CC Act 12Aअध्याय IIIA · Pre--institution Mediation and Settlement
धारा 12A · संस्था स्थापना पूर्व मध्यस्थता और समझौता।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [अध्याय IIIA]
संस्था-पूर्व मध्यस्थता और समझौता
12ए. पूर्व-संस्था मध्यस्थता एवं समझौता। --- (1) ऐसा कोई मुकदमा, जिसमें इस अधिनियम के तहत किसी तत्काल अंतरिम राहत की परिकल्पना न हो, तब तक दायर नहीं किया जाएगा जब तक कि वादी केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार पूर्व-संस्था मध्यस्थता के उपाय को समाप्त न कर दे।
(2) केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा विधि सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 (39 ऑफ 1987) के तहत गठित प्राधिकरणों को पूर्व-संस्थागत मध्यस्थता के प्रयोजनों के लिए अधिकृत कर सकती है।
(3) विधि सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 (39 ऑफ 1987) में किसी बात के होते हुए भी, केंद्र सरकार द्वारा उपधारा (2) के तहत अधिकृत प्राधिकरण, वादी द्वारा उपधारा (1) के तहत किए गए आवेदन की तिथि से तीन महीने की अवधि के भीतर मध्यस्थता की प्रक्रिया पूरी करेगा।
बशर्ते कि पक्षों की सहमति से मध्यस्थता की अवधि को दो महीने की अतिरिक्त अवधि के लिए बढ़ाया जा सकता है:
इसके अलावा, जिस अवधि के दौरान पक्षकार पूर्व-संस्थागत मध्यस्थता में व्यस्त रहे, उस अवधि की गणना परिसीमा अधिनियम, 1963 (36 ऑफ 1963) के तहत परिसीमा के उद्देश्य से नहीं की जाएगी।
(4) यदि वाणिज्यिक विवाद के पक्षकार किसी समझौते पर पहुँचते हैं, तो उसे लिखित रूप में दर्ज किया जाएगा और विवाद के पक्षकारों तथा मध्यस्थ द्वारा हस्ताक्षरित किया जाएगा।
(5) इस धारा के अधीन किए गए समझौते का वही दर्जा और प्रभाव होगा मानो वह मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 (26 ऑफ 1996) की धारा 30 की उपधारा (4) के तहत सहमत शर्तों पर दिया गया मध्यस्थता पुरस्कार हो।]
संस्था-पूर्व मध्यस्थता और समझौता
12ए. पूर्व-संस्था मध्यस्थता एवं समझौता। --- (1) ऐसा कोई मुकदमा, जिसमें इस अधिनियम के तहत किसी तत्काल अंतरिम राहत की परिकल्पना न हो, तब तक दायर नहीं किया जाएगा जब तक कि वादी केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार पूर्व-संस्था मध्यस्थता के उपाय को समाप्त न कर दे।
(2) केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा विधि सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 (39 ऑफ 1987) के तहत गठित प्राधिकरणों को पूर्व-संस्थागत मध्यस्थता के प्रयोजनों के लिए अधिकृत कर सकती है।
(3) विधि सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 (39 ऑफ 1987) में किसी बात के होते हुए भी, केंद्र सरकार द्वारा उपधारा (2) के तहत अधिकृत प्राधिकरण, वादी द्वारा उपधारा (1) के तहत किए गए आवेदन की तिथि से तीन महीने की अवधि के भीतर मध्यस्थता की प्रक्रिया पूरी करेगा।
बशर्ते कि पक्षों की सहमति से मध्यस्थता की अवधि को दो महीने की अतिरिक्त अवधि के लिए बढ़ाया जा सकता है:
इसके अलावा, जिस अवधि के दौरान पक्षकार पूर्व-संस्थागत मध्यस्थता में व्यस्त रहे, उस अवधि की गणना परिसीमा अधिनियम, 1963 (36 ऑफ 1963) के तहत परिसीमा के उद्देश्य से नहीं की जाएगी।
(4) यदि वाणिज्यिक विवाद के पक्षकार किसी समझौते पर पहुँचते हैं, तो उसे लिखित रूप में दर्ज किया जाएगा और विवाद के पक्षकारों तथा मध्यस्थ द्वारा हस्ताक्षरित किया जाएगा।
(5) इस धारा के अधीन किए गए समझौते का वही दर्जा और प्रभाव होगा मानो वह मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 (26 ऑफ 1996) की धारा 30 की उपधारा (4) के तहत सहमत शर्तों पर दिया गया मध्यस्थता पुरस्कार हो।]
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