CC Act 3अध्याय II · Commercial Courts, Commercial Appellate Courts, Commercial Divisions and Commercial Appellate Divisions
धारा 3 · वाणिज्यिक न्यायालयों का गठन।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
अध्याय II
1 [वाणिज्यिक न्यायालय, वाणिज्यिक अपीलीय न्यायालय, वाणिज्यिक प्रभाग और वाणिज्यिक अपीलीय प्रभाग]।
वाणिज्यिक न्यायालयों का गठन। --- (1) राज्य सरकार, संबंधित उच्च न्यायालय से परामर्श करने के बाद, अधिसूचना द्वारा, जिला स्तर पर उतने वाणिज्यिक न्यायालयों का गठन कर सकती है, जितने वह इस अधिनियम के अधीन उन न्यायालयों को प्रदत्त अधिकार क्षेत्र और शक्तियों का प्रयोग करने के लिए आवश्यक समझे:
2. इस प्रकार कि सामान्य मूल दीवानी क्षेत्राधिकार वाले उच्च न्यायालयों के संबंध में, राज्य सरकार संबंधित उच्च न्यायालय से परामर्श करने के बाद अधिसूचना द्वारा जिला न्यायाधीश स्तर पर वाणिज्यिक न्यायालयों का गठन कर सकती है:
इसके अलावा, यदि किसी ऐसे क्षेत्र पर उच्च न्यायालयों का सामान्य मूल दीवानी क्षेत्राधिकार है, तो राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा ऐसी मौद्रिक राशि निर्दिष्ट कर सकती है, जो तीन लाख रुपये से कम न हो और जिला न्यायालयों द्वारा प्रयोग किए जाने वाले मौद्रिक क्षेत्राधिकार से अधिक न हो, जैसा वह आवश्यक समझे।
3 [(1ए) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, राज्य सरकार संबंधित उच्च न्यायालय से परामर्श करने के बाद, अधिसूचना द्वारा, राज्य के पूरे या आंशिक भाग के लिए ऐसा मौद्रिक मूल्य निर्दिष्ट कर सकती है जो तीन लाख रुपये से कम न हो या ऐसा उच्च मूल्य निर्दिष्ट कर सकती है, जैसा वह आवश्यक समझे।]
(2) राज्य सरकार संबंधित उच्च न्यायालय से परामर्श करने के बाद अधिसूचना द्वारा उस क्षेत्र की स्थानीय सीमाएँ निर्दिष्ट करेगी, जिस तक वाणिज्यिक न्यायालय का अधिकार क्षेत्र विस्तारित होगा, और समय-समय पर ऐसी सीमाओं को बढ़ा, घटा या परिवर्तित कर सकती है।
( 3 ) राज्य सरकार, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सहमति से, वाणिज्यिक विवादों से निपटने का अनुभव रखने वाले एक या अधिक व्यक्तियों को जिला न्यायाधीश स्तर या जिला न्यायाधीश स्तर से नीचे के किसी वाणिज्यिक न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त कर सकती है।
1 [वाणिज्यिक न्यायालय, वाणिज्यिक अपीलीय न्यायालय, वाणिज्यिक प्रभाग और वाणिज्यिक अपीलीय प्रभाग]।
वाणिज्यिक न्यायालयों का गठन। --- (1) राज्य सरकार, संबंधित उच्च न्यायालय से परामर्श करने के बाद, अधिसूचना द्वारा, जिला स्तर पर उतने वाणिज्यिक न्यायालयों का गठन कर सकती है, जितने वह इस अधिनियम के अधीन उन न्यायालयों को प्रदत्त अधिकार क्षेत्र और शक्तियों का प्रयोग करने के लिए आवश्यक समझे:
2. इस प्रकार कि सामान्य मूल दीवानी क्षेत्राधिकार वाले उच्च न्यायालयों के संबंध में, राज्य सरकार संबंधित उच्च न्यायालय से परामर्श करने के बाद अधिसूचना द्वारा जिला न्यायाधीश स्तर पर वाणिज्यिक न्यायालयों का गठन कर सकती है:
इसके अलावा, यदि किसी ऐसे क्षेत्र पर उच्च न्यायालयों का सामान्य मूल दीवानी क्षेत्राधिकार है, तो राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा ऐसी मौद्रिक राशि निर्दिष्ट कर सकती है, जो तीन लाख रुपये से कम न हो और जिला न्यायालयों द्वारा प्रयोग किए जाने वाले मौद्रिक क्षेत्राधिकार से अधिक न हो, जैसा वह आवश्यक समझे।
3 [(1ए) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, राज्य सरकार संबंधित उच्च न्यायालय से परामर्श करने के बाद, अधिसूचना द्वारा, राज्य के पूरे या आंशिक भाग के लिए ऐसा मौद्रिक मूल्य निर्दिष्ट कर सकती है जो तीन लाख रुपये से कम न हो या ऐसा उच्च मूल्य निर्दिष्ट कर सकती है, जैसा वह आवश्यक समझे।]
(2) राज्य सरकार संबंधित उच्च न्यायालय से परामर्श करने के बाद अधिसूचना द्वारा उस क्षेत्र की स्थानीय सीमाएँ निर्दिष्ट करेगी, जिस तक वाणिज्यिक न्यायालय का अधिकार क्षेत्र विस्तारित होगा, और समय-समय पर ऐसी सीमाओं को बढ़ा, घटा या परिवर्तित कर सकती है।
( 3 ) राज्य सरकार, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सहमति से, वाणिज्यिक विवादों से निपटने का अनुभव रखने वाले एक या अधिक व्यक्तियों को जिला न्यायाधीश स्तर या जिला न्यायाधीश स्तर से नीचे के किसी वाणिज्यिक न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त कर सकती है।
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