The Delimitation Act, 2002 9
धारा 9 · निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) आयोग, इसमें दिए गए तरीके से, प्रत्येक राज्य को आवंटित लोकसभा की सीटों और 1971 की जनगणना के आधार पर पुनर्व्यवस्थित प्रत्येक राज्य की विधान सभा को आवंटित सीटों को एकल-सदस्यीय प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों में वितरित करेगा और संविधान के प्रावधानों, धारा 8 में निर्दिष्ट अधिनियम के प्रावधानों और निम्नलिखित प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए, वर्ष 1 [2001] में आयोजित जनगणना में निर्धारित जनगणना आंकड़ों के आधार पर उनका परिसीमन करेगा, अर्थात्: --
(क) सभी निर्वाचन क्षेत्र, जहाँ तक संभव हो, भौगोलिक रूप से सघन क्षेत्र होंगे, और उनकी सीमा निर्धारित करते समय भौतिक विशेषताओं, प्रशासनिक इकाइयों की मौजूदा सीमाओं, संचार सुविधाओं और सार्वजनिक सुविधा का ध्यान रखा जाएगा;
(ख) प्रत्येक विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की सीमाएँ इस प्रकार निर्धारित की जाएँगी कि वह पूर्णतः एक संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आए;
(ग) जिन निर्वाचन क्षेत्रों में अनुसूचित जातियों के लिए सीटें आरक्षित हैं, उन्हें राज्य के विभिन्न भागों में वितरित किया जाएगा और जहाँ तक संभव हो, उन क्षेत्रों में स्थित किया जाएगा जहाँ उनकी जनसंख्या का कुल जनसंख्या से अनुपात अपेक्षाकृत अधिक हो; और
(घ) जिन निर्वाचन क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटें आरक्षित हैं, वे यथासंभव उन क्षेत्रों में स्थित होंगे जहां उनकी जनसंख्या का कुल जनसंख्या से अनुपात सबसे अधिक हो।
(2) आयोग करेगा--
(क) निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के लिए अपने प्रस्तावों को, किसी भी सहयोगी सदस्य के असहमतिपूर्ण प्रस्तावों सहित, यदि कोई हो, जो उनका प्रकाशन चाहता है, भारत के राजपत्र में और सभी संबंधित राज्यों के आधिकारिक राजपत्रों में तथा ऐसे अन्य तरीके से भी प्रकाशित करे जैसा वह उचित समझे;
(ख) वह तिथि निर्दिष्ट करे जिस पर या जिसके बाद प्रस्तावों पर उसके द्वारा आगे विचार किया जाएगा;
(ग) निर्दिष्ट तिथि से पहले प्राप्त सभी आपत्तियों और सुझावों पर विचार करे, और ऐसे विचार-विमर्श के उद्देश्य से, प्रत्येक राज्य में ऐसे स्थान या स्थानों पर एक या एक से अधिक सार्वजनिक बैठकें आयोजित करे, जैसा वह उचित समझे; और
(घ) इसके बाद एक या एक से अधिक आदेशों द्वारा निर्धारित करें--
(i) संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन; और
(ii) विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन,
प्रत्येक राज्य का।
(क) सभी निर्वाचन क्षेत्र, जहाँ तक संभव हो, भौगोलिक रूप से सघन क्षेत्र होंगे, और उनकी सीमा निर्धारित करते समय भौतिक विशेषताओं, प्रशासनिक इकाइयों की मौजूदा सीमाओं, संचार सुविधाओं और सार्वजनिक सुविधा का ध्यान रखा जाएगा;
(ख) प्रत्येक विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की सीमाएँ इस प्रकार निर्धारित की जाएँगी कि वह पूर्णतः एक संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आए;
(ग) जिन निर्वाचन क्षेत्रों में अनुसूचित जातियों के लिए सीटें आरक्षित हैं, उन्हें राज्य के विभिन्न भागों में वितरित किया जाएगा और जहाँ तक संभव हो, उन क्षेत्रों में स्थित किया जाएगा जहाँ उनकी जनसंख्या का कुल जनसंख्या से अनुपात अपेक्षाकृत अधिक हो; और
(घ) जिन निर्वाचन क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटें आरक्षित हैं, वे यथासंभव उन क्षेत्रों में स्थित होंगे जहां उनकी जनसंख्या का कुल जनसंख्या से अनुपात सबसे अधिक हो।
(2) आयोग करेगा--
(क) निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के लिए अपने प्रस्तावों को, किसी भी सहयोगी सदस्य के असहमतिपूर्ण प्रस्तावों सहित, यदि कोई हो, जो उनका प्रकाशन चाहता है, भारत के राजपत्र में और सभी संबंधित राज्यों के आधिकारिक राजपत्रों में तथा ऐसे अन्य तरीके से भी प्रकाशित करे जैसा वह उचित समझे;
(ख) वह तिथि निर्दिष्ट करे जिस पर या जिसके बाद प्रस्तावों पर उसके द्वारा आगे विचार किया जाएगा;
(ग) निर्दिष्ट तिथि से पहले प्राप्त सभी आपत्तियों और सुझावों पर विचार करे, और ऐसे विचार-विमर्श के उद्देश्य से, प्रत्येक राज्य में ऐसे स्थान या स्थानों पर एक या एक से अधिक सार्वजनिक बैठकें आयोजित करे, जैसा वह उचित समझे; और
(घ) इसके बाद एक या एक से अधिक आदेशों द्वारा निर्धारित करें--
(i) संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन; और
(ii) विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन,
प्रत्येक राज्य का।
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