CC Act 15अध्याय V · Transfer of Pending Suits
धारा 15 · लंबित मामलों का स्थानांतरण।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) उच्च न्यायालय में जहां वाणिज्यिक प्रभाग का गठन किया गया है, वहां निर्दिष्ट मूल्य के वाणिज्यिक विवाद से संबंधित सभी मुकदमे और आवेदन, जिनमें मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 (26 ऑफ 1996) के तहत आवेदन भी शामिल हैं, वाणिज्यिक प्रभाग को स्थानांतरित कर दिए जाएंगे।
(2) किसी भी जिले या क्षेत्र में स्थित किसी भी दीवानी न्यायालय में, जिसके लिए वाणिज्यिक न्यायालय का गठन किया गया है, निर्दिष्ट मूल्य के वाणिज्यिक विवाद से संबंधित सभी मुकदमे और आवेदन, जिनमें मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 (26 ऑफ 1996) के तहत आवेदन भी शामिल हैं, ऐसे वाणिज्यिक न्यायालय में स्थानांतरित किए जाएंगे:
बशर्ते कि कोई भी मुकदमा या आवेदन, जिसमें वाणिज्यिक प्रभाग या वाणिज्यिक न्यायालय के गठन से पहले न्यायालय द्वारा अंतिम निर्णय सुरक्षित रखा गया हो, उप-धारा (1) या उप-धारा (2) के तहत स्थानांतरित नहीं किया जाएगा।
(3) जहां कोई मुकदमा या आवेदन, जिसमें मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 (26 ऑफ 1996) के तहत आवेदन भी शामिल है, निर्दिष्ट मूल्य के वाणिज्यिक विवाद से संबंधित, उप-धारा (1) या उप-धारा (2) के तहत वाणिज्यिक प्रभाग या वाणिज्यिक न्यायालय को हस्तांतरित किया जाता है, तो इस अधिनियम के प्रावधान उन प्रक्रियाओं पर लागू होंगे जो हस्तांतरण के समय पूर्ण नहीं थीं।
(4) वाणिज्यिक प्रभाग या वाणिज्यिक न्यायालय, जैसा भी मामला हो, ऐसे स्थानांतरित मुकदमे या आवेदन के संबंध में मामले प्रबंधन सुनवाई आयोजित कर सकता है ताकि नई समयसीमा निर्धारित की जा सके या ऐसे आगे के निर्देश जारी किए जा सकें जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के आदेश XV -A के अनुसार ऐसे मुकदमे या आवेदन के शीघ्र और प्रभावी निपटान के लिए आवश्यक हों।
बशर्ते कि सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के आदेश V के नियम 1 के उप-नियम (1) का परंतुक ऐसे स्थानांतरित मुकदमे या आवेदन पर लागू नहीं होगा और न्यायालय अपने विवेक से एक नई समयावधि निर्धारित कर सकता है जिसके भीतर लिखित बयान दाखिल किया जाएगा।
(5) यदि ऐसा वाद या आवेदन उपधारा (1) , उपधारा (2) या उपधारा (3) में निर्दिष्ट तरीके से स्थानांतरित नहीं किया जाता है, तो उच्च न्यायालय का वाणिज्यिक अपीलीय प्रभाग, वाद के किसी भी पक्षकार के आवेदन पर, ऐसे वाद या आवेदन को उस न्यायालय से वापस ले सकता है जिसके समक्ष वह लंबित है और उसे परीक्षण या निपटान के लिए वाणिज्यिक प्रभाग या वाणिज्यिक न्यायालय को स्थानांतरित कर सकता है, जैसा भी मामला हो, जिसके पास ऐसे वाद पर क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार हो, और स्थानांतरण का ऐसा आदेश अंतिम और बाध्यकारी होगा।
(2) किसी भी जिले या क्षेत्र में स्थित किसी भी दीवानी न्यायालय में, जिसके लिए वाणिज्यिक न्यायालय का गठन किया गया है, निर्दिष्ट मूल्य के वाणिज्यिक विवाद से संबंधित सभी मुकदमे और आवेदन, जिनमें मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 (26 ऑफ 1996) के तहत आवेदन भी शामिल हैं, ऐसे वाणिज्यिक न्यायालय में स्थानांतरित किए जाएंगे:
बशर्ते कि कोई भी मुकदमा या आवेदन, जिसमें वाणिज्यिक प्रभाग या वाणिज्यिक न्यायालय के गठन से पहले न्यायालय द्वारा अंतिम निर्णय सुरक्षित रखा गया हो, उप-धारा (1) या उप-धारा (2) के तहत स्थानांतरित नहीं किया जाएगा।
(3) जहां कोई मुकदमा या आवेदन, जिसमें मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 (26 ऑफ 1996) के तहत आवेदन भी शामिल है, निर्दिष्ट मूल्य के वाणिज्यिक विवाद से संबंधित, उप-धारा (1) या उप-धारा (2) के तहत वाणिज्यिक प्रभाग या वाणिज्यिक न्यायालय को हस्तांतरित किया जाता है, तो इस अधिनियम के प्रावधान उन प्रक्रियाओं पर लागू होंगे जो हस्तांतरण के समय पूर्ण नहीं थीं।
(4) वाणिज्यिक प्रभाग या वाणिज्यिक न्यायालय, जैसा भी मामला हो, ऐसे स्थानांतरित मुकदमे या आवेदन के संबंध में मामले प्रबंधन सुनवाई आयोजित कर सकता है ताकि नई समयसीमा निर्धारित की जा सके या ऐसे आगे के निर्देश जारी किए जा सकें जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के आदेश XV -A के अनुसार ऐसे मुकदमे या आवेदन के शीघ्र और प्रभावी निपटान के लिए आवश्यक हों।
बशर्ते कि सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के आदेश V के नियम 1 के उप-नियम (1) का परंतुक ऐसे स्थानांतरित मुकदमे या आवेदन पर लागू नहीं होगा और न्यायालय अपने विवेक से एक नई समयावधि निर्धारित कर सकता है जिसके भीतर लिखित बयान दाखिल किया जाएगा।
(5) यदि ऐसा वाद या आवेदन उपधारा (1) , उपधारा (2) या उपधारा (3) में निर्दिष्ट तरीके से स्थानांतरित नहीं किया जाता है, तो उच्च न्यायालय का वाणिज्यिक अपीलीय प्रभाग, वाद के किसी भी पक्षकार के आवेदन पर, ऐसे वाद या आवेदन को उस न्यायालय से वापस ले सकता है जिसके समक्ष वह लंबित है और उसे परीक्षण या निपटान के लिए वाणिज्यिक प्रभाग या वाणिज्यिक न्यायालय को स्थानांतरित कर सकता है, जैसा भी मामला हो, जिसके पास ऐसे वाद पर क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार हो, और स्थानांतरण का ऐसा आदेश अंतिम और बाध्यकारी होगा।
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