HCJRAC Rules 15
धारा 15 · आपत्ति दर्ज करने का अधिकार
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
- (i) जहां किसी न्यायालय में किसी मुकदमे या कार्यवाही में आवेदन किए जाने की उम्मीद हो, या आवेदन किया जा चुका हो, तो ऐसे आवेदन की सुनवाई पर न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने का अधिकार रखने वाला कोई भी व्यक्ति उसके संबंध में आपत्ति दर्ज करा सकता है।
(ii)
जहां उप-नियम (i) के तहत कोई आपत्ति दर्ज कराई गई है, तो जिस व्यक्ति द्वारा आपत्ति दर्ज कराई गई है (जिसे इसके बाद आपत्तिकर्ता कहा जाएगा) वह पंजीकृत डाक द्वारा, पावती सहित, उस व्यक्ति को आपत्ति की सूचना भेजेगा जिसके द्वारा उप-नियम (i) के तहत आवेदन किया गया है, या किए जाने की उम्मीद है।(iii)
जहां उप-नियम (i) के तहत आपत्ति दर्ज किए जाने के बाद, किसी मुकदमे या कार्यवाही में कोई आवेदन दायर किया जाता है, तो न्यायालय आपत्तिकर्ता को आवेदन की सूचना देगा।(iv)
जहां आवेदक को किसी आपत्ति की सूचना दी गई है, वह आपत्तिकर्ता को, आपत्तिकर्ता के खर्च पर, अपने द्वारा किए गए आवेदन की एक प्रति और साथ ही आवेदन के समर्थन में उसके द्वारा दायर किए गए या किए जाने वाले किसी भी कागज या दस्तावेज की प्रतियां तुरंत उपलब्ध कराएगा।(v)
जहां उप-नियम (i) के तहत कोई आपत्ति दर्ज की गई है, ऐसी आपत्ति दर्ज किए जाने की तारीख से नब्बे दिनों की समाप्ति के बाद लागू नहीं रहेगी, जब तक कि उक्त अवधि की समाप्ति से पहले उप-नियम (i) में निर्दिष्ट आवेदन न किया गया हो।इस धारा पर आपका निजी नोट
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