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47 प्रविष्टियाँ
परिभाषाएँ।
इस संहिता में, जब तक संदर्भ अन्यथा अपेक्षित न हो,--- (1) "कार्य" से तात्पर्य कार्यों की श्रृंखला के साथ-साथ एक एकल कार्य से भी है; (2) "पशु" से तात्पर्य मनुष्य के अलावा किसी भी जीवित प्राणी से है; (3) "बाल" से तात्पर्य अठारह वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति से है; (4) "नकली".---वह व्यक्ति "नकली" कहलाता है जो किसी…
पूरा पढ़ेंधारा 33 - “कार्य”
“कार्य” “कार्य” शब्द कार्यावली की द्योतक उसी प्रकार है जिस प्रकार एक कार्य का । “लोप”--“लोप” शब्द लोपावली की द्योतक उसी प्रकार है जिस प्रकार एक लोप का ।
पूरा पढ़ेंपरिभाषाएँ।
इस संहिता में, जब तक संदर्भ अन्यथा अपेक्षित न हो,--- (1) "कार्य" से तात्पर्य कार्यों की श्रृंखला के साथ-साथ एक एकल कार्य से भी है; (2) "पशु" से तात्पर्य मनुष्य के अलावा किसी भी जीवित प्राणी से है; (3) "बाल" से तात्पर्य अठारह वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति से है; (4) "नकली".---वह व्यक्ति "नकली" कहलाता है जो किसी…
पूरा पढ़ेंधारा 33 - “कार्य”
“कार्य” “कार्य” शब्द कार्यावली की द्योतक उसी प्रकार है जिस प्रकार एक कार्य का । “लोप”--“लोप” शब्द लोपावली की द्योतक उसी प्रकार है जिस प्रकार एक लोप का ।
पूरा पढ़ेंपरिभाषाएँ।
इस संहिता में, जब तक संदर्भ अन्यथा अपेक्षित न हो,--- (1) "कार्य" से तात्पर्य कार्यों की श्रृंखला के साथ-साथ एक एकल कार्य से भी है; (2) "पशु" से तात्पर्य मनुष्य के अलावा किसी भी जीवित प्राणी से है; (3) "बाल" से तात्पर्य अठारह वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति से है; (4) "नकली".---वह व्यक्ति "नकली" कहलाता है जो किसी…
पूरा पढ़ेंधारा 33 - “कार्य”
“कार्य” “कार्य” शब्द कार्यावली की द्योतक उसी प्रकार है जिस प्रकार एक कार्य का । “लोप”--“लोप” शब्द लोपावली की द्योतक उसी प्रकार है जिस प्रकार एक लोप का ।
पूरा पढ़ेंमामूली नुकसान पहुंचाने वाला कृत्य।
कोई भी बात इस कारण से अपराध नहीं है कि वह किसी प्रकार की हानि पहुंचाती है, या पहुंचाने का इरादा रखती है, या यह ज्ञात है कि इससे हानि होने की संभावना है, यदि वह हानि इतनी मामूली है कि सामान्य समझ और स्वभाव वाला कोई भी व्यक्ति ऐसी हानि की शिकायत नहीं करेगा।
पूरा पढ़ेंमामूली नुकसान पहुंचाने वाला कृत्य।
कोई भी बात इस कारण से अपराध नहीं है कि वह किसी प्रकार की हानि पहुंचाती है, या पहुंचाने का इरादा रखती है, या यह ज्ञात है कि इससे हानि होने की संभावना है, यदि वह हानि इतनी मामूली है कि सामान्य समझ और स्वभाव वाला कोई भी व्यक्ति ऐसी हानि की शिकायत नहीं करेगा।
पूरा पढ़ेंजबरन बयान दिलवाने या संपत्ति की बहाली के लिए जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई भी पीड़ित व्यक्ति या पीड़ित व्यक्ति के हितैषी से कोई स्वीकारोक्ति या ऐसी कोई जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से स्वेच्छा से चोट पहुँचाता है जिससे किसी अपराध या दुराचार का पता चल सके, या पीड़ित व्यक्ति या पीड़ित व्यक्ति के हितैषी को किसी संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति को लौटाने या लौटाने का कारण बनने, या…
पूरा पढ़ेंधारा 330 - संस्वीकृति उद्दापित करने के लिए या विवश करके सम्पत्ति का प्रत्यावर्तन कराने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना
संस्वीकृति उद्दापित करने के लिए या विवश करके सम्पत्ति का प्रत्यावर्तन कराने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना जो कोई इस प्रयोजन से स्वेच्छया उपहति कारित करेगा कि उपहत व्यक्ति से या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति से कोई संस्वीकृति या कोई ऐसी जानकारी, जिससे किसी अपराध अथवा अवचार का पता चल सके, उद्दापित की जाए, अथवा उपहत…
पूरा पढ़ेंजबरन बयान दिलवाने या संपत्ति की बहाली के लिए जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई भी पीड़ित व्यक्ति या पीड़ित व्यक्ति के हितैषी से कोई स्वीकारोक्ति या ऐसी कोई जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से स्वेच्छा से चोट पहुँचाता है जिससे किसी अपराध या दुराचार का पता चल सके, या पीड़ित व्यक्ति या पीड़ित व्यक्ति के हितैषी को किसी संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति को लौटाने या लौटाने का कारण बनने, या…
पूरा पढ़ेंधारा 330 - संस्वीकृति उद्दापित करने के लिए या विवश करके सम्पत्ति का प्रत्यावर्तन कराने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना
संस्वीकृति उद्दापित करने के लिए या विवश करके सम्पत्ति का प्रत्यावर्तन कराने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना जो कोई इस प्रयोजन से स्वेच्छया उपहति कारित करेगा कि उपहत व्यक्ति से या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति से कोई संस्वीकृति या कोई ऐसी जानकारी, जिससे किसी अपराध अथवा अवचार का पता चल सके, उद्दापित की जाए, अथवा उपहत…
पूरा पढ़ेंजबरन बयान दिलवाने या संपत्ति की बहाली के लिए जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई भी पीड़ित व्यक्ति या पीड़ित व्यक्ति के हितैषी से कोई स्वीकारोक्ति या ऐसी कोई जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से स्वेच्छा से चोट पहुँचाता है जिससे किसी अपराध या दुराचार का पता चल सके, या पीड़ित व्यक्ति या पीड़ित व्यक्ति के हितैषी को किसी संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति को लौटाने या लौटाने का कारण बनने, या…
पूरा पढ़ेंधारा 331 - संस्वीकॄति उद्दापित करने के लिए या विवश करके सम्पत्ति का प्रत्यावर्तन कराने के लिए स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
संस्वीकॄति उद्दापित करने के लिए या विवश करके सम्पत्ति का प्रत्यावर्तन कराने के लिए स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना जो कोई इस प्रयोजन से स्वेच्छया घोर उपहति कारित करेगा कि उपहत व्यक्ति से या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति से कोई संस्वीकॄति या कोई जानकारी, जिससे किसी अपराध अथवा अवचार का पता चल सके, उद्दापित की जाए अथवा उपहत…
पूरा पढ़ेंलोक सेवक को उसके कर्तव्य से विचलित करने के उद्देश्य से जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई स्वेच्छा से किसी लोक सेवक को उसके कर्तव्य निर्वाह में चोट पहुँचाता है, या उस व्यक्ति को या किसी अन्य लोक सेवक को उसके कर्तव्य निर्वाह से रोकने या हतोत्साहित करने के इरादे से, या उस व्यक्ति द्वारा लोक सेवक के रूप में अपने कर्तव्य के वैध निर्वाह में किए गए या किए जाने के प्रयास के परिणामस्वरूप चोट पहुँचाता…
पूरा पढ़ेंधारा 332 - लोक सेवक अपने कर्तव्य से भयोपरत करने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना
लोक सेवक अपने कर्तव्य से भयोपरत करने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना जो कोई किसी ऐसे व्यक्ति को, जो लोक सेवक हो, उस समय जब वह वैसे लोक सेवक के नाते अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहा हो अथवा इस आशय से कि उस व्यक्ति को या किसी अन्य लोक सेवक को, वैसे लोक सेवक के नाते उसके अपने कर्तव्य के निर्वहन से निवारित या भयोपरत करे,…
पूरा पढ़ेंलोक सेवक को उसके कर्तव्य से विचलित करने के उद्देश्य से जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई स्वेच्छा से किसी लोक सेवक को उसके कर्तव्य निर्वाह में चोट पहुँचाता है, या उस व्यक्ति को या किसी अन्य लोक सेवक को उसके कर्तव्य निर्वाह से रोकने या हतोत्साहित करने के इरादे से, या उस व्यक्ति द्वारा लोक सेवक के रूप में अपने कर्तव्य के वैध निर्वाह में किए गए या किए जाने के प्रयास के परिणामस्वरूप चोट पहुँचाता…
पूरा पढ़ेंधारा 332 - लोक सेवक अपने कर्तव्य से भयोपरत करने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना
लोक सेवक अपने कर्तव्य से भयोपरत करने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना जो कोई किसी ऐसे व्यक्ति को, जो लोक सेवक हो, उस समय जब वह वैसे लोक सेवक के नाते अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहा हो अथवा इस आशय से कि उस व्यक्ति को या किसी अन्य लोक सेवक को, वैसे लोक सेवक के नाते उसके अपने कर्तव्य के निर्वहन से निवारित या भयोपरत करे,…
पूरा पढ़ेंलोक सेवक को उसके कर्तव्य से विचलित करने के उद्देश्य से जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई स्वेच्छा से किसी लोक सेवक को उसके कर्तव्य निर्वाह में चोट पहुँचाता है, या उस व्यक्ति को या किसी अन्य लोक सेवक को उसके कर्तव्य निर्वाह से रोकने या हतोत्साहित करने के इरादे से, या उस व्यक्ति द्वारा लोक सेवक के रूप में अपने कर्तव्य के वैध निर्वाह में किए गए या किए जाने के प्रयास के परिणामस्वरूप चोट पहुँचाता…
पूरा पढ़ेंधारा 333 - लोक सेवक को अपने कर्तव्यों से भयोपरत स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
लोक सेवक को अपने कर्तव्यों से भयोपरत स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना जो कोई किसी ऐसे व्यक्ति को, जो लोक सेवक हो, उस समय जब वह वैसे लोक सेवक के नाते अपने कर्तव्य का निवहन कर रहा हो अथवा इस आशय से कि उस व्यक्ति को, या किसी अन्य लोक सेवक को वैसे लोक सेवक के नाते उस व्यक्ति द्वारा अपने कर्तव्य के विधिपूर्ण निर्वहन में की…
पूरा पढ़ेंउकसावे पर जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई जानबूझकर गंभीर और अचानक उकसावे पर चोट पहुँचाता है, यदि उसका इरादा न तो किसी अन्य व्यक्ति को चोट पहुँचाने का है और न ही उसे यह पता है कि वह उकसाने वाले व्यक्ति के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को चोट पहुँचा सकता है, तो उसे किसी भी प्रकार के कारावास से एक महीने तक की अवधि के लिए, या पाँच हजार रुपये तक के जुर्माने…
पूरा पढ़ेंधारा 334 - प्रकोपन पर स्वेच्छया उपहति करना
प्रकोपन पर स्वेच्छया उपहति करना जो कोई गम्भीर और अचानक प्रकोपन पर स्वेच्छया उपहति कारित करेगा, यदि न तो उसका आशय उस व्यक्ति से भिन्न, जिसने प्रकोपन दिया था, किसी व्यक्ति को उपहति कारित करने का हो और न वह अपने द्वारा ऐसी उपहति कारित किया जाना सम्भाव्य जानता हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक…
पूरा पढ़ेंउकसावे पर जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई जानबूझकर गंभीर और अचानक उकसावे पर चोट पहुँचाता है, यदि उसका इरादा न तो किसी अन्य व्यक्ति को चोट पहुँचाने का है और न ही उसे यह पता है कि वह उकसाने वाले व्यक्ति के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को चोट पहुँचा सकता है, तो उसे किसी भी प्रकार के कारावास से एक महीने तक की अवधि के लिए, या पाँच हजार रुपये तक के जुर्माने…
पूरा पढ़ेंधारा 334 - प्रकोपन पर स्वेच्छया उपहति करना
प्रकोपन पर स्वेच्छया उपहति करना जो कोई गम्भीर और अचानक प्रकोपन पर स्वेच्छया उपहति कारित करेगा, यदि न तो उसका आशय उस व्यक्ति से भिन्न, जिसने प्रकोपन दिया था, किसी व्यक्ति को उपहति कारित करने का हो और न वह अपने द्वारा ऐसी उपहति कारित किया जाना सम्भाव्य जानता हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक…
पूरा पढ़ेंउकसावे पर जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई जानबूझकर गंभीर और अचानक उकसावे पर चोट पहुँचाता है, यदि उसका इरादा न तो किसी अन्य व्यक्ति को चोट पहुँचाने का है और न ही उसे यह पता है कि वह उकसाने वाले व्यक्ति के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को चोट पहुँचा सकता है, तो उसे किसी भी प्रकार के कारावास से एक महीने तक की अवधि के लिए, या पाँच हजार रुपये तक के जुर्माने…
पूरा पढ़ेंधारा 335 - प्रकोपन पर स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
प्रकोपन पर स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना जो कोई गम्भीर और अचानक प्रकोपन पर स्वेच्छया घोर उपहति कारित करेगा, यदि न तो उसका आशय उस व्यक्ति से भिन्न, जिसने प्रकोपन दिया था, किसी व्यक्ति को घोर उपहति कारित करने का हो और न वह अपने द्वारा ऐसी उपहति कारित किया जाना सम्भाव्य जानता हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास…
पूरा पढ़ेंऐसा कृत्य जिससे दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा हो।
जो कोई भी ऐसा कार्य इतनी जल्दबाजी या लापरवाही से करता है जिससे मानव जीवन या दूसरों की व्यक्तिगत सुरक्षा खतरे में पड़ जाए, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन महीने तक की अवधि के लिए या ढाई हजार रुपये तक के जुर्माने से या दोनों से दंडित किया जाएगा, लेकिन— (क) जहां चोट पहुंचाई जाती है, वहां छह महीने तक की अवधि के लिए…
पूरा पढ़ेंधारा 336 - कार्य जिससे दूसरों का जीवन या वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न हो
कार्य जिससे दूसरों का जीवन या वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न हो जो कोई इतने उतावलेपन या उपेक्षा से कोई कार्य करेगा कि उससे मानव जीवन या दूसरों का वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न होता हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो ढ़ाई सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित…
पूरा पढ़ेंऐसा कृत्य जिससे दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा हो।
जो कोई भी ऐसा कार्य इतनी जल्दबाजी या लापरवाही से करता है जिससे मानव जीवन या दूसरों की व्यक्तिगत सुरक्षा खतरे में पड़ जाए, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन महीने तक की अवधि के लिए या ढाई हजार रुपये तक के जुर्माने से या दोनों से दंडित किया जाएगा, लेकिन— (क) जहां चोट पहुंचाई जाती है, वहां छह महीने तक की अवधि के लिए…
पूरा पढ़ेंधारा 337 - ऐसे कार्य द्वारा उपहति कारित करना, जिससे दूसरों का जीवन या वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न हो जाए
ऐसे कार्य द्वारा उपहति कारित करना, जिससे दूसरों का जीवन या वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न हो जाए जो कोई ऐसे उतावलेपन या उपेक्षा से कोई कार्य करने द्वारा, जिससे मानव जीवन या दूसरों का वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न हो जाए, किसी व्यक्ति को उपहति कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो…
पूरा पढ़ेंऐसा कृत्य जिससे दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा हो।
जो कोई भी ऐसा कार्य इतनी जल्दबाजी या लापरवाही से करता है जिससे मानव जीवन या दूसरों की व्यक्तिगत सुरक्षा खतरे में पड़ जाए, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन महीने तक की अवधि के लिए या ढाई हजार रुपये तक के जुर्माने से या दोनों से दंडित किया जाएगा, लेकिन— (क) जहां चोट पहुंचाई जाती है, वहां छह महीने तक की अवधि के लिए…
पूरा पढ़ेंधारा 338 - ऐसे कार्य द्वारा घोर उपहति कारित करना जिससे दूसरों का जीवन या वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न हो जाए
ऐसे कार्य द्वारा घोर उपहति कारित करना जिससे दूसरों का जीवन या वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न हो जाए जो कोई ऐसे उतावलेपन या उपेक्षा से कोई कार्य करने द्वारा, जिससे मानव जीवन या दूसरों का वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न हो जाए, किसी व्यक्ति को घोर उपहति कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की…
पूरा पढ़ेंगलत तरीके से रोकना।
(1) जो कोई स्वेच्छा से किसी व्यक्ति को इस प्रकार रोकता है कि वह व्यक्ति किसी भी दिशा में आगे बढ़ने से रोका जा सके, जिस दिशा में आगे बढ़ने का उसे अधिकार है, उसे उस व्यक्ति को गलत तरीके से रोकना कहा जाता है। अपवाद.—भूमि या जल पर किसी निजी मार्ग को अवरुद्ध करना, जिसे अवरुद्ध करने का किसी व्यक्ति को सद्भावनापूर्वक वैध…
पूरा पढ़ेंगलत तरीके से रोकना।
जो कोई भी स्वेच्छा से किसी व्यक्ति को इस प्रकार रोकता है जिससे वह व्यक्ति किसी भी दिशा में आगे बढ़ने से रोका जा सके, जिस दिशा में आगे बढ़ने का उसे अधिकार है, उसे उस व्यक्ति को गलत तरीके से रोकना कहा जाता है। अपवाद. —भूमि या जल पर किसी निजी मार्ग को अवरुद्ध करना, जिसे अवरुद्ध करने का किसी व्यक्ति को सद्भावनापूर्वक वैध…
पूरा पढ़ेंगलत तरीके से रोकना।
(1) जो कोई स्वेच्छा से किसी व्यक्ति को इस प्रकार रोकता है कि वह व्यक्ति किसी भी दिशा में आगे बढ़ने से रोका जा सके, जिस दिशा में आगे बढ़ने का उसे अधिकार है, उसे उस व्यक्ति को गलत तरीके से रोकना कहा जाता है। अपवाद.—भूमि या जल पर किसी निजी मार्ग को अवरुद्ध करना, जिसे अवरुद्ध करने का किसी व्यक्ति को सद्भावनापूर्वक वैध…
पूरा पढ़ेंगलत तरीके से रोकना।
जो कोई भी स्वेच्छा से किसी व्यक्ति को इस प्रकार रोकता है जिससे वह व्यक्ति किसी भी दिशा में आगे बढ़ने से रोका जा सके, जिस दिशा में आगे बढ़ने का उसे अधिकार है, उसे उस व्यक्ति को गलत तरीके से रोकना कहा जाता है। अपवाद. —भूमि या जल पर किसी निजी मार्ग को अवरुद्ध करना, जिसे अवरुद्ध करने का किसी व्यक्ति को सद्भावनापूर्वक वैध…
पूरा पढ़ेंघर में जबरन घुसना और घर तोड़ना।
(1) जो कोई भी घर में घुसपैठ करता है और ऐसी घुसपैठ को किसी ऐसे व्यक्ति से छुपाने के लिए सावधानी बरतता है जिसे घुसपैठिए को इमारत, तम्बू या बर्तन से बाहर निकालने या बेदखल करने का अधिकार है, उसे छिपकर घर में घुसपैठ करना कहा जाता है। (2) किसी व्यक्ति को गृह-भंग का दोषी तब कहा जाता है जब वह गृह में या उसके किसी भाग में…
पूरा पढ़ेंधारा 443 - प्रच्छन्न गॄह-अतिचार
प्रच्छन्न गॄह-अतिचार जो कोई यह पूर्वावधानी बरतने के पश्चात् गॄह-अतिचार करता है कि ऐसे गॄह-अतिचार को किसी ऐसे व्यक्ति से छिपाया जाए जिसे उस निर्माण, तम्बू या जलयान में से, जो अतिचार का विषय है, अतिचारी को अपवर्जित करने या बाहर कर देने का अधिकार है, वह “प्रच्छन्न गॄह-अतिचार” करता है, यह कहा जाता है ।
पूरा पढ़ेंघर में जबरन घुसना और घर तोड़ना।
(1) जो कोई भी घर में घुसपैठ करता है और ऐसी घुसपैठ को किसी ऐसे व्यक्ति से छुपाने के लिए सावधानी बरतता है जिसे घुसपैठिए को इमारत, तम्बू या बर्तन से बाहर निकालने या बेदखल करने का अधिकार है, उसे छिपकर घर में घुसपैठ करना कहा जाता है। (2) किसी व्यक्ति को गृह-भंग का दोषी तब कहा जाता है जब वह गृह में या उसके किसी भाग में…
पूरा पढ़ेंधारा 443 - प्रच्छन्न गॄह-अतिचार
प्रच्छन्न गॄह-अतिचार जो कोई यह पूर्वावधानी बरतने के पश्चात् गॄह-अतिचार करता है कि ऐसे गॄह-अतिचार को किसी ऐसे व्यक्ति से छिपाया जाए जिसे उस निर्माण, तम्बू या जलयान में से, जो अतिचार का विषय है, अतिचारी को अपवर्जित करने या बाहर कर देने का अधिकार है, वह “प्रच्छन्न गॄह-अतिचार” करता है, यह कहा जाता है ।
पूरा पढ़ेंघर में जबरन घुसना और घर तोड़ना।
(1) जो कोई भी घर में घुसपैठ करता है और ऐसी घुसपैठ को किसी ऐसे व्यक्ति से छुपाने के लिए सावधानी बरतता है जिसे घुसपैठिए को इमारत, तम्बू या बर्तन से बाहर निकालने या बेदखल करने का अधिकार है, उसे छिपकर घर में घुसपैठ करना कहा जाता है। (2) किसी व्यक्ति को गृह-भंग का दोषी तब कहा जाता है जब वह गृह में या उसके किसी भाग में…
पूरा पढ़ेंधारा 445 - गॄह-भेदन
गॄह-भेदन जो व्यक्ति गॄह-अतिचार करता है, वह “गॄह-भेदन” करता है, यह कहा जाता है, यदि वह उस गॄह में या उसके किसी भाग में एत्स्मिनपश्चात् वर्णित छह तरीकों में से किसी तरीके से प्रवेश करता है अथवा यदि वह उस गॄह में या उसके किसी भाग में अपराध करने के प्रयोजन से होते हुए, या वहां अपराध कर चुकने पर, उस गॄह से या उसके किसी भाग…
पूरा पढ़ेंघर में अनाधिकृत प्रवेश या घर तोड़ने पर सजा।
(1) जो कोई भी छिपकर घर में घुसपैठ करता है या घर तोड़ता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा। (2) जो कोई सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले छिपकर घर में घुसपैठ करता है या घर तोड़ता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन वर्ष तक की अवधि के…
पूरा पढ़ेंधारा 453 - प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन के लिए दंड
प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन के लिए दंड जो कोई प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
पूरा पढ़ेंघर में अनाधिकृत प्रवेश या घर तोड़ने पर सजा।
(1) जो कोई भी छिपकर घर में घुसपैठ करता है या घर तोड़ता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा। (2) जो कोई सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले छिपकर घर में घुसपैठ करता है या घर तोड़ता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन वर्ष तक की अवधि के…
पूरा पढ़ेंधारा 453 - प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन के लिए दंड
प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन के लिए दंड जो कोई प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
पूरा पढ़ेंघर में अनाधिकृत प्रवेश या घर तोड़ने पर सजा।
(1) जो कोई भी छिपकर घर में घुसपैठ करता है या घर तोड़ता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा। (2) जो कोई सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले छिपकर घर में घुसपैठ करता है या घर तोड़ता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन वर्ष तक की अवधि के…
पूरा पढ़ेंधारा 456 - रात्रौ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या रात्रौ गॄह-भेदन के लिए दंड
रात्रौ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या रात्रौ गॄह-भेदन के लिए दंड जो कोई रात्रौ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या रात्रौ गॄह-भेदन करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
पूरा पढ़ेंघर में अनाधिकृत प्रवेश या घर तोड़ने पर सजा।
(1) जो कोई भी छिपकर घर में घुसपैठ करता है या घर तोड़ता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा। (2) जो कोई सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले छिपकर घर में घुसपैठ करता है या घर तोड़ता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन वर्ष तक की अवधि के…
पूरा पढ़ेंधारा 454 - कारावास से दंडनीय अपराध करने के लिए प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन
कारावास से दंडनीय अपराध करने के लिए प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन जो कोई कारावास से दंडनीय अपराध करने के लिए प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा, तथा यदि वह अपराध, जिसका किया जाना आशयित…
पूरा पढ़ेंघर में अनाधिकृत प्रवेश या घर तोड़ने पर सजा।
(1) जो कोई भी छिपकर घर में घुसपैठ करता है या घर तोड़ता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा। (2) जो कोई सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले छिपकर घर में घुसपैठ करता है या घर तोड़ता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन वर्ष तक की अवधि के…
पूरा पढ़ेंधारा 457 - कारावास से दंडनीय अपराध करने के लिए रात्रौ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या रात्रौ गॄह-भेदन
कारावास से दंडनीय अपराध करने के लिए रात्रौ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या रात्रौ गॄह-भेदन जो कोई कारावास से दंडनीय कोई अपराध करने के लिए रात्रौ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या रात्रौ गॄह-भेदन करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा, तथा यदि…
पूरा पढ़ेंघर में अनाधिकृत प्रवेश या घर तोड़ने पर सजा।
(1) जो कोई भी छिपकर घर में घुसपैठ करता है या घर तोड़ता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा। (2) जो कोई सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले छिपकर घर में घुसपैठ करता है या घर तोड़ता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन वर्ष तक की अवधि के…
पूरा पढ़ेंधारा 455 - उपहति, हमले या सदोष अवरोध की तैयारी के पश्चात् प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन
उपहति, हमले या सदोष अवरोध की तैयारी के पश्चात् प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन जो कोई किसी व्यक्ति को उपहति कारित करने की या किसी व्यक्ति पर हमला करने की या किसी व्यक्ति का सदोष अवरोध करने की अथवा किसी व्यक्ति को उपहति के, या हमले के, या सदोष अवरोध के भय में डालने की तैयारी करके, प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन…
पूरा पढ़ेंघर में अनाधिकृत प्रवेश या घर तोड़ने पर सजा।
(1) जो कोई भी छिपकर घर में घुसपैठ करता है या घर तोड़ता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा। (2) जो कोई सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले छिपकर घर में घुसपैठ करता है या घर तोड़ता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन वर्ष तक की अवधि के…
पूरा पढ़ेंधारा 458 - उपहति, हमला या सदोष अवरोध की तैयारी के पश्चात् रात्रौ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार
उपहति, हमला या सदोष अवरोध की तैयारी के पश्चात् रात्रौ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार जो कोई किसी व्यक्ति को उपहति कारित करने की या किसी व्यक्ति पर हमला करने की या किसी व्यक्ति का सदोष अवरोघ करने की अथवा किसी व्यक्ति को उपहति के, या हमले के, या सदोष अवरोध के भय में डालने की तैयारी करके, रात्रो प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या रात्रो…
पूरा पढ़ेंघर में अनाधिकृत प्रवेश या घर तोड़ने पर सजा।
(1) जो कोई भी छिपकर घर में घुसपैठ करता है या घर तोड़ता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा। (2) जो कोई सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले छिपकर घर में घुसपैठ करता है या घर तोड़ता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन वर्ष तक की अवधि के…
पूरा पढ़ेंधारा 459 - प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन करते समय घोर उपहति कारित हो
प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन करते समय घोर उपहति कारित हो जो कोई प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन करते समय किसी व्यक्ति को घोर उपहति कारित करेगा या किसी व्यक्ति की मॄत्यु या घोर उपहति कारित करने का प्रयत्न करेगा, वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित…
पूरा पढ़ेंघर में अनाधिकृत प्रवेश या घर तोड़ने पर सजा।
(1) जो कोई भी छिपकर घर में घुसपैठ करता है या घर तोड़ता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा। (2) जो कोई सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले छिपकर घर में घुसपैठ करता है या घर तोड़ता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन वर्ष तक की अवधि के…
पूरा पढ़ेंधारा 460 - रात्रौ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या रात्रौ गॄह-भेदन में संयुक्ततः सम्पॄक्त समस्त व्यक्ति दंडनीय हैं, जबकि उनमें से एक द्वारा मॄत्यु या घोर उपहति कारित हो
रात्रौ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या रात्रौ गॄह-भेदन में संयुक्ततः सम्पॄक्त समस्त व्यक्ति दंडनीय हैं, जबकि उनमें से एक द्वारा मॄत्यु या घोर उपहति कारित हो यदि रात्रौ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या रात्रौ गॄह-भेदन करते समय ऐसे अपराध का दोषी कोई व्यक्ति स्वेच्छया किसी व्यक्ति की मॄत्यु या घोर उपहति कारित करेगा या मॄत्यु या घोर उपहति…
पूरा पढ़ेंअपराध करने के इरादे से घर में घुसपैठ करना।
जो कोई भी किसी अपराध को अंजाम देने के इरादे से घर में घुसपैठ करता है--- (क) मृत्युदंड के दंडनीय व्यक्ति को आजीवन कारावास या दस वर्ष से अधिक की अवधि के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा और जुर्माना भी लगाया जाएगा; (ख) आजीवन कारावास से दंडनीय व्यक्ति को दस वर्ष से अधिक की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित…
पूरा पढ़ेंधारा 449 - मॄत्यु से दंडनीय अपराध को रोकने के लिए गॄह-अतिचार
मॄत्यु से दंडनीय अपराध को रोकने के लिए गॄह-अतिचार जो कोई मॄत्यु से दंडनीय कोई अपराध करने के लिए गॄह-अतिचार करेगा, वह आजीवन कारावास से, या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से अधिक नहीं होगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
पूरा पढ़ेंअपराध करने के इरादे से घर में घुसपैठ करना।
जो कोई भी किसी अपराध को अंजाम देने के इरादे से घर में घुसपैठ करता है--- (क) मृत्युदंड के दंडनीय व्यक्ति को आजीवन कारावास या दस वर्ष से अधिक की अवधि के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा और जुर्माना भी लगाया जाएगा; (ख) आजीवन कारावास से दंडनीय व्यक्ति को दस वर्ष से अधिक की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित…
पूरा पढ़ेंधारा 449 - मॄत्यु से दंडनीय अपराध को रोकने के लिए गॄह-अतिचार
मॄत्यु से दंडनीय अपराध को रोकने के लिए गॄह-अतिचार जो कोई मॄत्यु से दंडनीय कोई अपराध करने के लिए गॄह-अतिचार करेगा, वह आजीवन कारावास से, या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से अधिक नहीं होगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
पूरा पढ़ेंअपराध करने के इरादे से घर में घुसपैठ करना।
जो कोई भी किसी अपराध को अंजाम देने के इरादे से घर में घुसपैठ करता है--- (क) मृत्युदंड के दंडनीय व्यक्ति को आजीवन कारावास या दस वर्ष से अधिक की अवधि के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा और जुर्माना भी लगाया जाएगा; (ख) आजीवन कारावास से दंडनीय व्यक्ति को दस वर्ष से अधिक की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित…
पूरा पढ़ेंधारा 450 - अपजीवन कारावास से दंडनीय अपराध को करने के लिए गॄह-अतिचार
अपजीवन कारावास से दंडनीय अपराध को करने के लिए गॄह-अतिचार जो कोई आजीवन कारावास से दंडनीय कोई अपराध करने के लिए गॄह-अतिचार करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से अधिक नहीं होगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
पूरा पढ़ेंअपराध करने के इरादे से घर में घुसपैठ करना।
जो कोई भी किसी अपराध को अंजाम देने के इरादे से घर में घुसपैठ करता है--- (क) मृत्युदंड के दंडनीय व्यक्ति को आजीवन कारावास या दस वर्ष से अधिक की अवधि के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा और जुर्माना भी लगाया जाएगा; (ख) आजीवन कारावास से दंडनीय व्यक्ति को दस वर्ष से अधिक की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित…
पूरा पढ़ेंधारा 451 - कारावास से दंडनीय अपराध को करने के लिए गॄह-अतिचार
कारावास से दंडनीय अपराध को करने के लिए गॄह-अतिचार जो कोई कारावास से दंडनीय कोई अपराध करने के लिए गॄह-अतिचार करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा, तथा यदि वह अपराध, जिसका किया जाना आशयित हो, चोरी हो, तो कारावास की अवधि सात…
पूरा पढ़ेंचोट पहुंचाने, हमला करने या गलत तरीके से बंधक बनाने की तैयारी के बाद घर में जबरन घुसना।
जो कोई भी किसी व्यक्ति को चोट पहुँचाने, उस पर हमला करने, उसे गलत तरीके से रोकने, या उसे चोट, हमले या गलत तरीके से रोके जाने का भय पैदा करने की तैयारी करके घर में घुसपैठ करता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से सात वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
पूरा पढ़ेंधारा 452 - उपहति, हमला या सदोष अवरोध की तैयारी के पश्चात् गॄह-अतिचार
उपहति, हमला या सदोष अवरोध की तैयारी के पश्चात् गॄह-अतिचार जो कोई किसी व्यक्ति को उपहति कारित करने की, या किसी व्यक्ति पर हमला करने की, या किसी व्यक्ति का सदोष अवरोध करने की अथवा किसी व्यक्ति को उपहति के, या हमले के, या सदोष अवरोध के भय में डालने की तैयारी करके गॄह-अतिचार करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास…
पूरा पढ़ेंबेईमानी से संपत्ति से भरे पात्र को तोड़कर खोलना।
(1) जो कोई बेईमानी से या उपद्रव करने के इरादे से किसी बंद पात्र को तोड़ता है या खोलता है जिसमें संपत्ति है या जिसके बारे में उसे विश्वास है कि उसमें संपत्ति है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा। (2) जो कोई भी, किसी बंद पात्र को सौंपे जाने पर,…
पूरा पढ़ेंधारा 461 - ऐसे पात्र को, जिसमें संपत्ति है, बेईमानी से तोड़कर खोलना
ऐसे पात्र को, जिसमें संपत्ति है, बेईमानी से तोड़कर खोलना जो कोई किसी ऐसे बंद पात्र को, जिसमें संपत्ति हो या जिसमें संपत्ति होने का उसे विश्वास हो, बेईमानी से या रिष्टि करने के आशय से तोड़कर खोलेगा या उपबंधित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों…
पूरा पढ़ेंबेईमानी से संपत्ति से भरे पात्र को तोड़कर खोलना।
(1) जो कोई बेईमानी से या उपद्रव करने के इरादे से किसी बंद पात्र को तोड़ता है या खोलता है जिसमें संपत्ति है या जिसके बारे में उसे विश्वास है कि उसमें संपत्ति है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा। (2) जो कोई भी, किसी बंद पात्र को सौंपे जाने पर,…
पूरा पढ़ेंधारा 461 - ऐसे पात्र को, जिसमें संपत्ति है, बेईमानी से तोड़कर खोलना
ऐसे पात्र को, जिसमें संपत्ति है, बेईमानी से तोड़कर खोलना जो कोई किसी ऐसे बंद पात्र को, जिसमें संपत्ति हो या जिसमें संपत्ति होने का उसे विश्वास हो, बेईमानी से या रिष्टि करने के आशय से तोड़कर खोलेगा या उपबंधित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों…
पूरा पढ़ेंबेईमानी से संपत्ति से भरे पात्र को तोड़कर खोलना।
(1) जो कोई बेईमानी से या उपद्रव करने के इरादे से किसी बंद पात्र को तोड़ता है या खोलता है जिसमें संपत्ति है या जिसके बारे में उसे विश्वास है कि उसमें संपत्ति है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा। (2) जो कोई भी, किसी बंद पात्र को सौंपे जाने पर,…
पूरा पढ़ेंधारा 462 - उसी अपराध के लिए दंड, जब कि वह ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया है जिसे अभिरक्षा न्यस्त की गई है
उसी अपराध के लिए दंड, जब कि वह ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया है जिसे अभिरक्षा न्यस्त की गई है जो कोई ऐसा बंद पात्र, जिसमें संपत्ति हो, या जिसमें संपत्ति होने का उसे विश्वास हो, अपने पास न्यस्त किए जाने पर उसको खोलने का प्राधिकार न रखते हुए, बेईमानी से या रिष्टि करने के आशय से, उस पात्र को तोड़कर खोलेगा या उपबंधित करेगा,…
पूरा पढ़ेंजाली दस्तावेज बनाना।
किसी व्यक्ति को झूठा दस्तावेज या झूठा इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाने वाला कहा जाता है--- (ए) जो बेईमानी से या धोखाधड़ी से--- (i) किसी दस्तावेज़ या दस्तावेज़ के किसी भाग को बनाता है, उस पर हस्ताक्षर करता है, मुहर लगाता है या उसे निष्पादित करता है; (ii) कोई इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड या किसी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का कोई भाग बनाता…
पूरा पढ़ेंजाली दस्तावेज बनाना।
1. किसी व्यक्ति को झूठा दस्तावेज़ या झूठा इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाने वाला कहा जाता है— प्रथम. —जो बेईमानी से या धोखाधड़ी से— (क) किसी दस्तावेज़ या दस्तावेज़ के किसी भाग को बनाता है, उस पर हस्ताक्षर करता है, मुहर लगाता है या उसे निष्पादित करता है; (ख) कोई इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख का कोई भाग बनाता या…
पूरा पढ़ेंजालसाजी।
(1) जो कोई भी जनता या किसी व्यक्ति को हानि या चोट पहुँचाने के इरादे से, या किसी दावे या हक का समर्थन करने के लिए, या किसी व्यक्ति को संपत्ति से वंचित करने के लिए, या किसी स्पष्ट या निहित अनुबंध में प्रवेश करने के लिए, या धोखाधड़ी करने के इरादे से, या धोखाधड़ी करवाए जाने की संभावना से कोई झूठा दस्तावेज़ या झूठा…
पूरा पढ़ेंधारा 463 - कूटरचना
कूटरचना जो कोई किसी मिथ्या दस्तावेज या मिथ्या इलैक्ट्रानिक अभिलेख अथवा दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख के किसी भाग कोट इस आशय से रचता है कि लोक को या किसी व्यक्ति को नुकसान या क्षति कारित की जाए, या किसी दावे या हक का समर्थन किया जाए, या यह कारित किया जाए कि कोई व्यक्ति संपत्ति अलग करे या कोई अभिव्यक्त या विवक्षित…
पूरा पढ़ेंजालसाजी।
(1) जो कोई भी जनता या किसी व्यक्ति को हानि या चोट पहुँचाने के इरादे से, या किसी दावे या हक का समर्थन करने के लिए, या किसी व्यक्ति को संपत्ति से वंचित करने के लिए, या किसी स्पष्ट या निहित अनुबंध में प्रवेश करने के लिए, या धोखाधड़ी करने के इरादे से, या धोखाधड़ी करवाए जाने की संभावना से कोई झूठा दस्तावेज़ या झूठा…
पूरा पढ़ेंधारा 463 - कूटरचना
कूटरचना जो कोई किसी मिथ्या दस्तावेज या मिथ्या इलैक्ट्रानिक अभिलेख अथवा दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख के किसी भाग कोट इस आशय से रचता है कि लोक को या किसी व्यक्ति को नुकसान या क्षति कारित की जाए, या किसी दावे या हक का समर्थन किया जाए, या यह कारित किया जाए कि कोई व्यक्ति संपत्ति अलग करे या कोई अभिव्यक्त या विवक्षित…
पूरा पढ़ेंजालसाजी।
(1) जो कोई भी जनता या किसी व्यक्ति को हानि या चोट पहुँचाने के इरादे से, या किसी दावे या हक का समर्थन करने के लिए, या किसी व्यक्ति को संपत्ति से वंचित करने के लिए, या किसी स्पष्ट या निहित अनुबंध में प्रवेश करने के लिए, या धोखाधड़ी करने के इरादे से, या धोखाधड़ी करवाए जाने की संभावना से कोई झूठा दस्तावेज़ या झूठा…
पूरा पढ़ेंधारा 465 - कूटरचना के लिए दण्ड
कूटरचना के लिए दण्ड जो कोई कूटरचना करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
पूरा पढ़ेंजालसाजी।
(1) जो कोई भी जनता या किसी व्यक्ति को हानि या चोट पहुँचाने के इरादे से, या किसी दावे या हक का समर्थन करने के लिए, या किसी व्यक्ति को संपत्ति से वंचित करने के लिए, या किसी स्पष्ट या निहित अनुबंध में प्रवेश करने के लिए, या धोखाधड़ी करने के इरादे से, या धोखाधड़ी करवाए जाने की संभावना से कोई झूठा दस्तावेज़ या झूठा…
पूरा पढ़ेंधारा 468 - छल के प्रयोजन से कूटरचना
छल के प्रयोजन से कूटरचना जो कोई कूटरचना इस आशय से करेगा कि वह दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख जिसकी कूटरचना की जाती है, छल के प्रयोजन से उपयोग में लाई जाएगी, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
पूरा पढ़ेंजालसाजी।
(1) जो कोई भी जनता या किसी व्यक्ति को हानि या चोट पहुँचाने के इरादे से, या किसी दावे या हक का समर्थन करने के लिए, या किसी व्यक्ति को संपत्ति से वंचित करने के लिए, या किसी स्पष्ट या निहित अनुबंध में प्रवेश करने के लिए, या धोखाधड़ी करने के इरादे से, या धोखाधड़ी करवाए जाने की संभावना से कोई झूठा दस्तावेज़ या झूठा…
पूरा पढ़ेंधारा 469 - ख्याति को अपहानि पहुंचाने के आशय से कूटरचन्न
ख्याति को अपहानि पहुंचाने के आशय से कूटरचन्न जो कोई कूटरचना इस आशय से करेगा कि वह दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख जिसकी कूटरचना की जाती है, किसी पक्षकार की ख्याति की अपहानि करेगी, या यह सम्भाव्य जानते हुए करेगा कि इस प्रयोजन से उसका उपयोग किया जाए, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो…
पूरा पढ़ेंन्यायालय के अभिलेखों या सार्वजनिक रजिस्टर आदि की जालसाजी।
जो कोई भी किसी न्यायालय की कार्यवाही या अभिलेख, या सरकार द्वारा जारी पहचान पत्र (मतदाता पहचान पत्र या आधार कार्ड सहित), या जन्म, विवाह या मृत्यु का रजिस्टर, या किसी लोक सेवक द्वारा रखा गया रजिस्टर, या किसी लोक सेवक द्वारा अपनी आधिकारिक क्षमता में जारी किया गया प्रमाण पत्र या दस्तावेज, या किसी मुकदमे को दायर करने या…
पूरा पढ़ेंधारा 466 - न्यायालय के अभिलेख की या लोक रजिस्टर आदि की कूटरचना
न्यायालय के अभिलेख की या लोक रजिस्टर आदि की कूटरचना जो कोई ऐसे दस्तावेज की या ऐसे इलैक्ट्रानिक अभिलेख कीट जिसका कि किसी न्यायालय का या न्यायालय में अभिलेख या कार्यवाही होना, या जन्म, वपतिस्मा, विवाह या अन्त्येष्टि का रजिस्टर, या लोक सेवक द्वारा लोक सेवक के नाते रखा गया रजिस्टर होना तात्पर्यित हो, अथवा किसी प्रमाणपत्र…
पूरा पढ़ेंमूल्यवान प्रतिभूतियों, वसीयत आदि की जालसाजी।
जो कोई भी ऐसा दस्तावेज बनाता है जो मूल्यवान प्रतिभूति, वसीयत, पुत्र गोद लेने का अधिकार पत्र, या किसी व्यक्ति को मूल्यवान प्रतिभूति बनाने या हस्तांतरित करने, या उस पर मूलधन, ब्याज या लाभांश प्राप्त करने, या कोई धन, चल संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति प्राप्त करने या देने का अधिकार देता हो, या कोई ऐसा दस्तावेज जो धन के…
पूरा पढ़ेंधारा 467 - मूल्यवान प्रतिभूति, विल, इत्यादि की कूटरचना
मूल्यवान प्रतिभूति, विल, इत्यादि की कूटरचना जो काई किसी ऐसी दस्तावेज की, जिसका कोई मूल्यवान प्रतिभूति या विल या पुत्र के दत्तकग्रहण का प्राधिकार होना तात्पर्यित हो, अथवा जिसका किसी मूल्यवान प्रतिभूति की रचना या अन्तरण का, या उस पर के मूलधन, ब्याज या लाभांश को प्राप्त करने का, या किसी धन, जंगम सम्पत्ति या मूल्यवान…
पूरा पढ़ेंधारा 337 या धारा 338 में वर्णित दस्तावेज को अपने कब्जे में रखना, यह जानते हुए कि वह जाली है और उसे असली के रूप में इस्तेमाल करने का इरादा रखना।
जो कोई भी किसी जाली दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख को अपने कब्जे में रखता है और यह जानते हुए कि वह जाली है तथा उसका उपयोग कपटपूर्ण या बेईमानी से असली के रूप में करने का इरादा रखता है, तो यदि वह दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख इस संहिता की धारा 337 में उल्लिखित प्रकार का है, तो उसे किसी भी प्रकार के कारावास से सात…
पूरा पढ़ेंधारा 474 - धारा 466 या 467 में वर्णित दस्तावेज को, उसे कूटरचित जानते हुए और उसे असली के रूप में उपयोग में लाने का आशय रखते हुए, कब्जे में रखना
धारा 466 या 467 में वर्णित दस्तावेज को, उसे कूटरचित जानते हुए और उसे असली के रूप में उपयोग में लाने का आशय रखते हुए, कब्जे में रखना जो कोई, किसी दस्तावेज या किसी इलैक्ट्रानिक अभिलेख को उसे कूटरचित जानते हुए और यह आशय रखते हुए कि वह कपटपूर्वक या बेईमानी से असली रूप में उपयोग में लाया जाएगा, अपने कब्जे में रखेगा, यदि वह…
पूरा पढ़ें- BNS §2IPC §33बदलाव हुआ
परिभाषाएँ।
धारा 33 - “कार्य”
- BNS §2(1)IPC §33
परिभाषाएँ।
धारा 33 - “कार्य”
- BNS §2(25)IPC §33
परिभाषाएँ।
धारा 33 - “कार्य”
- BNS §33IPC §95
मामूली नुकसान पहुंचाने वाला कृत्य।
- BNS §120IPC §330बदलाव हुआ
जबरन बयान दिलवाने या संपत्ति की बहाली के लिए जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
धारा 330 - संस्वीकृति उद्दापित करने के लिए या विवश करके सम्पत्ति का प्रत्यावर्तन कराने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना
- BNS §120(1)IPC §330
जबरन बयान दिलवाने या संपत्ति की बहाली के लिए जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
धारा 330 - संस्वीकृति उद्दापित करने के लिए या विवश करके सम्पत्ति का प्रत्यावर्तन कराने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना
- BNS §120(2)IPC §331
जबरन बयान दिलवाने या संपत्ति की बहाली के लिए जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
धारा 331 - संस्वीकॄति उद्दापित करने के लिए या विवश करके सम्पत्ति का प्रत्यावर्तन कराने के लिए स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
- BNS §121IPC §332बदलाव हुआ
लोक सेवक को उसके कर्तव्य से विचलित करने के उद्देश्य से जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
धारा 332 - लोक सेवक अपने कर्तव्य से भयोपरत करने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना
- BNS §121(1)IPC §332
लोक सेवक को उसके कर्तव्य से विचलित करने के उद्देश्य से जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
धारा 332 - लोक सेवक अपने कर्तव्य से भयोपरत करने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना
- BNS §121(2)IPC §333
लोक सेवक को उसके कर्तव्य से विचलित करने के उद्देश्य से जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
धारा 333 - लोक सेवक को अपने कर्तव्यों से भयोपरत स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
- BNS §122IPC §334बदलाव हुआ
उकसावे पर जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
धारा 334 - प्रकोपन पर स्वेच्छया उपहति करना
- BNS §122(1)IPC §334
उकसावे पर जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
धारा 334 - प्रकोपन पर स्वेच्छया उपहति करना
- BNS §122(2)IPC §335
उकसावे पर जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
धारा 335 - प्रकोपन पर स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
- BNS §125IPC §336बदलाव हुआ
ऐसा कृत्य जिससे दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा हो।
धारा 336 - कार्य जिससे दूसरों का जीवन या वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न हो
- BNS §125(a)IPC §337
ऐसा कृत्य जिससे दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा हो।
धारा 337 - ऐसे कार्य द्वारा उपहति कारित करना, जिससे दूसरों का जीवन या वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न हो जाए
- BNS §125(b)IPC §338
ऐसा कृत्य जिससे दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा हो।
धारा 338 - ऐसे कार्य द्वारा घोर उपहति कारित करना जिससे दूसरों का जीवन या वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न हो जाए
- BNS §126IPC §339बदलाव हुआ
गलत तरीके से रोकना।
- BNS §126(1)IPC §339
गलत तरीके से रोकना।
- BNS §330IPC §443बदलाव हुआ
घर में जबरन घुसना और घर तोड़ना।
धारा 443 - प्रच्छन्न गॄह-अतिचार
- BNS §330(1)IPC §443
घर में जबरन घुसना और घर तोड़ना।
धारा 443 - प्रच्छन्न गॄह-अतिचार
- BNS §330(2)IPC §445
घर में जबरन घुसना और घर तोड़ना।
धारा 445 - गॄह-भेदन
- BNS §331IPC §453बदलाव हुआ
घर में अनाधिकृत प्रवेश या घर तोड़ने पर सजा।
धारा 453 - प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन के लिए दंड
- BNS §331 (1)IPC §453
घर में अनाधिकृत प्रवेश या घर तोड़ने पर सजा।
धारा 453 - प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन के लिए दंड
- BNS §331(2)IPC §456
घर में अनाधिकृत प्रवेश या घर तोड़ने पर सजा।
धारा 456 - रात्रौ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या रात्रौ गॄह-भेदन के लिए दंड
- BNS §331 (3)IPC §454
घर में अनाधिकृत प्रवेश या घर तोड़ने पर सजा।
धारा 454 - कारावास से दंडनीय अपराध करने के लिए प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन
- BNS §331 (4)IPC §457
घर में अनाधिकृत प्रवेश या घर तोड़ने पर सजा।
धारा 457 - कारावास से दंडनीय अपराध करने के लिए रात्रौ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या रात्रौ गॄह-भेदन
- BNS §331 (5)IPC §455
घर में अनाधिकृत प्रवेश या घर तोड़ने पर सजा।
धारा 455 - उपहति, हमले या सदोष अवरोध की तैयारी के पश्चात् प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन
- BNS §331 (6)IPC §458
घर में अनाधिकृत प्रवेश या घर तोड़ने पर सजा।
धारा 458 - उपहति, हमला या सदोष अवरोध की तैयारी के पश्चात् रात्रौ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार
- BNS §331 (7)IPC §459
घर में अनाधिकृत प्रवेश या घर तोड़ने पर सजा।
धारा 459 - प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन करते समय घोर उपहति कारित हो
- BNS §331 (8)IPC §460
घर में अनाधिकृत प्रवेश या घर तोड़ने पर सजा।
धारा 460 - रात्रौ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या रात्रौ गॄह-भेदन में संयुक्ततः सम्पॄक्त समस्त व्यक्ति दंडनीय हैं, जबकि उनमें से एक द्वारा मॄत्यु या घोर उपहति कारित हो
- BNS §332IPC §449बदलाव हुआ
अपराध करने के इरादे से घर में घुसपैठ करना।
धारा 449 - मॄत्यु से दंडनीय अपराध को रोकने के लिए गॄह-अतिचार
- BNS §332 (a)IPC §449
अपराध करने के इरादे से घर में घुसपैठ करना।
धारा 449 - मॄत्यु से दंडनीय अपराध को रोकने के लिए गॄह-अतिचार
- BNS §332 (b)IPC §450
अपराध करने के इरादे से घर में घुसपैठ करना।
धारा 450 - अपजीवन कारावास से दंडनीय अपराध को करने के लिए गॄह-अतिचार
- BNS §332 (c)IPC §451
अपराध करने के इरादे से घर में घुसपैठ करना।
धारा 451 - कारावास से दंडनीय अपराध को करने के लिए गॄह-अतिचार
- BNS §333IPC §452
चोट पहुंचाने, हमला करने या गलत तरीके से बंधक बनाने की तैयारी के बाद घर में जबरन घुसना।
धारा 452 - उपहति, हमला या सदोष अवरोध की तैयारी के पश्चात् गॄह-अतिचार
- BNS §334IPC §461बदलाव हुआ
बेईमानी से संपत्ति से भरे पात्र को तोड़कर खोलना।
धारा 461 - ऐसे पात्र को, जिसमें संपत्ति है, बेईमानी से तोड़कर खोलना
- BNS §334(1)IPC §461
बेईमानी से संपत्ति से भरे पात्र को तोड़कर खोलना।
धारा 461 - ऐसे पात्र को, जिसमें संपत्ति है, बेईमानी से तोड़कर खोलना
- BNS §334(2)IPC §462
बेईमानी से संपत्ति से भरे पात्र को तोड़कर खोलना।
धारा 462 - उसी अपराध के लिए दंड, जब कि वह ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया है जिसे अभिरक्षा न्यस्त की गई है
- BNS §335IPC §464
जाली दस्तावेज बनाना।
- BNS §336IPC §463बदलाव हुआ
जालसाजी।
धारा 463 - कूटरचना
- BNS §336 (1)IPC §463
जालसाजी।
धारा 463 - कूटरचना
- BNS §336 (2)IPC §465
जालसाजी।
धारा 465 - कूटरचना के लिए दण्ड
- BNS §336 (3)IPC §468
जालसाजी।
धारा 468 - छल के प्रयोजन से कूटरचना
- BNS §336 (4)IPC §469
जालसाजी।
धारा 469 - ख्याति को अपहानि पहुंचाने के आशय से कूटरचन्न
- BNS §337IPC §466
न्यायालय के अभिलेखों या सार्वजनिक रजिस्टर आदि की जालसाजी।
धारा 466 - न्यायालय के अभिलेख की या लोक रजिस्टर आदि की कूटरचना
- BNS §338IPC §467
मूल्यवान प्रतिभूतियों, वसीयत आदि की जालसाजी।
धारा 467 - मूल्यवान प्रतिभूति, विल, इत्यादि की कूटरचना
- BNS §339IPC §474
धारा 337 या धारा 338 में वर्णित दस्तावेज को अपने कब्जे में रखना, यह जानते हुए कि वह जाली है और उसे असली के रूप में इस्तेमाल करने का इरादा रखना।
धारा 474 - धारा 466 या 467 में वर्णित दस्तावेज को, उसे कूटरचित जानते हुए और उसे असली के रूप में उपयोग में लाने का आशय रखते हुए, कब्जे में रखना
