आईपीसी → बीएनएस
17 प्रविष्टियाँ
धारा 29 - “दस्तावेज”
“दस्तावेज” "“दस्तावेज” शब्द किसी भी विषय का द्योतक है जिसके किसी पदार्थ पर अक्षरों, अंकों या चिह्न के साधन द्वारा, या उनसे एक से अधिक साधनों द्वारा अभिव्यक्त या वर्णित किया गया हो जो उस विषय के साक्षी के रूप में उपयोग किए जाने को आशयित हो या उपयोग किया जा सके । स्पष्टीकरण 1 - यह तत्वहीन है कि किस साधन द्वारा या किस…
पूरा पढ़ेंपरिभाषाएँ।
इस संहिता में, जब तक संदर्भ अन्यथा अपेक्षित न हो,--- (1) "कार्य" से तात्पर्य कार्यों की श्रृंखला के साथ-साथ एक एकल कार्य से भी है; (2) "पशु" से तात्पर्य मनुष्य के अलावा किसी भी जीवित प्राणी से है; (3) "बाल" से तात्पर्य अठारह वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति से है; (4) "नकली".---वह व्यक्ति "नकली" कहलाता है जो किसी…
पूरा पढ़ेंधारा 29A - “इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख”
“इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख” “इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख” शब्दों का वही अर्थ होगा जो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का 21) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (न) में उनको समनुदिष्ट किया गया है ।
पूरा पढ़ेंहटाई गई धारा
-
धारा 91 - ऐसे कार्यों का अपर्वजन जो कारित अपहानि के बिना भी स्वतः अपराध है
ऐसे कार्यों का अपर्वजन जो कारित अपहानि के बिना भी स्वतः अपराध है धारा 87, 88 और 89 के अपवादों का विस्तार उन कार्यो पर नहीं है जो उस अपहानि के बिना भी स्वतः अपराध हैं जो उस व्यक्ति को, जो सम्मति देता है या जिसकी ओर से सम्मति दी जाती है, उन कार्यो से कारित हो, या कारित किए जाने का आशय हो, या कारित होने की संभाव्यता…
पूरा पढ़ेंउन कृत्यों को बाहर रखा गया है जो किसी भी प्रकार की हानि से स्वतंत्र रूप से अपराध हैं।
धारा 25, 26 और 27 में दिए गए अपवाद उन कृत्यों पर लागू नहीं होते हैं जो किसी भी नुकसान से स्वतंत्र रूप से अपराध हैं, जो वे सहमति देने वाले व्यक्ति को या जिसकी ओर से सहमति दी गई है, को पहुंचा सकते हैं, या पहुंचाने का इरादा रखते हैं, या जिसके होने की संभावना ज्ञात है। चित्रण। गर्भपात कराना (जब तक कि यह महिला का जीवन…
पूरा पढ़ेंधारा 288 - किसी निर्माण को गिराने या उसकी मरम्मत करने के संबंध में उपेक्षापूर्ण आचरण
किसी निर्माण को गिराने या उसकी मरम्मत करने के संबंध में उपेक्षापूर्ण आचरण जो कोई किसी निर्माण को गिराने या उसकी मरम्मत करने में उस निर्माण की ऐसी व्यवस्था करने का, जो उस निर्माण के या उसके किसी भाग के गिरने से मानव जीवन को किसी अधिसम्भाव्य संकट से बचाने के लिए पर्याप्त हो, जानते हुए या उपेक्षापूर्वक लोप करेगा, वह…
पूरा पढ़ेंधारा 290. किसी निर्माण को गिराने, उसकी मरम्मत करने या संनिर्माण करने के संबंध में उपेक्षापूर्ण आचरण ।
290. जो कोई किसी निर्माण को गिराने, उसकी मरम्मत करने में या सन्निर्माण करने उस निर्माण के ऐसे उपाय करने का, जो उस निर्माण के या उसके किसी भाग के गिरने से मानव जीवन को किसी अधिसम्भाव्य संकट से बचाने के लिए पर्याप्त हो, जानते हुए या उपेक्षापूर्वक लोप करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक…
पूरा पढ़ेंधारा 289 - जीवजन्तु के संबंध में उपेक्षापूर्ण आचरण
जीवजन्तु के संबंध में उपेक्षापूर्ण आचरण जो कोई अपने कब्जे में के किसी जीवजन्तु के संबंध में ऐसी व्यवस्था करने का, जो ऐसे जीवजन्तु से मानव जीवन को किसी अधिसम्भाव्य संकट या घोर उपहति के किसी अधिसंभाव्य संकट से बचाने के लिए पर्याप्त हो, जानते हुए या उपेक्षापूर्वक लोप करेगा, वह दोनों में से किसी भांति से कारावास से, जिसकी…
पूरा पढ़ेंधारा 291. जीव-जन्तु के संबंध में उपेक्षापूर्ण आचरण ।
291. जो कोई अपने कब्जे में के किसी जीव-जन्तु के संबंध में ऐसे उपाय करने का, जो ऐसे जीव-जंतु से मानव जीवन को किसी अभिसम्भाव्य संकट या घोर उपहति के किसी अधिसंभाव्य संकट से बचाने के लिए पर्याप्त हो, जानते हुए या उपेक्षापूर्वक लोप करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या…
पूरा पढ़ेंधारा 290 - अन्यथा अनुपबन्धित मामलों में लोक न्यूसेन्स के लिए दण्ड
अन्यथा अनुपबन्धित मामलों में लोक न्यूसेन्स के लिए दण्ड जो कोई किसी ऐसे मामले में लोक न्यूसेन्स करेगा जो इस संहिता द्वारा अन्यथा दण्डनीय नहीं है, वह जुर्माने से, जो दो सौ रुपए तक को हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा ।
पूरा पढ़ेंधारा 292. अन्यथा अनुपबन्धित मामलों में लोक न्यूसेन्स के लिए दण्ड ।
292. जो कोई किसी ऐसे मामले में लोक न्यूसेन्स करेगा जो इस संहिता द्वारा अन्यथा दण्डनीय नहीं है, वह जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा ।
पूरा पढ़ेंधारा 291 - न्यूसेन्स बन्द करने के व्यादेश के पश्चात् उसका चालू रखना
न्यूसेन्स बन्द करने के व्यादेश के पश्चात् उसका चालू रखना जो कोई किसी लोक सेवक द्वारा, जिसको किसी न्यूसेन्स की पुनरावॄत्ति न करने या उसे चालू न रखने के लिए व्यादेश प्रचालित करने का प्राधिकार हो, ऐसे व्यादिष्ट किए जाने पर, किसी लोक न्यूसेन्स की पुनरावॄत्ति करेगा, या उसे चालू रखेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास…
पूरा पढ़ेंधारा 293. न्यूसेन्स बन्द करने के व्यादेश के पश्चात् उसका चालू रखना ।
293. जो कोई किसी लोक सेवक द्वारा, जिसको किसी न्यूसेन्स की पुनरावृति न करने या उसे चालू न रखने के लिए व्यादेश प्रचालित करने का प्राधिकार हो, ऐसे व्यादिष्ट किए जाने पर, किसी लोक न्यूसेन्स की पुनरावृत्ति करेगा, या उसे चालू रखेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक…
पूरा पढ़ेंधारा 292 - अश्लील पुस्तकों आदि का विक्रय आदि
अश्लील पुस्तकों आदि का विक्रय आदि (1) उपधारा (2) के प्रयोजनार्थ किसी पुस्तक, पुस्तिका, कागज, लेख, रेखाचित्र, रंगचित्र रूपण, आकॄति या अन्य वस्तु को अश्लील समझा जाएगा यदि वह कामोद्दीपक है या कामुक व्यक्तियों के लिए रुचिकर है या उसका या (जहां उसमें दो या अधिक सुभिन्न मदें समाविष्ट हैं वहां) उसकी किसी मद का प्रभाव, समग्र…
पूरा पढ़ेंधारा 294. अश्लील पुस्तकों, आदि का विक्रय आदि ।
294. (1) उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिए, किसी पुस्तक, पुस्तिका, कागज, लेख, रैखाचित्र, रंगचित्र, रूपण, आकृति या अन्य वस्तु जिसके अंतर्गत इलेक्ट्रानिक प्ररुप में किसी अंतर्वस्तु का प्रदर्शन भी है, को अश्लील समझा जाएगा यदि वह कामोद्दीपक है या कामुक व्यक्तियों के लिए रुचिकर है या उसका या (जहां उसमें दो या अधिक सुभिन्न…
पूरा पढ़ेंधारा 293 - तरुण व्यक्ति को अश्लील वस्तुओ का विक्रय आदि
तरुण व्यक्ति को अश्लील वस्तुओ का विक्रय आदि जो कोई बीस वर्ष से कम आयु के किसी व्यक्ति को कोई ऐसी अश्लील वस्तु, जो अनतिम पूर्वगामी धारा में निर्दिष्ट है, बेचेगा, भाड़े पर देगा, वितरण करेगा, प्रदर्शित करेगा या परिचालित करेगा या ऐसा करने की प्रस्थापना या प्रयत्न करेगा 1[प्रथम दोषसिद्धि पर दोनों में से किसी भांति के…
पूरा पढ़ेंधारा 295. बालक को अश्लील वस्तुओं का विक्रय, आदि ।
295. जो कोई, किसी बालक को कोई ऐसी अश्लील वस्तु, जो धारा 294 में निर्दिष्ट है, बेचेगा, भाड़े पर देगा, वितरण करेगा, प्रदर्शित करेगा या परिचालित करेगा या ऐसा करने की प्रस्थापना या प्रयत्न करेगा प्रथम दोषसिद्ध पर दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक…
पूरा पढ़ेंधारा 294 - अश्लील कार्य और गाने
अश्लील कार्य और गाने जो कोई-- (क) किसी लोक स्थान में कोई अश्लील कार्य करेगा, अथवा (ख) किसी लोक स्थान में या उसके समीप कोई अश्लील गाने, पवांड़े या शब्द गाएगा, सुनाएगा या उच्चारित करेगा, जिससे दूसरों को क्षोभ होता हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों…
पूरा पढ़ेंधारा 296. अश्लील कार्य और गाने ।
296. जो कोई- (क) किसी लोक स्थान में कोई अश्लील कार्य करेगा ; या (ख) किसी लोक स्थान में या उसके समीप कोई अश्लील गाने, पवांड़े या शब्द गाएगा, सुनाएगा या उच्चारित करेगा, जिससे दूसरों को क्षोभ होता हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से जो एक हजार रुपए तक का हो…
पूरा पढ़ेंधारा 294A - लाटरी कार्यालय रखना
लाटरी कार्यालय रखना जो कोई ऐसी कोई लाटरी, जो न तो राज्य लाटरी हो और न तत्संबंधित राज्य सरकार द्वारा प्राधिकॄत लाटरी हो, निकालने के प्रयोजन के लिए कोई कार्यालय या स्थान रखेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ; तथा जो कोई ऐसी लाटरी…
पूरा पढ़ेंधारा 297. लाटरी कार्यालय रखना ।
297. (1) जो कोई ऐसी कोई लाटरी, जो न तो राज्य लाटरी हो और न तत्संबंधित राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत लाटरी हो, निकालने के प्रयोजन के लिए कोई कार्यालय या स्थान रखेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ; (2) जो कोई ऐसी लाटरी में किसी…
पूरा पढ़ेंधारा 295 - किसी वर्ग के धर्म का अपमान करने के आशय से उपासना के स्थान को क्षति करना या अपवित्र करना
किसी वर्ग के धर्म का अपमान करने के आशय से उपासना के स्थान को क्षति करना या अपवित्र करना जो कोई किसी उपासना स्थान को या व्यक्तियों के किसी वर्ग द्वारा पवित्र मानी गई किसी वस्तु को नष्ट, नुकसानग्रस्त या अपवित्र इस आशय से करेगा कि किसी वर्ग के धर्म का तद्द्वारा अपमान किया जाए या यह सम्भाव्य जानते हुए करेगा कि व्यक्तियों…
पूरा पढ़ेंकिसी भी वर्ग के धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थल को नुकसान पहुंचाना या अपवित्र करना।
जो कोई भी किसी पूजा स्थल या किसी भी वर्ग के लोगों द्वारा पवित्र माने जाने वाली किसी वस्तु को किसी भी वर्ग के लोगों के धर्म का अपमान करने के इरादे से या इस ज्ञान के साथ नष्ट करता है, क्षति पहुँचाता है या अपवित्र करता है कि किसी भी वर्ग के लोग ऐसे विनाश, क्षति या अपवित्रता को अपने धर्म का अपमान मानेंगे, तो उसे किसी भी…
पूरा पढ़ेंधारा 295A - विमर्शित और विद्वेषपूर्ण कार्य जो किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आशय से किए गए हों
विमर्शित और विद्वेषपूर्ण कार्य जो किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आशय से किए गए हों जो कोई भारत के नागरिकों के किसी वर्ग की धार्मिक भावनओं को आहत करने के विमर्शित और विद्वेषपूर्ण आशय से उस वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान उच्चारित या लिखित शब्दों…
पूरा पढ़ेंकिसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से किए गए जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य, जिनमें उनके धर्म या धार्मिक मान्यताओं का अपमान करना शामिल है।
जो कोई भी जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण इरादे से भारत के किसी भी वर्ग के नागरिकों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के उद्देश्य से, बोले गए या लिखे गए शब्दों द्वारा, संकेतों द्वारा, दृश्य प्रस्तुतियों द्वारा, इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों द्वारा या किसी अन्य माध्यम से, उस वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करता है या…
पूरा पढ़ेंधारा 296 - धार्मिक जमाव में विघ्न करना
धार्मिक जमाव में विघ्न करना जो कोई धार्मिक उपासना या धार्मिक संस्कारों में वैध रूप से लगे हुए किसी जमाव में स्वचेछया विघ्न कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
पूरा पढ़ेंधार्मिक सभा में अशांति फैलाना।
जो कोई भी स्वेच्छा से किसी ऐसे समूह में अशांति उत्पन्न करता है जो विधिवत रूप से धार्मिक पूजा या धार्मिक अनुष्ठानों के निष्पादन में लगा हुआ हो, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा जिसकी अवधि एक वर्ष तक हो सकती है, या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 297 - कब्रिस्तानों आदि में अतिचार करना
कब्रिस्तानों आदि में अतिचार करना जो कोई किसी उपासना स्थान में, या किसी कब्रिस्तान पर या अन्त्येष्टि क्रिया ओं के लिए या मॄतकों के अवशेषों के लिए निक्षेप स्थान के रूप में पॄथक् रखे गए किसी स्थान में अतिचार या किसी मानव शव की अवहेलना या अन्त्येष्टि संस्कारों के लिए एकत्रित किन्हीं व्यक्तियों को विघ्न कारित, इस आशय से…
पूरा पढ़ेंकब्रिस्तानों आदि में अनाधिकृत प्रवेश करना।
जो कोई भी किसी व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से, या किसी व्यक्ति के धर्म का अपमान करने के इरादे से, या यह जानते हुए कि किसी व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंच सकती है, या किसी व्यक्ति के धर्म का अपमान हो सकता है, किसी पूजा स्थल या समाधि स्थल, या अंत्येष्टि अनुष्ठानों के लिए निर्धारित किसी स्थान, या मृतकों…
पूरा पढ़ेंधारा 298 - धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के विमर्शित आशय से शब्द उच्चारित करना आदि
धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के विमर्शित आशय से शब्द उच्चारित करना आदि जो कोई किसी व्यक्ति की धार्मिक भावनओं को ठेस पहुंचाने के विमर्शित आशय से उसकी श्रवणगोचरता में कोई शब्द उच्चारित करेगा या कोई ध्वनि करेगा या उसकी दृष्टिगोचरता में कोई अंगविक्षेप करेगा, या कोई वस्तु रखेगा,वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से,…
पूरा पढ़ेंकिसी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाने के इरादे से शब्द आदि बोलना।
जो कोई भी जानबूझकर किसी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस व्यक्ति के श्रवण क्षेत्र में कोई शब्द बोलता है या कोई ध्वनि उत्पन्न करता है या उस व्यक्ति की दृष्टि में कोई इशारा करता है या उस व्यक्ति की दृष्टि में कोई वस्तु रखता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से एक वर्ष तक की अवधि के लिए, या…
पूरा पढ़ेंगैर इरादतन हत्या।
जो कोई भी किसी कार्य को करके, या किसी ऐसे शारीरिक आघात को पहुंचाने के इरादे से जिससे मृत्यु होने की संभावना हो, या यह जानते हुए कि वह ऐसे कार्य से मृत्यु का कारण बन सकता है, किसी की मृत्यु का कारण बनता है, वह गैर इरादतन हत्या का अपराध करता है। रेखांकन (क) अ) किसी गड्ढे पर डंडे और घास बिछा देता है, इस इरादे से कि इससे…
पूरा पढ़ेंगैर इरादतन हत्या।
जो कोई भी किसी कार्य को करके, या किसी ऐसे शारीरिक आघात को पहुंचाने के इरादे से जिससे मृत्यु होने की संभावना हो, या यह जानते हुए कि वह ऐसे कार्य से मृत्यु का कारण बन सकता है, किसी की मृत्यु का कारण बनता है, वह गैर इरादतन हत्या का अपराध करता है। चित्र। (क) अ) किसी गड्ढे पर डंडे और घास बिछा देता है, इस इरादे से कि इससे…
पूरा पढ़ें- IPC §29BNS §2(8)
धारा 29 - “दस्तावेज”
परिभाषाएँ।
- IPC §29ABNS §DELETED
धारा 29A - “इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख”
हटाई गई धारा
IPC §29ABNS §DELETED - IPC §91BNS §29
धारा 91 - ऐसे कार्यों का अपर्वजन जो कारित अपहानि के बिना भी स्वतः अपराध है
उन कृत्यों को बाहर रखा गया है जो किसी भी प्रकार की हानि से स्वतंत्र रूप से अपराध हैं।
- IPC §288BNS §290
धारा 288 - किसी निर्माण को गिराने या उसकी मरम्मत करने के संबंध में उपेक्षापूर्ण आचरण
धारा 290. किसी निर्माण को गिराने, उसकी मरम्मत करने या संनिर्माण करने के संबंध में उपेक्षापूर्ण आचरण ।
- IPC §289BNS §291
धारा 289 - जीवजन्तु के संबंध में उपेक्षापूर्ण आचरण
धारा 291. जीव-जन्तु के संबंध में उपेक्षापूर्ण आचरण ।
- IPC §290BNS §292
धारा 290 - अन्यथा अनुपबन्धित मामलों में लोक न्यूसेन्स के लिए दण्ड
धारा 292. अन्यथा अनुपबन्धित मामलों में लोक न्यूसेन्स के लिए दण्ड ।
- IPC §291BNS §293
धारा 291 - न्यूसेन्स बन्द करने के व्यादेश के पश्चात् उसका चालू रखना
धारा 293. न्यूसेन्स बन्द करने के व्यादेश के पश्चात् उसका चालू रखना ।
- IPC §292BNS §294
धारा 292 - अश्लील पुस्तकों आदि का विक्रय आदि
धारा 294. अश्लील पुस्तकों, आदि का विक्रय आदि ।
- IPC §293BNS §295
धारा 293 - तरुण व्यक्ति को अश्लील वस्तुओ का विक्रय आदि
धारा 295. बालक को अश्लील वस्तुओं का विक्रय, आदि ।
- IPC §294BNS §296
धारा 294 - अश्लील कार्य और गाने
धारा 296. अश्लील कार्य और गाने ।
- IPC §294ABNS §297
धारा 294A - लाटरी कार्यालय रखना
धारा 297. लाटरी कार्यालय रखना ।
- IPC §295BNS §298
धारा 295 - किसी वर्ग के धर्म का अपमान करने के आशय से उपासना के स्थान को क्षति करना या अपवित्र करना
किसी भी वर्ग के धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थल को नुकसान पहुंचाना या अपवित्र करना।
- IPC §295ABNS §299
धारा 295A - विमर्शित और विद्वेषपूर्ण कार्य जो किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आशय से किए गए हों
किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से किए गए जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य, जिनमें उनके धर्म या धार्मिक मान्यताओं का अपमान करना शामिल है।
- IPC §296BNS §300
धारा 296 - धार्मिक जमाव में विघ्न करना
धार्मिक सभा में अशांति फैलाना।
- IPC §297BNS §301
धारा 297 - कब्रिस्तानों आदि में अतिचार करना
कब्रिस्तानों आदि में अनाधिकृत प्रवेश करना।
- IPC §298BNS §302
धारा 298 - धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के विमर्शित आशय से शब्द उच्चारित करना आदि
किसी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाने के इरादे से शब्द आदि बोलना।
- IPC §299BNS §100
गैर इरादतन हत्या।
