बीएनएस → आईपीसी
36 प्रविष्टियाँ
सामान्य स्पष्टीकरण।
(1) इस संहिता में अपराध की प्रत्येक परिभाषा, प्रत्येक दंड प्रावधान और ऐसी प्रत्येक परिभाषा या दंड प्रावधान के प्रत्येक उदाहरण को सामान्य अपवाद नामक अध्याय में निहित अपवादों के अधीन समझा जाएगा, भले ही वे अपवाद ऐसी परिभाषा, दंड प्रावधान या उदाहरण में दोहराए न गए हों। चित्र। (क) इस संहिता में अपराधों की परिभाषाएँ देने…
पूरा पढ़ेंधारा 35 - जबकि ऐसा कार्य इस कारण आपराधिक है कि वह आपराधिक ज्ञान या आशय से किया गया है
जबकि ऐसा कार्य इस कारण आपराधिक है कि वह आपराधिक ज्ञान या आशय से किया गया है जब कभी कोई कार्य, जो आपराधिक ज्ञान या आशय से किए जाने के कारण ही आपराधिक है, कई व्यक्तियों द्वारा किया जाता है, तब ऐसे व्यक्तियों में से हर व्यक्ति, जो ऐसे ज्ञान या आशय से उस कार्य में सम्मिलित होता है, उस कार्य के लिए उसी प्रकार दायित्व के…
पूरा पढ़ेंशरीर और संपत्ति की निजी रक्षा का अधिकार।
धारा 37 में निहित प्रतिबंधों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक व्यक्ति को बचाव का अधिकार है। (क) अपने शरीर और किसी अन्य व्यक्ति के शरीर को मानव शरीर को प्रभावित करने वाले किसी भी अपराध के विरुद्ध; (ख) स्वयं की या किसी अन्य व्यक्ति की चल या अचल संपत्ति के विरुद्ध, किसी ऐसे कृत्य के विरुद्ध जो चोरी, डकैती, उपद्रव या आपराधिक…
पूरा पढ़ेंधारा 97 - शरीर तथा संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार
शरीर तथा संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार धारा 99 में अंतर्विष्ट निर्बंधनों के अध्यधीन, हर व्यक्ति को अधिकार है कि, वह - पहला - मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले किसी अपराध के विरुद्ध अपने शरीर और किसी अन्य व्यक्ति के शरीर की प्रतिरक्षा करे ; दूसरा - किसी ऐसे कार्य के विरुद्ध, जो चोरी, लूट, रिष्टि या आप्राधिक…
पूरा पढ़ेंकिसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस पर हमला करना या आपराधिक बल का प्रयोग करना।
जो कोई भी किसी महिला पर हमला करता है या उसके खिलाफ आपराधिक बल का प्रयोग करता है, जिसका उद्देश्य उसकी लज्जा भंग करना हो या जिसके बारे में उसे पता हो कि ऐसा करने से उसकी लज्जा भंग होने की संभावना है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा जिसकी अवधि एक वर्ष से कम नहीं होगी बल्कि पांच वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है,…
पूरा पढ़ेंधारा 354 - स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग जो कोई किसी स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से या यह सम्भाव्य जानते हुए कि तद्द्वारा वह उसकी लज्जा भंग करेगा, उस स्त्री पर हमला करेगा या आपराधिक बल का प्रयोग करेगा, वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या…
पूरा पढ़ेंयौन उत्पीड़न।
(1) निम्नलिखित में से कोई भी कार्य करने वाला व्यक्ति:--- (i) अवांछित और स्पष्ट यौन इशारों से जुड़े शारीरिक संपर्क और हरकतें; या (ii) यौन अनुग्रह की मांग या अनुरोध; या (iii) किसी महिला की इच्छा के विरुद्ध अश्लील सामग्री दिखाना; या (iv) यौन संबंधी टिप्पणी करना, यौन उत्पीड़न के अपराध का दोषी पाया जाएगा। (2) उपधारा (1) के…
पूरा पढ़ेंधारा 354A - यौन उत्पीड़न
यौन उत्पीड़न केवल महिलाओं की रक्षा करता है। प्रावधान हैं: 1) .physical संपर्क और अनिष्ट और स्पष्ट यौन पहल को शामिल अग्रिम; या 2) एक मांग या यौन उपकार के लिए अनुरोध; या 3) यौन रंगीन टिप्पणी .making; या 4) .forcibly अश्लील साहित्य दिखा; या 5) यौन प्रकृति के अन्य अप्रिय शारीरिक, मौखिक या गैर मौखिक आचरण .any। सजा: सश्रम…
पूरा पढ़ेंकिसी महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से उस पर हमला करना या आपराधिक बल का प्रयोग करना।
जो कोई भी किसी महिला पर हमला करता है या उसके साथ आपराधिक बल का प्रयोग करता है या उसे निर्वस्त्र करने या नग्न होने के लिए मजबूर करने के इरादे से ऐसे कृत्य में सहायता करता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा जिसकी अवधि तीन वर्ष से कम नहीं होगी लेकिन सात वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है, और वह जुर्माने का भी…
पूरा पढ़ेंधारा 354B - एक औरत नंगा करने के इरादे के साथ कार्य
एक औरत नंगा करने के इरादे के साथ कार्य जो किसी के खिलाफ महिलाओं की रक्षा करता है "किसी भी महिला के लिए आपराधिक बल का उपयोग करता है या उसे नग्न होने के लिए नंगा करनेवाला के इरादे या सम्मोहक के साथ इस तरह के कानून शह मिलती हमले या।" अपराध: आक्रमण या इरादे के साथ महिलाओं के लिए आपराधिक बल का मुकदमा नंगा करने के लिए। सजा:…
पूरा पढ़ेंताक-झांक करना।
जो कोई भी किसी महिला को निजी कृत्य करते हुए देखता है, या उसकी छवि बनाता है, ऐसी परिस्थितियों में जहां महिला को सामान्यतः यह अपेक्षा होती है कि उसे न तो अपराधी द्वारा और न ही अपराधी के इशारे पर किसी अन्य व्यक्ति द्वारा देखा जा रहा है, या ऐसी छवि को प्रसारित करता है, तो उसे पहली बार दोषी पाए जाने पर कम से कम एक वर्ष से…
पूरा पढ़ेंधारा 354C - छिप कर देखना
छिप कर देखना केवल महिलाओं की रक्षा करता है। निहितार्थ से, महिलाओं के दण्ड से मुक्ति के साथ पुरुषों पर voyeuristically शिकार हो सकता है। निषिद्ध कार्रवाई की है, इस प्रकार परिभाषित करता है: "देख रहा है या में एक महिला पर कब्जा," परिस्थितियों में यथोचित गोपनीयता प्रदान की उम्मीद होगी जो एक जगह में किया जाता देख के एक…
पूरा पढ़ेंपीछा करना।
(1) कोई भी व्यक्ति जो--- (i) किसी महिला का पीछा करता है और उस महिला से बार-बार संपर्क करता है या व्यक्तिगत बातचीत को बढ़ावा देने के लिए संपर्क करने का प्रयास करता है, जबकि उस महिला ने स्पष्ट रूप से अरुचि दिखाई हो; या (ii) किसी महिला द्वारा इंटरनेट, ई-मेल या इलेक्ट्रॉनिक संचार के किसी अन्य रूप के उपयोग की निगरानी करता…
पूरा पढ़ेंधारा 354D - पीछा
पीछा केवल पुरुषों द्वारा पीछा किया जा रहा से महिलाओं की रक्षा। निहितार्थ से, महिलाओं के दण्ड से मुक्ति के साथ पुरुषों के डंठल सकता है। निषिद्ध कार्रवाई इस प्रकार परिभाषित किया गया है: "एक औरत और संपर्क का पालन करें, या ऐसी महिला द्वारा उदासीनता का एक स्पष्ट संकेत के बावजूद बार बार व्यक्तिगत संपर्क को बढ़ावा के लिए ऐसी…
पूरा पढ़ेंआपराधिक बल का प्रयोग।
जो कोई भी जानबूझकर किसी व्यक्ति की सहमति के बिना, किसी अपराध को अंजाम देने के उद्देश्य से, या ऐसे बल के प्रयोग से उस व्यक्ति को चोट, भय या असुविधा पहुँचाने के इरादे से, या यह जानते हुए कि ऐसे बल के प्रयोग से उस व्यक्ति को चोट, भय या असुविधा होने की संभावना है, उस पर बल का प्रयोग करता है, तो उसे उस दूसरे व्यक्ति पर…
पूरा पढ़ेंधारा 350 - आपराधिक बल
आपराधिक बल जो कोई किसी व्यक्ति पर उस व्यक्ति की सम्मति के बिना बल का प्रयोग किसी अपराध को करने के लिए उस व्यक्ति को, जिस पर बल का प्रयोग किया जाता है, क्षति, भय या क्षोभ, ऐसे बल के प्रयोग से कारित करने के आशय से, या ऐसे बल के प्रयोग से सम्भाव्यतः कारित करेगा यह जानते हुए साशय करता है, वह उस अन्य व्यक्ति पर आपराधिक बल…
पूरा पढ़ेंहमला करना।
जो कोई भी ऐसा इशारा करता है या कोई ऐसी तैयारी करता है जिसका इरादा हो या यह जानते हुए कि ऐसा इशारा या तैयारी उपस्थित किसी भी व्यक्ति को यह आशंका दिलाएगी कि इशारा या तैयारी करने वाला व्यक्ति उस व्यक्ति पर आपराधिक बल का प्रयोग करने वाला है, तो उसे हमला करने वाला कहा जाता है। स्पष्टीकरण— मात्र शब्दों से हमला नहीं होता।…
पूरा पढ़ेंधारा 351 - हमला
हमला जो कोई, कोई अंगविक्षेप या कोई तैयारी इस आशय से करता है, या यह सम्भाव्य जानते हुए करता है कि ऐसे अंगविक्षेप या ऐसी तैयारी करने से किसी उपस्थित व्यक्ति को यह आशंका हो जाएगी कि जो वैसा अंगविक्षेप या तैयारी करता है, वह उस व्यक्ति पर आपराधिक बल का प्रयोग करने ही वाला है, वह हमला करता है, यह कहा जाता है । स्पष्टीकरण -…
पूरा पढ़ेंगंभीर उकसावे के अलावा अन्य परिस्थितियों में हमले या आपराधिक बल प्रयोग के लिए दंड।
जो कोई भी किसी व्यक्ति पर गंभीर और अचानक उकसावे के अलावा किसी अन्य कारण से हमला करता है या आपराधिक बल का प्रयोग करता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन महीने तक की अवधि के लिए, या एक हजार रुपये तक के जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा। स्पष्टीकरण 1.—गंभीर और अचानक उकसावे से इस धारा के तहत अपराध के लिए सजा…
पूरा पढ़ेंधारा 352 - गम्भीर प्रकोपन होने से अन्यथा हमला करने या आपराधिक बल का प्रयोग करने के लिए दण्ड
गम्भीर प्रकोपन होने से अन्यथा हमला करने या आपराधिक बल का प्रयोग करने के लिए दण्ड जो कोई किसी व्यक्ति पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग उस व्यक्ति द्वारा गम्भीर और अचानक प्रकोपन दिए जाने पर करने से अन्यथा करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए…
पूरा पढ़ेंलोक सेवक को उसके कर्तव्य निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
जो कोई भी किसी लोक सेवक पर उसके कर्तव्य निर्वाह के दौरान हमला करता है या आपराधिक बल का प्रयोग करता है, या उस व्यक्ति को उसके कर्तव्य निर्वाह से रोकने या हतोत्साहित करने के इरादे से, या उस व्यक्ति द्वारा अपने कर्तव्य के वैध निर्वाह में किए गए या किए जाने के प्रयास के परिणामस्वरूप, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो…
पूरा पढ़ेंलोक सेवक को उसके कर्तव्य निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
जो कोई भी किसी लोक सेवक पर उसके कर्तव्य निर्वहन के दौरान हमला करता है या आपराधिक बल का प्रयोग करता है, या उस व्यक्ति को उसके कर्तव्य निर्वहन से रोकने या हतोत्साहित करने के इरादे से, या उस व्यक्ति द्वारा उसके कर्तव्य के वैध निर्वहन में किए गए या किए जाने के प्रयास के परिणामस्वरूप, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो…
पूरा पढ़ेंकिसी व्यक्ति को अपमानित करने के इरादे से हमला करना या आपराधिक बल का प्रयोग करना, गंभीर उकसावे के अलावा अन्य मामलों में।
जो कोई भी किसी व्यक्ति पर हमला करता है या आपराधिक बल का प्रयोग करता है, जिससे उस व्यक्ति का अपमान करने का इरादा हो, सिवाय उस व्यक्ति द्वारा दिए गए गंभीर और अचानक उकसावे के, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 355 - गम्भीर प्रकोपन होने से अन्यथा किसी व्यक्ति का अनादर करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
गम्भीर प्रकोपन होने से अन्यथा किसी व्यक्ति का अनादर करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग जो कोई किसी व्यक्ति पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग उस व्यक्ति द्वारा गम्भीर और अचानक प्रकोपन दिए जाने पर भारतीय दंड संहिता, 1860 67 करने, से अन्यथा, इस आशय से करेगा कि तद्द्वारा उसका अनादर किया जाए, वह दोनों में से…
पूरा पढ़ेंकिसी व्यक्ति द्वारा ले जाई जा रही संपत्ति की चोरी करने के प्रयास में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
जो कोई भी किसी व्यक्ति पर हमला करता है या आपराधिक बल का प्रयोग करता है, उस व्यक्ति द्वारा पहने या ले जाए जा रहे किसी भी सामान पर चोरी करने के प्रयास में, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंकिसी व्यक्ति द्वारा ले जाई जा रही संपत्ति की चोरी करने के प्रयास में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
जो कोई भी किसी व्यक्ति पर हमला करता है या आपराधिक बल का प्रयोग करता है, उस व्यक्ति द्वारा पहने या ले जाए जा रहे किसी भी सामान पर चोरी करने के प्रयास में, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंकिसी व्यक्ति को गलत तरीके से कैद करने के प्रयास में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
जो कोई भी किसी व्यक्ति को अवैध रूप से कैद करने के प्रयास में उस पर हमला करता है या आपराधिक बल का प्रयोग करता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से एक वर्ष तक की अवधि के लिए, या पांच हजार रुपये तक के जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 357 - किसी व्यक्ति का सदोष परिरोध करने के प्रयत्नों में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
किसी व्यक्ति का सदोष परिरोध करने के प्रयत्नों में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग जो कोई किसी व्यक्ति पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग उस व्यक्ति का सदोष परिरोध करने का प्रयत्न करने में करेगा, वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या…
पूरा पढ़ेंगंभीर उकसावे पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
जो कोई भी किसी व्यक्ति द्वारा दिए गए गंभीर और अचानक उकसावे पर उस व्यक्ति पर हमला करता है या आपराधिक बल का प्रयोग करता है, उसे एक महीने तक की साधारण कारावास या एक हजार रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा। स्पष्टीकरण.—यह धारा धारा 131 के समान स्पष्टीकरण के अधीन है।
पूरा पढ़ेंधारा 358 - गम्भीर प्रकोपन मिलने पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
गम्भीर प्रकोपन मिलने पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग जो कोई किसी व्यक्ति पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग उस व्यक्ति द्वारा दिए गए गम्भीर और अचानक प्रकोपन पर करेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दो सौ रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से, दण्डित किया जाएगा । स्पष्टीकरण - अंतिम धारा…
पूरा पढ़ेंअपहरण।
(1) अपहरण दो प्रकार के होते हैं: भारत से अपहरण और वैधानिक संरक्षकता से अपहरण— (क) जो कोई भी किसी व्यक्ति को उसकी सहमति के बिना, या उस व्यक्ति की ओर से सहमति देने के लिए कानूनी रूप से अधिकृत किसी व्यक्ति की सहमति के बिना, भारत की सीमाओं से बाहर ले जाता है, तो उसे उस व्यक्ति का भारत से अपहरण करना कहा जाता है; (ख) जो कोई…
पूरा पढ़ेंधारा 359 - व्यपहरण
व्यपहरण व्यपहरण दो किस्म का होता है ; भारत में से व्यपहरण और विधिपूर्ण संरक्षकता में से व्यपहरण ।
पूरा पढ़ेंअपहरण।
(1) अपहरण दो प्रकार के होते हैं: भारत से अपहरण और वैधानिक संरक्षकता से अपहरण— (क) जो कोई भी किसी व्यक्ति को उसकी सहमति के बिना, या उस व्यक्ति की ओर से सहमति देने के लिए कानूनी रूप से अधिकृत किसी व्यक्ति की सहमति के बिना, भारत की सीमाओं से बाहर ले जाता है, तो उसे उस व्यक्ति का भारत से अपहरण करना कहा जाता है; (ख) जो कोई…
पूरा पढ़ेंधारा 359 - व्यपहरण
व्यपहरण व्यपहरण दो किस्म का होता है ; भारत में से व्यपहरण और विधिपूर्ण संरक्षकता में से व्यपहरण ।
पूरा पढ़ेंमाल से भरे किसी भी पात्र पर झूठा चिह्न बनाना।
(1) जो कोई भी माल से भरे किसी डिब्बे, पैकेज या अन्य पात्र पर इस प्रकार कोई झूठा चिह्न लगाता है जिससे किसी लोक सेवक या किसी अन्य व्यक्ति को यह विश्वास हो जाए कि उस पात्र में वह माल है जो वास्तव में नहीं है, या उसमें वह माल नहीं है जो वास्तव में है, या उस पात्र में रखा माल उसकी वास्तविक प्रकृति या गुणवत्ता से भिन्न है,…
पूरा पढ़ेंधारा 487 - किसी ऐसे पात्र के ऊपर मिथ्या चिह्न बनाना जिसमें माल रखा है
किसी ऐसे पात्र के ऊपर मिथ्या चिह्न बनाना जिसमें माल रखा है जो कोई किसी पेटी, पैकेज या अन्य पात्र के ऊपर, जिसमें माल रखा हुआ हो, ऐसी रीति से कोई ऐसा मिथ्या चिह्न बनाएगा, जो इसलिए युक्तियुक्त रूप से प्रकल्पित है कि उससे किसी लोक सेवक को या किसी अन्य व्यक्ति को यह विश्वास कारित हो जाए कि ऐसे पात्र में ऐसा माल है, जो…
पूरा पढ़ेंमाल से भरे किसी भी पात्र पर झूठा चिह्न बनाना।
(1) जो कोई भी माल से भरे किसी डिब्बे, पैकेज या अन्य पात्र पर इस प्रकार कोई झूठा चिह्न लगाता है जिससे किसी लोक सेवक या किसी अन्य व्यक्ति को यह विश्वास हो जाए कि उस पात्र में वह माल है जो वास्तव में नहीं है, या उसमें वह माल नहीं है जो वास्तव में है, या उस पात्र में रखा माल उसकी वास्तविक प्रकृति या गुणवत्ता से भिन्न है,…
पूरा पढ़ेंधारा 487 - किसी ऐसे पात्र के ऊपर मिथ्या चिह्न बनाना जिसमें माल रखा है
किसी ऐसे पात्र के ऊपर मिथ्या चिह्न बनाना जिसमें माल रखा है जो कोई किसी पेटी, पैकेज या अन्य पात्र के ऊपर, जिसमें माल रखा हुआ हो, ऐसी रीति से कोई ऐसा मिथ्या चिह्न बनाएगा, जो इसलिए युक्तियुक्त रूप से प्रकल्पित है कि उससे किसी लोक सेवक को या किसी अन्य व्यक्ति को यह विश्वास कारित हो जाए कि ऐसे पात्र में ऐसा माल है, जो…
पूरा पढ़ेंमाल से भरे किसी भी पात्र पर झूठा चिह्न बनाना।
(1) जो कोई भी माल से भरे किसी डिब्बे, पैकेज या अन्य पात्र पर इस प्रकार कोई झूठा चिह्न लगाता है जिससे किसी लोक सेवक या किसी अन्य व्यक्ति को यह विश्वास हो जाए कि उस पात्र में वह माल है जो वास्तव में नहीं है, या उसमें वह माल नहीं है जो वास्तव में है, या उस पात्र में रखा माल उसकी वास्तविक प्रकृति या गुणवत्ता से भिन्न है,…
पूरा पढ़ेंधारा 488 - किसी ऐसे मिथ्या चिह्न को उपयोग में लाने के लिए दण्ड
किसी ऐसे मिथ्या चिह्न को उपयोग में लाने के लिए दण्ड कोई अन्तिम पूर्वगामी धारा द्वारा प्रतिषिद्ध किसी प्रकार से किसी ऐसे मिथ्या चिह्न का उपयोग करेगा, जब तक कि वह यह साबित न कर दे कि उसने वह कार्य कपट करने के आशय के बिना किया है, वह उसी प्रकार दण्डित किया जाएगा, मानो उसने उस धारा के विरुद्ध अपराध किया हो । 1 1958 के…
पूरा पढ़ेंआपराधिक धमकी।
(1) जो कोई भी किसी अन्य व्यक्ति को किसी भी माध्यम से उसकी जान, प्रतिष्ठा या संपत्ति को, या किसी ऐसे व्यक्ति की जान या प्रतिष्ठा को, जिसमें उस व्यक्ति की रुचि हो, हानि पहुँचाने की धमकी देता है, इस इरादे से कि उस व्यक्ति को भयभीत किया जाए, या उस व्यक्ति को कोई ऐसा कार्य करने के लिए विवश किया जाए जिसे करने के लिए वह…
पूरा पढ़ेंधारा 503 - आपराधिक अभित्रास
आपराधिक अभित्रास जो कोई किसी अन्य व्यक्ति के शरीर, ख्याति या सम्पत्ति को या किसी ऐसे व्यक्ति के शरीर या ख्याति को, जिससे कि वह व्यक्ति हितबद्ध हो कोई क्षति करने की धमकी उस अन्य व्यक्ति को इस आशय से देता है कि उसे संत्रास कारित किया जाए, या उससे ऐसी धमकी के निष्पादन का परिवर्जन करने के साधन स्वरूप कोई ऐसा कार्य कराया…
पूरा पढ़ेंआपराधिक धमकी।
(1) जो कोई भी किसी अन्य व्यक्ति को किसी भी माध्यम से उसकी जान, प्रतिष्ठा या संपत्ति को, या किसी ऐसे व्यक्ति की जान या प्रतिष्ठा को, जिसमें उस व्यक्ति की रुचि हो, हानि पहुँचाने की धमकी देता है, इस इरादे से कि उस व्यक्ति को भयभीत किया जाए, या उस व्यक्ति को कोई ऐसा कार्य करने के लिए विवश किया जाए जिसे करने के लिए वह…
पूरा पढ़ेंधारा 503 - आपराधिक अभित्रास
आपराधिक अभित्रास जो कोई किसी अन्य व्यक्ति के शरीर, ख्याति या सम्पत्ति को या किसी ऐसे व्यक्ति के शरीर या ख्याति को, जिससे कि वह व्यक्ति हितबद्ध हो कोई क्षति करने की धमकी उस अन्य व्यक्ति को इस आशय से देता है कि उसे संत्रास कारित किया जाए, या उससे ऐसी धमकी के निष्पादन का परिवर्जन करने के साधन स्वरूप कोई ऐसा कार्य कराया…
पूरा पढ़ेंआपराधिक धमकी।
(1) जो कोई भी किसी अन्य व्यक्ति को किसी भी माध्यम से उसकी जान, प्रतिष्ठा या संपत्ति को, या किसी ऐसे व्यक्ति की जान या प्रतिष्ठा को, जिसमें उस व्यक्ति की रुचि हो, हानि पहुँचाने की धमकी देता है, इस इरादे से कि उस व्यक्ति को भयभीत किया जाए, या उस व्यक्ति को कोई ऐसा कार्य करने के लिए विवश किया जाए जिसे करने के लिए वह…
पूरा पढ़ेंधारा 506 - आपराधिक अभित्रास के लिए दण्ड
आपराधिक अभित्रास के लिए दण्ड जो कोई आपराधिक अभित्रास का अपराध करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा । यदि धमकी मॄत्यु या घोर उपहति इत्यादि कारित करने की हो - तथा यदि धमकी मॄत्यु या घोर उपहति कारित करने की, या अग्नि द्वारा किसी…
पूरा पढ़ेंआपराधिक धमकी।
(1) जो कोई भी किसी अन्य व्यक्ति को किसी भी माध्यम से उसकी जान, प्रतिष्ठा या संपत्ति को, या किसी ऐसे व्यक्ति की जान या प्रतिष्ठा को, जिसमें उस व्यक्ति की रुचि हो, हानि पहुँचाने की धमकी देता है, इस इरादे से कि उस व्यक्ति को भयभीत किया जाए, या उस व्यक्ति को कोई ऐसा कार्य करने के लिए विवश किया जाए जिसे करने के लिए वह…
पूरा पढ़ेंधारा 506 - आपराधिक अभित्रास के लिए दण्ड
आपराधिक अभित्रास के लिए दण्ड जो कोई आपराधिक अभित्रास का अपराध करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा । यदि धमकी मॄत्यु या घोर उपहति इत्यादि कारित करने की हो - तथा यदि धमकी मॄत्यु या घोर उपहति कारित करने की, या अग्नि द्वारा किसी…
पूरा पढ़ेंआपराधिक धमकी।
(1) जो कोई भी किसी अन्य व्यक्ति को किसी भी माध्यम से उसकी जान, प्रतिष्ठा या संपत्ति को, या किसी ऐसे व्यक्ति की जान या प्रतिष्ठा को, जिसमें उस व्यक्ति की रुचि हो, हानि पहुँचाने की धमकी देता है, इस इरादे से कि उस व्यक्ति को भयभीत किया जाए, या उस व्यक्ति को कोई ऐसा कार्य करने के लिए विवश किया जाए जिसे करने के लिए वह…
पूरा पढ़ेंधारा 507 - अनाम संसूचना द्वारा आपराधिक अभित्रास
अनाम संसूचना द्वारा आपराधिक अभित्रास जो कोई अनाम संसूचना द्वारा या उस व्यक्ति का, जिसने धमकी दी हो, नाम या निवास-स्थान छिपाने की पूर्वावधानी करके आपराधिक अभित्रास का अपराध करेगा, वह पूर्ववर्ती अंतिम धारा द्वारा उस अपराध के लिए उपबन्धित दण्ड के अतिरिक्त, दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की…
पूरा पढ़ेंशांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना।
जो कोई भी जानबूझकर किसी भी तरह से अपमान करता है और इस प्रकार किसी व्यक्ति को उकसाता है, इस इरादे से या यह जानते हुए कि ऐसा उकसावा उसे सार्वजनिक शांति भंग करने या कोई अन्य अपराध करने के लिए प्रेरित करेगा, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंजानबूझकर अपमान करना और शांति भंग करने के इरादे से ऐसा करना।
जो कोई जानबूझकर किसी व्यक्ति का अपमान करता है और उसे उकसाता है, इस इरादे से या यह जानते हुए कि ऐसा उकसावा उसे सार्वजनिक शांति भंग करने या कोई अन्य अपराध करने के लिए प्रेरित करेगा, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंसार्वजनिक उपद्रव को बढ़ावा देने वाले बयान।
(1) जो कोई भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों सहित किसी भी प्रकार का कथन, झूठी सूचना, अफवाह या रिपोर्ट बनाता, प्रकाशित करता या प्रसारित करता है--- (क) भारत की सेना, नौसेना या वायु सेना के किसी अधिकारी, सैनिक, नाविक या वायुसैनिक को विद्रोह करने या अन्यथा अपने कर्तव्य की अवहेलना करने या उसमें विफल होने के लिए प्रेरित करने के…
पूरा पढ़ेंधारा 505 - लोक रिष्टिकारक वक्तव्य
लोक रिष्टिकारक वक्तव्य (1) जो कोई कोई ऐसा कथन, अफवाह या रिपोर्ट करेगा, प्रकाशित करेगा या परिचालित करेगा, - (क) इस आशय से कि भारत की सेना, नौसेना या वायुसेना का कोई आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक विद्रोह करे, या अन्यथा ऐसे आफिसर, सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक के नाते अपने कर्तव्य की अवहेलना करे या उसके पालन में असफल…
पूरा पढ़ेंकिसी व्यक्ति को यह विश्वास दिलाने के कारण किया गया कृत्य कि वह ईश्वर के क्रोध का पात्र बन जाएगा।
जो कोई भी स्वेच्छा से किसी व्यक्ति को ऐसा कोई कार्य करने के लिए प्रेरित करता है या प्रेरित करने का प्रयास करता है जिसे करने के लिए वह व्यक्ति कानूनी रूप से बाध्य नहीं है, या किसी ऐसे कार्य को न करने के लिए प्रेरित करता है जिसे करने का उसे कानूनी अधिकार है, और ऐसा करते समय उस व्यक्ति को यह विश्वास दिलाता है या दिलाने…
पूरा पढ़ेंधारा 508 - व्यक्ति को यह विश्वास करने के लिए उत्प्रेरित करके कि वह दैवी अप्रसाद का भाजन होगा कराया गया कार्य
व्यक्ति को यह विश्वास करने के लिए उत्प्रेरित करके कि वह दैवी अप्रसाद का भाजन होगा कराया गया कार्य जो कोई किसी व्यक्ति को यह विश्वास करने के लिए उत्प्रेरित करके, या उत्प्रेरित करने का प्रयत्न करके, कि यदि वह उस बात को न करेगा, जिसे उससे कराना अपराधी का उद्देश्य हो, या यदि वह उस बात को करेगा जिसका उससे लोप कराना अपराधी…
पूरा पढ़ेंशराब के नशे में धुत व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक स्थान पर दुर्व्यवहार।
जो कोई भी नशे की हालत में किसी सार्वजनिक स्थान पर, या किसी ऐसे स्थान पर जहाँ प्रवेश करना उसके लिए निषिद्ध है, उपस्थित होता है और वहाँ ऐसा आचरण करता है जिससे किसी व्यक्ति को असुविधा होती है, उसे चौबीस घंटे तक के साधारण कारावास, या एक हजार रुपये तक के जुर्माने, या दोनों, या सामुदायिक सेवा से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 510 - मत्त व्यक्ति द्वारा लोक स्थान में अवचार
मत्त व्यक्ति द्वारा लोक स्थान में अवचार जो कोई मत्तता की हालत में किसी लोक स्थान में, या किसी ऐसे स्थान में, जिसमें उसका प्रवेश करना अतिचार हो, आएगा और वहां इस प्रकार का आचरण करेगा जिससे किसी व्यक्ति को क्षोभ हो, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि चौबीस घंटे तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस रुपए तक का हो सकेगा, या…
पूरा पढ़ेंमानहानि।
(1) जो कोई भी, बोले गए या पढ़े जाने के उद्देश्य से शब्दों द्वारा, या संकेतों द्वारा, या दृश्य प्रस्तुतियों द्वारा, किसी भी तरह से किसी व्यक्ति के संबंध में कोई आरोप लगाता है या प्रकाशित करता है, जिसका उद्देश्य उस व्यक्ति की प्रतिष्ठा को हानि पहुँचाना हो, या यह जानते हुए या यह मानने का कारण रखते हुए कि ऐसा आरोप उस…
पूरा पढ़ेंमानहानि।
जो कोई भी, बोले गए या पढ़े जाने के उद्देश्य से लिखे गए शब्दों द्वारा, या संकेतों द्वारा, या दृश्य प्रस्तुतियों द्वारा, किसी व्यक्ति के संबंध में ऐसा कोई आरोप लगाता है या प्रकाशित करता है जिसका उद्देश्य उस व्यक्ति की प्रतिष्ठा को हानि पहुंचाना हो, या यह जानते हुए या यह मानने का कारण रखते हुए कि ऐसा आरोप उस व्यक्ति की…
पूरा पढ़ेंमानहानि।
(1) जो कोई भी, बोले गए या पढ़े जाने के उद्देश्य से शब्दों द्वारा, या संकेतों द्वारा, या दृश्य प्रस्तुतियों द्वारा, किसी भी तरह से किसी व्यक्ति के संबंध में कोई आरोप लगाता है या प्रकाशित करता है, जिसका उद्देश्य उस व्यक्ति की प्रतिष्ठा को हानि पहुँचाना हो, या यह जानते हुए या यह मानने का कारण रखते हुए कि ऐसा आरोप उस…
पूरा पढ़ेंमानहानि।
जो कोई भी, बोले गए या पढ़े जाने के उद्देश्य से लिखे गए शब्दों द्वारा, या संकेतों द्वारा, या दृश्य प्रस्तुतियों द्वारा, किसी व्यक्ति के संबंध में ऐसा कोई आरोप लगाता है या प्रकाशित करता है जिसका उद्देश्य उस व्यक्ति की प्रतिष्ठा को हानि पहुंचाना हो, या यह जानते हुए या यह मानने का कारण रखते हुए कि ऐसा आरोप उस व्यक्ति की…
पूरा पढ़ेंमानहानि।
(1) जो कोई भी, बोले गए या पढ़े जाने के उद्देश्य से शब्दों द्वारा, या संकेतों द्वारा, या दृश्य प्रस्तुतियों द्वारा, किसी भी तरह से किसी व्यक्ति के संबंध में कोई आरोप लगाता है या प्रकाशित करता है, जिसका उद्देश्य उस व्यक्ति की प्रतिष्ठा को हानि पहुँचाना हो, या यह जानते हुए या यह मानने का कारण रखते हुए कि ऐसा आरोप उस…
पूरा पढ़ेंमानहानि के लिए दंड।
जो कोई भी दूसरे व्यक्ति की मानहानि करेगा, उसे दो वर्ष तक की साधारण कारावास की सजा, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंमानहानि।
(1) जो कोई भी, बोले गए या पढ़े जाने के उद्देश्य से शब्दों द्वारा, या संकेतों द्वारा, या दृश्य प्रस्तुतियों द्वारा, किसी भी तरह से किसी व्यक्ति के संबंध में कोई आरोप लगाता है या प्रकाशित करता है, जिसका उद्देश्य उस व्यक्ति की प्रतिष्ठा को हानि पहुँचाना हो, या यह जानते हुए या यह मानने का कारण रखते हुए कि ऐसा आरोप उस…
पूरा पढ़ेंधारा 501 - मानहानिकारक जानी हुई बात को मुद्रित या उत्कीर्ण करना
मानहानिकारक जानी हुई बात को मुद्रित या उत्कीर्ण करना जो कोई किसी बात को यह जानते हुए या विश्वास करने का अच्छा कारण रखते हुए कि ऐसी बात किसी व्यक्ति के लिए मानहानिकारक है, मुद्रित करेगा, या उत्कीर्ण करेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
पूरा पढ़ेंमानहानि।
(1) जो कोई भी, बोले गए या पढ़े जाने के उद्देश्य से शब्दों द्वारा, या संकेतों द्वारा, या दृश्य प्रस्तुतियों द्वारा, किसी भी तरह से किसी व्यक्ति के संबंध में कोई आरोप लगाता है या प्रकाशित करता है, जिसका उद्देश्य उस व्यक्ति की प्रतिष्ठा को हानि पहुँचाना हो, या यह जानते हुए या यह मानने का कारण रखते हुए कि ऐसा आरोप उस…
पूरा पढ़ेंधारा 502 - मानहानिकारक विषय रखने वाले मुद्रित या उत्कीर्ण पदार्थ का बेचना
मानहानिकारक विषय रखने वाले मुद्रित या उत्कीर्ण पदार्थ का बेचना जो कोई किसी मुद्रित या उत्कीर्ण पदार्थ को, जिसमें मानहानिकारक विषय अन्तर्विष्ट है, यह जानते हुए कि उसमें ऐसा विषय अन्तर्विष्ट है, बेचेगा या बेचने की प्रस्थापना करेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से,…
पूरा पढ़ेंअसहाय व्यक्ति की जरूरतों को पूरा करने और उनकी देखभाल करने के अनुबंध का उल्लंघन।
जो कोई भी, किसी वैध अनुबंध द्वारा किसी ऐसे व्यक्ति की सेवा करने या उसकी जरूरतों को पूरा करने के लिए बाध्य है, जो यौवन, मानसिक अस्वस्थता, बीमारी या शारीरिक कमजोरी के कारण असहाय है या अपनी सुरक्षा या अपनी जरूरतों को पूरा करने में असमर्थ है, स्वेच्छा से ऐसा करने में विफल रहता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन…
पूरा पढ़ेंधारा 491 - असहाय व्यक्ति की परिचर्या करने की और उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति करने की संविदा का भंग
असहाय व्यक्ति की परिचर्या करने की और उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति करने की संविदा का भंग जो कोई ऐसे व्यक्ति की, जो किशोरावस्था या चित्तविकॄति या रोग या शारीरिक दुर्बलता के कारण असहाय है, या अपने निजी क्षेम की व्यवस्था या अपनी निजी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए असमर्थ है, परिचर्या करने के लिए या उसकी आवश्यकताओं की…
पूरा पढ़ेंनिरसन और बचत।
(1) भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) इसके द्वारा निरस्त की जाती है। (2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट संहिता के निरसन के बावजूद, यह निम्नलिखित पर प्रभाव नहीं डालेगा,--- (क) निरस्त की गई संहिता का पूर्व संचालन या उसके अधीन विधिवत किया गया कोई कार्य या सहा गया कोई कार्य; या (ख) निरस्त की गई संहिता के अधीन अर्जित, उपार्जित या…
पूरा पढ़ेंनई धारा
New Section
- BNS §3(6)IPC §35
सामान्य स्पष्टीकरण।
धारा 35 - जबकि ऐसा कार्य इस कारण आपराधिक है कि वह आपराधिक ज्ञान या आशय से किया गया है
- BNS §35IPC §97
शरीर और संपत्ति की निजी रक्षा का अधिकार।
धारा 97 - शरीर तथा संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार
- BNS §74IPC §354
किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस पर हमला करना या आपराधिक बल का प्रयोग करना।
धारा 354 - स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
- BNS §75IPC §354A
यौन उत्पीड़न।
धारा 354A - यौन उत्पीड़न
- BNS §76IPC §354Bबदलाव हुआ
किसी महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से उस पर हमला करना या आपराधिक बल का प्रयोग करना।
धारा 354B - एक औरत नंगा करने के इरादे के साथ कार्य
- BNS §77IPC §354Cबदलाव हुआ
ताक-झांक करना।
धारा 354C - छिप कर देखना
- BNS §78IPC §354D
पीछा करना।
धारा 354D - पीछा
- BNS §129IPC §350
आपराधिक बल का प्रयोग।
धारा 350 - आपराधिक बल
- BNS §130IPC §351
हमला करना।
धारा 351 - हमला
- BNS §131IPC §352बदलाव हुआ
गंभीर उकसावे के अलावा अन्य परिस्थितियों में हमले या आपराधिक बल प्रयोग के लिए दंड।
धारा 352 - गम्भीर प्रकोपन होने से अन्यथा हमला करने या आपराधिक बल का प्रयोग करने के लिए दण्ड
- BNS §132IPC §353
लोक सेवक को उसके कर्तव्य निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
- BNS §133IPC §355
किसी व्यक्ति को अपमानित करने के इरादे से हमला करना या आपराधिक बल का प्रयोग करना, गंभीर उकसावे के अलावा अन्य मामलों में।
धारा 355 - गम्भीर प्रकोपन होने से अन्यथा किसी व्यक्ति का अनादर करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
- BNS §134IPC §356
किसी व्यक्ति द्वारा ले जाई जा रही संपत्ति की चोरी करने के प्रयास में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
- BNS §135IPC §357बदलाव हुआ
किसी व्यक्ति को गलत तरीके से कैद करने के प्रयास में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
धारा 357 - किसी व्यक्ति का सदोष परिरोध करने के प्रयत्नों में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
- BNS §136IPC §358बदलाव हुआ
गंभीर उकसावे पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
धारा 358 - गम्भीर प्रकोपन मिलने पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
- BNS §137IPC §359बदलाव हुआ
अपहरण।
धारा 359 - व्यपहरण
- BNS §137(1)IPC §359
अपहरण।
धारा 359 - व्यपहरण
- BNS §350IPC §487बदलाव हुआ
माल से भरे किसी भी पात्र पर झूठा चिह्न बनाना।
धारा 487 - किसी ऐसे पात्र के ऊपर मिथ्या चिह्न बनाना जिसमें माल रखा है
- BNS §350 (1)IPC §487
माल से भरे किसी भी पात्र पर झूठा चिह्न बनाना।
धारा 487 - किसी ऐसे पात्र के ऊपर मिथ्या चिह्न बनाना जिसमें माल रखा है
- BNS §350 (2)IPC §488
माल से भरे किसी भी पात्र पर झूठा चिह्न बनाना।
धारा 488 - किसी ऐसे मिथ्या चिह्न को उपयोग में लाने के लिए दण्ड
- BNS §351IPC §503बदलाव हुआ
आपराधिक धमकी।
धारा 503 - आपराधिक अभित्रास
- BNS §351 (1)IPC §503
आपराधिक धमकी।
धारा 503 - आपराधिक अभित्रास
- BNS §351 (2)IPC §506
आपराधिक धमकी।
धारा 506 - आपराधिक अभित्रास के लिए दण्ड
- BNS §351 (3)IPC §506
आपराधिक धमकी।
धारा 506 - आपराधिक अभित्रास के लिए दण्ड
- BNS §351 (4)IPC §507
आपराधिक धमकी।
धारा 507 - अनाम संसूचना द्वारा आपराधिक अभित्रास
- BNS §352IPC §504
शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना।
जानबूझकर अपमान करना और शांति भंग करने के इरादे से ऐसा करना।
- BNS §353IPC §505
सार्वजनिक उपद्रव को बढ़ावा देने वाले बयान।
धारा 505 - लोक रिष्टिकारक वक्तव्य
- BNS §354IPC §508
किसी व्यक्ति को यह विश्वास दिलाने के कारण किया गया कृत्य कि वह ईश्वर के क्रोध का पात्र बन जाएगा।
धारा 508 - व्यक्ति को यह विश्वास करने के लिए उत्प्रेरित करके कि वह दैवी अप्रसाद का भाजन होगा कराया गया कार्य
- BNS §355IPC §510बदलाव हुआ
शराब के नशे में धुत व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक स्थान पर दुर्व्यवहार।
धारा 510 - मत्त व्यक्ति द्वारा लोक स्थान में अवचार
- BNS §356IPC §499बदलाव हुआ
मानहानि।
- BNS §356 (1)IPC §499
मानहानि।
- BNS §356 (2)IPC §500
मानहानि।
मानहानि के लिए दंड।
- BNS §356 (3)IPC §501
मानहानि।
धारा 501 - मानहानिकारक जानी हुई बात को मुद्रित या उत्कीर्ण करना
- BNS §356 (4)IPC §502
मानहानि।
धारा 502 - मानहानिकारक विषय रखने वाले मुद्रित या उत्कीर्ण पदार्थ का बेचना
- BNS §357IPC §491
असहाय व्यक्ति की जरूरतों को पूरा करने और उनकी देखभाल करने के अनुबंध का उल्लंघन।
धारा 491 - असहाय व्यक्ति की परिचर्या करने की और उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति करने की संविदा का भंग
- BNS §358IPC §New Section
निरसन और बचत।
नई धारा
BNS §358IPC §New Section
