The Delimitation Act, 2002 10
धारा 10 · आदेशों का प्रकाशन और उनके लागू होने की तिथि।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) आयोग धारा 8 या धारा 9 के अधीन जारी किए गए अपने प्रत्येक आदेश को भारत के राजपत्र और संबंधित राज्यों के आधिकारिक राजपत्रों में प्रकाशित करवाएगा तथा साथ ही ऐसे आदेशों को कम से कम दो स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित करवाएगा तथा रेडियो, टेलीविजन और जनता के लिए उपलब्ध अन्य संभावित माध्यमों पर प्रचारित करवाएगा तथा संबंधित राज्यों के आधिकारिक राजपत्रों में प्रकाशन के बाद, प्रत्येक जिला निर्वाचन अधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र से संबंधित ऐसे आदेशों का राजपत्र संस्करण सार्वजनिक सूचना के लिए अपने कार्यालय के किसी प्रमुख भाग पर चिपकाएगा।
(2) भारत के राजपत्र में प्रकाशन होने पर, ऐसा प्रत्येक आदेश विधि का बल रखेगा और किसी भी न्यायालय में इस पर प्रश्न नहीं उठाया जाएगा।
(3) ऐसे प्रकाशन के बाद यथाशीघ्र, प्रत्येक ऐसा आदेश लोकसभा और संबंधित राज्यों की विधान सभाओं के समक्ष रखा जाएगा।
(4) उपधारा (5) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, लोकसभा या किसी राज्य की विधान सभा में विभिन्न प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व का पुनर्व्यवस्थापन और ऐसे किसी आदेश में निर्धारित निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन, भारत के राजपत्र में उस आदेश के प्रकाशन के बाद आयोजित प्रत्येक विधानसभा या सदन के चुनाव पर लागू होगा, और यह किसी अन्य कानून में, जो उस समय लागू हो, या ऐसे कानून के तहत जारी किसी आदेश या अधिसूचना में निहित ऐसे प्रतिनिधित्व और परिसीमन संबंधी प्रावधानों को निरस्त करते हुए लागू होगा, जहाँ तक ऐसा प्रतिनिधित्व और परिसीमन इस अधिनियम के प्रावधानों के साथ असंगत है।
1. इस उपधारा में कोई भी बात झारखंड राज्य के संबंध में प्रकाशित परिसीमन आदेशों पर लागू नहीं होगी।
(5) इस धारा की कोई बात लोकसभा या किसी राज्य की विधान सभा में उस सदन या विधानसभा के विघटन तक प्रतिनिधित्व को प्रभावित नहीं करेगी, जो संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों या, जैसा भी मामला हो, उस राज्य के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन से संबंधित आयोग के अंतिम आदेश या आदेशों के भारत के राजपत्र में प्रकाशन की तिथि को विद्यमान थी, और ऐसे सदन या ऐसी विधानसभा में किसी रिक्ति को भरने के लिए कोई उपचुनाव उप-धारा (4) द्वारा निरस्त किए गए कानूनों और आदेशों के प्रावधानों के आधार पर आयोजित किया जाएगा, मानो उक्त प्रावधान निरस्त नहीं किए गए हों।
(6) आयोग उपधारा (1) में निर्दिष्ट अपने प्रत्येक आदेश को उस उपधारा में दिए गए तरीके से पूरा करने और प्रकाशित करने का प्रयास करेगा, धारा 3 के तहत [31 जुलाई, 2008 से पहले की अवधि के भीतर]।
(2) भारत के राजपत्र में प्रकाशन होने पर, ऐसा प्रत्येक आदेश विधि का बल रखेगा और किसी भी न्यायालय में इस पर प्रश्न नहीं उठाया जाएगा।
(3) ऐसे प्रकाशन के बाद यथाशीघ्र, प्रत्येक ऐसा आदेश लोकसभा और संबंधित राज्यों की विधान सभाओं के समक्ष रखा जाएगा।
(4) उपधारा (5) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, लोकसभा या किसी राज्य की विधान सभा में विभिन्न प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व का पुनर्व्यवस्थापन और ऐसे किसी आदेश में निर्धारित निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन, भारत के राजपत्र में उस आदेश के प्रकाशन के बाद आयोजित प्रत्येक विधानसभा या सदन के चुनाव पर लागू होगा, और यह किसी अन्य कानून में, जो उस समय लागू हो, या ऐसे कानून के तहत जारी किसी आदेश या अधिसूचना में निहित ऐसे प्रतिनिधित्व और परिसीमन संबंधी प्रावधानों को निरस्त करते हुए लागू होगा, जहाँ तक ऐसा प्रतिनिधित्व और परिसीमन इस अधिनियम के प्रावधानों के साथ असंगत है।
1. इस उपधारा में कोई भी बात झारखंड राज्य के संबंध में प्रकाशित परिसीमन आदेशों पर लागू नहीं होगी।
(5) इस धारा की कोई बात लोकसभा या किसी राज्य की विधान सभा में उस सदन या विधानसभा के विघटन तक प्रतिनिधित्व को प्रभावित नहीं करेगी, जो संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों या, जैसा भी मामला हो, उस राज्य के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन से संबंधित आयोग के अंतिम आदेश या आदेशों के भारत के राजपत्र में प्रकाशन की तिथि को विद्यमान थी, और ऐसे सदन या ऐसी विधानसभा में किसी रिक्ति को भरने के लिए कोई उपचुनाव उप-धारा (4) द्वारा निरस्त किए गए कानूनों और आदेशों के प्रावधानों के आधार पर आयोजित किया जाएगा, मानो उक्त प्रावधान निरस्त नहीं किए गए हों।
(6) आयोग उपधारा (1) में निर्दिष्ट अपने प्रत्येक आदेश को उस उपधारा में दिए गए तरीके से पूरा करने और प्रकाशित करने का प्रयास करेगा, धारा 3 के तहत [31 जुलाई, 2008 से पहले की अवधि के भीतर]।
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