OAM Act 28अध्याय V · Civil Liability and Adjudication
धारा 28 · नागरिक दायित्व और न्यायनिर्णय।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
जिस व्यक्ति को इस अधिनियम के अंतर्गत परमिट, लाइसेंस या पट्टा प्रदान किया गया है,--
(क) इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित सामान्य नियम एवं शर्तों का उल्लंघन करने पर केंद्र सरकार को कम से कम पांच लाख रुपये और अधिकतम एक करोड़ रुपये तक की राशि का भुगतान करना होगा;
(ख) यदि वह परमिटधारी, लाइसेंसधारी या पट्टेदार के मामले में ही लागू होने वाली किसी विशेष शर्तों और नियमों का उल्लंघन करता है, तो वह खंड (क) के तहत दायित्व के अतिरिक्त केंद्र सरकार को अतिरिक्त राशि का भुगतान करने के लिए भी उत्तरदायी होगा, जो कि पांच लाख रुपये से कम नहीं होगी और पचास लाख रुपये तक हो सकती है।
(2) केंद्र सरकार द्वारा इस प्रयोजन के लिए नामित अधिकृत अधिकारी के अतिरिक्त किसी न्यायालय या अन्य प्राधिकारी को उपधारा (1) के खंड (क) और (ख) से संबंधित मामलों की सुनवाई और निर्णय करने का अधिकार नहीं होगा।
(3) केंद्र सरकार का कोई अधिकारी जिसे उस सरकार द्वारा उप-धारा (2) के अधीन नामित अधिकृत अधिकारी के समक्ष आवेदन दाखिल करने के लिए अधिकृत किया गया है, वह लाइसेंसधारी, पट्टेदार या परमिटधारी के विरुद्ध, जैसा भी मामला हो, उप-धारा (1) के खंड (क) या खंड (ख) के अधीन उसके द्वारा किए गए दीवानी दुराचार को दर्शाते हुए, निर्धारित तरीके से आवेदन दाखिल करेगा।
(4) जब उपधारा (3) के अंतर्गत उपधारा (2) के अधीन नामित किसी अधिकृत अधिकारी के समक्ष आवेदन किया जाता है, तो वह आवेदन की प्रति सहित उस व्यक्ति को नोटिस तामील करेगा जिसके विरुद्ध आवेदन किया गया है, ताकि उसे निर्धारित तरीके से आवेदन का उत्तर दाखिल करने का अवसर दिया जा सके और अधिकृत अधिकारी आवेदन के समर्थन या विरोध में प्रस्तुत साक्ष्यों पर विचार करने और सुनवाई का अवसर प्रदान करने के बाद मामले का निपटारा करेगा।
(5) इस धारा के प्रयोजनों के लिए, उपधारा (2) के अधीन नामित अधिकृत अधिकारी को, निम्नलिखित मामलों के संबंध में, वाद की सुनवाई करते समय, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन किसी सिविल न्यायालय को प्राप्त शक्तियों के समान शक्तियां प्राप्त होंगी, अर्थात्:--
(क) किसी व्यक्ति को बुलाना और उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करना तथा शपथ पर उससे पूछताछ करना;
(ख) दस्तावेजों की खोज और प्रस्तुति की आवश्यकता;
(ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना;
(घ) गवाहों या दस्तावेजों की जांच के लिए आयोग जारी करना;
(ई) अपने निर्णयों की समीक्षा करना; और
(f) कोई अन्य मामला जो निर्धारित किया जा सके।
(क) इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित सामान्य नियम एवं शर्तों का उल्लंघन करने पर केंद्र सरकार को कम से कम पांच लाख रुपये और अधिकतम एक करोड़ रुपये तक की राशि का भुगतान करना होगा;
(ख) यदि वह परमिटधारी, लाइसेंसधारी या पट्टेदार के मामले में ही लागू होने वाली किसी विशेष शर्तों और नियमों का उल्लंघन करता है, तो वह खंड (क) के तहत दायित्व के अतिरिक्त केंद्र सरकार को अतिरिक्त राशि का भुगतान करने के लिए भी उत्तरदायी होगा, जो कि पांच लाख रुपये से कम नहीं होगी और पचास लाख रुपये तक हो सकती है।
(2) केंद्र सरकार द्वारा इस प्रयोजन के लिए नामित अधिकृत अधिकारी के अतिरिक्त किसी न्यायालय या अन्य प्राधिकारी को उपधारा (1) के खंड (क) और (ख) से संबंधित मामलों की सुनवाई और निर्णय करने का अधिकार नहीं होगा।
(3) केंद्र सरकार का कोई अधिकारी जिसे उस सरकार द्वारा उप-धारा (2) के अधीन नामित अधिकृत अधिकारी के समक्ष आवेदन दाखिल करने के लिए अधिकृत किया गया है, वह लाइसेंसधारी, पट्टेदार या परमिटधारी के विरुद्ध, जैसा भी मामला हो, उप-धारा (1) के खंड (क) या खंड (ख) के अधीन उसके द्वारा किए गए दीवानी दुराचार को दर्शाते हुए, निर्धारित तरीके से आवेदन दाखिल करेगा।
(4) जब उपधारा (3) के अंतर्गत उपधारा (2) के अधीन नामित किसी अधिकृत अधिकारी के समक्ष आवेदन किया जाता है, तो वह आवेदन की प्रति सहित उस व्यक्ति को नोटिस तामील करेगा जिसके विरुद्ध आवेदन किया गया है, ताकि उसे निर्धारित तरीके से आवेदन का उत्तर दाखिल करने का अवसर दिया जा सके और अधिकृत अधिकारी आवेदन के समर्थन या विरोध में प्रस्तुत साक्ष्यों पर विचार करने और सुनवाई का अवसर प्रदान करने के बाद मामले का निपटारा करेगा।
(5) इस धारा के प्रयोजनों के लिए, उपधारा (2) के अधीन नामित अधिकृत अधिकारी को, निम्नलिखित मामलों के संबंध में, वाद की सुनवाई करते समय, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन किसी सिविल न्यायालय को प्राप्त शक्तियों के समान शक्तियां प्राप्त होंगी, अर्थात्:--
(क) किसी व्यक्ति को बुलाना और उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करना तथा शपथ पर उससे पूछताछ करना;
(ख) दस्तावेजों की खोज और प्रस्तुति की आवश्यकता;
(ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना;
(घ) गवाहों या दस्तावेजों की जांच के लिए आयोग जारी करना;
(ई) अपने निर्णयों की समीक्षा करना; और
(f) कोई अन्य मामला जो निर्धारित किया जा सके।
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