PC Act 8अध्याय III · Offences and Penalties
धारा 8 · लोक सेवक को रिश्वत देने से संबंधित अपराध।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [ 8. लोक सेवक को रिश्वत देने से संबंधित अपराध। --(1) कोई भी व्यक्ति जो किसी अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों को अनुचित लाभ देता है या देने का वादा करता है, इस इरादे से--
(i) किसी लोक सेवक को लोक कर्तव्य का अनुचित ढंग से पालन करने के लिए प्रेरित करना; या
(ii) लोक सेवक को लोक कर्तव्य के अनुचित निष्पादन के लिए पुरस्कृत करना,
इसके लिए सात वर्ष तक की कारावास की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
परंतु इस धारा के प्रावधान उस स्थिति में लागू नहीं होंगे जहां किसी व्यक्ति को ऐसा अनुचित लाभ देने के लिए विवश किया जाता है:
इसके अलावा, यह भी प्रावधान है कि इस प्रकार से विवश किए गए व्यक्ति को अनुचित लाभ दिए जाने की तिथि से सात दिनों की अवधि के भीतर इस मामले की रिपोर्ट कानून प्रवर्तन प्राधिकरण या जांच एजेंसी को देनी होगी।
इसके अलावा, यदि इस धारा के अंतर्गत अपराध किसी वाणिज्यिक संगठन द्वारा किया गया हो, तो ऐसे वाणिज्यिक संगठन को जुर्माने से दंडित किया जाएगा।
उदाहरण .-- एक व्यक्ति, 'पी', एक लोक सेवक, 'एस' को दस हजार रुपये की राशि इस आश्वासन के साथ देता है कि उसे अन्य सभी बोलीदाताओं से ऊपर लाइसेंस मिल जाएगा। 'पी' इस उपधारा के अंतर्गत अपराध का दोषी है।
स्पष्टीकरण .--यह अप्रासंगिक होगा कि जिस व्यक्ति को अनुचित लाभ दिया गया है या देने का वादा किया गया है, वह वही व्यक्ति है जिसने संबंधित सार्वजनिक कर्तव्य का पालन किया है या कर रहा है, और यह भी अप्रासंगिक होगा कि ऐसा अनुचित लाभ उस व्यक्ति द्वारा प्रत्यक्ष रूप से या किसी तीसरे पक्ष के माध्यम से दिया गया है या देने का वादा किया गया है।
(2) उपधारा (1) की कोई बात उस व्यक्ति पर लागू नहीं होगी, यदि वह व्यक्ति किसी विधि प्रवर्तन प्राधिकरण या जांच एजेंसी को सूचित करने के बाद, किसी अन्य व्यक्ति को उसके विरुद्ध आरोपित अपराध की जांच में सहायता करने के लिए कोई अनुचित लाभ देता है या देने का वादा करता है।
(i) किसी लोक सेवक को लोक कर्तव्य का अनुचित ढंग से पालन करने के लिए प्रेरित करना; या
(ii) लोक सेवक को लोक कर्तव्य के अनुचित निष्पादन के लिए पुरस्कृत करना,
इसके लिए सात वर्ष तक की कारावास की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
परंतु इस धारा के प्रावधान उस स्थिति में लागू नहीं होंगे जहां किसी व्यक्ति को ऐसा अनुचित लाभ देने के लिए विवश किया जाता है:
इसके अलावा, यह भी प्रावधान है कि इस प्रकार से विवश किए गए व्यक्ति को अनुचित लाभ दिए जाने की तिथि से सात दिनों की अवधि के भीतर इस मामले की रिपोर्ट कानून प्रवर्तन प्राधिकरण या जांच एजेंसी को देनी होगी।
इसके अलावा, यदि इस धारा के अंतर्गत अपराध किसी वाणिज्यिक संगठन द्वारा किया गया हो, तो ऐसे वाणिज्यिक संगठन को जुर्माने से दंडित किया जाएगा।
उदाहरण .-- एक व्यक्ति, 'पी', एक लोक सेवक, 'एस' को दस हजार रुपये की राशि इस आश्वासन के साथ देता है कि उसे अन्य सभी बोलीदाताओं से ऊपर लाइसेंस मिल जाएगा। 'पी' इस उपधारा के अंतर्गत अपराध का दोषी है।
स्पष्टीकरण .--यह अप्रासंगिक होगा कि जिस व्यक्ति को अनुचित लाभ दिया गया है या देने का वादा किया गया है, वह वही व्यक्ति है जिसने संबंधित सार्वजनिक कर्तव्य का पालन किया है या कर रहा है, और यह भी अप्रासंगिक होगा कि ऐसा अनुचित लाभ उस व्यक्ति द्वारा प्रत्यक्ष रूप से या किसी तीसरे पक्ष के माध्यम से दिया गया है या देने का वादा किया गया है।
(2) उपधारा (1) की कोई बात उस व्यक्ति पर लागू नहीं होगी, यदि वह व्यक्ति किसी विधि प्रवर्तन प्राधिकरण या जांच एजेंसी को सूचित करने के बाद, किसी अन्य व्यक्ति को उसके विरुद्ध आरोपित अपराध की जांच में सहायता करने के लिए कोई अनुचित लाभ देता है या देने का वादा करता है।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 7 वर्ष
- जुर्माना
- जुर्माना — कोई विधिक सीमा नहीं, न्यायालय तय करेगा
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- अजमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- विचारण न्यायालय
- विशेष न्यायालय
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
इसी अधिनियम के अपने उपबंध के अनुसार
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
