृति की कोई अन्य प्रतिभूति जारी करके; या
(ख) ऐसे बैंक या वित्तीय संस्था के साथ ऐसे वित्तीय परिसंपत्तियों को ऐसी कंपनी को हस्तांतरित करने के लिए ऐसे नियम और शर्तों पर समझौता करके, जैसा कि उनके बीच सहमति हो सकती है।
2 [(1ए) परिसंपत्ति पुनर्निर्माण या प्रतिभूतिकरण के प्रयोजनों के लिए वित्तीय परिसंपत्तियों का अधिग्रहण करने वाली परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी के पक्ष में उप-धारा (1) के तहत किसी बैंक या वित्तीय संस्था द्वारा निष्पादित कोई भी दस्तावेज भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (1899 का 2) की धारा 8एफ के प्रावधानों के अनुसार स्टाम्प शुल्क से छूट प्राप्त होगा:
बशर्ते कि इस उपधारा के प्रावधान वहां लागू नहीं होंगे जहां परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी द्वारा वित्तीय परिसंपत्तियों का अधिग्रहण परिसंपत्ति पुनर्निर्माण या प्रतिभूतिकरण के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए किया गया हो।
(2) यदि बैंक या वित्तीय संस्था उप-धारा (1) के तहत 3 [संपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी] द्वारा अधिग्रहित किसी वित्तीय परिसंपत्ति के संबंध में ऋणदाता है, तो ऐसी 4 [संपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी] को ऐसे अधिग्रहण पर ऋणदाता माना जाएगा और ऐसे बैंक या वित्तीय संस्था के सभी अधिकार ऐसी वित्तीय परिसंपत्तियों के संबंध में ऐसी कंपनी में निहित होंगे।
2 [(2ए) यदि बैंक या वित्तीय संस्था किसी मूर्त या अमूर्त संपत्ति पर किसी अवैतनिक क्रय मूल्य के भुगतान या उधारकर्ता को मूर्त संपत्ति प्राप्त करने या अमूर्त संपत्ति का आवंटन या लाइसेंस प्रदान करने के लिए किए गए दायित्व या ऋण के भुगतान को सुरक्षित करने के लिए कोई अधिकार, स्वामित्व या हित धारण करती है, तो उप-धारा (1) के तहत ऐसी संपत्तियों के अधिग्रहण पर ऐसा अधिकार, स्वामित्व या हित परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी में निहित हो जाएगा।]
(3) जब तक इस अधिनियम द्वारा स्पष्ट रूप से अन्यथा प्रावधान न किया गया हो, उक्त वित्तीय परिसंपत्ति से संबंधित सभी अनुबंध, विलेख, बांड, समझौते, अभिरक्षा पत्र, कानूनी प्रतिनिधित्व के अनुदान, अनुमतियाँ, अनुमोदन, सहमति या किसी कानून के तहत अनापत्ति या अन्यथा तथा किसी भी प्रकृति के अन्य दस्तावेज जो उप-धारा (1) के तहत वित्तीय परिसंपत्ति के अधिग्रहण से ठीक पहले विद्यमान या प्रभावी हैं तथा जिनमें संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था एक पक्षकार है या जो ऐसे बैंक या वित्तीय संस्था के पक्ष में हैं, वित्तीय परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के बाद, 4 [परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी], जैसा भी मामला हो, के विरुद्ध या उसके पक्ष में पूर्ण रूप से लागू और प्रभावी होंगे तथा उन पर पूर्ण और प्रभावी रूप से प्रवर्तन या कार्रवाई की जा सकती है मानो उक्त बैंक या वित्तीय संस्था के स्थान पर, 4 [परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी], जैसा भी मामला हो, एक पक्षकार होती या मानो वे 4 [परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी], जैसा भी मामला हो, के पक्ष में जारी किए गए होते।
(4) यदि उपधारा (1) के तहत वित्तीय परिसंपत्ति के अधिग्रहण की तिथि पर उक्त वित्तीय परिसंपत्ति से संबंधित किसी भी प्रकार का कोई मुकदमा, अपील या अन्य कार्यवाही बैंक या वित्तीय संस्था द्वारा या उसके विरुद्ध लंबित है, तो बीमार औद्योगिक कंपनियां (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1985 (1 ऑफ 1986) की धारा 15 की उपधारा (1) के तीसरे परंतुक में दिए गए प्रावधानों को छोड़कर , वित्तीय परिसंपत्ति के अधिग्रहण के कारण, जैसा भी मामला हो, वह कार्यवाही समाप्त नहीं होगी, न ही उसे बंद किया जाएगा, और न ही उस पर किसी भी प्रकार से प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, बल्कि मुकदमा, अपील या अन्य कार्यवाही को जैसा भी मामला हो, उसके द्वारा या उसके विरुद्ध जारी रखा जा सकता है, उस पर मुकदमा चलाया जा सकता है और उसे लागू किया जा सकता है।
5 [(5) उपधारा (1) के अधीन वित्तीय परिसंपत्तियों के अधिग्रहण पर, परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी, मूलकर्ता की सहमति से, किसी लंबित मुकदमे, अपील या अन्य कार्यवाही में अपना नाम प्रतिस्थापित करने के उद्देश्य से ऋण वसूली न्यायाधिकरण या अपीलीय न्यायाधिकरण या किसी न्यायालय या अन्य प्राधिकरण के समक्ष आवेदन कर सकती है और ऐसे आवेदन की प्राप्ति पर, ऋण वसूली न्यायाधिकरण या अपीलीय न्यायाधिकरण या न्यायालय या प्राधिकरण ऐसे लंबित मुकदमे, अपील या अन्य कार्यवाही में परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी के नाम को प्रतिस्थापित करने के लिए आदेश पारित करेगा।]
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