PSS Act 38अध्याय VIII · Miscellaneous
धारा 38 · रिजर्व बैंक को नियम बनाने की शक्ति प्राप्त है।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) रिजर्व बैंक अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने के लिए इस अधिनियम के अनुरूप विनियम बना सकता है।
(2) विशेष रूप से, और पूर्वोक्त प्रावधान की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित सभी या इनमें से किसी भी मामले के लिए प्रावधान कर सकते हैं, अर्थात्:--
(क) उपधारा (2) में निर्दिष्ट बोर्ड की शक्तियाँ और कार्य, उसकी बैठकों का समय और स्थान तथा धारा 3 की उपधारा (4) के अधीन उसकी बैठकों में उसके द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया (ऐसी बैठकों में कोरम सहित);
(ख) भुगतान प्रणाली शुरू करने या चलाने के लिए प्राधिकरण हेतु आवेदन करने का प्रपत्र और तरीका तथा धारा 5 की उपधारा (2) के अंतर्गत ऐसे आवेदन के साथ लगने वाले शुल्क;
(ग) वह प्रपत्र जिसमें इस अधिनियम के अंतर्गत भुगतान प्रणाली संचालित करने के लिए धारा 7 की उपधारा (2) के अधीन प्राधिकरण जारी किया जाएगा;
(घ) भुगतान निर्देशों का प्रारूप और धारा 10 की उपधारा (1) के तहत भुगतान प्रणालियों द्वारा अनुपालन किए जाने वाले मानकों के निर्धारण से संबंधित अन्य मामले;
(ई) वे अंतराल, जिन पर तथा वे रूप और तरीके जिनमें धारा 12 के अंतर्गत रिजर्व बैंक द्वारा अपेक्षित सूचना या प्रतिफल प्रस्तुत किए जाएंगे;
(f) ऐसे अन्य मामले जो निर्धारित किए जाने आवश्यक हों, या निर्धारित किए जा सकें।
(2) इस धारा के अधीन बनाया गया कोई भी नियम ऐसी पूर्व या पश्चात तिथि से प्रभावी होगा (इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि से पूर्व नहीं) जैसा कि नियम में निर्दिष्ट किया गया हो।
(3) प्रत्येक नियमन, रिजर्व बैंक द्वारा बनाए जाने के तुरंत बाद, केंद्र सरकार को भेजा जाएगा और केंद्र सरकार उसकी एक प्रति संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिनों की अवधि के लिए रखेगी, जो एक सत्र या दो या दो से अधिक लगातार सत्रों में शामिल हो सकती है, और यदि उपर्युक्त सत्र या लगातार सत्रों के तुरंत बाद वाले सत्र की समाप्ति से पहले, दोनों सदन नियमन में कोई संशोधन करने पर सहमत हों, या दोनों सदन इस बात पर सहमत हों कि नियमन नहीं बनाया जाना चाहिए, तो नियमन इसके बाद केवल ऐसे संशोधित रूप में प्रभावी होगा या अप्रभावी होगा, जैसा भी मामला हो; हालांकि, ऐसा कोई भी संशोधन या निरस्तीकरण उस नियमन के तहत पहले किए गए किसी भी कार्य की वैधता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
(2) विशेष रूप से, और पूर्वोक्त प्रावधान की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित सभी या इनमें से किसी भी मामले के लिए प्रावधान कर सकते हैं, अर्थात्:--
(क) उपधारा (2) में निर्दिष्ट बोर्ड की शक्तियाँ और कार्य, उसकी बैठकों का समय और स्थान तथा धारा 3 की उपधारा (4) के अधीन उसकी बैठकों में उसके द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया (ऐसी बैठकों में कोरम सहित);
(ख) भुगतान प्रणाली शुरू करने या चलाने के लिए प्राधिकरण हेतु आवेदन करने का प्रपत्र और तरीका तथा धारा 5 की उपधारा (2) के अंतर्गत ऐसे आवेदन के साथ लगने वाले शुल्क;
(ग) वह प्रपत्र जिसमें इस अधिनियम के अंतर्गत भुगतान प्रणाली संचालित करने के लिए धारा 7 की उपधारा (2) के अधीन प्राधिकरण जारी किया जाएगा;
(घ) भुगतान निर्देशों का प्रारूप और धारा 10 की उपधारा (1) के तहत भुगतान प्रणालियों द्वारा अनुपालन किए जाने वाले मानकों के निर्धारण से संबंधित अन्य मामले;
(ई) वे अंतराल, जिन पर तथा वे रूप और तरीके जिनमें धारा 12 के अंतर्गत रिजर्व बैंक द्वारा अपेक्षित सूचना या प्रतिफल प्रस्तुत किए जाएंगे;
(f) ऐसे अन्य मामले जो निर्धारित किए जाने आवश्यक हों, या निर्धारित किए जा सकें।
(2) इस धारा के अधीन बनाया गया कोई भी नियम ऐसी पूर्व या पश्चात तिथि से प्रभावी होगा (इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि से पूर्व नहीं) जैसा कि नियम में निर्दिष्ट किया गया हो।
(3) प्रत्येक नियमन, रिजर्व बैंक द्वारा बनाए जाने के तुरंत बाद, केंद्र सरकार को भेजा जाएगा और केंद्र सरकार उसकी एक प्रति संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिनों की अवधि के लिए रखेगी, जो एक सत्र या दो या दो से अधिक लगातार सत्रों में शामिल हो सकती है, और यदि उपर्युक्त सत्र या लगातार सत्रों के तुरंत बाद वाले सत्र की समाप्ति से पहले, दोनों सदन नियमन में कोई संशोधन करने पर सहमत हों, या दोनों सदन इस बात पर सहमत हों कि नियमन नहीं बनाया जाना चाहिए, तो नियमन इसके बाद केवल ऐसे संशोधित रूप में प्रभावी होगा या अप्रभावी होगा, जैसा भी मामला हो; हालांकि, ऐसा कोई भी संशोधन या निरस्तीकरण उस नियमन के तहत पहले किए गए किसी भी कार्य की वैधता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
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