PSS Act 7अध्याय III · Authorisation of Payment Systems
धारा 7 · प्राधिकरण जारी करना या अस्वीकार करना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) यदि भारतीय रिज़र्व बैंक धारा 6 के तहत या अन्यथा किसी जाँच के बाद संतुष्ट हो जाता है कि आवेदन सभी दृष्टियों से पूर्ण है और इस अधिनियम और विनियमों के प्रावधानों के अनुरूप है, तो वह निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखते हुए इस अधिनियम के तहत भुगतान प्रणाली के संचालन के लिए प्राधिकरण जारी कर सकता है, अर्थात्:--
(i) प्रस्तावित भुगतान प्रणाली या इसके द्वारा किए जाने वाले प्रस्तावित सेवाओं की आवश्यकता;
(ii) प्रस्तावित भुगतान प्रणाली के तकनीकी मानक या डिजाइन;
(iii) प्रस्तावित भुगतान प्रणाली के संचालन की शर्तें और नियम, जिनमें कोई सुरक्षा प्रक्रिया भी शामिल है;
(iv) भुगतान प्रणाली के भीतर धन हस्तांतरण करने का तरीका;
(v) भुगतान प्रणाली के अंतर्गत भुगतान दायित्वों को प्रभावित करने वाले भुगतान निर्देशों के नेटिंग की प्रक्रिया;
(vi) आवेदक की वित्तीय स्थिति, प्रबंधन का अनुभव और सत्यनिष्ठा;
(vii) उपभोक्ताओं के हित, जिनमें भुगतान प्रणाली प्रदाताओं के साथ उनके संबंधों को नियंत्रित करने वाले नियम और शर्तें शामिल हैं;
(viii) मौद्रिक और ऋण नीतियां; और
(ix) ऐसे अन्य कारक जिन्हें रिजर्व बैंक प्रासंगिक समझे।
(2) उपधारा (1) के तहत जारी किया गया प्राधिकरण ऐसे प्रपत्र में होगा जैसा निर्धारित किया जाए और वह--
(क) वह तिथि बताइए जिस दिन से यह प्रभावी होगा;
(ख) वे शर्तें बताइए जिनके अधीन प्राधिकरण लागू रहेगा;
(सी) प्राधिकरण को प्रभावी बनाने के लिए यदि कोई शुल्क देय हो तो उसका उल्लेख करें;
(घ) यदि वह आवश्यक समझे, तो इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत भुगतान प्रणाली के उचित संचालन के लिए आवेदक से ऐसी सुरक्षा प्रदान करने की मांग कर सकता है;
(ई) प्राधिकरण रद्द होने तक लागू रहेगा।
(3) यदि रिजर्व बैंक को लगता है कि प्राधिकरण के लिए आवेदन अस्वीकार कर दिया जाना चाहिए, तो वह आवेदक को इस आशय का लिखित नोटिस देगा जिसमें अस्वीकृति के कारण बताए जाएंगे:
बशर्ते कि ऐसे किसी भी आवेदन को तब तक अस्वीकार नहीं किया जाएगा जब तक कि आवेदक को सुनवाई का उचित अवसर न दिया जाए।
(4) प्राधिकरण हेतु प्रत्येक आवेदन पर रिजर्व बैंक द्वारा यथाशीघ्र कार्रवाई की जाएगी तथा आवेदन दाखिल करने की तिथि से छह महीने के भीतर ऐसे आवेदन का निपटारा करने का प्रयास किया जाएगा।
(i) प्रस्तावित भुगतान प्रणाली या इसके द्वारा किए जाने वाले प्रस्तावित सेवाओं की आवश्यकता;
(ii) प्रस्तावित भुगतान प्रणाली के तकनीकी मानक या डिजाइन;
(iii) प्रस्तावित भुगतान प्रणाली के संचालन की शर्तें और नियम, जिनमें कोई सुरक्षा प्रक्रिया भी शामिल है;
(iv) भुगतान प्रणाली के भीतर धन हस्तांतरण करने का तरीका;
(v) भुगतान प्रणाली के अंतर्गत भुगतान दायित्वों को प्रभावित करने वाले भुगतान निर्देशों के नेटिंग की प्रक्रिया;
(vi) आवेदक की वित्तीय स्थिति, प्रबंधन का अनुभव और सत्यनिष्ठा;
(vii) उपभोक्ताओं के हित, जिनमें भुगतान प्रणाली प्रदाताओं के साथ उनके संबंधों को नियंत्रित करने वाले नियम और शर्तें शामिल हैं;
(viii) मौद्रिक और ऋण नीतियां; और
(ix) ऐसे अन्य कारक जिन्हें रिजर्व बैंक प्रासंगिक समझे।
(2) उपधारा (1) के तहत जारी किया गया प्राधिकरण ऐसे प्रपत्र में होगा जैसा निर्धारित किया जाए और वह--
(क) वह तिथि बताइए जिस दिन से यह प्रभावी होगा;
(ख) वे शर्तें बताइए जिनके अधीन प्राधिकरण लागू रहेगा;
(सी) प्राधिकरण को प्रभावी बनाने के लिए यदि कोई शुल्क देय हो तो उसका उल्लेख करें;
(घ) यदि वह आवश्यक समझे, तो इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत भुगतान प्रणाली के उचित संचालन के लिए आवेदक से ऐसी सुरक्षा प्रदान करने की मांग कर सकता है;
(ई) प्राधिकरण रद्द होने तक लागू रहेगा।
(3) यदि रिजर्व बैंक को लगता है कि प्राधिकरण के लिए आवेदन अस्वीकार कर दिया जाना चाहिए, तो वह आवेदक को इस आशय का लिखित नोटिस देगा जिसमें अस्वीकृति के कारण बताए जाएंगे:
बशर्ते कि ऐसे किसी भी आवेदन को तब तक अस्वीकार नहीं किया जाएगा जब तक कि आवेदक को सुनवाई का उचित अवसर न दिया जाए।
(4) प्राधिकरण हेतु प्रत्येक आवेदन पर रिजर्व बैंक द्वारा यथाशीघ्र कार्रवाई की जाएगी तथा आवेदन दाखिल करने की तिथि से छह महीने के भीतर ऐसे आवेदन का निपटारा करने का प्रयास किया जाएगा।
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
