RFEIFEB Act 3अध्याय II · Remittances of Foreign Exchange
धारा 3 · प्रतिरक्षा।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) किसी अन्य कानून में इस समय लागू किसी बात के होते हुए भी,--
(क) कोई भी प्राप्तकर्ता, जो इस अध्याय के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस अध्याय के अंतर्गत प्रेषण प्राप्त करने के प्रयोजनों हेतु निर्दिष्ट योजना के अनुसार उन्मुक्ति का दावा करता है, उसे किसी भी प्रयोजन के लिए, उसे किए गए प्रेषण की प्रकृति और स्रोत का खुलासा करने की आवश्यकता नहीं होगी;
(ख) प्राप्तकर्ता के विरुद्ध किसी भी ऐसे कानून के तहत इस आधार पर कोई पूछताछ या जांच शुरू नहीं की जाएगी कि उसने ऐसा प्रेषण प्राप्त किया है;
(ग) प्राप्तकर्ता को धन प्राप्त होने का तथ्य ध्यान में नहीं रखा जाएगा और किसी भी ऐसे कानून के तहत किसी अपराध या दंड लगाने से संबंधित किसी भी कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य नहीं होगा।
(2) उपधारा (1) में कही गई कोई बात लागू नहीं होगी--
(क) किसी भी विदेशी मुद्रा के लिए जिसे भारत में किसी भी प्रावधान के तहत लाना आवश्यक है--
(i) विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 (1973 का 46); या
(ii) आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का 43), विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 (1973 का 46) के साथ पढ़ा जाए,
यदि वह अवधि जिसके भीतर ऐसी विदेशी मुद्रा को भारत में लाया जाना है, समाप्त नहीं हुई है या यदि ऐसी अवधि को केंद्र सरकार या भारतीय रिजर्व बैंक या किसी अन्य प्राधिकरण द्वारा किसी भी तरह से बढ़ाया गया है, तो ऐसी विस्तारित अवधि इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि को समाप्त नहीं हुई है;
(ख) भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) के अध्याय IX या अध्याय XVII के तहत दंडनीय किसी अपराध, मादक औषधि एवं मनोरोगी पदार्थ अधिनियम, 1985 (1985 का 61), आतंकवादी एवं विघटनकारी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम, 1987 (1987 का 28), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (1988 का 49) के तहत किसी अपराध के लिए अभियोजन के संबंध में, या किसी नागरिक दायित्व के प्रवर्तन के उद्देश्य से।
(3) केंद्र सरकार उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन अधिसूचित योजना को अधिसूचित होने के बाद यथाशीघ्र संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखेगी।
(क) कोई भी प्राप्तकर्ता, जो इस अध्याय के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस अध्याय के अंतर्गत प्रेषण प्राप्त करने के प्रयोजनों हेतु निर्दिष्ट योजना के अनुसार उन्मुक्ति का दावा करता है, उसे किसी भी प्रयोजन के लिए, उसे किए गए प्रेषण की प्रकृति और स्रोत का खुलासा करने की आवश्यकता नहीं होगी;
(ख) प्राप्तकर्ता के विरुद्ध किसी भी ऐसे कानून के तहत इस आधार पर कोई पूछताछ या जांच शुरू नहीं की जाएगी कि उसने ऐसा प्रेषण प्राप्त किया है;
(ग) प्राप्तकर्ता को धन प्राप्त होने का तथ्य ध्यान में नहीं रखा जाएगा और किसी भी ऐसे कानून के तहत किसी अपराध या दंड लगाने से संबंधित किसी भी कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य नहीं होगा।
(2) उपधारा (1) में कही गई कोई बात लागू नहीं होगी--
(क) किसी भी विदेशी मुद्रा के लिए जिसे भारत में किसी भी प्रावधान के तहत लाना आवश्यक है--
(i) विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 (1973 का 46); या
(ii) आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का 43), विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 (1973 का 46) के साथ पढ़ा जाए,
यदि वह अवधि जिसके भीतर ऐसी विदेशी मुद्रा को भारत में लाया जाना है, समाप्त नहीं हुई है या यदि ऐसी अवधि को केंद्र सरकार या भारतीय रिजर्व बैंक या किसी अन्य प्राधिकरण द्वारा किसी भी तरह से बढ़ाया गया है, तो ऐसी विस्तारित अवधि इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि को समाप्त नहीं हुई है;
(ख) भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) के अध्याय IX या अध्याय XVII के तहत दंडनीय किसी अपराध, मादक औषधि एवं मनोरोगी पदार्थ अधिनियम, 1985 (1985 का 61), आतंकवादी एवं विघटनकारी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम, 1987 (1987 का 28), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (1988 का 49) के तहत किसी अपराध के लिए अभियोजन के संबंध में, या किसी नागरिक दायित्व के प्रवर्तन के उद्देश्य से।
(3) केंद्र सरकार उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन अधिसूचित योजना को अधिसूचित होने के बाद यथाशीघ्र संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखेगी।
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