CCP 2अध्याय 0 · Preliminary
धारा 2 · परिभाषाएँ।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
इस अधिनियम में, जब तक कि विषय या संदर्भ में कोई विरोधाभास न हो,
(1) "संहिता" में नियम शामिल हैं;
(2) "डिक्री" से तात्पर्य किसी निर्णय की औपचारिक अभिव्यक्ति से है, जो न्यायालय द्वारा व्यक्त की गई किसी भी या सभी विवादित मामलों के संबंध में पक्षों के अधिकारों को निर्णायक रूप से निर्धारित करती है और यह प्रारंभिक या अंतिम हो सकती है। इसमें वादपत्र की अस्वीकृति और धारा 144 के अंतर्गत किसी प्रश्न का निर्धारण शामिल माना जाएगा, लेकिन इसमें निम्नलिखित शामिल नहीं होंगे:
(क) कोई भी निर्णय जिससे किसी आदेश के विरुद्ध अपील की जा सकती है, या
(ख) चूक के कारण बर्खास्तगी का कोई आदेश।
स्पष्टीकरण : किसी मुकदमे का पूर्ण निपटारा होने से पहले आगे की कार्यवाही किए जाने पर निर्णय प्रारंभिक कहलाता है। जब निर्णय मुकदमे का पूर्ण निपटारा कर देता है, तब वह अंतिम होता है। यह आंशिक रूप से प्रारंभिक और आंशिक रूप से अंतिम हो सकता है।
(3) "डिक्री धारक" से तात्पर्य किसी ऐसे व्यक्ति से है जिसके पक्ष में डिक्री पारित की गई हो या निष्पादन योग्य आदेश दिया गया हो;
(4) "जिला" से तात्पर्य मूल अधिकार क्षेत्र वाले प्रधान सिविल न्यायालय (जिसे इसके बाद जिला न्यायालय कहा जाएगा) के अधिकार क्षेत्र की स्थानीय सीमा से है, और इसमें उच्च न्यायालय के सामान्य मूल सिविल अधिकार क्षेत्र की स्थानीय सीमाएँ शामिल हैं;
[ 2 (5) "विदेशी न्यायालय" से तात्पर्य भारत के बाहर स्थित न्यायालय से है, जो केंद्रीय सरकार के अधिकार द्वारा स्थापित या जारी नहीं रखा गया हो;]
(6) "विदेशी निर्णय" से तात्पर्य किसी विदेशी न्यायालय के निर्णय से है;
(7) "सरकारी वकील" में राज्य सरकार द्वारा इस संहिता द्वारा सरकारी वकील पर स्पष्ट रूप से लगाए गए सभी या किसी भी कार्य को करने के लिए नियुक्त कोई भी अधिकारी और सरकारी वकील के निर्देशों के तहत कार्य करने वाला कोई भी वकील शामिल है;
(7ए) अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के संबंध में "उच्च न्यायालय" से तात्पर्य कलकत्ता स्थित उच्च न्यायालय से है;
(7B) धारा 1, 29, 43, 44, 4 [44A,] 78, 79, 82, 83 और 87A को छोड़कर, "भारत" से तात्पर्य भारत के उस क्षेत्र से है जिसमें जम्मू और कश्मीर राज्य शामिल नहीं है;]
(8) "न्यायाधीश" से तात्पर्य सिविल न्यायालय के पीठासीन अधिकारी से है;
(9) "निर्णय" से तात्पर्य न्यायाधीश द्वारा किसी डिक्री या आदेश के आधारों के संबंध में दिए गए कथन से है;
(10) "निर्णय-देनदार" से तात्पर्य किसी ऐसे व्यक्ति से है जिसके विरुद्ध कोई डिक्री पारित की गई हो या निष्पादन योग्य कोई आदेश दिया गया हो;
(11) "कानूनी प्रतिनिधि" से तात्पर्य उस व्यक्ति से है जो विधिवत किसी मृतक व्यक्ति की संपत्ति का प्रतिनिधित्व करता है, और इसमें कोई भी ऐसा व्यक्ति शामिल है जो मृतक की संपत्ति में हस्तक्षेप करता है और जहां कोई पक्षकार प्रतिनिधि के रूप में मुकदमा करता है या जारी करता है, तो वह व्यक्ति जिस पर मुकदमा करने वाले या जिस पर मुकदमा किया गया है, उस पक्षकार की मृत्यु पर संपत्ति का अधिकार होता है;
(12) संपत्ति के " मध्यवर्ती लाभ" से तात्पर्य उन लाभों से है जो ऐसी संपत्ति पर अवैध कब्जे वाले व्यक्ति ने वास्तव में प्राप्त किए हों या सामान्य परिश्रम से प्राप्त कर सकता हो, साथ ही ऐसे लाभों पर ब्याज भी, लेकिन इसमें अवैध कब्जे वाले व्यक्ति द्वारा किए गए सुधारों के कारण होने वाले लाभ शामिल नहीं होंगे;
(13) "चल संपत्ति" में बढ़ती फसलें शामिल हैं;
(14) "आदेश" से तात्पर्य किसी सिविल न्यायालय के किसी निर्णय की औपचारिक अभिव्यक्ति से है जो डिक्री नहीं है;
(15) "वकील" से तात्पर्य किसी ऐसे व्यक्ति से है जो न्यायालय में किसी अन्य व्यक्ति के लिए उपस्थित होने और पैरवी करने का हकदार है, और इसमें उच्च न्यायालय का अधिवक्ता, वकील और अटॉर्नी शामिल हैं;
(16) "निर्धारित" का अर्थ नियमों द्वारा निर्धारित है;
(17) "लोक अधिकारी" से तात्पर्य निम्नलिखित विवरणों में से किसी एक के अंतर्गत आने वाले व्यक्ति से है, अर्थात्:
(क) प्रत्येक न्यायाधीश;
(ख) 5 [एक अखिल भारतीय सेवा] का प्रत्येक सदस्य;
(ग) संघ की सैन्य 6 [नौसेना या वायु] सेनाओं में प्रत्येक कमीशन प्राप्त या राजपत्रित अधिकारी 7 [संघ] 8 *** सरकार के अधीन सेवा करते हुए;
(घ) न्यायालय का प्रत्येक अधिकारी जिसका कर्तव्य, ऐसे अधिकारी के रूप में, किसी विधि या तथ्य के मामले की जांच करना या उस पर रिपोर्ट देना, या किसी दस्तावेज को बनाना, प्रमाणित करना या रखना, या किसी संपत्ति का प्रभार लेना या उसका निपटान करना, या किसी न्यायिक प्रक्रिया को निष्पादित करना, या किसी शपथ को दिलाना, या व्याख्या करना, या न्यायालय में व्यवस्था बनाए रखना है, और प्रत्येक व्यक्ति जिसे न्यायालय द्वारा विशेष रूप से ऐसे किसी कर्तव्य को पूरा करने के लिए अधिकृत किया गया है;
(ई) प्रत्येक व्यक्ति जो किसी ऐसे पद का धारक है जिसके आधार पर उसे किसी व्यक्ति को कारावास में रखने या कैद करने का अधिकार प्राप्त है;
(f) सरकार का प्रत्येक अधिकारी जिसका कर्तव्य, ऐसे अधिकारी के रूप में, अपराधों को रोकना, अपराधों की सूचना देना, अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाना, या सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा या सुविधा की रक्षा करना है;
(जी) प्रत्येक अधिकारी जिसका कर्तव्य है कि वह अधिकारी के रूप में सरकार की ओर से किसी संपत्ति को ले, प्राप्त करे, रखे या खर्च करे, या सरकार की ओर से कोई सर्वेक्षण, मूल्यांकन या अनुबंध करे, या कोई राजस्व प्रक्रिया निष्पादित करे, या सरकार के वित्तीय हितों को प्रभावित करने वाले किसी मामले की जांच करे या उस पर रिपोर्ट दे, या सरकार के वित्तीय हितों से संबंधित कोई दस्तावेज बनाए, प्रमाणित करे या रखे, या सरकार के वित्तीय हितों की रक्षा के लिए किसी कानून के उल्लंघन को रोके; और
(h) सरकार की सेवा या वेतन में कार्यरत प्रत्येक अधिकारी, या किसी सार्वजनिक कर्तव्य के निष्पादन के लिए शुल्क या कमीशन द्वारा पारिश्रमिक प्राप्त करने वाला अधिकारी;
(18) "नियम" से तात्पर्य प्रथम अनुसूची में निहित नियमों और प्रपत्रों से है, या धारा 122 या धारा 125 के अंतर्गत बनाए गए नियमों और प्रपत्रों से है;
(19) "निगम में हिस्सेदारी" में स्टॉक, डिबेंचर स्टॉक, डिबेंचर या बांड शामिल माना जाएगा; और
(20) "हस्ताक्षरित", निर्णय या डिक्री के मामले को छोड़कर, में मुहर लगी हुई शामिल है।
9 * * * * *
(1) "संहिता" में नियम शामिल हैं;
(2) "डिक्री" से तात्पर्य किसी निर्णय की औपचारिक अभिव्यक्ति से है, जो न्यायालय द्वारा व्यक्त की गई किसी भी या सभी विवादित मामलों के संबंध में पक्षों के अधिकारों को निर्णायक रूप से निर्धारित करती है और यह प्रारंभिक या अंतिम हो सकती है। इसमें वादपत्र की अस्वीकृति और धारा 144 के अंतर्गत किसी प्रश्न का निर्धारण शामिल माना जाएगा, लेकिन इसमें निम्नलिखित शामिल नहीं होंगे:
(क) कोई भी निर्णय जिससे किसी आदेश के विरुद्ध अपील की जा सकती है, या
(ख) चूक के कारण बर्खास्तगी का कोई आदेश।
स्पष्टीकरण : किसी मुकदमे का पूर्ण निपटारा होने से पहले आगे की कार्यवाही किए जाने पर निर्णय प्रारंभिक कहलाता है। जब निर्णय मुकदमे का पूर्ण निपटारा कर देता है, तब वह अंतिम होता है। यह आंशिक रूप से प्रारंभिक और आंशिक रूप से अंतिम हो सकता है।
(3) "डिक्री धारक" से तात्पर्य किसी ऐसे व्यक्ति से है जिसके पक्ष में डिक्री पारित की गई हो या निष्पादन योग्य आदेश दिया गया हो;
(4) "जिला" से तात्पर्य मूल अधिकार क्षेत्र वाले प्रधान सिविल न्यायालय (जिसे इसके बाद जिला न्यायालय कहा जाएगा) के अधिकार क्षेत्र की स्थानीय सीमा से है, और इसमें उच्च न्यायालय के सामान्य मूल सिविल अधिकार क्षेत्र की स्थानीय सीमाएँ शामिल हैं;
[ 2 (5) "विदेशी न्यायालय" से तात्पर्य भारत के बाहर स्थित न्यायालय से है, जो केंद्रीय सरकार के अधिकार द्वारा स्थापित या जारी नहीं रखा गया हो;]
(6) "विदेशी निर्णय" से तात्पर्य किसी विदेशी न्यायालय के निर्णय से है;
(7) "सरकारी वकील" में राज्य सरकार द्वारा इस संहिता द्वारा सरकारी वकील पर स्पष्ट रूप से लगाए गए सभी या किसी भी कार्य को करने के लिए नियुक्त कोई भी अधिकारी और सरकारी वकील के निर्देशों के तहत कार्य करने वाला कोई भी वकील शामिल है;
(7ए) अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के संबंध में "उच्च न्यायालय" से तात्पर्य कलकत्ता स्थित उच्च न्यायालय से है;
(7B) धारा 1, 29, 43, 44, 4 [44A,] 78, 79, 82, 83 और 87A को छोड़कर, "भारत" से तात्पर्य भारत के उस क्षेत्र से है जिसमें जम्मू और कश्मीर राज्य शामिल नहीं है;]
(8) "न्यायाधीश" से तात्पर्य सिविल न्यायालय के पीठासीन अधिकारी से है;
(9) "निर्णय" से तात्पर्य न्यायाधीश द्वारा किसी डिक्री या आदेश के आधारों के संबंध में दिए गए कथन से है;
(10) "निर्णय-देनदार" से तात्पर्य किसी ऐसे व्यक्ति से है जिसके विरुद्ध कोई डिक्री पारित की गई हो या निष्पादन योग्य कोई आदेश दिया गया हो;
(11) "कानूनी प्रतिनिधि" से तात्पर्य उस व्यक्ति से है जो विधिवत किसी मृतक व्यक्ति की संपत्ति का प्रतिनिधित्व करता है, और इसमें कोई भी ऐसा व्यक्ति शामिल है जो मृतक की संपत्ति में हस्तक्षेप करता है और जहां कोई पक्षकार प्रतिनिधि के रूप में मुकदमा करता है या जारी करता है, तो वह व्यक्ति जिस पर मुकदमा करने वाले या जिस पर मुकदमा किया गया है, उस पक्षकार की मृत्यु पर संपत्ति का अधिकार होता है;
(12) संपत्ति के " मध्यवर्ती लाभ" से तात्पर्य उन लाभों से है जो ऐसी संपत्ति पर अवैध कब्जे वाले व्यक्ति ने वास्तव में प्राप्त किए हों या सामान्य परिश्रम से प्राप्त कर सकता हो, साथ ही ऐसे लाभों पर ब्याज भी, लेकिन इसमें अवैध कब्जे वाले व्यक्ति द्वारा किए गए सुधारों के कारण होने वाले लाभ शामिल नहीं होंगे;
(13) "चल संपत्ति" में बढ़ती फसलें शामिल हैं;
(14) "आदेश" से तात्पर्य किसी सिविल न्यायालय के किसी निर्णय की औपचारिक अभिव्यक्ति से है जो डिक्री नहीं है;
(15) "वकील" से तात्पर्य किसी ऐसे व्यक्ति से है जो न्यायालय में किसी अन्य व्यक्ति के लिए उपस्थित होने और पैरवी करने का हकदार है, और इसमें उच्च न्यायालय का अधिवक्ता, वकील और अटॉर्नी शामिल हैं;
(16) "निर्धारित" का अर्थ नियमों द्वारा निर्धारित है;
(17) "लोक अधिकारी" से तात्पर्य निम्नलिखित विवरणों में से किसी एक के अंतर्गत आने वाले व्यक्ति से है, अर्थात्:
(क) प्रत्येक न्यायाधीश;
(ख) 5 [एक अखिल भारतीय सेवा] का प्रत्येक सदस्य;
(ग) संघ की सैन्य 6 [नौसेना या वायु] सेनाओं में प्रत्येक कमीशन प्राप्त या राजपत्रित अधिकारी 7 [संघ] 8 *** सरकार के अधीन सेवा करते हुए;
(घ) न्यायालय का प्रत्येक अधिकारी जिसका कर्तव्य, ऐसे अधिकारी के रूप में, किसी विधि या तथ्य के मामले की जांच करना या उस पर रिपोर्ट देना, या किसी दस्तावेज को बनाना, प्रमाणित करना या रखना, या किसी संपत्ति का प्रभार लेना या उसका निपटान करना, या किसी न्यायिक प्रक्रिया को निष्पादित करना, या किसी शपथ को दिलाना, या व्याख्या करना, या न्यायालय में व्यवस्था बनाए रखना है, और प्रत्येक व्यक्ति जिसे न्यायालय द्वारा विशेष रूप से ऐसे किसी कर्तव्य को पूरा करने के लिए अधिकृत किया गया है;
(ई) प्रत्येक व्यक्ति जो किसी ऐसे पद का धारक है जिसके आधार पर उसे किसी व्यक्ति को कारावास में रखने या कैद करने का अधिकार प्राप्त है;
(f) सरकार का प्रत्येक अधिकारी जिसका कर्तव्य, ऐसे अधिकारी के रूप में, अपराधों को रोकना, अपराधों की सूचना देना, अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाना, या सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा या सुविधा की रक्षा करना है;
(जी) प्रत्येक अधिकारी जिसका कर्तव्य है कि वह अधिकारी के रूप में सरकार की ओर से किसी संपत्ति को ले, प्राप्त करे, रखे या खर्च करे, या सरकार की ओर से कोई सर्वेक्षण, मूल्यांकन या अनुबंध करे, या कोई राजस्व प्रक्रिया निष्पादित करे, या सरकार के वित्तीय हितों को प्रभावित करने वाले किसी मामले की जांच करे या उस पर रिपोर्ट दे, या सरकार के वित्तीय हितों से संबंधित कोई दस्तावेज बनाए, प्रमाणित करे या रखे, या सरकार के वित्तीय हितों की रक्षा के लिए किसी कानून के उल्लंघन को रोके; और
(h) सरकार की सेवा या वेतन में कार्यरत प्रत्येक अधिकारी, या किसी सार्वजनिक कर्तव्य के निष्पादन के लिए शुल्क या कमीशन द्वारा पारिश्रमिक प्राप्त करने वाला अधिकारी;
(18) "नियम" से तात्पर्य प्रथम अनुसूची में निहित नियमों और प्रपत्रों से है, या धारा 122 या धारा 125 के अंतर्गत बनाए गए नियमों और प्रपत्रों से है;
(19) "निगम में हिस्सेदारी" में स्टॉक, डिबेंचर स्टॉक, डिबेंचर या बांड शामिल माना जाएगा; और
(20) "हस्ताक्षरित", निर्णय या डिक्री के मामले को छोड़कर, में मुहर लगी हुई शामिल है।
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