SRFAESI Act 14अध्याय III · Enforcement of Security Interest
धारा 14 · मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट, सुरक्षित लेनदार को सुरक्षित संपत्ति पर कब्जा लेने में सहायता करेंगे।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जहाँ किसी सुरक्षित परिसंपत्ति का कब्ज़ा सुरक्षित लेनदार द्वारा लिया जाना आवश्यक हो, या यदि किसी सुरक्षित परिसंपत्ति को इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन सुरक्षित लेनदार द्वारा बेचा या हस्तांतरित किया जाना आवश्यक हो, तो सुरक्षित लेनदार ऐसी किसी सुरक्षित परिसंपत्ति का कब्ज़ा या नियंत्रण लेने के उद्देश्य से, मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट, जिसके अधिकार क्षेत्र में ऐसी कोई सुरक्षित परिसंपत्ति या उससे संबंधित अन्य दस्तावेज स्थित हों, को लिखित में उस परिसंपत्ति का कब्ज़ा लेने का अनुरोध कर सकता है, और मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या, जैसा भी मामला हो, जिला मजिस्ट्रेट, ऐसा अनुरोध प्राप्त होने पर—
(क) ऐसी संपत्ति और उससे संबंधित दस्तावेजों पर कब्जा कर लेना; और
(ख) ऐसी संपत्ति और दस्तावेजों को सुरक्षित लेनदार को अग्रेषित करना:
1. बशर्ते कि सुरक्षित लेनदार द्वारा किए गए किसी भी आवेदन के साथ सुरक्षित लेनदार के अधिकृत अधिकारी द्वारा विधिवत प्रमाणित शपथपत्र संलग्न होना चाहिए, जिसमें यह घोषित किया गया हो कि---
(i) आवेदन दाखिल करने की तिथि तक दी गई वित्तीय सहायता की कुल राशि और बैंक का कुल दावा;
(ii) उधारकर्ता ने विभिन्न संपत्तियों पर सुरक्षा हित बनाया है और बैंक या वित्तीय संस्था ऐसी संपत्तियों पर वैध और विद्यमान सुरक्षा हित रखती है और बैंक या वित्तीय संस्था का दावा परिसीमा अवधि के भीतर है;
(iii) उधारकर्ता ने उप-खंड (ii) में उल्लिखित संपत्तियों का विवरण देते हुए विभिन्न संपत्तियों पर सुरक्षा हित स्थापित किया है;
(iv) उधारकर्ता ने निर्दिष्ट राशि के बराबर वित्तीय सहायता के पुनर्भुगतान में चूक की है;
(v) वित्तीय सहायता के पुनर्भुगतान में ऐसी चूक के परिणामस्वरूप उधारकर्ता के खाते को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति के रूप में वर्गीकृत किया गया है;
(vi) यह पुष्टि करना कि धारा 13 की उपधारा (2) के प्रावधानों के अनुसार, चूक की गई वित्तीय सहायता के भुगतान की मांग करते हुए, साठ दिनों की नोटिस अवधि उधारकर्ता को दी जा चुकी है;
(vii) उधारकर्ता से प्राप्त नोटिस के उत्तर में आपत्ति या अभ्यावेदन पर सुरक्षित लेनदार द्वारा विचार किया गया है और ऐसी आपत्ति या अभ्यावेदन को अस्वीकार करने के कारणों की सूचना उधारकर्ता को दे दी गई है;
(viii) उधारकर्ता ने उपरोक्त सूचना के बावजूद वित्तीय सहायता का कोई पुनर्भुगतान नहीं किया है और इसलिए अधिकृत अधिकारी मूल अधिनियम की धारा 13 की उपधारा (4) के प्रावधानों के तहत धारा 14 के साथ पढ़ी गई धारा के तहत सुरक्षित परिसंपत्तियों पर कब्जा करने का हकदार है;
(ix) कि इस अधिनियम और इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के प्रावधानों का अनुपालन किया गया है:
इसके अलावा, अधिकृत अधिकारी से शपथ पत्र प्राप्त होने पर, जिला मजिस्ट्रेट या मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट, जैसा भी मामला हो, शपथ पत्र की सामग्री से संतुष्ट होने के बाद, सुरक्षित परिसंपत्तियों पर कब्जा लेने के उद्देश्य से उपयुक्त आदेश पारित करेगा [ आवेदन की तिथि से तीस दिनों की अवधि के भीतर:]
2 [यह भी प्रावधान है कि यदि मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा उक्त तीस दिनों की अवधि के भीतर उनके नियंत्रण से परे कारणों से कोई आदेश पारित नहीं किया जाता है, तो वे इसके लिए लिखित रूप में कारण दर्ज करने के बाद, ऐसी अतिरिक्त अवधि के भीतर आदेश पारित कर सकते हैं, लेकिन कुल मिलाकर साठ दिनों से अधिक नहीं।]
इसके अलावा, प्रथम परंतुक में उल्लिखित शपथपत्र दाखिल करने की आवश्यकता, इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि को किसी जिला मजिस्ट्रेट या मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट के समक्ष लंबित कार्यवाही पर लागू नहीं होगी।
3 [(1ए) जिला मजिस्ट्रेट या मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी को अधिकृत कर सकता है,--
(i) ऐसी संपत्तियों और उनसे संबंधित दस्तावेजों पर कब्जा लेना; और
(ii) ऐसी संपत्तियों और दस्तावेजों को सुरक्षित लेनदार को अग्रेषित करना।]
(2) उपधारा (1) के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट ऐसे कदम उठा सकता है या उठवा सकता है तथा ऐसे बल का प्रयोग कर सकता है या करवा सकता है, जो उसकी राय में आवश्यक हो।
(3) मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट 1 [मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कोई अधिकारी] द्वारा इस धारा के अनुसरण में किया गया कोई भी कार्य किसी न्यायालय में या किसी प्राधिकरण के समक्ष प्रश्न में नहीं उठाया जाएगा।
(क) ऐसी संपत्ति और उससे संबंधित दस्तावेजों पर कब्जा कर लेना; और
(ख) ऐसी संपत्ति और दस्तावेजों को सुरक्षित लेनदार को अग्रेषित करना:
1. बशर्ते कि सुरक्षित लेनदार द्वारा किए गए किसी भी आवेदन के साथ सुरक्षित लेनदार के अधिकृत अधिकारी द्वारा विधिवत प्रमाणित शपथपत्र संलग्न होना चाहिए, जिसमें यह घोषित किया गया हो कि---
(i) आवेदन दाखिल करने की तिथि तक दी गई वित्तीय सहायता की कुल राशि और बैंक का कुल दावा;
(ii) उधारकर्ता ने विभिन्न संपत्तियों पर सुरक्षा हित बनाया है और बैंक या वित्तीय संस्था ऐसी संपत्तियों पर वैध और विद्यमान सुरक्षा हित रखती है और बैंक या वित्तीय संस्था का दावा परिसीमा अवधि के भीतर है;
(iii) उधारकर्ता ने उप-खंड (ii) में उल्लिखित संपत्तियों का विवरण देते हुए विभिन्न संपत्तियों पर सुरक्षा हित स्थापित किया है;
(iv) उधारकर्ता ने निर्दिष्ट राशि के बराबर वित्तीय सहायता के पुनर्भुगतान में चूक की है;
(v) वित्तीय सहायता के पुनर्भुगतान में ऐसी चूक के परिणामस्वरूप उधारकर्ता के खाते को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति के रूप में वर्गीकृत किया गया है;
(vi) यह पुष्टि करना कि धारा 13 की उपधारा (2) के प्रावधानों के अनुसार, चूक की गई वित्तीय सहायता के भुगतान की मांग करते हुए, साठ दिनों की नोटिस अवधि उधारकर्ता को दी जा चुकी है;
(vii) उधारकर्ता से प्राप्त नोटिस के उत्तर में आपत्ति या अभ्यावेदन पर सुरक्षित लेनदार द्वारा विचार किया गया है और ऐसी आपत्ति या अभ्यावेदन को अस्वीकार करने के कारणों की सूचना उधारकर्ता को दे दी गई है;
(viii) उधारकर्ता ने उपरोक्त सूचना के बावजूद वित्तीय सहायता का कोई पुनर्भुगतान नहीं किया है और इसलिए अधिकृत अधिकारी मूल अधिनियम की धारा 13 की उपधारा (4) के प्रावधानों के तहत धारा 14 के साथ पढ़ी गई धारा के तहत सुरक्षित परिसंपत्तियों पर कब्जा करने का हकदार है;
(ix) कि इस अधिनियम और इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के प्रावधानों का अनुपालन किया गया है:
इसके अलावा, अधिकृत अधिकारी से शपथ पत्र प्राप्त होने पर, जिला मजिस्ट्रेट या मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट, जैसा भी मामला हो, शपथ पत्र की सामग्री से संतुष्ट होने के बाद, सुरक्षित परिसंपत्तियों पर कब्जा लेने के उद्देश्य से उपयुक्त आदेश पारित करेगा [ आवेदन की तिथि से तीस दिनों की अवधि के भीतर:]
2 [यह भी प्रावधान है कि यदि मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा उक्त तीस दिनों की अवधि के भीतर उनके नियंत्रण से परे कारणों से कोई आदेश पारित नहीं किया जाता है, तो वे इसके लिए लिखित रूप में कारण दर्ज करने के बाद, ऐसी अतिरिक्त अवधि के भीतर आदेश पारित कर सकते हैं, लेकिन कुल मिलाकर साठ दिनों से अधिक नहीं।]
इसके अलावा, प्रथम परंतुक में उल्लिखित शपथपत्र दाखिल करने की आवश्यकता, इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि को किसी जिला मजिस्ट्रेट या मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट के समक्ष लंबित कार्यवाही पर लागू नहीं होगी।
3 [(1ए) जिला मजिस्ट्रेट या मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी को अधिकृत कर सकता है,--
(i) ऐसी संपत्तियों और उनसे संबंधित दस्तावेजों पर कब्जा लेना; और
(ii) ऐसी संपत्तियों और दस्तावेजों को सुरक्षित लेनदार को अग्रेषित करना।]
(2) उपधारा (1) के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट ऐसे कदम उठा सकता है या उठवा सकता है तथा ऐसे बल का प्रयोग कर सकता है या करवा सकता है, जो उसकी राय में आवश्यक हो।
(3) मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट 1 [मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कोई अधिकारी] द्वारा इस धारा के अनुसरण में किया गया कोई भी कार्य किसी न्यायालय में या किसी प्राधिकरण के समक्ष प्रश्न में नहीं उठाया जाएगा।
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
