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41 प्रविष्टियाँ
परिभाषाएँ।
इस संहिता में, जब तक संदर्भ अन्यथा अपेक्षित न हो,--- (1) "कार्य" से तात्पर्य कार्यों की श्रृंखला के साथ-साथ एक एकल कार्य से भी है; (2) "पशु" से तात्पर्य मनुष्य के अलावा किसी भी जीवित प्राणी से है; (3) "बाल" से तात्पर्य अठारह वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति से है; (4) "नकली".---वह व्यक्ति "नकली" कहलाता है जो किसी…
पूरा पढ़ेंधारा 30 - “मूल्यवान प्रतिभूति”
“मूल्यवान प्रतिभूति” “मूल्यवान प्रतिभूति” शब्द उस दस्तावेज के द्योतक हैं, जो ऐसी दस्तावेज है, या होनी तात्पर्यित है, जिसके द्वारा कोई विधिक अधिकार सॄजित, विस्तॄत, अन्तरित, निर्बन्धित, निर्वापित किया जाए, छोड़ा जाए या जिसके द्वारा कोई व्यक्ति यह अभिस्वीकार करता है कि वह विधिक दायित्व के अधीन है, या अमुक विधिक अधिकार…
पूरा पढ़ेंबिना सहमति के किसी व्यक्ति के लाभ के लिए सद्भावनापूर्वक किया गया कार्य।
कोई भी कार्य, सद्भावनापूर्वक किए जाने पर भी, उस व्यक्ति की सहमति के बिना भी, उस व्यक्ति को होने वाली किसी भी हानि के कारण अपराध नहीं है, यदि परिस्थितियाँ ऐसी हों कि उस व्यक्ति के लिए सहमति देना असंभव हो, या यदि वह व्यक्ति सहमति देने में असमर्थ हो, और उसका कोई अभिभावक या अन्य कानूनी रूप से प्रभारी व्यक्ति न हो जिससे…
पूरा पढ़ेंधारा 92 - सम्मति के बिना किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक किया गया कार्य
सम्मति के बिना किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक किया गया कार्य कोई बात जो किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक यद्यपी, उसकी सम्मति के बिना, की गई है, ऐसी किसी अपहानि के कारण, जो उस बात से उस व्यक्ति को कारित हो जाए, अपराध नहीं है, यदि परिस्थितियां ऐसी हों कि उस व्यक्ति के लिए यह असंभव हो कि वह अपनी…
पूरा पढ़ेंदहेज हत्या।
(1) यदि किसी स्त्री की मृत्यु जलने या शारीरिक चोट के कारण होती है या विवाह के सात वर्षों के भीतर सामान्य परिस्थितियों के अलावा किसी अन्य कारण से होती है और यह सिद्ध हो जाता है कि उसकी मृत्यु से कुछ समय पहले उसके पति या उसके किसी रिश्तेदार द्वारा दहेज की मांग के लिए या उससे संबंधित किसी कारणवश उसके साथ क्रूरता या…
पूरा पढ़ेंदहेज हत्या।
1 [304B. दहेज मृत्यु. -- (1) जहाँ किसी स्त्री की मृत्यु किसी जलने या शारीरिक चोट के कारण होती है या विवाह के सात वर्षों के भीतर सामान्य परिस्थितियों के अलावा किसी अन्य कारण से होती है और यह सिद्ध हो जाता है कि उसकी मृत्यु से कुछ समय पहले उसके पति या उसके पति के किसी रिश्तेदार द्वारा दहेज की किसी मांग के लिए या उससे…
पूरा पढ़ेंहत्या।
इसके बाद जिन मामलों को अपवाद स्वरूप रखा गया है, उन्हें छोड़कर, गैर इरादतन हत्या, हत्या ही मानी जाएगी। (क) यदि जिस कार्य से मृत्यु हुई है वह मृत्यु का कारण बनने के इरादे से किया गया हो; या (ख) यदि जिस कृत्य से मृत्यु हुई है, वह इस इरादे से किया गया हो कि अपराधी को यह ज्ञात हो कि उससे उस व्यक्ति की मृत्यु होने की…
पूरा पढ़ेंहत्या।
इसके बाद जिन मामलों को अपवाद स्वरूप रखा गया है, उन्हें छोड़कर, यदि मृत्यु का कारण बनने वाला कृत्य मृत्यु का कारण बनने के इरादे से किया गया हो, तो गैर इरादतन हत्या, हत्या मानी जाएगी, या— द्वितीय. —यदि यह इस इरादे से किया गया हो कि अपराधी को ऐसी शारीरिक चोट पहुंचे जिससे उस व्यक्ति की मृत्यु होने की संभावना हो जिसे चोट…
पूरा पढ़ेंकिसी ऐसे व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनकर गैर इरादतन हत्या करना, जिसकी मृत्यु का इरादा नहीं था।
यदि कोई व्यक्ति किसी ऐसे कार्य को करके, जिसे वह जानबूझकर या जानबूझकर करने की संभावना जानता है, किसी ऐसे व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनता है जिसकी मृत्यु का न तो वह इरादा रखता है और न ही स्वयं जानता है कि वह उसकी मृत्यु का कारण बन सकता है, तो अपराधी द्वारा किया गया गैर इरादतन हत्या का अपराध करता है, जैसा कि तब होता जब…
पूरा पढ़ेंकिसी ऐसे व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनकर गैर इरादतन हत्या करना, जिसकी मृत्यु का इरादा नहीं था।
यदि कोई व्यक्ति किसी ऐसे कार्य को करके, जिसे वह जानबूझकर या जानबूझकर मृत्यु का कारण मानता है, किसी ऐसे व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनता है जिसकी मृत्यु का न तो वह इरादा रखता है और न ही स्वयं जानता है कि वह मृत्यु का कारण बन सकता है, तो अपराधी द्वारा किया गया गैर इरादतन हत्या का अपराध माना जाएगा, जैसा कि तब होता जब उसने…
पूरा पढ़ेंहत्या का दंड।
(1) जो कोई हत्या करेगा उसे मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी और वह जुर्माने का भी हकदार होगा। (2) जब पाँच या दो से अधिक व्यक्तियों का कोई समूह जाति, समुदाय, लिंग, जन्म स्थान, भाषा, व्यक्तिगत विश्वास या किसी अन्य समान आधार पर हत्या करता है, तो ऐसे समूह के प्रत्येक सदस्य को मृत्युदंड या आजीवन कारावास से दंडित…
पूरा पढ़ेंहत्या का दंड।
जो कोई भी हत्या करेगा उसे मृत्युदंड या 1 [आजीवन कारावास] से दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
पूरा पढ़ेंआजीवन कारावास की सजा पाए व्यक्ति द्वारा हत्या का दंड।
जो कोई भी आजीवन कारावास की सजा के अधीन रहते हुए हत्या करता है, उसे मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी, जिसका अर्थ उस व्यक्ति के प्राकृतिक जीवन का शेष भाग होगा।
पूरा पढ़ेंआजीवन कारावास की सजा पाए व्यक्ति द्वारा हत्या का दंड।
जो कोई भी 1 [आजीवन कारावास] की सजा के अधीन रहते हुए हत्या करता है, उसे मृत्युदंड दिया जाएगा।
पूरा पढ़ेंहत्या न करने के अपराध में गैर इरादतन हत्या के लिए सजा।
जो कोई भी हत्या न करने के इरादे से गैर इरादतन हत्या करता है, उसे आजीवन कारावास या किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसकी अवधि पांच वर्ष से कम नहीं होगी, लेकिन दस वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है, और जुर्माना भी लगाया जाएगा, यदि मृत्यु का कारण बनने वाला कृत्य मृत्यु का कारण बनने या ऐसी शारीरिक चोट पहुंचाने के…
पूरा पढ़ेंहत्या न करने के अपराध में गैर इरादतन हत्या के लिए सजा।
जो कोई भी हत्या न करने के इरादे से गैर इरादतन हत्या करता है, उसे 1 [आजीवन कारावास] या किसी भी प्रकार के कारावास से दस वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और जुर्माना भी लगाया जाएगा, यदि जिस कृत्य से मृत्यु हुई है वह मृत्यु का कारण बनने या ऐसी शारीरिक चोट पहुंचाने के इरादे से किया गया है जिससे मृत्यु होने की…
पूरा पढ़ेंलापरवाही से मृत्यु का कारण बनना।
(1) जो कोई भी लापरवाही या असावधानी से किसी व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनता है, जो जानबूझकर हत्या न हो, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से पांच वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और जुर्माना भी लगाया जाएगा; और यदि ऐसा कार्य किसी पंजीकृत चिकित्सक द्वारा चिकित्सा प्रक्रिया करते समय किया जाता है, तो उसे किसी भी प्रकार…
पूरा पढ़ेंलापरवाही से मृत्यु का कारण बनना।
1 [304ए. लापरवाही से मृत्यु का कारण बनना। --जो कोई भी किसी ऐसे जल्दबाजी या लापरवाहीपूर्ण कार्य को करके किसी व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनता है जो गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में नहीं आता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।] राज्य संशोधन हिमाचल…
पूरा पढ़ेंकिसी बच्चे या मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाना।
यदि कोई बच्चा, कोई मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति, कोई प्रलापग्रस्त व्यक्ति या नशे की हालत में कोई व्यक्ति आत्महत्या करता है, तो जो कोई भी ऐसी आत्महत्या के लिए उकसाता है, उसे मृत्युदंड या आजीवन कारावास या दस वर्ष से अधिक की अवधि के कारावास से दंडित किया जाएगा और उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।
पूरा पढ़ेंकिसी बच्चे या मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाना।
यदि अठारह वर्ष से कम आयु का कोई व्यक्ति, कोई पागल व्यक्ति, कोई प्रलापग्रस्त व्यक्ति, कोई मंदबुद्धि व्यक्ति, या नशे की हालत में कोई व्यक्ति आत्महत्या करता है, तो जो कोई भी ऐसी आत्महत्या के लिए उकसाता है, उसे मृत्युदंड या आजीवन कारावास, या दस वर्ष से अधिक की अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी, और जुर्माना भी लगाया…
पूरा पढ़ेंआत्महत्या के लिए उकसाना।
यदि कोई व्यक्ति आत्महत्या करता है, तो जो कोई भी ऐसी आत्महत्या करने में सहायता करता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दस वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
पूरा पढ़ेंआत्महत्या के लिए उकसाना।
यदि कोई व्यक्ति आत्महत्या करता है, तो जो कोई भी ऐसी आत्महत्या करने में सहायता करता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दस वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
पूरा पढ़ेंहत्या का प्रयास।
(1) जो कोई भी ऐसे इरादे या जानकारी के साथ और ऐसी परिस्थितियों में कोई कार्य करता है कि यदि वह उस कार्य से मृत्यु का कारण बनता है, तो वह हत्या का दोषी होगा, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दस वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और जुर्माना भी लगाया जाएगा; और यदि ऐसे कार्य से किसी व्यक्ति को चोट पहुँचती है, तो…
पूरा पढ़ेंहत्या का प्रयास।
जो कोई भी इस इरादे या जानकारी के साथ और ऐसी परिस्थितियों में कोई कार्य करता है कि यदि वह उस कार्य से मृत्यु का कारण बनता है, तो वह हत्या का दोषी होगा, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दस वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और जुर्माना भी लगाया जाएगा; और यदि ऐसे कार्य से किसी व्यक्ति को चोट पहुँचती है, तो अपराधी या…
पूरा पढ़ेंगैर इरादतन हत्या का प्रयास।
जो कोई भी इस इरादे या जानकारी के साथ और ऐसी परिस्थितियों में कोई कार्य करता है कि यदि वह उस कार्य से किसी की मृत्यु का कारण बनता है, तो वह हत्या न करने के योग्य गैर इरादतन हत्या का दोषी होगा, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा; और यदि ऐसे कार्य से…
पूरा पढ़ेंगैर इरादतन हत्या का प्रयास।
जो कोई भी इस इरादे या जानकारी के साथ और ऐसी परिस्थितियों में कोई कार्य करता है कि यदि वह उस कार्य से किसी की मृत्यु का कारण बनता है, तो वह हत्या न करने के योग्य गैर इरादतन हत्या का दोषी होगा, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा; और यदि ऐसे कार्य से…
पूरा पढ़ेंहटाई गई धारा
DELETED
धारा 309 - आत्महत्या करने का प्रयत्न
आत्महत्या करने का प्रयत्न जो कोई आत्महत्या करने का प्रयत्न करेगा, और उस अपराध के करने के लिए कोई कार्य करेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, 1[या जुर्माने से, या दोनों से,] दण्डित किया जाएगा ।
पूरा पढ़ेंधार्मिक सभा में अशांति फैलाना।
जो कोई भी स्वेच्छा से किसी ऐसे समूह में अशांति उत्पन्न करता है जो विधिवत रूप से धार्मिक पूजा या धार्मिक अनुष्ठानों के निष्पादन में लगा हुआ हो, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा जिसकी अवधि एक वर्ष तक हो सकती है, या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 296 - धार्मिक जमाव में विघ्न करना
धार्मिक जमाव में विघ्न करना जो कोई धार्मिक उपासना या धार्मिक संस्कारों में वैध रूप से लगे हुए किसी जमाव में स्वचेछया विघ्न कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
पूरा पढ़ेंकब्रिस्तानों आदि में अनाधिकृत प्रवेश करना।
जो कोई भी किसी व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से, या किसी व्यक्ति के धर्म का अपमान करने के इरादे से, या यह जानते हुए कि किसी व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंच सकती है, या किसी व्यक्ति के धर्म का अपमान हो सकता है, किसी पूजा स्थल या समाधि स्थल, या अंत्येष्टि अनुष्ठानों के लिए निर्धारित किसी स्थान, या मृतकों…
पूरा पढ़ेंधारा 297 - कब्रिस्तानों आदि में अतिचार करना
कब्रिस्तानों आदि में अतिचार करना जो कोई किसी उपासना स्थान में, या किसी कब्रिस्तान पर या अन्त्येष्टि क्रिया ओं के लिए या मॄतकों के अवशेषों के लिए निक्षेप स्थान के रूप में पॄथक् रखे गए किसी स्थान में अतिचार या किसी मानव शव की अवहेलना या अन्त्येष्टि संस्कारों के लिए एकत्रित किन्हीं व्यक्तियों को विघ्न कारित, इस आशय से…
पूरा पढ़ेंकिसी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाने के इरादे से शब्द आदि बोलना।
जो कोई भी जानबूझकर किसी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस व्यक्ति के श्रवण क्षेत्र में कोई शब्द बोलता है या कोई ध्वनि उत्पन्न करता है या उस व्यक्ति की दृष्टि में कोई इशारा करता है या उस व्यक्ति की दृष्टि में कोई वस्तु रखता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से एक वर्ष तक की अवधि के लिए, या…
पूरा पढ़ेंधारा 298 - धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के विमर्शित आशय से शब्द उच्चारित करना आदि
धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के विमर्शित आशय से शब्द उच्चारित करना आदि जो कोई किसी व्यक्ति की धार्मिक भावनओं को ठेस पहुंचाने के विमर्शित आशय से उसकी श्रवणगोचरता में कोई शब्द उच्चारित करेगा या कोई ध्वनि करेगा या उसकी दृष्टिगोचरता में कोई अंगविक्षेप करेगा, या कोई वस्तु रखेगा,वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से,…
पूरा पढ़ेंचोरी।
(1) जो कोई भी किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसके कब्जे से कोई चल संपत्ति बेईमानी से लेने के इरादे से, उस संपत्ति को इस प्रकार लेने के लिए ले जाता है, तो वह चोरी करता है। स्पष्टीकरण 1. —जब तक कोई वस्तु पृथ्वी से जुड़ी रहती है, वह चल संपत्ति न होने के कारण चोरी का विषय नहीं होती; परन्तु जैसे ही वह पृथ्वी से अलग हो जाती…
पूरा पढ़ेंधारा 378 - चोरी
चोरी जो कोई किसी व्यक्ति के कब्जे में से, उस व्यक्ति की सम्मति के बिना, कोई जंगम सम्पत्ति बेईमानी से ले लेने का आशय रखते हुए वह सम्पत्ति ऐसे लेने के लिए हटाता है, वह चोरी करता है, यह कहा जाता है । स्पष्टीकरण 1 - जब तक कोई वस्तु भूबद्ध रहती है, जंगम सम्पत्ति न होने से चोरी का विषय नहीं होती ; किन्तु ज्यों ही वह भूमि से…
पूरा पढ़ेंचोरी।
(1) जो कोई भी किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसके कब्जे से कोई चल संपत्ति बेईमानी से लेने के इरादे से, उस संपत्ति को इस प्रकार लेने के लिए ले जाता है, तो वह चोरी करता है। स्पष्टीकरण 1. —जब तक कोई वस्तु पृथ्वी से जुड़ी रहती है, वह चल संपत्ति न होने के कारण चोरी का विषय नहीं होती; परन्तु जैसे ही वह पृथ्वी से अलग हो जाती…
पूरा पढ़ेंधारा 378 - चोरी
चोरी जो कोई किसी व्यक्ति के कब्जे में से, उस व्यक्ति की सम्मति के बिना, कोई जंगम सम्पत्ति बेईमानी से ले लेने का आशय रखते हुए वह सम्पत्ति ऐसे लेने के लिए हटाता है, वह चोरी करता है, यह कहा जाता है । स्पष्टीकरण 1 - जब तक कोई वस्तु भूबद्ध रहती है, जंगम सम्पत्ति न होने से चोरी का विषय नहीं होती ; किन्तु ज्यों ही वह भूमि से…
पूरा पढ़ेंचोरी।
(1) जो कोई भी किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसके कब्जे से कोई चल संपत्ति बेईमानी से लेने के इरादे से, उस संपत्ति को इस प्रकार लेने के लिए ले जाता है, तो वह चोरी करता है। स्पष्टीकरण 1. —जब तक कोई वस्तु पृथ्वी से जुड़ी रहती है, वह चल संपत्ति न होने के कारण चोरी का विषय नहीं होती; परन्तु जैसे ही वह पृथ्वी से अलग हो जाती…
पूरा पढ़ेंधारा 379 - चोरी के लिए दंड
चोरी के लिए दंड जो कोई चोरी करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
पूरा पढ़ेंछीनना।
(1) चोरी छीनना है यदि, चोरी करने के उद्देश्य से, अपराधी अचानक या जल्दी से या बलपूर्वक किसी व्यक्ति से या उसके कब्जे से कोई चल संपत्ति छीन लेता है या सुरक्षित कर लेता है या छीन लेता है या ले जाता है। (2) जो कोई भी छीन-झपट का अपराध करेगा, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और वह…
पूरा पढ़ेंनई धारा
New Section
किसी आवासीय मकान, परिवहन के साधन या पूजा स्थल आदि में चोरी।
जो कोई भी चोरी करता है— (क) किसी भी भवन, तम्बू या पोत में जिसका उपयोग मानव निवास के रूप में या संपत्ति की सुरक्षा के लिए किया जाता हो; या (ख) माल या यात्रियों के परिवहन के लिए प्रयुक्त किसी भी परिवहन साधन का; या (ग) माल या यात्रियों के परिवहन के लिए उपयोग किए जाने वाले किसी भी परिवहन साधन से किसी भी वस्तु या सामान का;…
पूरा पढ़ेंघर में चोरी, आदि।
जो कोई भी किसी भवन, तम्बू या पोत में चोरी करता है, जिसका उपयोग मानव निवास के रूप में या संपत्ति की सुरक्षा के लिए किया जाता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से सात वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
पूरा पढ़ेंकिसी आवासीय मकान, परिवहन के साधन या पूजा स्थल आदि में चोरी।
जो कोई भी चोरी करता है— (क) किसी भी भवन, तम्बू या पोत में जिसका उपयोग मानव निवास के रूप में या संपत्ति की सुरक्षा के लिए किया जाता हो; या (ख) माल या यात्रियों के परिवहन के लिए प्रयुक्त किसी भी परिवहन साधन का; या (ग) माल या यात्रियों के परिवहन के लिए उपयोग किए जाने वाले किसी भी परिवहन साधन से किसी भी वस्तु या सामान का;…
पूरा पढ़ेंनई उपधारा
New Sub-Section
किसी आवासीय मकान, परिवहन के साधन या पूजा स्थल आदि में चोरी।
जो कोई भी चोरी करता है— (क) किसी भी भवन, तम्बू या पोत में जिसका उपयोग मानव निवास के रूप में या संपत्ति की सुरक्षा के लिए किया जाता हो; या (ख) माल या यात्रियों के परिवहन के लिए प्रयुक्त किसी भी परिवहन साधन का; या (ग) माल या यात्रियों के परिवहन के लिए उपयोग किए जाने वाले किसी भी परिवहन साधन से किसी भी वस्तु या सामान का;…
पूरा पढ़ेंनई उपधारा
New Sub-Section
किसी आवासीय मकान, परिवहन के साधन या पूजा स्थल आदि में चोरी।
जो कोई भी चोरी करता है— (क) किसी भी भवन, तम्बू या पोत में जिसका उपयोग मानव निवास के रूप में या संपत्ति की सुरक्षा के लिए किया जाता हो; या (ख) माल या यात्रियों के परिवहन के लिए प्रयुक्त किसी भी परिवहन साधन का; या (ग) माल या यात्रियों के परिवहन के लिए उपयोग किए जाने वाले किसी भी परिवहन साधन से किसी भी वस्तु या सामान का;…
पूरा पढ़ेंनई उपधारा
New Sub-Section
किसी आवासीय मकान, परिवहन के साधन या पूजा स्थल आदि में चोरी।
जो कोई भी चोरी करता है— (क) किसी भी भवन, तम्बू या पोत में जिसका उपयोग मानव निवास के रूप में या संपत्ति की सुरक्षा के लिए किया जाता हो; या (ख) माल या यात्रियों के परिवहन के लिए प्रयुक्त किसी भी परिवहन साधन का; या (ग) माल या यात्रियों के परिवहन के लिए उपयोग किए जाने वाले किसी भी परिवहन साधन से किसी भी वस्तु या सामान का;…
पूरा पढ़ेंनई उपधारा
New Sub-Section
क्लर्क या नौकर द्वारा मालिक के कब्जे में मौजूद संपत्ति की चोरी।
जो कोई भी क्लर्क या नौकर होते हुए, या क्लर्क या नौकर के रूप में कार्यरत होते हुए, अपने स्वामी या नियोक्ता के कब्जे में मौजूद किसी संपत्ति की चोरी करता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से सात वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
पूरा पढ़ेंधारा 381 - लिपिक या सेवक द्वारा स्वामी के कब्जे में की संपत्ति की चोरी
लिपिक या सेवक द्वारा स्वामी के कब्जे में की संपत्ति की चोरी जो कोई, लिपिक या सेवक होते हुए, या लिपिक या सेवक की हैसियत में नियोजित होते हुए, अपने स्वामी या नियोजक के कब्जे में की किसी संपत्ति के संबंध में चोरी करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और…
पूरा पढ़ेंचोरी करने के उद्देश्य से किसी की मृत्यु, चोट या बंधक बनाने की तैयारी करने के बाद की गई चोरी।
जो कोई भी चोरी करता है, और चोरी करने के उद्देश्य से, या चोरी करने के बाद भाग निकलने के उद्देश्य से, या चोरी से प्राप्त संपत्ति को अपने पास रखने के उद्देश्य से, किसी व्यक्ति को मृत्यु, चोट, बंधक बनाने, या मृत्यु, चोट या बंधक का भय उत्पन्न करने की तैयारी करता है, उसे दस वर्ष तक के कठोर कारावास की सजा दी जाएगी और उस पर…
पूरा पढ़ेंधारा 382 - चोरी करने के लिए मॄत्यु, उपहति या अवरोध कारित करने की तैयारी के पश्चात् चोरी
चोरी करने के लिए मॄत्यु, उपहति या अवरोध कारित करने की तैयारी के पश्चात् चोरी जो कोई चोरी करने के लिए, या चोरी करने के पश्चात् निकल भागने के लिए, या चोरी द्वारा ली गई संपत्ति को रखे रखने के लिए, किसी व्यक्ति की मॄत्यु, या उसे उपहति या उसका अवरोध कारित करने की, या मॄत्यु का, उपहति का या अवरोध का भय कारित करने की तैयारी…
पूरा पढ़ेंज़बरदस्ती वसूली।
(1) जो कोई जानबूझकर किसी व्यक्ति को उस व्यक्ति को या किसी अन्य को चोट पहुँचाने का भय दिलाता है, और इस प्रकार बेईमानी से उस भयभीत व्यक्ति को किसी व्यक्ति को कोई संपत्ति, या मूल्यवान प्रतिभूति, या हस्ताक्षरित या मुहरबंद कोई वस्तु सौंपने के लिए प्रेरित करता है जिसे मूल्यवान प्रतिभूति में परिवर्तित किया जा सकता है, वह…
पूरा पढ़ेंधारा 383 - उद्दापन
उद्दापन जो कोई किसी व्यक्ति को स्वयं उस व्यक्ति को या किसी अन्य व्यक्ति को कोई क्षति करने के भय में साशय डालता है, और तद्द्वारा इस प्रकार भय में डाले गए व्यक्ति को, कोई संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति या हस्ताक्षरित या मुद्रांकित कोई चीज, जिसे मूल्यवान प्रतिभूति में परिवर्तित किया जा सके, किसी व्यक्ति को परिदत्त करने के…
पूरा पढ़ेंज़बरदस्ती वसूली।
(1) जो कोई जानबूझकर किसी व्यक्ति को उस व्यक्ति को या किसी अन्य को चोट पहुँचाने का भय दिलाता है, और इस प्रकार बेईमानी से उस भयभीत व्यक्ति को किसी व्यक्ति को कोई संपत्ति, या मूल्यवान प्रतिभूति, या हस्ताक्षरित या मुहरबंद कोई वस्तु सौंपने के लिए प्रेरित करता है जिसे मूल्यवान प्रतिभूति में परिवर्तित किया जा सकता है, वह…
पूरा पढ़ेंधारा 383 - उद्दापन
उद्दापन जो कोई किसी व्यक्ति को स्वयं उस व्यक्ति को या किसी अन्य व्यक्ति को कोई क्षति करने के भय में साशय डालता है, और तद्द्वारा इस प्रकार भय में डाले गए व्यक्ति को, कोई संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति या हस्ताक्षरित या मुद्रांकित कोई चीज, जिसे मूल्यवान प्रतिभूति में परिवर्तित किया जा सके, किसी व्यक्ति को परिदत्त करने के…
पूरा पढ़ेंज़बरदस्ती वसूली।
(1) जो कोई जानबूझकर किसी व्यक्ति को उस व्यक्ति को या किसी अन्य को चोट पहुँचाने का भय दिलाता है, और इस प्रकार बेईमानी से उस भयभीत व्यक्ति को किसी व्यक्ति को कोई संपत्ति, या मूल्यवान प्रतिभूति, या हस्ताक्षरित या मुहरबंद कोई वस्तु सौंपने के लिए प्रेरित करता है जिसे मूल्यवान प्रतिभूति में परिवर्तित किया जा सकता है, वह…
पूरा पढ़ेंधारा 384 - उद्दापन के लिए दंड
उद्दापन के लिए दंड जो कोई उद्दापन करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
पूरा पढ़ेंज़बरदस्ती वसूली।
(1) जो कोई जानबूझकर किसी व्यक्ति को उस व्यक्ति को या किसी अन्य को चोट पहुँचाने का भय दिलाता है, और इस प्रकार बेईमानी से उस भयभीत व्यक्ति को किसी व्यक्ति को कोई संपत्ति, या मूल्यवान प्रतिभूति, या हस्ताक्षरित या मुहरबंद कोई वस्तु सौंपने के लिए प्रेरित करता है जिसे मूल्यवान प्रतिभूति में परिवर्तित किया जा सकता है, वह…
पूरा पढ़ेंधारा 385 - उद्दापन करने के लिए किसी व्यक्ति को क्षति के भय में डालना
उद्दापन करने के लिए किसी व्यक्ति को क्षति के भय में डालना जो कोई उद्दापन करने के लिए किसी व्यक्ति को किसी क्षति के पहुंचाने के भय में डालेगा या भय में डालने का प्रयत्न करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
पूरा पढ़ेंज़बरदस्ती वसूली।
(1) जो कोई जानबूझकर किसी व्यक्ति को उस व्यक्ति को या किसी अन्य को चोट पहुँचाने का भय दिलाता है, और इस प्रकार बेईमानी से उस भयभीत व्यक्ति को किसी व्यक्ति को कोई संपत्ति, या मूल्यवान प्रतिभूति, या हस्ताक्षरित या मुहरबंद कोई वस्तु सौंपने के लिए प्रेरित करता है जिसे मूल्यवान प्रतिभूति में परिवर्तित किया जा सकता है, वह…
पूरा पढ़ेंधारा 387 - उद्दापन करने के लिए किसी व्यक्ति को मॄत्यु या घोर उपहति के भय में डालना
उद्दापन करने के लिए किसी व्यक्ति को मॄत्यु या घोर उपहति के भय में डालना जो कोई उद्दापन करने के लिए किसी व्यक्ति को स्वयं उसकी या किसी अन्य व्यक्ति की मॄत्यु या घोर उपहति के भय में डालेगा या भय में डालने का प्रयत्न करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और…
पूरा पढ़ेंज़बरदस्ती वसूली।
(1) जो कोई जानबूझकर किसी व्यक्ति को उस व्यक्ति को या किसी अन्य को चोट पहुँचाने का भय दिलाता है, और इस प्रकार बेईमानी से उस भयभीत व्यक्ति को किसी व्यक्ति को कोई संपत्ति, या मूल्यवान प्रतिभूति, या हस्ताक्षरित या मुहरबंद कोई वस्तु सौंपने के लिए प्रेरित करता है जिसे मूल्यवान प्रतिभूति में परिवर्तित किया जा सकता है, वह…
पूरा पढ़ेंधारा 386 - किसी व्यक्ति को मॄत्यु या घोर उपहति के भय में डालकर उद्दापन
किसी व्यक्ति को मॄत्यु या घोर उपहति के भय में डालकर उद्दापन जो कोई किसी व्यक्ति को स्वयं उसकी या किसी अन्य व्यक्ति की मॄत्यु या घोर उपहति के भय में डालकर उद्दापन करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
पूरा पढ़ेंज़बरदस्ती वसूली।
(1) जो कोई जानबूझकर किसी व्यक्ति को उस व्यक्ति को या किसी अन्य को चोट पहुँचाने का भय दिलाता है, और इस प्रकार बेईमानी से उस भयभीत व्यक्ति को किसी व्यक्ति को कोई संपत्ति, या मूल्यवान प्रतिभूति, या हस्ताक्षरित या मुहरबंद कोई वस्तु सौंपने के लिए प्रेरित करता है जिसे मूल्यवान प्रतिभूति में परिवर्तित किया जा सकता है, वह…
पूरा पढ़ेंधारा 389 - उद्दापन करने के लिए किसी व्यक्ति को अपराध का अभियोग लगाने के भय में डालना
उद्दापन करने के लिए किसी व्यक्ति को अपराध का अभियोग लगाने के भय में डालना जो कोई उद्दापन करने के लिए किसी व्यक्ति को, स्वयं उसके विरुद्ध या किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध यह अभियोग लगाने का भय दिखलाएगा या यह भय दिखलाने का प्रयत्न करेगा कि उसने ऐसा अपराध किया है, या करने का प्रयत्न किया है, जो मॄत्यु से या आजीवन कारावास…
पूरा पढ़ेंज़बरदस्ती वसूली।
(1) जो कोई जानबूझकर किसी व्यक्ति को उस व्यक्ति को या किसी अन्य को चोट पहुँचाने का भय दिलाता है, और इस प्रकार बेईमानी से उस भयभीत व्यक्ति को किसी व्यक्ति को कोई संपत्ति, या मूल्यवान प्रतिभूति, या हस्ताक्षरित या मुहरबंद कोई वस्तु सौंपने के लिए प्रेरित करता है जिसे मूल्यवान प्रतिभूति में परिवर्तित किया जा सकता है, वह…
पूरा पढ़ेंधारा 388 - मॄत्यु या आजीवन कारावास, आदि से दंडनीय अपराध का अभियोग लगाने की धमकी देकर उद्दापन
मॄत्यु या आजीवन कारावास, आदि से दंडनीय अपराध का अभियोग लगाने की धमकी देकर उद्दापन जो कोई किसी व्यक्ति को स्वयं उसके विरुद्ध या किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध यह अभियोग लगाने के भय में डालकर कि उसने कोई ऐसा अपराध किया है, या करने का प्रयत्न किया है, जो मॄत्यु से या आजीवन कारावास से या ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष…
पूरा पढ़ेंडकैती।
(1) सभी डकैती में या तो चोरी होती है या जबरन वसूली। (2) चोरी डकैती है यदि, चोरी करने के उद्देश्य से, या चोरी करते समय, या चोरी से प्राप्त संपत्ति को ले जाने या ले जाने का प्रयास करते समय, अपराधी उस उद्देश्य से स्वेच्छा से किसी व्यक्ति को मृत्यु या चोट या गलत तरीके से रोकना, या तत्काल मृत्यु या तत्काल चोट या तत्काल गलत…
पूरा पढ़ेंधारा 390 - लूट
लूट सब प्रकार की लूट में या तो चोरी या उद्दापन होता है । चोरी कब लूट है - चोरी “लूट” है, यदि उस चोरी को करने के लिए, या उस चोरी के करने में या उस चोरी द्वारा अभिप्राप्त सम्पत्ति को ले जाने या ले जाने का प्रयत्न करने में, अपराधी उस उद्देश्य से स्वेच्छया किसी व्यक्ति की मॄत्यु, या उपहति या उसका सदोष अवरोध या तत्काल…
पूरा पढ़ेंडकैती।
(1) सभी डकैती में या तो चोरी होती है या जबरन वसूली। (2) चोरी डकैती है यदि, चोरी करने के उद्देश्य से, या चोरी करते समय, या चोरी से प्राप्त संपत्ति को ले जाने या ले जाने का प्रयास करते समय, अपराधी उस उद्देश्य से स्वेच्छा से किसी व्यक्ति को मृत्यु या चोट या गलत तरीके से रोकना, या तत्काल मृत्यु या तत्काल चोट या तत्काल गलत…
पूरा पढ़ेंधारा 390 - लूट
लूट सब प्रकार की लूट में या तो चोरी या उद्दापन होता है । चोरी कब लूट है - चोरी “लूट” है, यदि उस चोरी को करने के लिए, या उस चोरी के करने में या उस चोरी द्वारा अभिप्राप्त सम्पत्ति को ले जाने या ले जाने का प्रयत्न करने में, अपराधी उस उद्देश्य से स्वेच्छया किसी व्यक्ति की मॄत्यु, या उपहति या उसका सदोष अवरोध या तत्काल…
पूरा पढ़ेंडकैती।
(1) सभी डकैती में या तो चोरी होती है या जबरन वसूली। (2) चोरी डकैती है यदि, चोरी करने के उद्देश्य से, या चोरी करते समय, या चोरी से प्राप्त संपत्ति को ले जाने या ले जाने का प्रयास करते समय, अपराधी उस उद्देश्य से स्वेच्छा से किसी व्यक्ति को मृत्यु या चोट या गलत तरीके से रोकना, या तत्काल मृत्यु या तत्काल चोट या तत्काल गलत…
पूरा पढ़ेंधारा 392 - लूट के लिए दण्ड
लूट के लिए दण्ड जो कोई लूट करेगा, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा, और यदि लूट राजमार्ग पर सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच की जाए, तो कारावास चौदह वर्ष तक का हो सकेगा ।
पूरा पढ़ेंडकैती।
(1) सभी डकैती में या तो चोरी होती है या जबरन वसूली। (2) चोरी डकैती है यदि, चोरी करने के उद्देश्य से, या चोरी करते समय, या चोरी से प्राप्त संपत्ति को ले जाने या ले जाने का प्रयास करते समय, अपराधी उस उद्देश्य से स्वेच्छा से किसी व्यक्ति को मृत्यु या चोट या गलत तरीके से रोकना, या तत्काल मृत्यु या तत्काल चोट या तत्काल गलत…
पूरा पढ़ेंधारा 393 - लूट करने का प्रयत्न
लूट करने का प्रयत्न जो कोई लूट करने का प्रयत्न करेगा, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
पूरा पढ़ेंडकैती।
(1) सभी डकैती में या तो चोरी होती है या जबरन वसूली। (2) चोरी डकैती है यदि, चोरी करने के उद्देश्य से, या चोरी करते समय, या चोरी से प्राप्त संपत्ति को ले जाने या ले जाने का प्रयास करते समय, अपराधी उस उद्देश्य से स्वेच्छा से किसी व्यक्ति को मृत्यु या चोट या गलत तरीके से रोकना, या तत्काल मृत्यु या तत्काल चोट या तत्काल गलत…
पूरा पढ़ेंधारा 394 - लूट करने में स्वेच्छया उपहति कारित करना
लूट करने में स्वेच्छया उपहति कारित करना यदि कोई व्यक्ति लूट करने में या लूट का प्रयत्न करने में स्वेच्छया उपहति कारित करेगा, तो ऐसा व्यक्ति और जो कोई अन्य व्यक्ति ऐसी लूट करने में, या लूट का प्रयत्न करने में संयुक्त तौर पर संपॄक्त होगा, वह आजीवन कारावास से या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित…
पूरा पढ़ें- BNS §2(31)IPC §30
परिभाषाएँ।
धारा 30 - “मूल्यवान प्रतिभूति”
- BNS §30IPC §92
बिना सहमति के किसी व्यक्ति के लाभ के लिए सद्भावनापूर्वक किया गया कार्य।
धारा 92 - सम्मति के बिना किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक किया गया कार्य
- BNS §80IPC §304B
दहेज हत्या।
- BNS §101IPC §300
हत्या।
- BNS §102IPC §301
किसी ऐसे व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनकर गैर इरादतन हत्या करना, जिसकी मृत्यु का इरादा नहीं था।
- BNS §103IPC §302बदलाव हुआ
हत्या का दंड।
- BNS §104IPC §303बदलाव हुआ
आजीवन कारावास की सजा पाए व्यक्ति द्वारा हत्या का दंड।
- BNS §105IPC §304बदलाव हुआ
हत्या न करने के अपराध में गैर इरादतन हत्या के लिए सजा।
- BNS §106IPC §304Aबदलाव हुआ
लापरवाही से मृत्यु का कारण बनना।
- BNS §107IPC §305
किसी बच्चे या मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाना।
किसी बच्चे या मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाना।
- BNS §108IPC §306
आत्महत्या के लिए उकसाना।
- BNS §109IPC §307बदलाव हुआ
हत्या का प्रयास।
- BNS §110IPC §308
गैर इरादतन हत्या का प्रयास।
- BNS §DELETEDIPC §309
हटाई गई धारा
धारा 309 - आत्महत्या करने का प्रयत्न
BNS §DELETEDIPC §309 - BNS §300IPC §296
धार्मिक सभा में अशांति फैलाना।
धारा 296 - धार्मिक जमाव में विघ्न करना
- BNS §301IPC §297
कब्रिस्तानों आदि में अनाधिकृत प्रवेश करना।
धारा 297 - कब्रिस्तानों आदि में अतिचार करना
- BNS §302IPC §298
किसी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाने के इरादे से शब्द आदि बोलना।
धारा 298 - धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के विमर्शित आशय से शब्द उच्चारित करना आदि
- BNS §303IPC §378बदलाव हुआ
चोरी।
धारा 378 - चोरी
- BNS §303 (1)IPC §378
चोरी।
धारा 378 - चोरी
- BNS §303 (2)IPC §379
चोरी।
धारा 379 - चोरी के लिए दंड
- BNS §304IPC §New Section
छीनना।
नई धारा
BNS §304IPC §New Section - BNS §305IPC §380बदलाव हुआ
किसी आवासीय मकान, परिवहन के साधन या पूजा स्थल आदि में चोरी।
घर में चोरी, आदि।
- BNS §305(b)IPC §New Sub-Section
किसी आवासीय मकान, परिवहन के साधन या पूजा स्थल आदि में चोरी।
नई उपधारा
BNS §305(b)IPC §New Sub-Section - BNS §305(c)IPC §New Sub-Section
किसी आवासीय मकान, परिवहन के साधन या पूजा स्थल आदि में चोरी।
नई उपधारा
BNS §305(c)IPC §New Sub-Section - BNS §305(d)IPC §New Sub-Section
किसी आवासीय मकान, परिवहन के साधन या पूजा स्थल आदि में चोरी।
नई उपधारा
BNS §305(d)IPC §New Sub-Section - BNS §305(e)IPC §New Sub-Section
किसी आवासीय मकान, परिवहन के साधन या पूजा स्थल आदि में चोरी।
नई उपधारा
BNS §305(e)IPC §New Sub-Section - BNS §306IPC §381
क्लर्क या नौकर द्वारा मालिक के कब्जे में मौजूद संपत्ति की चोरी।
धारा 381 - लिपिक या सेवक द्वारा स्वामी के कब्जे में की संपत्ति की चोरी
- BNS §307IPC §382
चोरी करने के उद्देश्य से किसी की मृत्यु, चोट या बंधक बनाने की तैयारी करने के बाद की गई चोरी।
धारा 382 - चोरी करने के लिए मॄत्यु, उपहति या अवरोध कारित करने की तैयारी के पश्चात् चोरी
- BNS §308IPC §383बदलाव हुआ
ज़बरदस्ती वसूली।
धारा 383 - उद्दापन
- BNS §308 (1)IPC §383
ज़बरदस्ती वसूली।
धारा 383 - उद्दापन
- BNS §308 (2)IPC §384
ज़बरदस्ती वसूली।
धारा 384 - उद्दापन के लिए दंड
- BNS §308 (3)IPC §385
ज़बरदस्ती वसूली।
धारा 385 - उद्दापन करने के लिए किसी व्यक्ति को क्षति के भय में डालना
- BNS §308 (4)IPC §387
ज़बरदस्ती वसूली।
धारा 387 - उद्दापन करने के लिए किसी व्यक्ति को मॄत्यु या घोर उपहति के भय में डालना
- BNS §308 (5)IPC §386
ज़बरदस्ती वसूली।
धारा 386 - किसी व्यक्ति को मॄत्यु या घोर उपहति के भय में डालकर उद्दापन
- BNS §308 (6)IPC §389
ज़बरदस्ती वसूली।
धारा 389 - उद्दापन करने के लिए किसी व्यक्ति को अपराध का अभियोग लगाने के भय में डालना
- BNS §308 (7)IPC §388
ज़बरदस्ती वसूली।
धारा 388 - मॄत्यु या आजीवन कारावास, आदि से दंडनीय अपराध का अभियोग लगाने की धमकी देकर उद्दापन
- BNS §309IPC §390बदलाव हुआ
डकैती।
धारा 390 - लूट
- BNS §309 (1)(2)(3)IPC §390
डकैती।
धारा 390 - लूट
- BNS §309 (4)IPC §392
डकैती।
धारा 392 - लूट के लिए दण्ड
- BNS §309(5)IPC §393
डकैती।
धारा 393 - लूट करने का प्रयत्न
- BNS §309(6)IPC §394
डकैती।
धारा 394 - लूट करने में स्वेच्छया उपहति कारित करना
