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30 प्रविष्टियाँ
परिभाषाएँ।
इस संहिता में, जब तक संदर्भ अन्यथा अपेक्षित न हो,--- (1) "कार्य" से तात्पर्य कार्यों की श्रृंखला के साथ-साथ एक एकल कार्य से भी है; (2) "पशु" से तात्पर्य मनुष्य के अलावा किसी भी जीवित प्राणी से है; (3) "बाल" से तात्पर्य अठारह वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति से है; (4) "नकली".---वह व्यक्ति "नकली" कहलाता है जो किसी…
पूरा पढ़ेंव्यक्ति''।
"व्यक्ति" शब्द में कोई भी कंपनी या संघ या व्यक्तियों का समूह शामिल है, चाहे वह निगमित हो या नहीं।
पूरा पढ़ेंएकान्त कारावास।
जब भी कोई व्यक्ति ऐसे अपराध का दोषी पाया जाता है जिसके लिए इस संहिता के अधीन न्यायालय को उसे कठोर कारावास की सजा देने का अधिकार है, तो न्यायालय अपने फैसले में यह आदेश दे सकता है कि अपराधी को उसकी सजा के किसी भाग या भागों के लिए, कुल मिलाकर तीन महीने से अधिक न होने वाली अवधि के लिए, निम्नलिखित पैमाने के अनुसार एकांत…
पूरा पढ़ेंधारा 73 - एकांत परिरोध
एकांत परिरोध जब कभी कोई व्यक्ति ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्ध ठहराया जाता है जिसके लिए न्यायालय को इस संहिता के अधीन उसे कठिन कारावास से दंडादिष्ट करने की शक्ति है, तो न्यायालय अपने दंडादेश द्वारा आदेश दे सकेगा कि अपराधी को उस कारावास के, जिसके लिए वह दंडादिष्ट किया गया है, किसी भाग या भागों के लिए, जो कुल मिलाकर तीन मास…
पूरा पढ़ेंयदि उकसाया गया व्यक्ति उकसाने वाले व्यक्ति से भिन्न इरादे से कार्य करता है, तो उकसाने के लिए दंड दिया जाएगा।
जो कोई भी किसी अपराध को अंजाम देने में सहायता करता है, यदि सहायता प्राप्त व्यक्ति वह कार्य सहायताकर्ता के इरादे या ज्ञान से भिन्न इरादे या ज्ञान के साथ करता है, तो उसे उस अपराध के लिए निर्धारित दंड से दंडित किया जाएगा जो तब किया जाता जब वह कार्य सहायताकर्ता के इरादे या ज्ञान के साथ किया गया होता और किसी अन्य इरादे या…
पूरा पढ़ेंधारा 110 - दुष्प्रेरण का दण्ड, यदि दुष्प्रेरित व्यक्ति दुष्प्रेरक के आशय से भिन्न आशय से कार्य करता है
दुष्प्रेरण का दण्ड, यदि दुष्प्रेरित व्यक्ति दुष्प्रेरक के आशय से भिन्न आशय से कार्य करता है जो कोई किसी अपराध के किए जाने का दुष्प्रेरण करता है, यदि दुष्प्रेरित व्यक्ति ने दुष्प्रेरक के आशय या ज्ञान से भिन्न् आशय या ज्ञान से वह कार्य किया हो, तो वह उसी दण्ड से दण्डित किया जाएगा, जो उस अपराध के लिए उपबन्धित है, जो किया…
पूरा पढ़ेंजब किसी एक कृत्य के लिए उकसाया गया हो और दूसरा कृत्य स्वयं किया गया हो, तो उकसाने वाले की जिम्मेदारी।
जब किसी कृत्य के लिए उकसाया जाता है और उसके बदले कोई दूसरा कृत्य किया जाता है, तो उकसाने वाला उस कृत्य के लिए उसी प्रकार और उसी हद तक उत्तरदायी होता है, मानो उसने प्रत्यक्ष रूप से उस कृत्य के लिए उकसाया हो। बशर्ते कि किया गया कृत्य उकसावे का संभावित परिणाम था, और उकसावे के प्रभाव में, या उकसावे का आधार बनने वाली साजिश…
पूरा पढ़ेंधारा 111 - दुष्प्रेरक का दायित्व जब एक कार्य का दुष्प्रेरण किया गया है और उससे भिन्न कार्य किया गया है
दुष्प्रेरक का दायित्व जब एक कार्य का दुष्प्रेरण किया गया है और उससे भिन्न कार्य किया गया है जब कि किसी एक कार्य का दुष्प्रेरण किया जाता है, और कोई भिन्न कार्य किया जाता है, तब दुष्प्रेरक उस किए गए कार्य के लिए उसी प्रकार से और उसी विस्तार तक दायित्व के अधीन है, मानो उसने सीधे उसी कार्य का दुष्प्रेरण किया हो : परन्तुक…
पूरा पढ़ेंजब कोई व्यक्ति उकसाए गए कृत्य और स्वयं किए गए कृत्य दोनों के लिए संचयी दंड का पात्र हो।
यदि वह कृत्य जिसके लिए उकसाने वाला धारा 51 के तहत उत्तरदायी है, उकसाए गए कृत्य के अतिरिक्त किया जाता है, और एक अलग अपराध का गठन करता है, तो उकसाने वाला प्रत्येक अपराध के लिए दंड का पात्र होगा। चित्रण । A, B को उकसाता है कि वह लोक सेवक द्वारा की गई ज़ब्ती का बलपूर्वक विरोध करे। परिणामस्वरूप, B उस ज़ब्ती का विरोध करता…
पूरा पढ़ेंधारा 112 - दुष्प्रेरक कब दुष्प्रेरित कार्य के लिए और किए गए कार्य के लिए आकलित दण्ड से दण्डनीय है
दुष्प्रेरक कब दुष्प्रेरित कार्य के लिए और किए गए कार्य के लिए आकलित दण्ड से दण्डनीय है यदि वह कार्य, जिसके लिए दुष्प्रेरक अंतिम पूर्ववर्ती धारा के अधीन दायित्व के अधीन है, दुष्प्रेरित कार्य के अतिरिक्त किया जाता है और भिन्न अपराध गठित करता है, तो दुष्प्रेरक उन अपराधों में से हर एक के लिए दण्ड का भागी है । दृष्टांत :…
पूरा पढ़ेंउकसाने वाले व्यक्ति की उस कृत्य के परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाले प्रभाव के लिए देयता, जो उकसाने वाले व्यक्ति के इच्छित प्रभाव से भिन्न हो।
जब कोई व्यक्ति किसी विशेष प्रभाव उत्पन्न करने के इरादे से किसी कृत्य को उकसाता है, और उकसाने के परिणामस्वरूप उकसाने वाला व्यक्ति जिस कृत्य के लिए उत्तरदायी होता है, वह उकसाने वाले व्यक्ति के इच्छित प्रभाव से भिन्न प्रभाव उत्पन्न करता है, तो उकसाने वाला व्यक्ति उत्पन्न प्रभाव के लिए उसी प्रकार और उसी सीमा तक उत्तरदायी…
पूरा पढ़ेंधारा 113 - दुष्प्रेरित कार्य से कारित उस प्रभाव के लिए दुष्प्रेरक का दायित्व जो दुष्प्रेरक द्वारा आशयित से भिन्न हो
दुष्प्रेरित कार्य से कारित उस प्रभाव के लिए दुष्प्रेरक का दायित्व जो दुष्प्रेरक द्वारा आशयित से भिन्न हो जब कि कार्य का दुष्प्रेरण दुष्प्रेरक द्वारा किसी विशिष्ट प्रभाव को कारित करने के आशय से किया जाता है और दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप जिस कार्य के लिए दुष्प्रेरक दायित्व के अधीन है, वह कार्य दुष्प्रेरक के द्वारा आशयित…
पूरा पढ़ेंअपराध घटित होने के समय सहायक उपस्थित था।
जब भी कोई व्यक्ति, जो अनुपस्थित होने पर भी उकसाने वाले के रूप में दंडित होने के योग्य होता, उस समय उपस्थित होता है जब वह कृत्य या अपराध किया जाता है जिसके लिए उकसाने के परिणामस्वरूप वह दंडनीय होता, तो उसे वह कृत्य या अपराध करने वाला माना जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 114 - अपराध किए जाते समय दुष्प्रेरक की उपस्थिति
अपराध किए जाते समय दुष्प्रेरक की उपस्थिति जब कभी कोई व्यक्ति जो अनुपस्थित होने पर दुष्प्रेरक के नाते दण्डनीय होता, उस समय उपस्थित हो जब वह कार्य या अपराध किया जाए जिसके लिए वह दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप दण्डनीय होता, तब यह समझा जाएगा कि उसने ऐसा कार्य या अपराध किया है ।
पूरा पढ़ेंऐसे अपराध में सहायता करना जिसके लिए मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।
जो कोई भी मृत्युदंड या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध के लिए उकसाता है, यदि उकसाने के परिणामस्वरूप वह अपराध नहीं होता है, और इस संहिता में ऐसे उकसाने के दंड के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, तो उसे किसी भी प्रकार के कारावास से सात वर्ष तक की सजा दी जाएगी और जुर्माना भी लगाया जाएगा; और यदि उकसाने के परिणामस्वरूप…
पूरा पढ़ेंधारा 115 - मॄत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय अपराध का दुष्प्रेरण--यदि अपराध नहीं किया जाता
मॄत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय अपराध का दुष्प्रेरण--यदि अपराध नहीं किया जाता जो कोई मॄत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय अपराध किए जाने का दुष्प्रेरण करेगा, यदि वह अपराध उस दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप न किया जाए, और ऐसे दुष्प्रेरण के दण्ड के लिए कोई अभिव्यक्त उपबन्ध इस संहिता में नहीं किया गया है, तो वह दोनों में से…
पूरा पढ़ेंअपराध में सहायता करना कारावास से दंडनीय है।
जो कोई भी कारावास से दंडनीय अपराध के लिए उकसाता है, यदि उकसाने के परिणामस्वरूप वह अपराध नहीं होता है, और इस संहिता में ऐसे उकसाने के दंड के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, तो उसे उस अपराध के लिए निर्धारित किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसकी अवधि उस अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम अवधि के एक-चौथाई तक हो…
पूरा पढ़ेंधारा 116 - कारावास से दण्डनीय अपराध का दुष्प्रेरण--यदि अपराध न किया जाए
कारावास से दण्डनीय अपराध का दुष्प्रेरण--यदि अपराध न किया जाए जो कोई कारावास से दण्डनीय अपराध का दुष्प्रेरण करेगा, यदि वह अपराध उस दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप न किया जाए, और ऐसे दुष्प्रेरण के दण्ड के लिए इस संहिता द्वारा कोई अभिव्यक्त उपबन्ध नहीं किया गया है, तो वह उस अपराध के लिए उपबन्धित भांति के कारावास से, जिसकी…
पूरा पढ़ेंकिसी सार्वजनिक संगठन द्वारा या दस से अधिक व्यक्तियों द्वारा अपराध करने में सहायता करना।
जो कोई भी आम जनता द्वारा या दस से अधिक व्यक्तियों के किसी समूह या वर्ग द्वारा अपराध करने में सहायता करता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से सात वर्ष तक की अवधि के लिए और जुर्माने से दंडित किया जाएगा। चित्रण । यदि कोई व्यक्ति किसी सार्वजनिक स्थान पर ऐसा पोस्टर लगाता है जिसमें दस से अधिक सदस्यों वाले एक संप्रदाय को…
पूरा पढ़ेंधारा 117 - लोक साधारण द्वारा या दस से अधिक व्यक्तियों द्वारा अपराध किए जाने का दुष्प्रेरण
लोक साधारण द्वारा या दस से अधिक व्यक्तियों द्वारा अपराध किए जाने का दुष्प्रेरण जो कोई लोक साधारण द्वारा, या दस से अधिक व्यक्तियों की किसी भी संख्या या वर्ग द्वारा किसी अपराध के किए जाने का दुष्प्रेरण करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से या दोनों से, दण्डित…
पूरा पढ़ेंकिसी अपराध को अंजाम देने की योजना को छिपाना, जिसके लिए मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।
जो कोई भी किसी ऐसे अपराध को अंजाम देने में सहायता करने के इरादे से या यह जानते हुए कि इससे मृत्युदंड या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध को अंजाम देने में सहायता मिलने की संभावना है, स्वेच्छा से किसी भी कार्य या चूक से, या एन्क्रिप्शन या किसी अन्य सूचना छिपाने वाले उपकरण के उपयोग से, ऐसे अपराध को अंजाम देने की योजना के…
पूरा पढ़ेंधारा 118 - मॄत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध करने की परिकल्पना को छिपाना
मॄत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध करने की परिकल्पना को छिपाना जो कोई मॄत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध का किया जाना सुकर बनाने के आशय से या संभाव्यतः तद्द्वारा सुकर बनाएगा यह जानते हुए, ऐसे अपराध के किए जाने की परिकल्पना के अस्तित्व को किसी, कार्य या अवैध लोप द्वारा स्वेच्छया छिपाएगा या ऐसी परिकल्पना के…
पूरा पढ़ेंलोक सेवक द्वारा ऐसे अपराध को अंजाम देने की योजना को छुपाना जिसे रोकना उसका कर्तव्य है।
जो कोई लोक सेवक होते हुए, किसी ऐसे अपराध को सुगम बनाने के इरादे से या यह जानते हुए कि ऐसा करने से उस अपराध को सुगम बनाने की संभावना है जिसे रोकना लोक सेवक के रूप में उसका कर्तव्य है, स्वेच्छा से किसी कार्य या चूक द्वारा या एन्क्रिप्शन या किसी अन्य सूचना छिपाने वाले उपकरण के उपयोग द्वारा ऐसे अपराध को करने की योजना के…
पूरा पढ़ेंधारा 119 - किसी ऐसे अपराध के किए जाने की परिकल्पना का लोक सेवक द्वारा छिपाया जाना, जिसका निवारण करना उसका कर्तव्य है
किसी ऐसे अपराध के किए जाने की परिकल्पना का लोक सेवक द्वारा छिपाया जाना, जिसका निवारण करना उसका कर्तव्य है जो कोई लोक सेवक होते हुए, ऐसे अपराध का, जिसका निवारण करना ऐसे लोक सेवक के नाते उसका कर्तव्य है, किया जाना सुकर बनाने के आशय से, या संभाव्यतः तद्द्वारा सुकर बनाएगा यह जानते हुए, ऐसे अपराध के किए जाने की परिकल्पना…
पूरा पढ़ेंगैर इरादतन हत्या का प्रयास।
जो कोई भी इस इरादे या जानकारी के साथ और ऐसी परिस्थितियों में कोई कार्य करता है कि यदि वह उस कार्य से किसी की मृत्यु का कारण बनता है, तो वह हत्या न करने के योग्य गैर इरादतन हत्या का दोषी होगा, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा; और यदि ऐसे कार्य से…
पूरा पढ़ेंगैर इरादतन हत्या का प्रयास।
जो कोई भी इस इरादे या जानकारी के साथ और ऐसी परिस्थितियों में कोई कार्य करता है कि यदि वह उस कार्य से किसी की मृत्यु का कारण बनता है, तो वह हत्या न करने के योग्य गैर इरादतन हत्या का दोषी होगा, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा; और यदि ऐसे कार्य से…
पूरा पढ़ेंसंगठित अपराध।
(1) किसी भी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह द्वारा, संगठित अपराध सिंडिकेट के सदस्य के रूप में या ऐसे सिंडिकेट की ओर से, हिंसा, हिंसा की धमकी, डरा-धमकाकर, दबाव डालकर या किसी अन्य गैरकानूनी तरीके से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भौतिक लाभ, जिसमें वित्तीय लाभ भी शामिल है, प्राप्त करने के लिए की गई कोई भी निरंतर गैरकानूनी…
पूरा पढ़ेंनई धारा
New Section
छोटे-मोटे संगठित अपराध।
(1) जो कोई भी किसी समूह या गिरोह का सदस्य होकर, अकेले या संयुक्त रूप से, चोरी, छीना-झपटी, धोखाधड़ी, टिकटों की अनधिकृत बिक्री, अनधिकृत सट्टेबाजी या जुआ, सार्वजनिक परीक्षा के प्रश्न पत्रों की बिक्री या किसी अन्य समान आपराधिक कृत्य को अंजाम देता है, उसे लघु संगठित अपराध करने वाला कहा जाता है। स्पष्टीकरण.—इस उपधारा के…
पूरा पढ़ेंनई धारा
New Section
आतंकवादी कृत्य।
(1) जो कोई भी भारत की एकता, अखंडता, संप्रभुता, सुरक्षा या आर्थिक सुरक्षा को खतरे में डालने या खतरे में डालने की संभावना से कोई कार्य करता है, या भारत में या किसी विदेशी देश में लोगों या लोगों के किसी वर्ग में आतंक फैलाने या आतंक फैलाने की संभावना से कोई कार्य करता है, --- (क) बम, डायनामाइट या अन्य विस्फोटक पदार्थ या…
पूरा पढ़ेंनई धारा
New Section
आहत।
जो कोई भी किसी व्यक्ति को शारीरिक पीड़ा, बीमारी या दुर्बलता पहुंचाता है, उसे चोट पहुंचाना कहा जाता है।
पूरा पढ़ेंधारा 319 - उपहति
उपहति जो कोई व्यक्ति को शारीरिक पीड़ा रोग या अंग-शैथिल्य कारित करता है, वह उपहति करता है, यह कहा जाता है ।
पूरा पढ़ेंजानबूझकर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई भी किसी व्यक्ति को चोट पहुँचाने के इरादे से, या इस ज्ञान के साथ कि वह किसी व्यक्ति को चोट पहुँचा सकता है, कोई कार्य करता है और इस प्रकार किसी व्यक्ति को चोट पहुँचाता है, तो उसे “स्वेच्छा से चोट पहुँचाना” कहा जाता है। (2) धारा 122 की उपधारा (1) में दिए गए प्रावधान के अलावा, जो कोई स्वेच्छा से चोट पहुँचाता…
पूरा पढ़ेंधारा 321 - स्वेच्छया उपहति कारित करना
स्वेच्छया उपहति कारित करना जो कोई किसी कार्य को इस आशय से करता है कि तद्द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करे या इस ज्ञान के साथ करता है कि यह संभाव्य है कि वह तद्द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करे और तद्द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करता है, वह “स्वेच्छया उपहति करता है”, यह कहा जाता है ।
पूरा पढ़ेंजानबूझकर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई भी किसी व्यक्ति को चोट पहुँचाने के इरादे से, या इस ज्ञान के साथ कि वह किसी व्यक्ति को चोट पहुँचा सकता है, कोई कार्य करता है और इस प्रकार किसी व्यक्ति को चोट पहुँचाता है, तो उसे “स्वेच्छा से चोट पहुँचाना” कहा जाता है। (2) धारा 122 की उपधारा (1) में दिए गए प्रावधान के अलावा, जो कोई स्वेच्छा से चोट पहुँचाता…
पूरा पढ़ेंधारा 321 - स्वेच्छया उपहति कारित करना
स्वेच्छया उपहति कारित करना जो कोई किसी कार्य को इस आशय से करता है कि तद्द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करे या इस ज्ञान के साथ करता है कि यह संभाव्य है कि वह तद्द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करे और तद्द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करता है, वह “स्वेच्छया उपहति करता है”, यह कहा जाता है ।
पूरा पढ़ेंजानबूझकर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई भी किसी व्यक्ति को चोट पहुँचाने के इरादे से, या इस ज्ञान के साथ कि वह किसी व्यक्ति को चोट पहुँचा सकता है, कोई कार्य करता है और इस प्रकार किसी व्यक्ति को चोट पहुँचाता है, तो उसे “स्वेच्छा से चोट पहुँचाना” कहा जाता है। (2) धारा 122 की उपधारा (1) में दिए गए प्रावधान के अलावा, जो कोई स्वेच्छा से चोट पहुँचाता…
पूरा पढ़ेंजानबूझकर चोट पहुंचाने पर मिलने वाली सजा।
धारा 334 में दिए गए प्रावधान के अलावा, जो कोई भी स्वेच्छा से चोट पहुँचाता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से एक वर्ष तक की अवधि के लिए, या एक हजार रुपये तक के जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंगंभीर चोट।
केवल निम्नलिखित प्रकार की चोटों को ही “गंभीर चोट” की श्रेणी में रखा गया है, अर्थात्:— (क) नपुंसकीकरण; (ख) किसी भी आंख की दृष्टि का स्थायी रूप से वंचित हो जाना; (ग) किसी भी कान की श्रवण शक्ति का स्थायी रूप से समाप्त हो जाना; (घ) किसी सदस्य या संयुक्त सदस्य को वंचित करना; (ई) किसी सदस्य या संयुक्त अंग की शक्तियों का…
पूरा पढ़ेंधारा 320 - घोर उपहति
घोर उपहति उपहति की केवल नीचे लिखी किस्में “घोर” कहलाती है - पहला - पुंस्त्वहरण । दूसरा - दोनों में से किसी भी नेत्र की दृष्टि का स्थायी विच्छेद । तीसरा - दोनों में से किसी भी कान की श्रवणशक्ति का स्थायी विच्छेद । चौथा - किसी भी अंग या जोड़ का विच्छेद । पांचवां - किसी भी अंग या जोड़ का की शक्तियों का नाश या स्थायी…
पूरा पढ़ेंजानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई स्वेच्छा से चोट पहुँचाता है, यदि वह चोट जो वह पहुँचाने का इरादा रखता है या जानता है कि वह पहुँचाने की संभावना है, गंभीर चोट है, और यदि वह जो चोट पहुँचाता है वह गंभीर चोट है, तो उसे “स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुँचाना” कहा जाता है। स्पष्टीकरण—किसी व्यक्ति को स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुँचाने वाला तब तक नहीं कहा…
पूरा पढ़ेंधारा 322 - स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना जो कोई व्यक्ति स्वेच्छया उपहति कारित करता है, यदि वह उपहति, जिसे कारित करने का उसका आशय है या जिसे वह जानता है कि उसके द्वारा उसका किया जाना सम्भाव्य है घोर उपहति है, और यदि वह उपहति, जो वह कारित करता है, घोर उपहति को, तो वह “स्वेच्छया घोर उपहति करता है”, यह कहा जाता है । स्पष्टीकरण -…
पूरा पढ़ेंजानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई स्वेच्छा से चोट पहुँचाता है, यदि वह चोट जो वह पहुँचाने का इरादा रखता है या जानता है कि वह पहुँचाने की संभावना है, गंभीर चोट है, और यदि वह जो चोट पहुँचाता है वह गंभीर चोट है, तो उसे “स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुँचाना” कहा जाता है। स्पष्टीकरण—किसी व्यक्ति को स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुँचाने वाला तब तक नहीं कहा…
पूरा पढ़ेंधारा 322 - स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना जो कोई व्यक्ति स्वेच्छया उपहति कारित करता है, यदि वह उपहति, जिसे कारित करने का उसका आशय है या जिसे वह जानता है कि उसके द्वारा उसका किया जाना सम्भाव्य है घोर उपहति है, और यदि वह उपहति, जो वह कारित करता है, घोर उपहति को, तो वह “स्वेच्छया घोर उपहति करता है”, यह कहा जाता है । स्पष्टीकरण -…
पूरा पढ़ेंजानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई स्वेच्छा से चोट पहुँचाता है, यदि वह चोट जो वह पहुँचाने का इरादा रखता है या जानता है कि वह पहुँचाने की संभावना है, गंभीर चोट है, और यदि वह जो चोट पहुँचाता है वह गंभीर चोट है, तो उसे “स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुँचाना” कहा जाता है। स्पष्टीकरण—किसी व्यक्ति को स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुँचाने वाला तब तक नहीं कहा…
पूरा पढ़ेंधारा 325 - स्वेच्छया घोर उपहति कारित करने के लिए दण्ड
स्वेच्छया घोर उपहति कारित करने के लिए दण्ड उस दशा के सिवाय, जिसके लिए धारा 335 में उपबंध है, जो कोई स्वेच्छया घोर उपहति कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
पूरा पढ़ेंखतरनाक हथियारों या साधनों द्वारा जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) धारा 122 की उपधारा (1) में दिए गए प्रावधान के अलावा, जो कोई भी स्वेच्छा से किसी तीरंदाजी, छुरा घोंपने या काटने के औजार से, या किसी ऐसे औजार से, जिसका प्रयोग अपराध के हथियार के रूप में मृत्यु का कारण बन सकता है, या आग या किसी गर्म पदार्थ से, या किसी जहर या किसी संक्षारक पदार्थ से, या किसी विस्फोटक पदार्थ से, या…
पूरा पढ़ेंधारा 324 - खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया उपहति कारित करना
खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया उपहति कारित करना उस दशा के सिवाय, जिसके लिए धारा 334 में उपबंध है, जो कोई असन, वेधन या काटने के किसी उपकरण द्वारा या किसी ऐसे उपकरण द्वारा जो यदि आक्रामक आयुध के तौर पर उपयोग में लाया जाए, तो उससे मॄत्यु कारित होना सम्भाव्य है, या अग्नि या किसी तप्त पदार्थ द्वारा, या किसी विष…
पूरा पढ़ेंखतरनाक हथियारों या साधनों द्वारा जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) धारा 122 की उपधारा (1) में दिए गए प्रावधान के अलावा, जो कोई भी स्वेच्छा से किसी तीरंदाजी, छुरा घोंपने या काटने के औजार से, या किसी ऐसे औजार से, जिसका प्रयोग अपराध के हथियार के रूप में मृत्यु का कारण बन सकता है, या आग या किसी गर्म पदार्थ से, या किसी जहर या किसी संक्षारक पदार्थ से, या किसी विस्फोटक पदार्थ से, या…
पूरा पढ़ेंधारा 324 - खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया उपहति कारित करना
खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया उपहति कारित करना उस दशा के सिवाय, जिसके लिए धारा 334 में उपबंध है, जो कोई असन, वेधन या काटने के किसी उपकरण द्वारा या किसी ऐसे उपकरण द्वारा जो यदि आक्रामक आयुध के तौर पर उपयोग में लाया जाए, तो उससे मॄत्यु कारित होना सम्भाव्य है, या अग्नि या किसी तप्त पदार्थ द्वारा, या किसी विष…
पूरा पढ़ेंखतरनाक हथियारों या साधनों द्वारा जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) धारा 122 की उपधारा (1) में दिए गए प्रावधान के अलावा, जो कोई भी स्वेच्छा से किसी तीरंदाजी, छुरा घोंपने या काटने के औजार से, या किसी ऐसे औजार से, जिसका प्रयोग अपराध के हथियार के रूप में मृत्यु का कारण बन सकता है, या आग या किसी गर्म पदार्थ से, या किसी जहर या किसी संक्षारक पदार्थ से, या किसी विस्फोटक पदार्थ से, या…
पूरा पढ़ेंधारा 326 - खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना उस दशा के सिवाय, जिसके लिए धारा 335 में उपबंध है, जो कोई असन, वेधन या काटने के किसी उपकरण द्वारा या किसी ऐसे उपकरण द्वारा, जो यदि आक्रामक आयुध के तौर पर उपयोग में लाया जाए, तो उससे मॄत्यु कारित होना सम्भाव्य है, या अग्नि या किसी तप्त पदार्थ द्वारा, या किसी…
पूरा पढ़ेंसंपत्ति हड़पने या किसी अवैध कृत्य के लिए विवश करने के उद्देश्य से जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई भी पीड़ित से, या पीड़ित के हित में किसी व्यक्ति से, कोई संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति जबरन वसूलने के उद्देश्य से, या पीड़ित या पीड़ित के हित में किसी व्यक्ति को कोई ऐसा कार्य करने के लिए विवश करने के उद्देश्य से, जो अवैध हो या जिससे अपराध करने में सुविधा हो, स्वेच्छा से चोट पहुँचाता है, उसे किसी भी प्रकार…
पूरा पढ़ेंधारा 327 - संपत्ति उद्दापित करने के लिए या अवैध कार्य कराने को मजबूर करने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना
संपत्ति उद्दापित करने के लिए या अवैध कार्य कराने को मजबूर करने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना जो कोई इस प्रयोजन से स्वेच्छया उपहति कारित करेगा कि उपहत व्यक्ति से, या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति से, कोई सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति उद्दापित की जाए या उपहत व्यक्ति को या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति को कोई ऐसी बात, जो…
पूरा पढ़ेंसंपत्ति हड़पने या किसी अवैध कृत्य के लिए विवश करने के उद्देश्य से जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई भी पीड़ित से, या पीड़ित के हित में किसी व्यक्ति से, कोई संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति जबरन वसूलने के उद्देश्य से, या पीड़ित या पीड़ित के हित में किसी व्यक्ति को कोई ऐसा कार्य करने के लिए विवश करने के उद्देश्य से, जो अवैध हो या जिससे अपराध करने में सुविधा हो, स्वेच्छा से चोट पहुँचाता है, उसे किसी भी प्रकार…
पूरा पढ़ेंधारा 327 - संपत्ति उद्दापित करने के लिए या अवैध कार्य कराने को मजबूर करने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना
संपत्ति उद्दापित करने के लिए या अवैध कार्य कराने को मजबूर करने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना जो कोई इस प्रयोजन से स्वेच्छया उपहति कारित करेगा कि उपहत व्यक्ति से, या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति से, कोई सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति उद्दापित की जाए या उपहत व्यक्ति को या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति को कोई ऐसी बात, जो…
पूरा पढ़ेंसंपत्ति हड़पने या किसी अवैध कृत्य के लिए विवश करने के उद्देश्य से जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
(1) जो कोई भी पीड़ित से, या पीड़ित के हित में किसी व्यक्ति से, कोई संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति जबरन वसूलने के उद्देश्य से, या पीड़ित या पीड़ित के हित में किसी व्यक्ति को कोई ऐसा कार्य करने के लिए विवश करने के उद्देश्य से, जो अवैध हो या जिससे अपराध करने में सुविधा हो, स्वेच्छा से चोट पहुँचाता है, उसे किसी भी प्रकार…
पूरा पढ़ेंधारा 329 - सम्पत्ति उद्दापित करने के लिए या अवैध कार्य कराने को मजबूर करने के लिए स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
सम्पत्ति उद्दापित करने के लिए या अवैध कार्य कराने को मजबूर करने के लिए स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना जो कोई इस प्रयोजन से स्वेच्छया घोर उपहति कारित करेगा कि उपहत व्यक्ति से या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति से कोई सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति उद्दापित की जाए या उपहत व्यक्ति को या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति को कोई ऐसी…
पूरा पढ़ें- BNS §2(26)IPC §11
परिभाषाएँ।
व्यक्ति''।
- BNS §11IPC §73
एकान्त कारावास।
धारा 73 - एकांत परिरोध
- BNS §50IPC §110
यदि उकसाया गया व्यक्ति उकसाने वाले व्यक्ति से भिन्न इरादे से कार्य करता है, तो उकसाने के लिए दंड दिया जाएगा।
धारा 110 - दुष्प्रेरण का दण्ड, यदि दुष्प्रेरित व्यक्ति दुष्प्रेरक के आशय से भिन्न आशय से कार्य करता है
- BNS §51IPC §111
जब किसी एक कृत्य के लिए उकसाया गया हो और दूसरा कृत्य स्वयं किया गया हो, तो उकसाने वाले की जिम्मेदारी।
धारा 111 - दुष्प्रेरक का दायित्व जब एक कार्य का दुष्प्रेरण किया गया है और उससे भिन्न कार्य किया गया है
- BNS §52IPC §112
जब कोई व्यक्ति उकसाए गए कृत्य और स्वयं किए गए कृत्य दोनों के लिए संचयी दंड का पात्र हो।
धारा 112 - दुष्प्रेरक कब दुष्प्रेरित कार्य के लिए और किए गए कार्य के लिए आकलित दण्ड से दण्डनीय है
- BNS §53IPC §113
उकसाने वाले व्यक्ति की उस कृत्य के परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाले प्रभाव के लिए देयता, जो उकसाने वाले व्यक्ति के इच्छित प्रभाव से भिन्न हो।
धारा 113 - दुष्प्रेरित कार्य से कारित उस प्रभाव के लिए दुष्प्रेरक का दायित्व जो दुष्प्रेरक द्वारा आशयित से भिन्न हो
- BNS §54IPC §114
अपराध घटित होने के समय सहायक उपस्थित था।
धारा 114 - अपराध किए जाते समय दुष्प्रेरक की उपस्थिति
- BNS §55IPC §115
ऐसे अपराध में सहायता करना जिसके लिए मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।
धारा 115 - मॄत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय अपराध का दुष्प्रेरण--यदि अपराध नहीं किया जाता
- BNS §56IPC §116
अपराध में सहायता करना कारावास से दंडनीय है।
धारा 116 - कारावास से दण्डनीय अपराध का दुष्प्रेरण--यदि अपराध न किया जाए
- BNS §57IPC §117बदलाव हुआ
किसी सार्वजनिक संगठन द्वारा या दस से अधिक व्यक्तियों द्वारा अपराध करने में सहायता करना।
धारा 117 - लोक साधारण द्वारा या दस से अधिक व्यक्तियों द्वारा अपराध किए जाने का दुष्प्रेरण
- BNS §58IPC §118
किसी अपराध को अंजाम देने की योजना को छिपाना, जिसके लिए मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।
धारा 118 - मॄत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध करने की परिकल्पना को छिपाना
- BNS §59IPC §119
लोक सेवक द्वारा ऐसे अपराध को अंजाम देने की योजना को छुपाना जिसे रोकना उसका कर्तव्य है।
धारा 119 - किसी ऐसे अपराध के किए जाने की परिकल्पना का लोक सेवक द्वारा छिपाया जाना, जिसका निवारण करना उसका कर्तव्य है
- BNS §110IPC §308
गैर इरादतन हत्या का प्रयास।
- BNS §111IPC §New Section
संगठित अपराध।
नई धारा
BNS §111IPC §New Section - BNS §112IPC §New Section
छोटे-मोटे संगठित अपराध।
नई धारा
BNS §112IPC §New Section - BNS §113IPC §New Section
आतंकवादी कृत्य।
नई धारा
BNS §113IPC §New Section - BNS §114IPC §319
आहत।
धारा 319 - उपहति
- BNS §115IPC §321बदलाव हुआ
जानबूझकर चोट पहुंचाना।
धारा 321 - स्वेच्छया उपहति कारित करना
- BNS §115(1)IPC §321
जानबूझकर चोट पहुंचाना।
धारा 321 - स्वेच्छया उपहति कारित करना
- BNS §115(2)IPC §323
जानबूझकर चोट पहुंचाना।
जानबूझकर चोट पहुंचाने पर मिलने वाली सजा।
- BNS §116IPC §320बदलाव हुआ
गंभीर चोट।
धारा 320 - घोर उपहति
- BNS §117IPC §322बदलाव हुआ
जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना।
धारा 322 - स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
- BNS §117(1)IPC §322
जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना।
धारा 322 - स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
- BNS §117(2)IPC §325
जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना।
धारा 325 - स्वेच्छया घोर उपहति कारित करने के लिए दण्ड
- BNS §118IPC §324बदलाव हुआ
खतरनाक हथियारों या साधनों द्वारा जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
धारा 324 - खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया उपहति कारित करना
- BNS §118(1)IPC §324
खतरनाक हथियारों या साधनों द्वारा जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
धारा 324 - खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया उपहति कारित करना
- BNS §118(2)IPC §326
खतरनाक हथियारों या साधनों द्वारा जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
धारा 326 - खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
- BNS §119IPC §327बदलाव हुआ
संपत्ति हड़पने या किसी अवैध कृत्य के लिए विवश करने के उद्देश्य से जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
धारा 327 - संपत्ति उद्दापित करने के लिए या अवैध कार्य कराने को मजबूर करने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना
- BNS §119(1)IPC §327
संपत्ति हड़पने या किसी अवैध कृत्य के लिए विवश करने के उद्देश्य से जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
धारा 327 - संपत्ति उद्दापित करने के लिए या अवैध कार्य कराने को मजबूर करने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना
- BNS §119(2)IPC §329
संपत्ति हड़पने या किसी अवैध कृत्य के लिए विवश करने के उद्देश्य से जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना।
धारा 329 - सम्पत्ति उद्दापित करने के लिए या अवैध कार्य कराने को मजबूर करने के लिए स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
