RDB Act 15अध्याय II · Establishment of Tribunal and Appellate Tribunal
धारा 15 · इस्तीफा और बर्खास्तगी।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
( 1 ) [न्यायाधीश का पीठासीन अधिकारी या अपीलीय न्यायाधिकरण का अध्यक्ष] केंद्र सरकार को संबोधित अपने हस्ताक्षर से लिखित नोटिस द्वारा अपने पद से त्यागपत्र दे सकता है:
बशर्ते कि 2 [किसी न्यायाधिकरण का पीठासीन अधिकारी या अपीलीय न्यायाधिकरण का अध्यक्ष], जब तक कि उसे केंद्र सरकार द्वारा अपना पद पहले छोड़ने की अनुमति न दी जाए, तब तक ऐसे नोटिस की प्राप्ति की तिथि से तीन महीने की समाप्ति तक या उसके उत्तराधिकारी के रूप में विधिवत नियुक्त व्यक्ति के पदभार ग्रहण करने तक या उसके कार्यकाल की समाप्ति तक, जो भी पहले हो, पद पर बना रहेगा।
(2) 1 [न्यायाधीश के पीठासीन अधिकारी या अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष] को जांच के बाद सिद्ध दुर्व्यवहार या अक्षमता के आधार पर केंद्र सरकार द्वारा जारी आदेश के अलावा उनके पद से नहीं हटाया जाएगा,--
(क) न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी के मामले में, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा किया गया;
(ख) सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा किए गए 3 [अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष] के मामले में, जिसमें 4 [न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी या अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष] को उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों की सूचना दी गई हो और इन आरोपों के संबंध में सुनवाई का उचित अवसर दिया गया हो:
5. बशर्ते कि केंद्र सरकार, पीठासीन अधिकारी या अध्यक्ष के विरुद्ध चल रही जांच के दौरान, पीठासीन अधिकारी या अध्यक्ष के चयन हेतु गठित चयन समिति के अध्यक्ष से परामर्श करने के बाद, यदि वह संतुष्ट हो कि पीठासीन अधिकारी या अध्यक्ष को पीठासीन अधिकारी या अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यों का निर्वहन बंद कर देना चाहिए, तो उन्हें निलंबित करने का आदेश पारित कर सकती है।
(3) केंद्र सरकार नियमों द्वारा न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी या अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष के दुर्व्यवहार या अक्षमता की जांच की प्रक्रिया को विनियमित कर सकती है।
बशर्ते कि 2 [किसी न्यायाधिकरण का पीठासीन अधिकारी या अपीलीय न्यायाधिकरण का अध्यक्ष], जब तक कि उसे केंद्र सरकार द्वारा अपना पद पहले छोड़ने की अनुमति न दी जाए, तब तक ऐसे नोटिस की प्राप्ति की तिथि से तीन महीने की समाप्ति तक या उसके उत्तराधिकारी के रूप में विधिवत नियुक्त व्यक्ति के पदभार ग्रहण करने तक या उसके कार्यकाल की समाप्ति तक, जो भी पहले हो, पद पर बना रहेगा।
(2) 1 [न्यायाधीश के पीठासीन अधिकारी या अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष] को जांच के बाद सिद्ध दुर्व्यवहार या अक्षमता के आधार पर केंद्र सरकार द्वारा जारी आदेश के अलावा उनके पद से नहीं हटाया जाएगा,--
(क) न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी के मामले में, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा किया गया;
(ख) सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा किए गए 3 [अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष] के मामले में, जिसमें 4 [न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी या अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष] को उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों की सूचना दी गई हो और इन आरोपों के संबंध में सुनवाई का उचित अवसर दिया गया हो:
5. बशर्ते कि केंद्र सरकार, पीठासीन अधिकारी या अध्यक्ष के विरुद्ध चल रही जांच के दौरान, पीठासीन अधिकारी या अध्यक्ष के चयन हेतु गठित चयन समिति के अध्यक्ष से परामर्श करने के बाद, यदि वह संतुष्ट हो कि पीठासीन अधिकारी या अध्यक्ष को पीठासीन अधिकारी या अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यों का निर्वहन बंद कर देना चाहिए, तो उन्हें निलंबित करने का आदेश पारित कर सकती है।
(3) केंद्र सरकार नियमों द्वारा न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी या अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष के दुर्व्यवहार या अक्षमता की जांच की प्रक्रिया को विनियमित कर सकती है।
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