UP Gangsters Act 4
धारा 4 · ाक्ष्य के विशेष नियम
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
संहिता या भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 में किसी प्रतिकूल बात के होते हुये भी. इस अधिनियम के अधीन अपराधों या सम्बद्ध अपराधों के लिए विचारण और दण्ड के प्रयोजनार्थ-
(क) न्यायालय इस तथ्य को ध्यान में रख सकता है कि अभियुक्त-
(एक) किसी पूर्व अवसर पर संहिता की धारा 107 या धारा 108 या धारा 109 या धारा 110 के अधीन आबद्ध किया गया था; या
(दो) निवारक निरोध से सम्बन्धित किसी विधि के अधीन निरूद्ध किया गया था; या
(तीन) उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम, 1970 या ऐसी किसी अन्य विधि के अधीन वहिष्कासित किया गया था;
(ख) जहाँ यह साबित हो जाय कि किसी गिरोहबन्द या उसकी ओर से किसी व्यक्ति के पास किसी समय इतनी जंगम या स्थावर सम्पत्ति है या रही है जिसका वह सन्तोषजनक हिसाब नहीं दे सकता है, या जहाँ उसके वित्तीय साधन उसकी आय के ज्ञात स्रोतों के अनुपात में नहीं है; वहाँ न्यायालय, जब तक कि इसके प्रतिकूल न साबित कर दिया जाय, यह उपधारणा करेगा कि ऐसी सम्पत्ति या वित्तीय साधन गिरोहबन्द के रूप में उसके किया-कलाप से अर्जित या प्राप्त किया गया है;
(ग) जहाँ यह साबित हो जाय कि अभियुक्त ने किसी व्यक्ति का व्यपहरण या अपहरण किया है, वहाँ न्यायालय यह उपधारणा करेगा कि यह फिरौती के लिए किया गया था;
(घ) जहाँ यह साबित हो जाय कि किसी गिरोहबन्द ने किसी व्यपहृत या अपहृत व्यक्ति को सदोष छिपाया या परिरूद्ध किया है, यहां न्यायालय यह उपधारणा करेगा कि गिरोहबन्द यह जानता था कि ऐसा व्यक्ति, यथास्थिति, व्यपहृत या अपहृत किया गया था;
(ड) यदि न्यायालय, उन कारणों से जो अभिलिखित किये जायेगें, ऐसा करना उचित समझे, अभियुक्त की अनुपस्थिति में विचारण की कार्यवाही प्रारम्भ कर सकता है और किसी साक्षी का साक्ष्य अभिलिखित करसकता है, किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि यदि अभियुक्त ऐसा चाहे तो साक्षी को प्रति परीक्षा के लिए पुनः बुलाया जा सकता है किन्तु अभियुक्त की उपस्थिति में उसकी मुख्य परीक्षा पुनः अभिलिखित करना आवश्यक न होगा।
(क) न्यायालय इस तथ्य को ध्यान में रख सकता है कि अभियुक्त-
(एक) किसी पूर्व अवसर पर संहिता की धारा 107 या धारा 108 या धारा 109 या धारा 110 के अधीन आबद्ध किया गया था; या
(दो) निवारक निरोध से सम्बन्धित किसी विधि के अधीन निरूद्ध किया गया था; या
(तीन) उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम, 1970 या ऐसी किसी अन्य विधि के अधीन वहिष्कासित किया गया था;
(ख) जहाँ यह साबित हो जाय कि किसी गिरोहबन्द या उसकी ओर से किसी व्यक्ति के पास किसी समय इतनी जंगम या स्थावर सम्पत्ति है या रही है जिसका वह सन्तोषजनक हिसाब नहीं दे सकता है, या जहाँ उसके वित्तीय साधन उसकी आय के ज्ञात स्रोतों के अनुपात में नहीं है; वहाँ न्यायालय, जब तक कि इसके प्रतिकूल न साबित कर दिया जाय, यह उपधारणा करेगा कि ऐसी सम्पत्ति या वित्तीय साधन गिरोहबन्द के रूप में उसके किया-कलाप से अर्जित या प्राप्त किया गया है;
(ग) जहाँ यह साबित हो जाय कि अभियुक्त ने किसी व्यक्ति का व्यपहरण या अपहरण किया है, वहाँ न्यायालय यह उपधारणा करेगा कि यह फिरौती के लिए किया गया था;
(घ) जहाँ यह साबित हो जाय कि किसी गिरोहबन्द ने किसी व्यपहृत या अपहृत व्यक्ति को सदोष छिपाया या परिरूद्ध किया है, यहां न्यायालय यह उपधारणा करेगा कि गिरोहबन्द यह जानता था कि ऐसा व्यक्ति, यथास्थिति, व्यपहृत या अपहृत किया गया था;
(ड) यदि न्यायालय, उन कारणों से जो अभिलिखित किये जायेगें, ऐसा करना उचित समझे, अभियुक्त की अनुपस्थिति में विचारण की कार्यवाही प्रारम्भ कर सकता है और किसी साक्षी का साक्ष्य अभिलिखित करसकता है, किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि यदि अभियुक्त ऐसा चाहे तो साक्षी को प्रति परीक्षा के लिए पुनः बुलाया जा सकता है किन्तु अभियुक्त की उपस्थिति में उसकी मुख्य परीक्षा पुनः अभिलिखित करना आवश्यक न होगा।
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