HCJRAC Rules 9
धारा 9 · Section 9
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1)
दीवानी मामलों में, अधिवक्ता की नियुक्ति को दीवानी प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश 3 के नियम 4 द्वारा उस संबंध में प्रदान की गई सीमा तक प्रभावी माना जाएगा।(2)
आपराधिक मामलों में, किसी अधिवक्ता की नियुक्ति तब तक प्रभावी मानी जाएगी जब तक कि मुवक्किल या अधिवक्ता द्वारा हस्ताक्षरित लिखित रूप में न्यायालय की अनुमति से इसे समाप्त न कर दिया जाए और न्यायालय में दाखिल न कर दिया जाए, या जब तक मुवक्किल या अधिवक्ता की मृत्यु न हो जाए, या जब तक मुवक्किल के संबंध में मामले की सभी कार्यवाही समाप्त न हो जाए।(3)
जब कोई अधिवक्ता, जिसने किसी पक्ष के लिए वकालतनामा दाखिल किया है, अपनी उपस्थिति वापस लेना चाहता है, तो वह न्यायालय में मामले की सुनवाई से कम से कम सात दिन पहले अपने मुवक्किल को अपनी इस मंशा की लिखित सूचना देगा। यदि मुवक्किल ने अधिवक्ता को इस संबंध में निर्देश दिया है, तो उपस्थिति वापस लेने के लिए न्यायालय से अनुमति भी मांगी जा सकती है। अधिवक्ता न्यायालय से उपस्थिति वापस लेने की अनुमति का अनुरोध करते हुए एक लिखित नोट दाखिल करेगा और नोट के साथ मुवक्किल का वह पत्र भी दाखिल करेगा जिसमें उसे अपनी उपस्थिति वापस लेने का निर्देश दिया गया है या मुवक्किल को दी गई उपरोक्त सूचना की एक प्रति और मुवक्किल द्वारा इसकी लिखित स्वीकृति भी दाखिल करेगा। यदि न्यायालय संतुष्ट है कि न्यायालय या मुवक्किल को कोई असुविधा होने की संभावना नहीं है, तो वह अधिवक्ता को अपनी उपस्थिति वापस लेने की अनुमति दे सकता है और अनुमति देते समय ऐसी शर्तें और नियम भी लगा सकता है जो वह जनहित में या पक्षकारों के हित में उचित समझे।(4)
जो पक्षकार अपने द्वारा नियुक्त अधिवक्ता को हटाना चाहता है, वह इसी प्रकार की प्रक्रिया का पालन करते हुए न्यायालय से हटाने के आदेश के लिए आवेदन कर सकता है और न्यायालय, यदि वह संतुष्ट है, तो अधिवक्ता को हटाने का आदेश पारित कर सकता है और ऐसा करते समय ऐसी शर्तें और नियम लागू कर सकता है जिन्हें वह उचित समझे।इस धारा पर आपका निजी नोट
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