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25 प्रविष्टियाँ
पूर्व दोषसिद्धि के बाद कुछ अपराधों के लिए बढ़ी हुई सजा।
जो कोई भी, भारत में किसी न्यायालय द्वारा इस संहिता के अध्याय X या अध्याय XVII के अंतर्गत किसी ऐसे अपराध का दोषी पाया जाता है, जिसके लिए तीन वर्ष या उससे अधिक की अवधि के लिए किसी भी प्रकार का कारावास दंडनीय है, और वह किसी ऐसे अपराध का दोषी पाया जाता है जिसके लिए इन अध्यायों में से किसी एक के अंतर्गत समान अवधि के लिए…
पूरा पढ़ेंधारा 75 - पूर्व दोषसिद्धि के पश्चात् अध्याय 12 या अध्याय 17 के अधीन कतिपय अपराधों के लिए वर्धित दण्ड
पूर्व दोषसिद्धि के पश्चात् अध्याय 12 या अध्याय 17 के अधीन कतिपय अपराधों के लिए वर्धित दण्ड जो कोई व्यक्ति - (क) भारत में के किसी न्यायालय द्वारा इस संहिता के अध्याय 12 या अध्याय 17 के अधीन तीन वर्ष या उससे अधिक की अवधि के लिए दोनों में से किसी भांति के कारावास से दण्डनीय अपराध के लिए, दोषसिद्ध ठहराए जाने के पश्चात् उन…
पूरा पढ़ेंहमला करना।
जो कोई भी ऐसा इशारा करता है या कोई ऐसी तैयारी करता है जिसका इरादा हो या यह जानते हुए कि ऐसा इशारा या तैयारी उपस्थित किसी भी व्यक्ति को यह आशंका दिलाएगी कि इशारा या तैयारी करने वाला व्यक्ति उस व्यक्ति पर आपराधिक बल का प्रयोग करने वाला है, तो उसे हमला करने वाला कहा जाता है। स्पष्टीकरण— मात्र शब्दों से हमला नहीं होता।…
पूरा पढ़ेंधारा 351 - हमला
हमला जो कोई, कोई अंगविक्षेप या कोई तैयारी इस आशय से करता है, या यह सम्भाव्य जानते हुए करता है कि ऐसे अंगविक्षेप या ऐसी तैयारी करने से किसी उपस्थित व्यक्ति को यह आशंका हो जाएगी कि जो वैसा अंगविक्षेप या तैयारी करता है, वह उस व्यक्ति पर आपराधिक बल का प्रयोग करने ही वाला है, वह हमला करता है, यह कहा जाता है । स्पष्टीकरण -…
पूरा पढ़ेंगंभीर उकसावे के अलावा अन्य परिस्थितियों में हमले या आपराधिक बल प्रयोग के लिए दंड।
जो कोई भी किसी व्यक्ति पर गंभीर और अचानक उकसावे के अलावा किसी अन्य कारण से हमला करता है या आपराधिक बल का प्रयोग करता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन महीने तक की अवधि के लिए, या एक हजार रुपये तक के जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा। स्पष्टीकरण 1.—गंभीर और अचानक उकसावे से इस धारा के तहत अपराध के लिए सजा…
पूरा पढ़ेंधारा 352 - गम्भीर प्रकोपन होने से अन्यथा हमला करने या आपराधिक बल का प्रयोग करने के लिए दण्ड
गम्भीर प्रकोपन होने से अन्यथा हमला करने या आपराधिक बल का प्रयोग करने के लिए दण्ड जो कोई किसी व्यक्ति पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग उस व्यक्ति द्वारा गम्भीर और अचानक प्रकोपन दिए जाने पर करने से अन्यथा करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए…
पूरा पढ़ेंलोक सेवक को उसके कर्तव्य निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
जो कोई भी किसी लोक सेवक पर उसके कर्तव्य निर्वाह के दौरान हमला करता है या आपराधिक बल का प्रयोग करता है, या उस व्यक्ति को उसके कर्तव्य निर्वाह से रोकने या हतोत्साहित करने के इरादे से, या उस व्यक्ति द्वारा अपने कर्तव्य के वैध निर्वाह में किए गए या किए जाने के प्रयास के परिणामस्वरूप, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो…
पूरा पढ़ेंलोक सेवक को उसके कर्तव्य निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
जो कोई भी किसी लोक सेवक पर उसके कर्तव्य निर्वहन के दौरान हमला करता है या आपराधिक बल का प्रयोग करता है, या उस व्यक्ति को उसके कर्तव्य निर्वहन से रोकने या हतोत्साहित करने के इरादे से, या उस व्यक्ति द्वारा उसके कर्तव्य के वैध निर्वहन में किए गए या किए जाने के प्रयास के परिणामस्वरूप, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो…
पूरा पढ़ेंकिसी व्यक्ति को अपमानित करने के इरादे से हमला करना या आपराधिक बल का प्रयोग करना, गंभीर उकसावे के अलावा अन्य मामलों में।
जो कोई भी किसी व्यक्ति पर हमला करता है या आपराधिक बल का प्रयोग करता है, जिससे उस व्यक्ति का अपमान करने का इरादा हो, सिवाय उस व्यक्ति द्वारा दिए गए गंभीर और अचानक उकसावे के, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 355 - गम्भीर प्रकोपन होने से अन्यथा किसी व्यक्ति का अनादर करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
गम्भीर प्रकोपन होने से अन्यथा किसी व्यक्ति का अनादर करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग जो कोई किसी व्यक्ति पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग उस व्यक्ति द्वारा गम्भीर और अचानक प्रकोपन दिए जाने पर भारतीय दंड संहिता, 1860 67 करने, से अन्यथा, इस आशय से करेगा कि तद्द्वारा उसका अनादर किया जाए, वह दोनों में से…
पूरा पढ़ेंकिसी व्यक्ति द्वारा ले जाई जा रही संपत्ति की चोरी करने के प्रयास में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
जो कोई भी किसी व्यक्ति पर हमला करता है या आपराधिक बल का प्रयोग करता है, उस व्यक्ति द्वारा पहने या ले जाए जा रहे किसी भी सामान पर चोरी करने के प्रयास में, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंकिसी व्यक्ति द्वारा ले जाई जा रही संपत्ति की चोरी करने के प्रयास में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
जो कोई भी किसी व्यक्ति पर हमला करता है या आपराधिक बल का प्रयोग करता है, उस व्यक्ति द्वारा पहने या ले जाए जा रहे किसी भी सामान पर चोरी करने के प्रयास में, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंकिसी व्यक्ति को गलत तरीके से कैद करने के प्रयास में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
जो कोई भी किसी व्यक्ति को अवैध रूप से कैद करने के प्रयास में उस पर हमला करता है या आपराधिक बल का प्रयोग करता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से एक वर्ष तक की अवधि के लिए, या पांच हजार रुपये तक के जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 357 - किसी व्यक्ति का सदोष परिरोध करने के प्रयत्नों में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
किसी व्यक्ति का सदोष परिरोध करने के प्रयत्नों में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग जो कोई किसी व्यक्ति पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग उस व्यक्ति का सदोष परिरोध करने का प्रयत्न करने में करेगा, वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या…
पूरा पढ़ेंगंभीर उकसावे पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
जो कोई भी किसी व्यक्ति द्वारा दिए गए गंभीर और अचानक उकसावे पर उस व्यक्ति पर हमला करता है या आपराधिक बल का प्रयोग करता है, उसे एक महीने तक की साधारण कारावास या एक हजार रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा। स्पष्टीकरण.—यह धारा धारा 131 के समान स्पष्टीकरण के अधीन है।
पूरा पढ़ेंधारा 358 - गम्भीर प्रकोपन मिलने पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
गम्भीर प्रकोपन मिलने पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग जो कोई किसी व्यक्ति पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग उस व्यक्ति द्वारा दिए गए गम्भीर और अचानक प्रकोपन पर करेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दो सौ रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से, दण्डित किया जाएगा । स्पष्टीकरण - अंतिम धारा…
पूरा पढ़ेंअपहरण।
(1) अपहरण दो प्रकार के होते हैं: भारत से अपहरण और वैधानिक संरक्षकता से अपहरण— (क) जो कोई भी किसी व्यक्ति को उसकी सहमति के बिना, या उस व्यक्ति की ओर से सहमति देने के लिए कानूनी रूप से अधिकृत किसी व्यक्ति की सहमति के बिना, भारत की सीमाओं से बाहर ले जाता है, तो उसे उस व्यक्ति का भारत से अपहरण करना कहा जाता है; (ख) जो कोई…
पूरा पढ़ेंधारा 359 - व्यपहरण
व्यपहरण व्यपहरण दो किस्म का होता है ; भारत में से व्यपहरण और विधिपूर्ण संरक्षकता में से व्यपहरण ।
पूरा पढ़ेंअपहरण।
(1) अपहरण दो प्रकार के होते हैं: भारत से अपहरण और वैधानिक संरक्षकता से अपहरण— (क) जो कोई भी किसी व्यक्ति को उसकी सहमति के बिना, या उस व्यक्ति की ओर से सहमति देने के लिए कानूनी रूप से अधिकृत किसी व्यक्ति की सहमति के बिना, भारत की सीमाओं से बाहर ले जाता है, तो उसे उस व्यक्ति का भारत से अपहरण करना कहा जाता है; (ख) जो कोई…
पूरा पढ़ेंधारा 359 - व्यपहरण
व्यपहरण व्यपहरण दो किस्म का होता है ; भारत में से व्यपहरण और विधिपूर्ण संरक्षकता में से व्यपहरण ।
पूरा पढ़ेंअपहरण।
(1) अपहरण दो प्रकार के होते हैं: भारत से अपहरण और वैधानिक संरक्षकता से अपहरण— (क) जो कोई भी किसी व्यक्ति को उसकी सहमति के बिना, या उस व्यक्ति की ओर से सहमति देने के लिए कानूनी रूप से अधिकृत किसी व्यक्ति की सहमति के बिना, भारत की सीमाओं से बाहर ले जाता है, तो उसे उस व्यक्ति का भारत से अपहरण करना कहा जाता है; (ख) जो कोई…
पूरा पढ़ेंधारा 360 - भारत में से व्यपहरण
भारत में से व्यपहरण जो कोई किसी व्यक्ति का उस व्यक्ति की, या उस व्यक्ति की ओर से सम्मति देने के लिए वैध रूप से प्राधिकॄत किसी व्यक्ति की सम्मति के बिना, 1[भारत] की सीमाओं से परे प्रवहण कर देता है, वह 1[भारत] में से उस व्यक्ति का व्यपहरण करता है, यह कहा जाता है ।
पूरा पढ़ेंअपहरण।
(1) अपहरण दो प्रकार के होते हैं: भारत से अपहरण और वैधानिक संरक्षकता से अपहरण— (क) जो कोई भी किसी व्यक्ति को उसकी सहमति के बिना, या उस व्यक्ति की ओर से सहमति देने के लिए कानूनी रूप से अधिकृत किसी व्यक्ति की सहमति के बिना, भारत की सीमाओं से बाहर ले जाता है, तो उसे उस व्यक्ति का भारत से अपहरण करना कहा जाता है; (ख) जो कोई…
पूरा पढ़ेंधारा 361 - विधिपूर्ण संरक्षकता में से व्यपहरण
विधिपूर्ण संरक्षकता में से व्यपहरण जो कोई किसी अप्राप्तव्य को, यदि वह नर हो, तो सोलह वर्ष से कम आयु वाले को, या यदि वह नारी हो तो अठारह वर्ष से कम आयु वाली को या किसी विकॄतचित्त व्यक्ति को, ऐसे अप्राप्तवय या विकॄतचित्त व्यक्ति के विधिपूर्ण संरक्षक की संरक्षकता में से ऐसे संरक्षक की सम्मति के बिना ले जाता है या बहका ले…
पूरा पढ़ेंअपहरण।
(1) अपहरण दो प्रकार के होते हैं: भारत से अपहरण और वैधानिक संरक्षकता से अपहरण— (क) जो कोई भी किसी व्यक्ति को उसकी सहमति के बिना, या उस व्यक्ति की ओर से सहमति देने के लिए कानूनी रूप से अधिकृत किसी व्यक्ति की सहमति के बिना, भारत की सीमाओं से बाहर ले जाता है, तो उसे उस व्यक्ति का भारत से अपहरण करना कहा जाता है; (ख) जो कोई…
पूरा पढ़ेंधारा 363 - व्यपहरण के लिए दण्ड
व्यपहरण के लिए दण्ड जो कोई भारत में से या विधिपूर्ण संरक्षकता में से किसी व्यक्ति का व्यपहरण करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
पूरा पढ़ेंअपहरण।
जो कोई भी बलपूर्वक या छलपूर्ण साधनों से किसी व्यक्ति को किसी स्थान से जाने के लिए विवश करता है, उसे उस व्यक्ति का अपहरण करना कहा जाता है।
पूरा पढ़ेंधारा 362 - अपहरण
अपहरण जो कोई किसी व्यक्ति को किसी स्थान से जाने के लिए बल द्वारा विवश करता है, या किन्हीं प्रवंचनापूर्ण उपायों द्वारा उत्प्रेरित करता है, वह उस व्यक्ति का अपहरण करता है, यह कहा जाता है ।
पूरा पढ़ेंभीख मांगने के उद्देश्य से किसी बच्चे का अपहरण करना या उसे अपंग करना।
(1) जो कोई किसी बच्चे का अपहरण करता है या, ऐसे बच्चे का वैध अभिभावक न होते हुए, उस बच्चे की अभिरक्षा प्राप्त करता है, ताकि ऐसे बच्चे को भीख मांगने के उद्देश्य से नियोजित या उपयोग किया जा सके, उसे कम से कम दस वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जो आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, और वह जुर्माने का भी हकदार…
पूरा पढ़ेंधारा 363A - भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए अप्राप्तवय का व्यपहरण का विकलांगीकरण
भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए अप्राप्तवय का व्यपहरण का विकलांगीकरण (1) जो कोई किसी अप्राप्तवय का इसलिए व्यपहरण करेगा या अप्राप्तवय का विधिपूर्ण संरक्षक स्वयं न होते हुए अप्राप्तवय की अभिरक्षा इसलिए अभिप्राप्त करेगा कि ऐसा अप्राप्तवय भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए नियोजित या प्रयुक्त किया जाए, वह दोनों में से किसी…
पूरा पढ़ेंऐसे कैदी को भागने में सहायता करना, उसे बचाना या उसे शरण देना।
जो कोई भी जानबूझकर किसी राजकीय कैदी या युद्धबंदी को वैध हिरासत से भागने में सहायता करता है या सहायता प्रदान करता है, या ऐसे किसी कैदी को छुड़ाता है या छुड़ाने का प्रयास करता है, या वैध हिरासत से भागे हुए किसी कैदी को शरण देता है या छुपाता है, या ऐसे कैदी को पुनः पकड़ने में किसी प्रकार का प्रतिरोध करता है या करने का…
पूरा पढ़ेंधारा 130 - ऐसे कैदी के निकल भागने में सहायता देना, उसे छुड़ाना या संश्रय देना
ऐसे कैदी के निकल भागने में सहायता देना, उसे छुड़ाना या संश्रय देना जो कोई जानते हुए किसी राजकैदी या युद्धकैदी को विधिपूर्ण अभिरक्षा से निकल भागने में मदद या सहायता देगा, या किसी ऐसे कैदी को छुड़ाएगा, या छुड़ाने का प्रयत्न करेगा, या किसी ऐसे कैदी को, जो विधिपूर्ण अभिरक्षा से निकल भागा है, संश्रय देगा या छिपाएगा या ऐसे…
पूरा पढ़ेंविद्रोह को उकसाना, या किसी सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक को उसके कर्तव्य से विचलित करने का प्रयास करना।
जो कोई भी भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायु सेना में किसी अधिकारी, सैनिक, नाविक या वायुसैनिक द्वारा विद्रोह करने में सहायता करता है या ऐसे किसी अधिकारी, सैनिक, नाविक या वायुसैनिक को उसकी निष्ठा या कर्तव्य से विमुख करने का प्रयास करता है, उसे आजीवन कारावास या दस वर्ष तक की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के कारावास से…
पूरा पढ़ेंधारा 131 - विद्रोह का दुष्प्रेरण, या किसी सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक को कर्तव्य से विचलित करने का प्रयत्न करना
विद्रोह का दुष्प्रेरण, या किसी सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक को कर्तव्य से विचलित करने का प्रयत्न करना जो कोई भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायुसेना के किसी आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा विद्रोह किया जाना दुष्प्रेरित करेगा, या ऐसे किसी आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक को उसकी राजनिष्ठा से या उसके कर्तव्य…
पूरा पढ़ेंविद्रोह को उकसाना, यदि इसके परिणामस्वरूप विद्रोह किया जाता है।
भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायु सेना में कार्यरत किसी अधिकारी, सैनिक, नाविक या वायुसैनिक द्वारा विद्रोह करने के लिए उकसाने वाला कोई भी व्यक्ति, यदि उस उकसावे के परिणामस्वरूप विद्रोह होता है, तो उसे मृत्युदंड या आजीवन कारावास या दस वर्ष तक की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा और उस पर…
पूरा पढ़ेंधारा 132 - विद्रोह का दुष्प्रेरण, यदि उसके परिणामस्वरूप विद्रोह किया जाए
विद्रोह का दुष्प्रेरण, यदि उसके परिणामस्वरूप विद्रोह किया जाए जो कोई भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायुसेना के किसी आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा विद्रोह किया जाना दुष्प्रेरित करेगा, तो यदि उस दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप विद्रोह किया जाए, वह मृत्यु से, या आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के…
पूरा पढ़ेंकिसी सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अपने वरिष्ठ अधिकारी पर, जब वह अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहा हो, हमला करने के लिए उकसाना।
जो कोई भी भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायु सेना के किसी अधिकारी, सैनिक, नाविक या वायुसैनिक द्वारा अपने पद का निर्वहन कर रहे किसी वरिष्ठ अधिकारी पर हमले में सहायता करता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 133 - सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अपने वरिष्ठ आफिसर पर, जब कि वह आफिसर अपने पद-निष्पादन में हो, हमले का दुष्प्रेरण
सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अपने वरिष्ठ आफिसर पर, जब कि वह आफिसर अपने पद-निष्पादन में हो, हमले का दुष्प्रेरण जो कोई भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायुसेना के किसी आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा किसी वरिष्ठ आफिसर पर, जब कि वह अपने पद के निष्पादन में हो, हमला किया जाना दुष्प्रेरित करेगा, वह दोनों में…
पूरा पढ़ेंयदि हमला किया गया हो तो ऐसे हमले में सहायता करना।
भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायु सेना में कार्यरत किसी अधिकारी, सैनिक, नाविक या वायुसैनिक द्वारा अपने पद का निर्वहन कर रहे किसी वरिष्ठ अधिकारी पर हमला करने के लिए जो कोई भी सहायता करता है, यदि ऐसा हमला उस सहायता के परिणामस्वरूप किया जाता है, तो उसे किसी भी प्रकार के कारावास से सात वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया…
पूरा पढ़ेंधारा 134 - ऐसे हमले का दुष्प्रेरण, यदि हमला किया जाए
ऐसे हमले का दुष्प्रेरण, यदि हमला किया जाए जो कोई भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायुसेना के किसी आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा किसी वरिष्ठ आफिसर पर, जब कि वह अपने पद के निष्पादन में हो, हमला किया जाना दुष्प्रेरित करेगा, तो यदि उस दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप ऐसा हमला किया जाए, वह दोनों में से किसी भांति के…
पूरा पढ़ेंसैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक को पलायन के लिए उकसाना।
जो कोई भी भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायु सेना में किसी अधिकारी, सैनिक, नाविक या वायुसैनिक को सेना से भागने के लिए उकसाता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 135 - सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अभित्यजन का दुष्प्रेरण
सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अभित्यजन का दुष्प्रेरण जो कोई भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायुसेना के किसी आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अभित्यजन किया जाना दुष्प्रेरित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
पूरा पढ़ेंभगोड़े को शरण देना।
इसके बाद जिन मामलों में अपवाद नहीं दिए गए हैं, उन्हें छोड़कर, जो कोई भी यह जानते हुए या यह मानने का कारण रखते हुए कि भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायु सेना का कोई अधिकारी, सैनिक, नाविक या वायुसैनिक भाग गया है, ऐसे अधिकारी, सैनिक, नाविक या वायुसैनिक को शरण देता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि…
पूरा पढ़ेंधारा 136 - अभित्याजक को संश्रय देना
अभित्याजक को संश्रय देना जो कोई, एतस्मिन्पश्चात् अपवादित दशा के सिवाय, यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायुसेना के किसी आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक ने अभित्यजन किया है, ऐसे आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक को संश्रय देगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास…
पूरा पढ़ेंकप्तान की लापरवाही के कारण एक भगोड़ा व्यापारी जहाज पर छिपा हुआ था।
किसी व्यापारिक पोत का स्वामी या प्रभारी व्यक्ति, जिस पर भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायु सेना का कोई भगोड़ा छिपा हुआ हो, ऐसे छिपाव से अनभिज्ञ होने पर भी तीन हजार रुपये से अधिक के जुर्माने का पात्र होगा, यदि वह स्वामी या प्रभारी व्यक्ति के रूप में अपने कर्तव्य की किसी प्रकार की उपेक्षा या पोत पर अनुशासनहीनता के कारण…
पूरा पढ़ेंधारा 137 - मास्टर की उपेक्षा से किसी वाणिज्यिक जलयान पर छुपा हुआ अभित्याजक
मास्टर की उपेक्षा से किसी वाणिज्यिक जलयान पर छुपा हुआ अभित्याजक किसी ऐसे वाणिज्यिक जलयान का, जिस पर भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायुसेना का कोई अभित्याजक छिपा हुआ हो, मास्टर या भारसाधक व्यक्ति, यद्यपि वे ऐसे छिपने के संबंध में अनभिज्ञ हो, ऐसी शास्ति से दंडनीय होगा जो पांच सौ रुपए से अधिक नहीं होगी, यदि उसे ऐसे छिपने…
पूरा पढ़ेंसैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अवज्ञा के कृत्य में सहायता करना।
जो कोई भी भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायु सेना में कार्यरत किसी अधिकारी, सैनिक, नाविक या वायुसैनिक द्वारा अवज्ञा के कृत्य को जानबूझकर उकसाता है, यदि ऐसा कृत्य उस उकसावे के परिणामस्वरूप किया जाता है, तो उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 138 - सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अनधीनता के कार्य का दुष्प्रेरण
सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अनधीनता के कार्य का दुष्प्रेरण जो कोई भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायुसेना के किसी आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा किए जाने वाले ऐसे कार्य का, जिसे वह अनधीनता का कार्य जानता है, दुष्प्रेरण करेगा, तो यदि उस दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप अनधीनता का ऐसा कार्य किया जाए, वह दोनों…
पूरा पढ़ेंकुछ अधिनियमों के अधीन व्यक्ति।
वायु सेना अधिनियम, 1950 (1950 का 45), सेना अधिनियम, 1950 (1950 का 46) और नौसेना अधिनियम, 1957 (1957 का 62) के अधीन कोई भी व्यक्ति इस अध्याय में परिभाषित किसी भी अपराध के लिए इस संहिता के तहत दंड के अधीन नहीं होगा।
पूरा पढ़ेंधारा 139 - कुछ अधिनियमों के अध्यधीन व्यक्ति
कुछ अधिनियमों के अध्यधीन व्यक्ति कोई व्यक्ति, जो आर्मी एक्ट, सेना अधिनियम, 1950, (1950 का 46), नेवल डिसिप्लिन एक्ट, इंडियन नेवी (डिसिप्लिन) एक्ट, 1934 (1934 का 34), एअर फोरस एक्ट या वायुसेना अधिनियम, 1950 (1950 का 45) के अध्यधीन है, इस अध्याय में परिभाषित अपराधों में से किसी के लिए इस संहिता के अधीन दंडनीय नहीं है ।
पूरा पढ़ें- BNS §13IPC §75
पूर्व दोषसिद्धि के बाद कुछ अपराधों के लिए बढ़ी हुई सजा।
धारा 75 - पूर्व दोषसिद्धि के पश्चात् अध्याय 12 या अध्याय 17 के अधीन कतिपय अपराधों के लिए वर्धित दण्ड
- BNS §130IPC §351
हमला करना।
धारा 351 - हमला
- BNS §131IPC §352बदलाव हुआ
गंभीर उकसावे के अलावा अन्य परिस्थितियों में हमले या आपराधिक बल प्रयोग के लिए दंड।
धारा 352 - गम्भीर प्रकोपन होने से अन्यथा हमला करने या आपराधिक बल का प्रयोग करने के लिए दण्ड
- BNS §132IPC §353
लोक सेवक को उसके कर्तव्य निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
- BNS §133IPC §355
किसी व्यक्ति को अपमानित करने के इरादे से हमला करना या आपराधिक बल का प्रयोग करना, गंभीर उकसावे के अलावा अन्य मामलों में।
धारा 355 - गम्भीर प्रकोपन होने से अन्यथा किसी व्यक्ति का अनादर करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
- BNS §134IPC §356
किसी व्यक्ति द्वारा ले जाई जा रही संपत्ति की चोरी करने के प्रयास में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
- BNS §135IPC §357बदलाव हुआ
किसी व्यक्ति को गलत तरीके से कैद करने के प्रयास में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
धारा 357 - किसी व्यक्ति का सदोष परिरोध करने के प्रयत्नों में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
- BNS §136IPC §358बदलाव हुआ
गंभीर उकसावे पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
धारा 358 - गम्भीर प्रकोपन मिलने पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
- BNS §137IPC §359बदलाव हुआ
अपहरण।
धारा 359 - व्यपहरण
- BNS §137(1)IPC §359
अपहरण।
धारा 359 - व्यपहरण
- BNS §137(1)(a)IPC §360
अपहरण।
धारा 360 - भारत में से व्यपहरण
- BNS §137(1)(b)IPC §361
अपहरण।
धारा 361 - विधिपूर्ण संरक्षकता में से व्यपहरण
- BNS §137(2)IPC §363
अपहरण।
धारा 363 - व्यपहरण के लिए दण्ड
- BNS §138IPC §362
अपहरण।
धारा 362 - अपहरण
- BNS §139IPC §363Aबदलाव हुआ
भीख मांगने के उद्देश्य से किसी बच्चे का अपहरण करना या उसे अपंग करना।
धारा 363A - भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए अप्राप्तवय का व्यपहरण का विकलांगीकरण
- BNS §158IPC §130
ऐसे कैदी को भागने में सहायता करना, उसे बचाना या उसे शरण देना।
धारा 130 - ऐसे कैदी के निकल भागने में सहायता देना, उसे छुड़ाना या संश्रय देना
- BNS §159IPC §131
विद्रोह को उकसाना, या किसी सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक को उसके कर्तव्य से विचलित करने का प्रयास करना।
धारा 131 - विद्रोह का दुष्प्रेरण, या किसी सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक को कर्तव्य से विचलित करने का प्रयत्न करना
- BNS §160IPC §132
विद्रोह को उकसाना, यदि इसके परिणामस्वरूप विद्रोह किया जाता है।
धारा 132 - विद्रोह का दुष्प्रेरण, यदि उसके परिणामस्वरूप विद्रोह किया जाए
- BNS §161IPC §133
किसी सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अपने वरिष्ठ अधिकारी पर, जब वह अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहा हो, हमला करने के लिए उकसाना।
धारा 133 - सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अपने वरिष्ठ आफिसर पर, जब कि वह आफिसर अपने पद-निष्पादन में हो, हमले का दुष्प्रेरण
- BNS §162IPC §134
यदि हमला किया गया हो तो ऐसे हमले में सहायता करना।
धारा 134 - ऐसे हमले का दुष्प्रेरण, यदि हमला किया जाए
- BNS §163IPC §135
सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक को पलायन के लिए उकसाना।
धारा 135 - सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अभित्यजन का दुष्प्रेरण
- BNS §164IPC §136
भगोड़े को शरण देना।
धारा 136 - अभित्याजक को संश्रय देना
- BNS §165IPC §137बदलाव हुआ
कप्तान की लापरवाही के कारण एक भगोड़ा व्यापारी जहाज पर छिपा हुआ था।
धारा 137 - मास्टर की उपेक्षा से किसी वाणिज्यिक जलयान पर छुपा हुआ अभित्याजक
- BNS §166IPC §138बदलाव हुआ
सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अवज्ञा के कृत्य में सहायता करना।
धारा 138 - सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अनधीनता के कार्य का दुष्प्रेरण
- BNS §167IPC §139
कुछ अधिनियमों के अधीन व्यक्ति।
धारा 139 - कुछ अधिनियमों के अध्यधीन व्यक्ति
