अधिनियम की परिभाषा
लोक कर्तव्य
यह परिभाषा अधिनियम की परिभाषा-धारा से ली गई है।
अभिप्रेत है वह कर्तव्य; जिसके निर्वहन में राज्य, जनता या समस्त समुदाय का हित है । स्पष्टीकरण-इस खंड में, राज्य" के अंतर्गत किसी केंद्रीय, प्रांतीय या राज्य अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित निगम या सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण के अधीन या सरकार से सहाय
परिभाषा इस धारा में दी गई है
भ्र.नि. अधि. §2 — परिभाषाएँ।इन धाराओं में आता है
- भा.न्या.सं. §121लोक सेवक को उसके कर्तव्य से विचलित करने के उद्देश्य से जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
- भ्र.नि. अधि. §7लोक सेवक को रिश्वत देने से संबंधित अपराध।
- भा.दं.सं. §332धारा 332 - लोक सेवक अपने कर्तव्य से भयोपरत करने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना
- भा.दं.सं. §333धारा 333 - लोक सेवक को अपने कर्तव्यों से भयोपरत स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
- भ्र.नि. अधि. §7Aभ्रष्ट या अवैध साधनों से या व्यक्तिगत प्रभाव का प्रयोग करके लोक सेवक को प्रभावित करने के लिए अनुचित लाभ उठाना।
- भ्र.नि. अधि. §8लोक सेवक को रिश्वत देने से संबंधित अपराध।
- भा.दं.सं. §119धारा 119 - किसी ऐसे अपराध के किए जाने की परिकल्पना का लोक सेवक द्वारा छिपाया जाना, जिसका निवारण करना उसका कर्तव्य है
- अ.जा./अ.ज.जा. अधि. §4कर्तव्यों की उपेक्षा करने पर दंड।
- Nagaland Habitual Offenders Act, 1967 §332लोक सेवक को उसके कर्तव्य से विचलित करने के लिए जानबूझकर चोट पहुँचाना
- भ्र.नि. अधि. §17Aलोक सेवक द्वारा अपने आधिकारिक कार्यों या कर्तव्यों के निर्वहन में की गई सिफारिशों या लिए गए निर्णयों से संबंधित अपराधों की जांच या छानबीन।
- Nagaland Habitual Offenders Act, 1967 §333लोक सेवक को उसके कर्तव्य से विचलित करने के उद्देश्य से जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना।
- The Orissa State Prosecution Service Rules, 1997 §14कर्तव्यों का आवंटन
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