DM Act 30अध्याय IV · District Disaster Management Authority
धारा 30 · जिला प्राधिकरण की शक्तियां और कार्य।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जिला प्राधिकरण आपदा प्रबंधन के लिए जिला योजना, समन्वय और कार्यान्वयन निकाय के रूप में कार्य करेगा तथा राष्ट्रीय प्राधिकरण और राज्य प्राधिकरण द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार जिले में आपदा प्रबंधन के प्रयोजनों के लिए सभी उपाय करेगा।
(2) उपधारा (1) के प्रावधानों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जिला प्राधिकरण
(i) जिले के लिए जिला प्रतिक्रिया योजना सहित आपदा प्रबंधन योजना तैयार करना;
(ii) राष्ट्रीय नीति, राज्य नीति, राष्ट्रीय योजना, राज्य योजना और जिला योजना के कार्यान्वयन का समन्वय और निगरानी करना;
(iii) यह सुनिश्चित करना कि जिले में आपदाओं के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की जाए और आपदाओं की रोकथाम और इसके प्रभावों को कम करने के उपाय जिला स्तर पर सरकार के विभागों के साथ-साथ स्थानीय अधिकारियों द्वारा भी किए जाएं;
(iv) यह सुनिश्चित करना कि राष्ट्रीय प्राधिकरण और राज्य प्राधिकरण द्वारा निर्धारित आपदाओं की रोकथाम, इसके प्रभावों को कम करने, तैयारी और प्रतिक्रिया उपायों के लिए दिशानिर्देशों का पालन जिला स्तर पर सरकार के सभी विभागों और जिले के स्थानीय अधिकारियों द्वारा किया जाता है;
(v) जिला स्तर पर विभिन्न अधिकारियों और स्थानीय अधिकारियों को आपदाओं की रोकथाम या शमन के लिए ऐसे अन्य उपाय करने के निर्देश देना जो आवश्यक हों;
(vi) जिला स्तर पर सरकार के विभाग और जिले में स्थानीय अधिकारियों द्वारा आपदा प्रबंधन योजनाओं की तैयारी के लिए दिशानिर्देश निर्धारित करना;
(vii) जिला स्तर पर सरकार के विभागों द्वारा तैयार की गई आपदा प्रबंधन योजनाओं के कार्यान्वयन की निगरानी करना;
(viii) आपदाओं की रोकथाम और शमन के उपायों को अपनी विकास योजनाओं और परियोजनाओं में एकीकृत करने के उद्देश्य से जिला स्तर पर सरकार के विभागों द्वारा पालन किए जाने वाले दिशानिर्देश निर्धारित करना और इसके लिए आवश्यक तकनीकी सहायता प्रदान करना;
(ix) खंड (viii) में निर्दिष्ट उपायों के कार्यान्वयन की निगरानी करना;
(x) जिले में किसी आपदा या आपदा के खतरे की स्थिति से निपटने की क्षमताओं की स्थिति की समीक्षा करना और जिला स्तर पर संबंधित विभागों या अधिकारियों को उनकी आवश्यकतानुसार उन्नयन के लिए निर्देश देना;
(xi) तैयारियों के उपायों की समीक्षा करना और जिला स्तर पर संबंधित विभागों या अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देश देना, जहां आवश्यक हो, ताकि तैयारियों के उपायों को किसी भी आपदा या संभावित आपदा की स्थिति का प्रभावी ढंग से जवाब देने के लिए आवश्यक स्तर तक लाया जा सके;
(xii) जिले में विभिन्न स्तरों के अधिकारियों, कर्मचारियों और स्वयंसेवी बचाव कर्मियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन और समन्वय करना;
(xiii) स्थानीय अधिकारियों, सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से आपदा की रोकथाम या शमन के लिए सामुदायिक प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों को सुगम बनाना;
(xiv) जनता को उचित सूचना की प्रारंभिक चेतावनी और प्रसार के लिए तंत्र की स्थापना, रखरखाव, समीक्षा और उन्नयन करना;
(xv) जिला स्तरीय प्रतिक्रिया योजना और दिशा-निर्देश तैयार करना, समीक्षा करना और अद्यतन करना;
(xvi) किसी भी संभावित आपदा स्थिति या आपदा के प्रति प्रतिक्रिया का समन्वय करना;
(xvii) यह सुनिश्चित करना कि जिला स्तर पर सरकार के विभाग और स्थानीय प्राधिकरण जिला प्रतिक्रिया योजना के अनुसार अपनी प्रतिक्रिया योजना तैयार करें;
(xviii) जिला स्तर पर सरकार के संबंधित विभाग या जिले की स्थानीय सीमाओं के भीतर किसी अन्य प्राधिकरण को किसी भी संभावित आपदा स्थिति या आपदा का प्रभावी ढंग से जवाब देने के लिए उपाय करने हेतु दिशा-निर्देश निर्धारित करना या निर्देश देना;
(xix) जिले में आपदा प्रबंधन में लगे सरकारी विभागों, वैधानिक निकायों और अन्य सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों की गतिविधियों को सलाह देना, सहायता करना और समन्वय करना;
(xx) जिले में आपदा की आशंका वाली स्थिति या आपदा की रोकथाम या शमन के उपायों को शीघ्र और प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए जिले के स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय करना और उन्हें दिशा-निर्देश देना;
(xxi) जिले में स्थानीय अधिकारियों को उनके कार्यों के निष्पादन के लिए आवश्यक तकनीकी सहायता प्रदान करना या सलाह देना;
(xxii) आपदा की रोकथाम या शमन के लिए आवश्यक प्रावधान करने हेतु जिला स्तर पर सरकार के विभागों, वैधानिक प्राधिकरणों या स्थानीय प्राधिकरणों द्वारा तैयार की गई विकास योजनाओं की समीक्षा करना;
(xxiii) जिले के किसी भी क्षेत्र में निर्माण की जांच करे और यदि उसकी राय हो कि ऐसे निर्माण के लिए निर्धारित आपदा निवारण या शमन मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है या नहीं किया गया है, तो वह संबंधित प्राधिकारी को ऐसे मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दे सकता है;
(xxiv) ऐसी इमारतों और स्थानों की पहचान करना जिनका उपयोग किसी भी संभावित आपदा की स्थिति या आपदा की स्थिति में राहत केंद्रों या शिविरों के रूप में किया जा सके और ऐसी इमारतों या स्थानों में जल आपूर्ति और स्वच्छता की व्यवस्था करना;
(xxv) राहत एवं बचाव सामग्री का भंडार स्थापित करना या अल्प सूचना पर ऐसी सामग्री उपलब्ध कराने की तैयारी सुनिश्चित करना;
(xxvi) आपदा प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं से संबंधित राज्य प्राधिकरण को जानकारी प्रदान करना;
(xxvii) आपदा प्रबंधन के लिए जिले में जमीनी स्तर पर काम करने वाले गैर-सरकारी संगठनों और स्वैच्छिक सामाजिक कल्याण संस्थानों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना;
(xxviii) यह सुनिश्चित करना कि संचार प्रणालियाँ सुचारू रूप से चल रही हैं, और आपदा प्रबंधन अभ्यास समय-समय पर आयोजित किए जाते हैं;
(xxix) ऐसे अन्य कार्य करना जो राज्य सरकार या राज्य प्राधिकरण उसे सौंपे या जो वह जिले में आपदा प्रबंधन के लिए आवश्यक समझे।
(2) उपधारा (1) के प्रावधानों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जिला प्राधिकरण
(i) जिले के लिए जिला प्रतिक्रिया योजना सहित आपदा प्रबंधन योजना तैयार करना;
(ii) राष्ट्रीय नीति, राज्य नीति, राष्ट्रीय योजना, राज्य योजना और जिला योजना के कार्यान्वयन का समन्वय और निगरानी करना;
(iii) यह सुनिश्चित करना कि जिले में आपदाओं के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की जाए और आपदाओं की रोकथाम और इसके प्रभावों को कम करने के उपाय जिला स्तर पर सरकार के विभागों के साथ-साथ स्थानीय अधिकारियों द्वारा भी किए जाएं;
(iv) यह सुनिश्चित करना कि राष्ट्रीय प्राधिकरण और राज्य प्राधिकरण द्वारा निर्धारित आपदाओं की रोकथाम, इसके प्रभावों को कम करने, तैयारी और प्रतिक्रिया उपायों के लिए दिशानिर्देशों का पालन जिला स्तर पर सरकार के सभी विभागों और जिले के स्थानीय अधिकारियों द्वारा किया जाता है;
(v) जिला स्तर पर विभिन्न अधिकारियों और स्थानीय अधिकारियों को आपदाओं की रोकथाम या शमन के लिए ऐसे अन्य उपाय करने के निर्देश देना जो आवश्यक हों;
(vi) जिला स्तर पर सरकार के विभाग और जिले में स्थानीय अधिकारियों द्वारा आपदा प्रबंधन योजनाओं की तैयारी के लिए दिशानिर्देश निर्धारित करना;
(vii) जिला स्तर पर सरकार के विभागों द्वारा तैयार की गई आपदा प्रबंधन योजनाओं के कार्यान्वयन की निगरानी करना;
(viii) आपदाओं की रोकथाम और शमन के उपायों को अपनी विकास योजनाओं और परियोजनाओं में एकीकृत करने के उद्देश्य से जिला स्तर पर सरकार के विभागों द्वारा पालन किए जाने वाले दिशानिर्देश निर्धारित करना और इसके लिए आवश्यक तकनीकी सहायता प्रदान करना;
(ix) खंड (viii) में निर्दिष्ट उपायों के कार्यान्वयन की निगरानी करना;
(x) जिले में किसी आपदा या आपदा के खतरे की स्थिति से निपटने की क्षमताओं की स्थिति की समीक्षा करना और जिला स्तर पर संबंधित विभागों या अधिकारियों को उनकी आवश्यकतानुसार उन्नयन के लिए निर्देश देना;
(xi) तैयारियों के उपायों की समीक्षा करना और जिला स्तर पर संबंधित विभागों या अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देश देना, जहां आवश्यक हो, ताकि तैयारियों के उपायों को किसी भी आपदा या संभावित आपदा की स्थिति का प्रभावी ढंग से जवाब देने के लिए आवश्यक स्तर तक लाया जा सके;
(xii) जिले में विभिन्न स्तरों के अधिकारियों, कर्मचारियों और स्वयंसेवी बचाव कर्मियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन और समन्वय करना;
(xiii) स्थानीय अधिकारियों, सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से आपदा की रोकथाम या शमन के लिए सामुदायिक प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों को सुगम बनाना;
(xiv) जनता को उचित सूचना की प्रारंभिक चेतावनी और प्रसार के लिए तंत्र की स्थापना, रखरखाव, समीक्षा और उन्नयन करना;
(xv) जिला स्तरीय प्रतिक्रिया योजना और दिशा-निर्देश तैयार करना, समीक्षा करना और अद्यतन करना;
(xvi) किसी भी संभावित आपदा स्थिति या आपदा के प्रति प्रतिक्रिया का समन्वय करना;
(xvii) यह सुनिश्चित करना कि जिला स्तर पर सरकार के विभाग और स्थानीय प्राधिकरण जिला प्रतिक्रिया योजना के अनुसार अपनी प्रतिक्रिया योजना तैयार करें;
(xviii) जिला स्तर पर सरकार के संबंधित विभाग या जिले की स्थानीय सीमाओं के भीतर किसी अन्य प्राधिकरण को किसी भी संभावित आपदा स्थिति या आपदा का प्रभावी ढंग से जवाब देने के लिए उपाय करने हेतु दिशा-निर्देश निर्धारित करना या निर्देश देना;
(xix) जिले में आपदा प्रबंधन में लगे सरकारी विभागों, वैधानिक निकायों और अन्य सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों की गतिविधियों को सलाह देना, सहायता करना और समन्वय करना;
(xx) जिले में आपदा की आशंका वाली स्थिति या आपदा की रोकथाम या शमन के उपायों को शीघ्र और प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए जिले के स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय करना और उन्हें दिशा-निर्देश देना;
(xxi) जिले में स्थानीय अधिकारियों को उनके कार्यों के निष्पादन के लिए आवश्यक तकनीकी सहायता प्रदान करना या सलाह देना;
(xxii) आपदा की रोकथाम या शमन के लिए आवश्यक प्रावधान करने हेतु जिला स्तर पर सरकार के विभागों, वैधानिक प्राधिकरणों या स्थानीय प्राधिकरणों द्वारा तैयार की गई विकास योजनाओं की समीक्षा करना;
(xxiii) जिले के किसी भी क्षेत्र में निर्माण की जांच करे और यदि उसकी राय हो कि ऐसे निर्माण के लिए निर्धारित आपदा निवारण या शमन मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है या नहीं किया गया है, तो वह संबंधित प्राधिकारी को ऐसे मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दे सकता है;
(xxiv) ऐसी इमारतों और स्थानों की पहचान करना जिनका उपयोग किसी भी संभावित आपदा की स्थिति या आपदा की स्थिति में राहत केंद्रों या शिविरों के रूप में किया जा सके और ऐसी इमारतों या स्थानों में जल आपूर्ति और स्वच्छता की व्यवस्था करना;
(xxv) राहत एवं बचाव सामग्री का भंडार स्थापित करना या अल्प सूचना पर ऐसी सामग्री उपलब्ध कराने की तैयारी सुनिश्चित करना;
(xxvi) आपदा प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं से संबंधित राज्य प्राधिकरण को जानकारी प्रदान करना;
(xxvii) आपदा प्रबंधन के लिए जिले में जमीनी स्तर पर काम करने वाले गैर-सरकारी संगठनों और स्वैच्छिक सामाजिक कल्याण संस्थानों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना;
(xxviii) यह सुनिश्चित करना कि संचार प्रणालियाँ सुचारू रूप से चल रही हैं, और आपदा प्रबंधन अभ्यास समय-समय पर आयोजित किए जाते हैं;
(xxix) ऐसे अन्य कार्य करना जो राज्य सरकार या राज्य प्राधिकरण उसे सौंपे या जो वह जिले में आपदा प्रबंधन के लिए आवश्यक समझे।
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