JKR Act 60अध्याय V · Delimitation of Constituencies
धारा 60 · निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम की धारा 14 की उपधारा (3) के प्रतिकूल प्रभाव के बिना, जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश की विधान सभा में सीटों की संख्या 107 से बढ़ाकर 114 कर दी जाएगी, और निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन चुनाव आयोग द्वारा इसके बाद दिए गए तरीके से किया जाएगा--
(क) संविधान के प्रासंगिक प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए, विधानसभा में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित की जाने वाली सीटों की संख्या;
(ख) वे विधानसभा क्षेत्र जिनमें केंद्र शासित प्रदेश को विभाजित किया जाएगा, ऐसे प्रत्येक क्षेत्र का क्षेत्रफल और उनमें से कौन-कौन सी सीटें अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित होंगी; और
(ग) प्रत्येक केंद्र शासित प्रदेश में संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं और उनके विस्तार के विवरण में आवश्यक या उपयुक्त समायोजन।
(2) उपधारा (1) के खंड (ख) और (ग) में निर्दिष्ट मामलों का निर्धारण करते समय, चुनाव आयोग निम्नलिखित प्रावधानों को ध्यान में रखेगा, अर्थात्:--
(क) सभी निर्वाचन क्षेत्र एकल सदस्य निर्वाचन क्षेत्र होंगे;
(ख) सभी निर्वाचन क्षेत्र, जहाँ तक संभव हो, भौगोलिक रूप से सघन क्षेत्र होंगे, और उनकी सीमा निर्धारित करते समय भौतिक विशेषताओं, प्रशासनिक इकाइयों की मौजूदा सीमाओं, संचार सुविधाओं और जनता की सहूलियतों का ध्यान रखा जाएगा; और
(ग) जिन निर्वाचन क्षेत्रों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटें आरक्षित हैं, वे यथासंभव उन क्षेत्रों में स्थित होंगे जहां उनकी जनसंख्या का कुल जनसंख्या से अनुपात सबसे अधिक हो।
(3) उपधारा (1) के अधीन अपने कार्यों के निष्पादन में सहायता के उद्देश्य से, चुनाव आयोग अपने साथ सह-सदस्यों के रूप में चार व्यक्तियों को नियुक्त करेगा, जिन्हें केंद्र सरकार आदेश द्वारा निर्दिष्ट कर सकती है, जो जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश की विधान सभा के सदस्य हों या जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाले लोकसभा के चार सदस्य हों।
बशर्ते कि किसी भी सहयोगी सदस्य को मतदान करने या चुनाव आयोग के किसी भी निर्णय पर हस्ताक्षर करने का अधिकार नहीं होगा।
(4) यदि मृत्यु या त्यागपत्र के कारण सह सदस्य का पद रिक्त हो जाता है, तो उसे जहाँ तक संभव हो, उपधारा (3) के प्रावधानों के अनुसार भरा जाएगा।
(5) चुनाव आयोग करेगा--
(क) निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के लिए अपने प्रस्तावों को, यदि कोई हो, तो किसी सहयोगी सदस्य के असहमतिपूर्ण प्रस्तावों सहित, आधिकारिक राजपत्र में और आयोग द्वारा उचित समझे जाने वाले अन्य तरीके से प्रकाशित करना, साथ ही प्रस्तावों के संबंध में आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित करने वाली सूचना प्रकाशित करना और उस तिथि को निर्दिष्ट करना जिस पर या जिसके बाद प्रस्तावों पर आयोग द्वारा आगे विचार किया जाएगा;
(ख) निर्दिष्ट तिथि से पहले प्राप्त सभी आपत्तियों और सुझावों पर विचार करना; और
(ग) निर्दिष्ट तिथि से पहले प्राप्त सभी आपत्तियों और सुझावों पर विचार करने के बाद, एक या एक से अधिक आदेशों द्वारा निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन निर्धारित करे और ऐसे आदेश या आदेशों को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित करवाए, और ऐसे प्रकाशन के बाद, आदेश या आदेशों को कानून का पूर्ण बल प्राप्त होगा और किसी भी न्यायालय में इस पर प्रश्न नहीं उठाया जा सकेगा।
(6) ऐसे प्रकाशन के बाद यथाशीघ्र, विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों से संबंधित प्रत्येक आदेश जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश की विधान सभा के समक्ष रखा जाएगा।
(क) संविधान के प्रासंगिक प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए, विधानसभा में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित की जाने वाली सीटों की संख्या;
(ख) वे विधानसभा क्षेत्र जिनमें केंद्र शासित प्रदेश को विभाजित किया जाएगा, ऐसे प्रत्येक क्षेत्र का क्षेत्रफल और उनमें से कौन-कौन सी सीटें अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित होंगी; और
(ग) प्रत्येक केंद्र शासित प्रदेश में संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं और उनके विस्तार के विवरण में आवश्यक या उपयुक्त समायोजन।
(2) उपधारा (1) के खंड (ख) और (ग) में निर्दिष्ट मामलों का निर्धारण करते समय, चुनाव आयोग निम्नलिखित प्रावधानों को ध्यान में रखेगा, अर्थात्:--
(क) सभी निर्वाचन क्षेत्र एकल सदस्य निर्वाचन क्षेत्र होंगे;
(ख) सभी निर्वाचन क्षेत्र, जहाँ तक संभव हो, भौगोलिक रूप से सघन क्षेत्र होंगे, और उनकी सीमा निर्धारित करते समय भौतिक विशेषताओं, प्रशासनिक इकाइयों की मौजूदा सीमाओं, संचार सुविधाओं और जनता की सहूलियतों का ध्यान रखा जाएगा; और
(ग) जिन निर्वाचन क्षेत्रों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटें आरक्षित हैं, वे यथासंभव उन क्षेत्रों में स्थित होंगे जहां उनकी जनसंख्या का कुल जनसंख्या से अनुपात सबसे अधिक हो।
(3) उपधारा (1) के अधीन अपने कार्यों के निष्पादन में सहायता के उद्देश्य से, चुनाव आयोग अपने साथ सह-सदस्यों के रूप में चार व्यक्तियों को नियुक्त करेगा, जिन्हें केंद्र सरकार आदेश द्वारा निर्दिष्ट कर सकती है, जो जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश की विधान सभा के सदस्य हों या जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाले लोकसभा के चार सदस्य हों।
बशर्ते कि किसी भी सहयोगी सदस्य को मतदान करने या चुनाव आयोग के किसी भी निर्णय पर हस्ताक्षर करने का अधिकार नहीं होगा।
(4) यदि मृत्यु या त्यागपत्र के कारण सह सदस्य का पद रिक्त हो जाता है, तो उसे जहाँ तक संभव हो, उपधारा (3) के प्रावधानों के अनुसार भरा जाएगा।
(5) चुनाव आयोग करेगा--
(क) निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के लिए अपने प्रस्तावों को, यदि कोई हो, तो किसी सहयोगी सदस्य के असहमतिपूर्ण प्रस्तावों सहित, आधिकारिक राजपत्र में और आयोग द्वारा उचित समझे जाने वाले अन्य तरीके से प्रकाशित करना, साथ ही प्रस्तावों के संबंध में आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित करने वाली सूचना प्रकाशित करना और उस तिथि को निर्दिष्ट करना जिस पर या जिसके बाद प्रस्तावों पर आयोग द्वारा आगे विचार किया जाएगा;
(ख) निर्दिष्ट तिथि से पहले प्राप्त सभी आपत्तियों और सुझावों पर विचार करना; और
(ग) निर्दिष्ट तिथि से पहले प्राप्त सभी आपत्तियों और सुझावों पर विचार करने के बाद, एक या एक से अधिक आदेशों द्वारा निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन निर्धारित करे और ऐसे आदेश या आदेशों को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित करवाए, और ऐसे प्रकाशन के बाद, आदेश या आदेशों को कानून का पूर्ण बल प्राप्त होगा और किसी भी न्यायालय में इस पर प्रश्न नहीं उठाया जा सकेगा।
(6) ऐसे प्रकाशन के बाद यथाशीघ्र, विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों से संबंधित प्रत्येक आदेश जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश की विधान सभा के समक्ष रखा जाएगा।
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