NCM Act 9अध्याय III · Functions of the Commission
धारा 9 · आयोग के कार्य।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) आयोग निम्नलिखित में से सभी या कोई भी कार्य करेगा, अर्थात्:--
(क) संघ और राज्यों के अधीन अल्पसंख्यकों के विकास की प्रगति का मूल्यांकन करना;
(ख) संविधान में और संसद तथा राज्य विधानमंडलों द्वारा अधिनियमित कानूनों में दिए गए सुरक्षा उपायों के कामकाज की निगरानी करना;
(ग) केंद्र सरकार या राज्य सरकारों द्वारा अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए सुरक्षा उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु सिफारिशें करना;
(घ) अल्पसंख्यकों के अधिकारों और सुरक्षा उपायों के हनन से संबंधित विशिष्ट शिकायतों की जांच करना और ऐसे मामलों को उचित अधिकारियों के समक्ष उठाना;
(ई) अल्पसंख्यकों के विरुद्ध किसी भी प्रकार के भेदभाव से उत्पन्न समस्याओं के संबंध में अध्ययन कराना और उन्हें दूर करने के उपायों की सिफारिश करना;
(f) अल्पसंख्यकों के सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक विकास से संबंधित मुद्दों पर अध्ययन, अनुसंधान और विश्लेषण करना;
(जी) किसी अल्पसंख्यक के संबंध में केंद्र सरकार या राज्य सरकारों द्वारा किए जाने वाले उपयुक्त उपायों का सुझाव देना;
(h) अल्पसंख्यकों से संबंधित किसी भी मामले पर और विशेष रूप से उनके द्वारा सामना की जाने वाली कठिनाइयों पर केंद्र सरकार को आवधिक या विशेष रिपोर्ट प्रस्तुत करना; और
(i) कोई अन्य मामला जिसे केंद्र सरकार द्वारा इसे संदर्भित किया जा सकता है।
(2) केंद्र सरकार उपधारा (1) के खंड (सी) में निर्दिष्ट अनुशंसाओं को संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष एक ज्ञापन के साथ प्रस्तुत करवाएगी, जिसमें संघ से संबंधित अनुशंसाओं पर की गई या प्रस्तावित कार्रवाई और ऐसी किसी अनुशंसा को स्वीकार न करने के कारणों (यदि कोई हो) का स्पष्टीकरण दिया जाएगा।
(3) जहां उपधारा (1) के खंड (सी) में निर्दिष्ट किसी सिफारिश या उसके किसी भाग से कोई राज्य सरकार संबंधित हो, तो आयोग ऐसी सिफारिश या उसके भाग की एक प्रति उस राज्य सरकार को भेजेगा, जो उसे राज्य के विधानमंडल के समक्ष एक ज्ञापन के साथ प्रस्तुत करवाएगी, जिसमें राज्य से संबंधित सिफारिशों पर की गई या प्रस्तावित कार्रवाई और ऐसी किसी सिफारिश या उसके भाग को अस्वीकार करने के कारणों (यदि कोई हो) का स्पष्टीकरण दिया जाएगा।
(4) उपधारा (1) के उपखंड (क) , (ख) और (घ) में उल्लिखित किसी भी कार्य को करते समय आयोग को किसी मुकदमे की सुनवाई करने वाले दीवानी न्यायालय की सभी शक्तियां प्राप्त होंगी, और विशेष रूप से निम्नलिखित मामलों के संबंध में, अर्थात्:--
(क) भारत के किसी भी भाग से किसी व्यक्ति को बुलाना और उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करना तथा शपथ पर उससे पूछताछ करना;
(ख) किसी दस्तावेज की खोज और प्रस्तुति की आवश्यकता;
(ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना;
(घ) किसी न्यायालय या कार्यालय से कोई सार्वजनिक अभिलेख या उसकी प्रति मंगवाना;
(ई) गवाहों और दस्तावेजों की जांच के लिए आयोग जारी करना; और
(f) कोई अन्य मामला जो निर्धारित किया जा सके।
(क) संघ और राज्यों के अधीन अल्पसंख्यकों के विकास की प्रगति का मूल्यांकन करना;
(ख) संविधान में और संसद तथा राज्य विधानमंडलों द्वारा अधिनियमित कानूनों में दिए गए सुरक्षा उपायों के कामकाज की निगरानी करना;
(ग) केंद्र सरकार या राज्य सरकारों द्वारा अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए सुरक्षा उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु सिफारिशें करना;
(घ) अल्पसंख्यकों के अधिकारों और सुरक्षा उपायों के हनन से संबंधित विशिष्ट शिकायतों की जांच करना और ऐसे मामलों को उचित अधिकारियों के समक्ष उठाना;
(ई) अल्पसंख्यकों के विरुद्ध किसी भी प्रकार के भेदभाव से उत्पन्न समस्याओं के संबंध में अध्ययन कराना और उन्हें दूर करने के उपायों की सिफारिश करना;
(f) अल्पसंख्यकों के सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक विकास से संबंधित मुद्दों पर अध्ययन, अनुसंधान और विश्लेषण करना;
(जी) किसी अल्पसंख्यक के संबंध में केंद्र सरकार या राज्य सरकारों द्वारा किए जाने वाले उपयुक्त उपायों का सुझाव देना;
(h) अल्पसंख्यकों से संबंधित किसी भी मामले पर और विशेष रूप से उनके द्वारा सामना की जाने वाली कठिनाइयों पर केंद्र सरकार को आवधिक या विशेष रिपोर्ट प्रस्तुत करना; और
(i) कोई अन्य मामला जिसे केंद्र सरकार द्वारा इसे संदर्भित किया जा सकता है।
(2) केंद्र सरकार उपधारा (1) के खंड (सी) में निर्दिष्ट अनुशंसाओं को संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष एक ज्ञापन के साथ प्रस्तुत करवाएगी, जिसमें संघ से संबंधित अनुशंसाओं पर की गई या प्रस्तावित कार्रवाई और ऐसी किसी अनुशंसा को स्वीकार न करने के कारणों (यदि कोई हो) का स्पष्टीकरण दिया जाएगा।
(3) जहां उपधारा (1) के खंड (सी) में निर्दिष्ट किसी सिफारिश या उसके किसी भाग से कोई राज्य सरकार संबंधित हो, तो आयोग ऐसी सिफारिश या उसके भाग की एक प्रति उस राज्य सरकार को भेजेगा, जो उसे राज्य के विधानमंडल के समक्ष एक ज्ञापन के साथ प्रस्तुत करवाएगी, जिसमें राज्य से संबंधित सिफारिशों पर की गई या प्रस्तावित कार्रवाई और ऐसी किसी सिफारिश या उसके भाग को अस्वीकार करने के कारणों (यदि कोई हो) का स्पष्टीकरण दिया जाएगा।
(4) उपधारा (1) के उपखंड (क) , (ख) और (घ) में उल्लिखित किसी भी कार्य को करते समय आयोग को किसी मुकदमे की सुनवाई करने वाले दीवानी न्यायालय की सभी शक्तियां प्राप्त होंगी, और विशेष रूप से निम्नलिखित मामलों के संबंध में, अर्थात्:--
(क) भारत के किसी भी भाग से किसी व्यक्ति को बुलाना और उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करना तथा शपथ पर उससे पूछताछ करना;
(ख) किसी दस्तावेज की खोज और प्रस्तुति की आवश्यकता;
(ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना;
(घ) किसी न्यायालय या कार्यालय से कोई सार्वजनिक अभिलेख या उसकी प्रति मंगवाना;
(ई) गवाहों और दस्तावेजों की जांच के लिए आयोग जारी करना; और
(f) कोई अन्य मामला जो निर्धारित किया जा सके।
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