UP Gangsters Act 3
धारा 3 · ास्ति
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) किसी गिरोहबन्द को दोनों में से किसी भांति के कारावास से ऐसी अवधि के लिए जो दो वर्ष शास्ति से कम न होगी और जो दस वर्ष तक हो सकेगी और जुर्माने से भी जो पांच हजार रूपये से कम नहीं होगा, दण्डित किया जायगाः
परन्तु किसी गिरोहबन्द को जो किसी लोक सेवक के शरीर के प्रति या लोक सेवक के कुटुम्ब के किसी सदस्य के शरीर के प्रति कोई अपराध करता है दोनों में से किसी भांति के कारावास से ऐसी अवधि के लिए जो तीन वर्ष से कम न होगी और जुर्माना से भी, जो पांच हजार रूपये से कम नहीं होगा, दण्डित किया जायगा।
(2) किसी ऐसे व्यक्ति को जो लोक सेवक होते हुये चाहे स्वयं या अन्य के माध्यम से किसी गिरोहबन्द की किसी रीति से अवैध रूप से सहायता या समर्थन, चाहे गिरोहबन्द द्वारा कोई अपराध किये जाने के पूर्व या पश्चात् करता है, या विधिपूर्ण उपाय करने से विरत रहता है या इस संबंध में किसी न्यायालय या अपने वरिष्ठ अधिकारियों के निदेशों को कार्यान्वित करने से जानबूझकर बचता है, दोनों में से किसी भांति के कारावास से ऐसी अवधि के लिए जो दस वर्ष तक की हो सकेगी, किन्तु तीन वर्ष से कम न होगी और जुर्माने से भी दंडित किया जायगा।
परन्तु किसी गिरोहबन्द को जो किसी लोक सेवक के शरीर के प्रति या लोक सेवक के कुटुम्ब के किसी सदस्य के शरीर के प्रति कोई अपराध करता है दोनों में से किसी भांति के कारावास से ऐसी अवधि के लिए जो तीन वर्ष से कम न होगी और जुर्माना से भी, जो पांच हजार रूपये से कम नहीं होगा, दण्डित किया जायगा।
(2) किसी ऐसे व्यक्ति को जो लोक सेवक होते हुये चाहे स्वयं या अन्य के माध्यम से किसी गिरोहबन्द की किसी रीति से अवैध रूप से सहायता या समर्थन, चाहे गिरोहबन्द द्वारा कोई अपराध किये जाने के पूर्व या पश्चात् करता है, या विधिपूर्ण उपाय करने से विरत रहता है या इस संबंध में किसी न्यायालय या अपने वरिष्ठ अधिकारियों के निदेशों को कार्यान्वित करने से जानबूझकर बचता है, दोनों में से किसी भांति के कारावास से ऐसी अवधि के लिए जो दस वर्ष तक की हो सकेगी, किन्तु तीन वर्ष से कम न होगी और जुर्माने से भी दंडित किया जायगा।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 10 वर्ष
- न्यूनतम दंड (विधिक)
- 2 वर्ष
- जुर्माना
- जुर्माना — कोई विधिक सीमा नहीं, न्यायालय तय करेगा
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- अजमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- विचारण न्यायालय
- विशेष न्यायालय
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
इस धारा की अलग-अलग उपधाराओं में अलग दंड हैं; यहाँ अधिकतम दिखाया गया है।
इसी अधिनियम के अपने उपबंध के अनुसार
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
