GST Act 10
धारा 10 · उपकर से प्राप्त धनराशि को कोष में जमा करना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) धारा 8 के अधीन लगाए जाने वाले उपकर की आय और परिषद द्वारा अनुशंसित अन्य राशियों को माल एवं सेवा कर क्षतिपूर्ति निधि नामक एक अव्यवस्थित निधि में जमा किया जाएगा, जो भारत के सार्वजनिक खाते का हिस्सा होगी और उक्त धारा में निर्दिष्ट उद्देश्यों के लिए उपयोग की जाएगी।
(2) धारा 7 के अधीन राज्यों को देय सभी राशियाँ निधि से दी जाएँगी।
(3) संक्रमण काल की समाप्ति पर निधि में शेष बची राशि का पचास प्रतिशत भारत की समेकित निधि में केंद्र के हिस्से के रूप में हस्तांतरित किया जाएगा, और शेष पचास प्रतिशत राज्यों में संक्रमण काल के अंतिम वर्ष में राज्य कर या केंद्र शासित प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर से प्राप्त कुल राजस्व के अनुपात में वितरित किया जाएगा।
1 [(3ए) उप-धारा (3) में किसी बात के होते हुए भी, परिषद द्वारा अनुशंसित राशि का पचास प्रतिशत, जो संक्रमण काल के दौरान किसी भी वित्तीय वर्ष में किसी भी समय निधि में अप्रयुक्त रहता है, केंद्र के हिस्से के रूप में भारत की समेकित निधि में स्थानांतरित कर दिया जाएगा, और शेष पचास प्रतिशत राज्यों के बीच उनके आधार वर्ष के राजस्व के अनुपात में वितरित किया जाएगा, जो धारा 5 के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित किया जाएगा:
बशर्ते कि यदि किसी दो माह की अवधि के लिए धारा 7 के तहत जारी किए जाने वाले मुआवजे की आवश्यकता के मुकाबले निधि में एकत्रित राशि में कमी हो, तो उसका पचास प्रतिशत, परन्तु परिषद द्वारा अनुशंसित केंद्र और राज्यों को हस्तांतरित कुल राशि से अधिक न हो, केंद्र से वसूल किया जाएगा और शेष पचास प्रतिशत राज्यों से उनके आधार वर्ष के राजस्व के अनुपात में वसूल किया जाएगा, जो धारा 5 के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित किया जाएगा।
(4) निधि से संबंधित खातों का लेखापरीक्षा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक या उनके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति द्वारा ऐसे अंतरालों पर की जाएगी जैसा कि उनके द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है और ऐसी लेखापरीक्षा के संबंध में कोई भी व्यय केंद्र सरकार द्वारा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को देय होगा।
(5) भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक या उनके द्वारा इस संबंध में नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्रमाणित निधि के खाते, साथ ही उस पर लेखापरीक्षा रिपोर्ट, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी।
(2) धारा 7 के अधीन राज्यों को देय सभी राशियाँ निधि से दी जाएँगी।
(3) संक्रमण काल की समाप्ति पर निधि में शेष बची राशि का पचास प्रतिशत भारत की समेकित निधि में केंद्र के हिस्से के रूप में हस्तांतरित किया जाएगा, और शेष पचास प्रतिशत राज्यों में संक्रमण काल के अंतिम वर्ष में राज्य कर या केंद्र शासित प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर से प्राप्त कुल राजस्व के अनुपात में वितरित किया जाएगा।
1 [(3ए) उप-धारा (3) में किसी बात के होते हुए भी, परिषद द्वारा अनुशंसित राशि का पचास प्रतिशत, जो संक्रमण काल के दौरान किसी भी वित्तीय वर्ष में किसी भी समय निधि में अप्रयुक्त रहता है, केंद्र के हिस्से के रूप में भारत की समेकित निधि में स्थानांतरित कर दिया जाएगा, और शेष पचास प्रतिशत राज्यों के बीच उनके आधार वर्ष के राजस्व के अनुपात में वितरित किया जाएगा, जो धारा 5 के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित किया जाएगा:
बशर्ते कि यदि किसी दो माह की अवधि के लिए धारा 7 के तहत जारी किए जाने वाले मुआवजे की आवश्यकता के मुकाबले निधि में एकत्रित राशि में कमी हो, तो उसका पचास प्रतिशत, परन्तु परिषद द्वारा अनुशंसित केंद्र और राज्यों को हस्तांतरित कुल राशि से अधिक न हो, केंद्र से वसूल किया जाएगा और शेष पचास प्रतिशत राज्यों से उनके आधार वर्ष के राजस्व के अनुपात में वसूल किया जाएगा, जो धारा 5 के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित किया जाएगा।
(4) निधि से संबंधित खातों का लेखापरीक्षा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक या उनके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति द्वारा ऐसे अंतरालों पर की जाएगी जैसा कि उनके द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है और ऐसी लेखापरीक्षा के संबंध में कोई भी व्यय केंद्र सरकार द्वारा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को देय होगा।
(5) भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक या उनके द्वारा इस संबंध में नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्रमाणित निधि के खाते, साथ ही उस पर लेखापरीक्षा रिपोर्ट, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी।
इस धारा पर आपका निजी नोट
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