The Delimitation Act, 2002 7
धारा 7 · आयोग की प्रक्रिया एवं शक्तियां।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) आयोग अपनी प्रक्रिया स्वयं निर्धारित करेगा तथा अपने कार्यों के निष्पादन में, निम्नलिखित मामलों के संबंध में किसी मुकदमे की सुनवाई करते समय, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अंतर्गत सिविल न्यायालय की सभी शक्तियों का प्रयोग करेगा, अर्थात्:--
(क) गवाहों को बुलाना और उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करना;
(ख) किसी दस्तावेज के उत्पादन की मांग करना; और
(ग) किसी न्यायालय या कार्यालय से कोई सार्वजनिक अभिलेख मंगवाना।
(2) आयोग को किसी भी व्यक्ति से ऐसे बिंदुओं या मामलों पर कोई भी जानकारी प्रस्तुत करने की आवश्यकता होगी जो आयोग की राय में आयोग के विचाराधीन किसी भी मामले के लिए उपयोगी या प्रासंगिक हो।
(3) आयोग अपने किसी सदस्य को उपधारा (1) के खंड (क) से (ग) तथा उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों में से किसी का प्रयोग करने के लिए अधिकृत कर सकता है, और आयोग द्वारा अधिकृत सदस्य द्वारा उन शक्तियों के प्रयोग में दिया गया कोई आदेश या किया गया कोई कार्य, जैसा भी मामला हो, आयोग का आदेश या कार्य माना जाएगा।
(4) यदि सदस्यों के बीच मतभेद हो तो बहुमत की राय मान्य होगी, और आयोग के कार्य और आदेश बहुमत के विचारों के अनुसार व्यक्त किए जाएंगे।
(5) आयोग तथा सह-सदस्यों के किसी भी समूह को किसी सदस्य या सह-सदस्य की अस्थायी अनुपस्थिति या आयोग में या उस या सह-सदस्यों के किसी अन्य समूह में रिक्ति होने के बावजूद कार्य करने का अधिकार होगा; और आयोग या सह-सदस्यों के किसी भी समूह का कोई भी कार्य या कार्यवाही केवल ऐसी अस्थायी अनुपस्थिति या ऐसी रिक्ति के अस्तित्व के आधार पर अमान्य या प्रश्नचिह्नित नहीं की जाएगी।
(6) आयोग को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (2 ऑफ 1974) की धारा 345 और 346 के प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय माना जाएगा।
स्पष्टीकरण .-- गवाहों की उपस्थिति को लागू करने के प्रयोजन से, आयोग के अधिकार क्षेत्र की स्थानीय सीमाएँ भारत के भूभाग की सीमाएँ होंगी।
(क) गवाहों को बुलाना और उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करना;
(ख) किसी दस्तावेज के उत्पादन की मांग करना; और
(ग) किसी न्यायालय या कार्यालय से कोई सार्वजनिक अभिलेख मंगवाना।
(2) आयोग को किसी भी व्यक्ति से ऐसे बिंदुओं या मामलों पर कोई भी जानकारी प्रस्तुत करने की आवश्यकता होगी जो आयोग की राय में आयोग के विचाराधीन किसी भी मामले के लिए उपयोगी या प्रासंगिक हो।
(3) आयोग अपने किसी सदस्य को उपधारा (1) के खंड (क) से (ग) तथा उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों में से किसी का प्रयोग करने के लिए अधिकृत कर सकता है, और आयोग द्वारा अधिकृत सदस्य द्वारा उन शक्तियों के प्रयोग में दिया गया कोई आदेश या किया गया कोई कार्य, जैसा भी मामला हो, आयोग का आदेश या कार्य माना जाएगा।
(4) यदि सदस्यों के बीच मतभेद हो तो बहुमत की राय मान्य होगी, और आयोग के कार्य और आदेश बहुमत के विचारों के अनुसार व्यक्त किए जाएंगे।
(5) आयोग तथा सह-सदस्यों के किसी भी समूह को किसी सदस्य या सह-सदस्य की अस्थायी अनुपस्थिति या आयोग में या उस या सह-सदस्यों के किसी अन्य समूह में रिक्ति होने के बावजूद कार्य करने का अधिकार होगा; और आयोग या सह-सदस्यों के किसी भी समूह का कोई भी कार्य या कार्यवाही केवल ऐसी अस्थायी अनुपस्थिति या ऐसी रिक्ति के अस्तित्व के आधार पर अमान्य या प्रश्नचिह्नित नहीं की जाएगी।
(6) आयोग को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (2 ऑफ 1974) की धारा 345 और 346 के प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय माना जाएगा।
स्पष्टीकरण .-- गवाहों की उपस्थिति को लागू करने के प्रयोजन से, आयोग के अधिकार क्षेत्र की स्थानीय सीमाएँ भारत के भूभाग की सीमाएँ होंगी।
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